अमेरिकी सेना के लिए जेनेटिकली संवर्धित खोजी कुत्ते तैयार करेगी वॉरहाउंड, 1.2 अरब डॉलर के मूल्यांकन पर जुटाए 200 मिलियन डॉलर कोलोसल बायोसाइंसेज और एंडुरिल के संस्थापकों ने मिलकर वॉरहाउंड की शुरुआत की है, जो अमेरिकी सुरक्षा बलों के लिए उच्च क्षमता वाले विशेष कुत्ते तैयार करने के मकसद से 200 मिलियन डॉलर जुटा चुकी है। अमेरिकी सेना, पुलिस बलों और आपातकालीन प्रतिक्रिया टीमों की क्षमताओं को बढ़ाने के मकसद से एक नई बायोटेक रक्षा कंपनी सामने आई है। कोलोसल बायोसाइंसेज के बेन लाम और रक्षा तकनीक कंपनी एंडुरिल के सह-संस्थापक पाल्मर लकी ने मिलकर सेना के खोजी कुत्तों की नस्ल को जेनेटिक स्तर पर बेहतर बनाने की योजना तैयार की है। यह विचार अब एक औपचारिक कंपनी के रूप में सामने आया है, जिसका नाम वॉरहाउंड रखा गया है। कंपनी ने बाजार में कदम रखते ही 200 मिलियन डॉलर का भारी-भरकम निवेश जुटाने में सफलता प्राप्त की है। इस निवेश दौर में इन-क्यू-टेल, सिकोइया और 8वीसी जैसे प्रमुख निवेशकों ने पूंजी लगाई है, जिसके दम पर कंपनी का मूल्यांकन 1.2 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। विदेशी निर्भरता और सैन्य कुत्तों की मौजूदा चुनौतियां सुरक्षा बलों में कुत्ते ऐसे कई जटिल और जोखिम भरे काम संभालते हैं जो इंसानों के लिए जानलेवा होते हैं और मशीनों के जरिए जिन्हें अंजाम देना बेहद मुश्किल होता है। इनमें मुख्य रूप से बमों और विस्फोटकों का पता लगाना, तलाशी अभियान चलाना और विशेष सामरिक ऑपरेशनों में सैनिकों की मदद करना शामिल है। हालांकि, अमेरिका वर्तमान में इस मोर्चे पर भारी कमी का सामना कर रहा है। कंपनी के मुताबिक, अमेरिकी सेना द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले 80 प्रतिशत से अधिक कार्यशील कुत्ते यूरोप से आयात किए जाते हैं। इसके अलावा, विदेश से मंगाए जाने वाले इन श्वानों में से आधे से भी कम कुत्ते कठिन सैन्य सेवा के मानकों पर खरे उतर पाते हैं। इस स्थिति के कारण एक तरफ जहां सैन्य कार्यों के लिए उपयुक्त कुत्तों की आपूर्ति लगातार घट रही है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी सेना और कानून प्रवर्तन एजेंसियां विदेशों पर अत्यधिक निर्भर हो गई हैं। वॉरहाउंड इसी गंभीर अंतर को समाप्त करने के लक्ष्य के साथ काम कर रही है। कोलोसल की अत्याधुनिक जेनेटिक तकनीकों के माध्यम से ऐसे कुत्ते विकसित करने की योजना है, जिनमें सबसे चुनौतीपूर्ण अभियानों की जरूरतों के अनुकूल शारीरिक और मानसिक क्षमताएं मौजूद हों। जेनेटिक सुधार और बायोबैंक का निर्माण इस परियोजना की शुरुआत लगभग एक वर्ष पूर्व एक सम्मेलन के दौरान हुई थी, जहां पाल्मर लकी ने अमेरिकी सेना में सेवारत कुत्तों की स्थिति को बेहतर बनाने का विचार बेन लाम के सामने रखा था। इसके बाद दोनों के बीच लगातार चर्चाएं हुईं और लाम ने पारंपरिक ब्रीडिंग यानी प्रजनन से जुड़ी समस्याओं का गहन अध्ययन किया। अध्ययन से यह स्पष्ट हुआ कि बड़ी संख्या में कुत्ते प्रशिक्षण के कठिन दौर को पार नहीं कर पाते हैं। इसका मुख्य कारण उनकी आनुवंशिक कमियां होती हैं, जिनमें कमजोर दृष्टि, कैंसर की उच्च आशंका, कूल्हे की विकृति यानी हिप डिस्प्लेसिया और मांसपेशियों का कमजोर पड़ना शामिल हैं। बेन लाम का मानना है कि वैज्ञानिक तकनीकों के इस्तेमाल से कुत्तों के स्वास्थ्य और जीवनकाल को काफी बढ़ाया जा सकता है। इसके साथ ही उनकी गति, चपलता और बम सूंघने वाले घ्राण संवेदकों की क्षमता को भी काफी तीव्र किया जा सकता है। इस दिशा में काम करते हुए विशेषज्ञों की टीम ने बेहतरीन प्रदर्शन करने वाली कार्यशील नस्लों, जैसे बेल्जियन मैलिनोइस और जर्मन शेफर्ड पर ध्यान केंद्रित किया। इन नस्लों की सेल लाइनों को एकत्र करके एक बायोबैंक में सुरक्षित किया गया है। वैज्ञानिक इन कोशिकाओं के जीनों को संपादित करेंगे, जिसमें श्रेष्ठ प्रदर्शन में मदद करने वाले जीनों को शामिल किया जाएगा और स्वास्थ्य संबंधी कमजोरियों वाले जीनों को हटा दिया जाएगा, ताकि सेवा के लिए पूरी तरह से नई श्रेणी के कुत्ते तैयार किए जा सकें। एंडुरिल की उन्नत तकनीक और डिजिटल उपकरण जेनेटिक बदलावों के साथ-साथ इन कुत्तों को मैदान पर और अधिक प्रभावी बनाने के लिए एंडुरिल के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर उपकरणों से लैस किया जाएगा। एंडुरिल इस साझेदारी में विशेष रक्षात्मक जैकेट और सुरक्षात्मक चश्मे जैसे उपकरण उपलब्ध कराएगी। यह उपकरण कुत्तों और उनके संचालकों को वास्तविक समय में स्थिति की सटीक जानकारी देने और बेहतर समन्वय स्थापित करने में मदद करेंगे। उदाहरण के तौर पर, इन कुत्तों के लिए बुलेटप्रूफ बनियान तैयार की जाएंगी जिनमें अत्याधुनिक डेटा सेंसर लगे होंगे। ये सेंसर मैदान की महत्वपूर्ण सूचनाएं तुरंत उनके मानव संचालक तक पहुंचाएंगे, जिससे पूरी टीम को यह समझने में आसानी होगी कि आसपास क्या घटित हो रहा है। बेन लाम का कहना है कि जब कुत्ते को अधिक सुरक्षित, स्वस्थ और सक्षम बनाया जाएगा, तो वह अपने कर्तव्यों का पालन भी बेहतर ढंग से करेगा। एंडुरिल का तकनीकी काम कुत्ते के आंतरिक जैविक ढांचे से अलग होगा, यानी यह तकनीक कुत्ते के शरीर के ऊपर होगी, उसके शरीर के भीतर नहीं। इससे न केवल श्वान की सुरक्षा होगी बल्कि उसके संचालक की जान का जोखिम भी कम होगा। कंपनी की संरचना और क्लोनिंग की समयसीमा इस उद्यम में मालिकाना हक के संदर्भ में बेन लाम ने स्पष्ट किया है कि पाल्मर लकी कंपनी में कोई व्यक्तिगत इक्विटी नहीं रखते हैं और वे केवल एक रणनीतिक साझेदार हैं। वहीं, कोलोसल कंपनी में इक्विटी रखती है और अपनी लाइसेंस प्राप्त तकनीकों के जरिए इस पहल को आगे बढ़ा रही है। कोलोसल को पूर्व में डोडो और मैमथ जैसे विलुप्त हो चुके जीवों को वापस लाने के प्रयासों के लिए जाना जाता रहा है, जहां वह जीन क्लोनिंग और पशु जीनों के विश्लेषण के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करती है। वॉरहाउंड के लिए कुत्तों के पहले बैच की क्लोनिंग और इनक्यूबेशन की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। उम्मीद है कि यह पहला बैच अगले साल की शुरुआत में जन्म लेगा और अगले दो वर्षों के भीतर इन्हें सक्रिय सेवा में तैनात किया जा सकेगा। इस क्लोनिंग प्रक्रिया में कोलोसल की स्वामित्व वाली कंपनी वायेजन साझेदारी कर रही है। वायेजन के पास क्लोनिंग तकनीक में सफलता की उच्च दर मौजूद है, जिसका उपयोग कोलोसल वर्तमान में लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण कार्यक्रम में भी कर रही है। नागरिक सुरक्षा और सेवानिवृत्ति की योजना शुरुआती चरण में होने के कारण स्टार्टअप ने अभी तक इन कुत्तों की बिक्री कीमत तय नहीं की है। कंपनी का लक्ष्य रक्षा विभाग, सैन्य सेवा समूहों, पुलिस बलों और आपातकालीन बचाव दलों को यह कुत्ते उपलब्ध कराना है। सरकारी मंजूरियों के बारे में कंपनी ने कई संबंधित सरकारी विभागों को अपने व्यवसाय और सुरक्षा मानकों की जानकारी दे दी है। जेनेटिकली बदले गए कुत्तों को लेकर नागरिक सुरक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी के सवाल पर यह स्पष्ट किया गया है कि इन श्वानों को पारंपरिक सैन्य कुत्तों की तरह ही कड़ा प्रशिक्षण दिया जाएगा और इनका नियंत्रण पूरी तरह से इन्हें खरीदने वाली सुरक्षा एजेंसियों के हाथ में रहेगा। इसके अलावा, कंपनी अमेरिकन ह्यूमेन सोसाइटी के मार्गदर्शन में अपने प्रशिक्षण कार्यक्रम को प्रमाणित कराने पर काम कर रही है। सैन्य सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद इन कुत्तों की देखभाल के लिए सोसाइटी के मिलिट्री वर्किंग डॉग रीयूनिफिकेशन प्रोग्राम या अन्य सहायता कार्यक्रमों के माध्यम से इन्हें सुरक्षित और आरामदायक घर उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की जाएगी। इसका आप पर असर जेनेटिक रूप से उन्नत और तकनीकी उपकरणों से लैस खोजी कुत्तों के विकास से भविष्य में वैश्विक सुरक्षा तंत्र और कार्यशील श्वानों के प्रजनन मानकों में गहरा बदलाव आ सकता है। • सैन्य और पुलिस बलों के लिए: सुरक्षा एजेंसियों को आनुवंशिक रूप से मजबूत, स्वस्थ और अधिक सटीक सूंघने की क्षमता वाले खोजी कुत्ते मिल सकेंगे। इससे बम निष्क्रिय करने और आतंकवाद विरोधी अभियानों के दौरान जवानों की जान का जोखिम काफी कम हो जाएगा। • बायोटेक और ब्रीडिंग क्षेत्र के लिए: आनुवंशिक कमियों और हिप डिस्प्लेसिया जैसी बीमारियों को दूर करने की यह तकनीक भविष्य में पालतू जानवरों के उपचार के नए रास्ते खोल सकती है। इसके जरिए पशुओं के गंभीर रोगों से बचाव की दिशा में नई वैज्ञानिक प्रगति संभव होगी। • नागरिक सुरक्षा और निगरानी के लिए: विशेष सेंसर वाले जैकेट से लैस ये कुत्ते आपदा प्रबंधन और खोज अभियानों में मलबे में फंसे नागरिकों को तेजी से खोजने में सक्षम होंगे। इससे प्राकृतिक आपदाओं या दुर्घटनाओं के समय राहत कार्यों की गति बढ़ जाएगी। • नैतिक और कानूनी मानकों के लिए: जेनेटिकली संवर्धित जीवों के उपयोग को लेकर सुरक्षा और कल्याण संबंधी नए नियम तय किए जाएंगे। इस पर नजर रखने के लिए पशु संरक्षण संस्थाओं और सरकारी एजेंसियों को स्पष्ट दिशानिर्देश तय करने होंगे। ऐसा क्यों हुआ अमेरिकी सेना की कार्यशील कुत्तों के लिए विदेशी देशों पर भारी निर्भरता और पारंपरिक ब्रीडिंग में आने वाली गंभीर स्वास्थ्य कमियों के कारण वॉरहाउंड की स्थापना की गई है। • विदेशी आपूर्ति पर अत्यधिक निर्भरता: वर्तमान में अमेरिकी सेना के 80 प्रतिशत से अधिक कार्यशील कुत्ते यूरोप से खरीदे जाते हैं। इन आयातित कुत्तों में से भी आधे से कम सैन्य सेवा की कठिन परीक्षाओं और फिटनेस मानकों पर खरे उतर पाते हैं। • पारंपरिक नस्लों में आनुवंशिक बीमारियां: जर्मन शेफर्ड और बेल्जियन मैलिनोइस जैसी कार्यशील नस्लों में कैंसर, कमजोर दृष्टि और हिप डिस्प्लेसिया जैसी गंभीर आनुवंशिक समस्याएं आम हैं। इन स्वास्थ्य समस्याओं के कारण कई होनहार कुत्ते प्रशिक्षण के दौरान ही बाहर हो जाते हैं। • तकनीकी तालमेल की आवश्यकता: आधुनिक सामरिक अभियानों में केवल प्राकृतिक क्षमताएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि वास्तविक समय के डेटा समन्वय की भी सख्त जरूरत होती है। इसी कमी को पूरा करने के लिए कोलोसल की जीन तकनीक और एंडुरिल के हार्डवेयर को एक साथ लाया गया है। • सफल क्लोनिंग का आधार: कोलोसल की सहयोगी कंपनी वायेजन के पास जानवरों की क्लोनिंग का पहले से सफल ट्रैक रिकॉर्ड मौजूद है। इसी तकनीकी दक्षता ने इन संवर्धित कुत्तों को वास्तविक रूप से तैयार करने का मार्ग प्रशस्त किया है। सवाल-जवाब 1. वॉरहाउंड कंपनी की शुरुआत किसने की है? इसकी शुरुआत कोलोसल बायोसाइंसेज के बेन लाम और रक्षा तकनीक विशेषज्ञ पाल्मर लकी के विचार से हुई है। 2. कंपनी ने कितना निवेश जुटाया है और इसका मूल्यांकन कितना है? कंपनी ने 200 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई है और इसका मूल्यांकन 1.2 अरब डॉलर आंका गया है। 3. किन नस्लों के जीनों में बदलाव किए जा रहे हैं? कंपनी बेल्जियन मैलिनोइस और जर्मन शेफर्ड नस्लों के सेल लाइनों को बायोबैंक में रखकर उनके जीनों को संपादित कर रही है। 4. एंडुरिल कंपनी इस परियोजना में क्या भूमिका निभा रही है? एंडुरिल कुत्तों के लिए बुलेटप्रूफ जैकेट, सुरक्षा चश्मे और डेटा सेंसर जैसे बाहरी तकनीकी उपकरण विकसित कर रही है। 5. इन जेनेटिकली संवर्धित कुत्तों का पहला बैच कब तक तैयार होगा? पहला बैच अगले साल की शुरुआत में पैदा होने की उम्मीद है और लगभग दो साल के भीतर ये सेवा में शामिल हो सकते हैं। 6. सेवानिवृत्ति के बाद इन कुत्तों की देखभाल कैसे होगी? कंपनी अमेरिकन ह्यूमेन सोसाइटी के साथ मिलकर काम कर रही है ताकि रिटायरमेंट के बाद इन्हें सुरक्षित घर और देखभाल मिल सके। https://trendkia.com/startups/us-sena-ke-lie-jenetikali-snvardhita-khoji-kutte-taiyara-karegi-warhound-1-2-araba-dolara-ke-mulyankana-para-jutae-200-miliyana-do-51123 TrendKia — Har trend, sabse pehle.