आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से सेमीकंडक्टर चिप्स तैयार कर कंप्यूट संकट हल करने में जुटी रिकर्सिव इंटेलिजेंस रिकर्सिव इंटेलिजेंस सेमीकंडक्टर चिप्स के लेआउट को पूरी तरह एआई की मदद से डिजाइन कर रही है, ताकि कंप्यूटिंग की बढ़ती भारी मांग और डेटा सेंटर्स के दबाव को कम किया जा सके। दुनिया भर में कंप्यूटिंग क्षमता की जरूरत बेहद तेजी से बढ़ रही है, और अनुमान लगाया जा रहा है कि अगले पांच वर्षों में कंप्यूट की मांग कम से कम 10,000 गुना बढ़ सकती है। यह अनुमान भी काफी रूढ़िवादी माना जा रहा है। इतनी भारी मांग को पूरा करने के लिए 10,000 गुना अधिक डेटा सेंटर्स का निर्माण करना व्यावहारिक समाधान नहीं है। यदि इस स्तर पर बुनियादी ढांचे का विस्तार किया जाए या अंतरिक्ष में भी बड़े पैमाने पर केंद्र बनाए जाएं, तो पर्यावरणीय और भौतिक चुनौतियां अकल्पनीय हो जाएंगी। इस जटिल समस्या से निपटने के लिए अधिक दक्ष चिप्स तैयार करने की दिशा में काम किया जा रहा है, जो डेटा सेंटर्स की बैंडविड्थ, सेमीकंडक्टर फैब्स और वेफर्स का बेहद कुशलता से उपयोग कर सकें। मानव रचनात्मकता और एआई की कार्यप्रणाली का संगम कुछ लोग एआई द्वारा स्वयं अपने चिप्स तैयार करने के विचार से आशंकित हो सकते हैं, लेकिन गोल्डी का तर्क है कि चिप डिजाइन का काम एआई को सौंपने से इंसान अधिक महत्वपूर्ण कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। इंसानों की ऊर्जा नए एप्लिकेशन विकसित करने और कंप्यूटिंग के माध्यम से नई संभावनाओं की खोज करने में लगाई जा सकेगी। वर्तमान में उद्योग की कार्यप्रणाली में एक बड़ा बदलाव देखा जा रहा है, जहां मानव अपने बेहतरीन विचार और रचनात्मक सोच प्रस्तुत करते हैं, जबकि उनके निष्पादन की जिम्मेदारी एआई संभालता है। यह प्रक्रिया केवल सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट में ही नहीं, बल्कि चिप निर्माण में भी लागू हो रही है, और रिकर्सिव इसी मॉडल को सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आगे बढ़ा रही है। पारंपरिक सीमाओं को तोड़ते अप्रत्याशित चिप लेआउट संस्थापकों का कहना है कि पारंपरिक चिप डिजाइनिंग विधियों को एआई सीधे तौर पर चुनौती दे रहा है। एआई ऐसे अनूठे और गैर-पारंपरिक लेआउट खोज रहा है जो पुराने पारंपरिक तरीकों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करते हैं। उदाहरण के तौर पर, संस्थापकों द्वारा पहले विकसित किए गए अल्फाचिप नामक एआई सिस्टम ने चिप घटकों की एक गोलाकार, डोनट जैसी व्यवस्था तैयार की थी। इस डिजाइन ने शुरुआत में इंजीनियरों को हैरान कर दिया था, लेकिन परीक्षण के बाद यह लेआउट पूरी तरह से सफल साबित हुआ। संपूर्ण चिप ऑप्टिमाइजेशन और तरंग जैसी आकृतियां पारंपरिक रूप से किसी चिप को दर्जनों छोटे-छोटे ब्लॉकों में बांटकर डिजाइन किया जाता रहा है। इसके विपरीत, इस नई व्यवस्था में पूरे चिप को एक साथ ऑप्टिमाइज़ किया जा रहा है। इस दृष्टिकोण की बदौलत एआई बेहद जटिल पैटर्न तैयार करने में सक्षम हो रहा है, जिसमें तरंग जैसी डिजाइन भी शामिल हैं। संस्थापकों का कहना है कि वे इस खास तकनीक और डिजाइनों से जुड़े विवरण भविष्य में साझा करने की योजना बना रहे हैं। डिजाइन समय में भारी कमी और कस्टम चिप्स की संभावनाएं अगर किसी नए चिप को डिजाइन करने में छह महीने, एक साल या दो साल का लंबा समय लगता है, तो कंपनियों को बहुत चुन-चुनकर निर्णय लेने पड़ते हैं कि किस चिप को विकसित किया जाए। वहीं, यदि किसी चिप को महज एक सप्ताह के भीतर डिजाइन किया जा सके, तो निर्माण के लिए विभिन्न विशिष्ट उपयोगों हेतु कस्टम चिप्स बनाना आर्थिक रूप से व्यवहार्य हो जाता है। ऐसी स्थिति में स्पेस टेक्नोलॉजी, एआर, वीआर और बायोलॉजिकल कंप्यूटिंग जैसे विविध क्षेत्रों के लिए अलग-अलग कस्टम चिप्स बनाए जा सकते हैं, जिससे सिस्टम अधिक ऊर्जा-दक्ष भी बनेंगे। इसका आप पर असर एआई द्वारा संचालित तेज और किफायती चिप डिजाइन से आने वाले समय में हार्डवेयर उपकरणों और उन्नत डिजिटल सेवाओं की लागत और ऊर्जा खपत में सुधार देखने को मिल सकता है। • डिवाइस उपलब्धता: कस्टम चिप्स का डिजाइन समय घटकर एक सप्ताह रहने से एआर, वीआर और नई तकनीकों के लिए विशेष गैजेट्स तेजी से बाजार में आ सकेंगे। इससे उपभोक्ताओं को नई पीढ़ी के गैजेट्स के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। • ऊर्जा दक्षता: नए डिजाइनों से डेटा सेंटर्स और चिप्स की बिजली खपत कम करने में मदद मिलेगी। इसका सीधा असर इंटरनेट आधारित सेवाओं की स्थिरता और पर्यावरण पर पड़ेगा। • लागत नियंत्रण: सेमीकंडक्टर निर्माण चक्र छोटा होने से विकास पर होने वाला खर्च घटेगा। नतीजतन भविष्य के हार्डवेयर उत्पादों के दाम नियंत्रण में रह सकते हैं। • एप्लिकेशन नवाचार: इंजीनियरों को डिजाइनिंग के जटिल रूटीन काम से मुक्ति मिलने से वे अधिक रचनात्मक सॉफ्टवेयर और समाधान तैयार करने पर समय दे सकेंगे। इससे उपयोगकर्ताओं को अधिक उपयोगी टूल्स और सेवाएं मिलेंगी। ऐसा क्यों हुआ कंप्यूटिंग की मांग अगले पांच वर्षों में 10,000 गुना बढ़ने की संभावना के बीच भौतिक रूप से इतने डेटा सेंटर्स का निर्माण करना असंभव हो गया है। मौजूदा सेमीकंडक्टर डिजाइनिंग प्रक्रियाओं में लगने वाले लंबे समय और अकुशलता के कारण यह नई तकनीकी पहल सामने आई है। • कंप्यूट मांग में भारी उछाल: आधुनिक एआई मॉडलों के प्रसार के कारण कंप्यूटिंग शक्ति की आवश्यकता अप्रत्याशित रूप से बढ़ गई है। पारंपरिक गति से बुनियादी ढांचा खड़ा करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं रह गया है। • भौतिक विस्तार की सीमाएं: हजारों नए डेटा सेंटर्स बनाने से ऊर्जा, वेफर्स और फैब्स पर भारी दबाव पड़ता है। यहां तक कि असीमित विस्तार से पर्यावरणीय चुनौतियां पैदा हो सकती हैं। • पारंपरिक डिजाइनिंग की धीमी गति: एक चिप को पारंपरिक तरीके से छोटे ब्लॉकों में बांटकर डिजाइन करने में छह महीने से दो साल तक का समय लग जाता था। इस धीमी रफ्तार के कारण कंपनियां हर जरूरत के लिए कस्टम चिप्स नहीं बना पाती थीं। • एआई लेआउट की सफलता: पहले विकसित अल्फाचिप प्रणाली ने यह साबित किया कि एआई इंसानों द्वारा सोचे गए पारंपरिक लेआउट से बेहतर और गैर-पारंपरिक आकृतियां खोज सकता है। इस सफलता ने पूरी चिप को एक साथ ऑप्टिमाइज़ करने का मार्ग प्रशस्त किया। सवाल-जवाब 1. अगले पांच वर्षों में कंप्यूटिंग की मांग में कितनी वृद्धि का अनुमान है? गोल्डी के अनुसार, अगले पांच वर्षों में कंप्यूट की मांग कम से कम 10,000 गुना बढ़ने का अनुमान है, जो कि एक रूढ़िवादी आकलन हो सकता है। 2. क्या चिप डिजाइन का काम एआई को सौंपने से इंसानों की भूमिका खत्म हो जाएगी? नहीं, गोल्डी का तर्क है कि इससे इंसान नए एप्लिकेशन विकसित करने और रचनात्मक विचारों पर ध्यान दे सकेंगे, जबकि निष्पादन का काम एआई संभालेगा। 3. अल्फाचिप सिस्टम ने कौन सा अनूठा लेआउट तैयार किया था? अल्फाचिप ने घटकों की एक गोलाकार, डोनट जैसी व्यवस्था तैयार की थी, जो शुरुआत में हैरान करने वाली थी लेकिन बाद में सफल साबित हुई। 4. पारंपरिक चिप डिजाइन प्रक्रिया में कितना समय लगता है? पारंपरिक तरीके से एक नए चिप को डिजाइन करने में छह महीने, एक साल या दो साल तक का समय लग सकता है। 5. एआई की मदद से चिप डिजाइनिंग में कितना समय लगने की बात कही गई है? एआई आधारित दृष्टिकोण से चिप को लगभग एक सप्ताह के भीतर डिजाइन किया जा सकता है। 6. तेज चिप डिजाइनिंग से किन क्षेत्रों को फायदा होगा? इससे स्पेस, एआर, वीआर और बायोलॉजिकल कंप्यूटिंग जैसे विशेष क्षेत्रों के लिए कस्टम और ऊर्जा-दक्ष चिप्स बनाना संभव हो सकेगा। https://trendkia.com/startups/ricursive-intelligence-eai-se-dijaina-chipsa-ke-jarie-knpyuta-snkata-hala-karane-ki-taiyari-men-47876 TrendKia — Har trend, sabse pehle.