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  "type": "article",
  "title": "उत्सव गुप्ता और रेबेका नेफ का नया ऐप बोरिंग किताबों और पीडीएफ को रील्स और टिकटॉक जैसे फीड में बदलेगा",
  "summary": "स्टैनफोर्ड और यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया के छात्रों ने स्क्रॉलएड नामक नया ऐप तैयार किया है, जो अध्ययन सामग्री को वर्टिकल वीडियो और इंटरैक्टिव क्विज में बदलकर पढ़ाई को आसान बनाता है।",
  "content": "स्मार्टफोन की लत और लगातार स्क्रीन स्क्रॉल करने की आदत को अक्सर गिरते अटेंशन स्पैन और पढ़ाई से ध्यान भटकने का मुख्य कारण माना जाता है। ज्यादातर लोग रात को सोने से पहले घंटों सोशल मीडिया पर बिना वजह रील्स देखते रहते हैं, जिससे न केवल समय बर्बाद होता है बल्कि मानसिक थकान भी होती है। इसी आदत को सकारात्मक दिशा में मोड़ने के मकसद से एक नए एडटेक प्लेटफॉर्म ने जन्म लिया है। स्क्रॉलएड नाम के इस मोबाइल ऐप्लिकेशन की सोच यह है कि अगर युवाओं की स्क्रॉल करने की आदत को पूरी तरह बदला नहीं जा सकता, तो क्यों न उस कंटेंट को ही बदल दिया जाए जिसे वे स्क्रीन पर देख रहे हैं।\n\nपीडीएफ और किताबों को वर्टिकल वीडियो में बदलने की तकनीक\nस्क्रॉलएड ने एक ऐसा सॉफ्टवेयर टूल विकसित किया है जो किसी भी सामान्य टेक्स्ट फाइल, जैसे भारी भरकम पीडीएफ या कॉलेज की किताबों को, इंस्टाग्राम रील्स या टिकटॉक जैसी वर्टिकल फीड में तब्दील कर देता है। जब कोई छात्र ऐप में स्क्रॉल करता है, तो उसके सामने वही जटिल विषय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किए गए वीडियो, ऑडियो, संक्षेप टेक्स्ट या इंटरैक्टिव क्विज के रूप में दिखाई देते हैं। इस प्लेटफॉर्म का नेविगेशन भी काफी सहज बनाया गया है। स्क्रीन पर ऊपर की तरफ स्वाइप करने से एक नया अध्याय या विषय सामने आता है, जबकि साइड में स्वाइप करके यूजर उसी विषय की बारीकियों को गहराई से समझ सकता है। विषय के अंत में एक क्विज भी रखी गई है ताकि पाठक अपनी समझ को तुरंत परख सकें।\n\nयुवा पीढ़ी की पसंद के अनुसार अध्ययन का तरीका\nप्लेटफॉर्म के सह-संस्थापक उत्सव गुप्ता के अनुसार, आज की युवा पीढ़ी खासतौर पर 18 साल के युवा बड़े पैमाने पर शॉर्ट फॉर्म वर्टिकल वीडियो की तरफ बढ़ रहे हैं। ऐसे में गहराई और एकाग्रता की मांग करने वाले शैक्षणिक कंटेंट के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गया है। उत्सव गुप्ता ने बताया कि उनकी योजना छात्रों को उनकी मौजूदा आदतों के बीच ही समाधान देने की है। उन्होंने कहा, “हम उन्हें वहीं मिलना चाहते हैं जहां वे पहले से मौजूद हैं।” उन्होंने यह भी साफ किया कि उनका मकसद केवल स्क्रीन पर समय बिताना बढ़ाना नहीं है, बल्कि उस समय का सही और सार्थक उपयोग करना है।\n\nउत्सव गुप्ता का मानना है कि एक छोटा वीडियो मन में जिज्ञासा पैदा कर सकता है, लेकिन उस जिज्ञासा को शांत करने के लिए अक्सर लोग ऐप छोड़ देते हैं या भटक जाते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने ऐसा सिस्टम तैयार किया है जिससे विषय की गहराई में जाना उतना ही आसान हो जाता है जितना कि अगले वीडियो पर स्वाइप करना।\n\nबिस्तर पर फोन देखने की बेचैनी से आया स्टार्टअप का विचार\nइस स्टार्टअप की शुरुआत उत्सव गुप्ता और उनकी पत्नी व सह-संस्थापक रेबेका नेफ ने इस साल बूटस्ट्रैप करके की। दोनों को यह विचार तब आया जब वे अक्सर रात को सोने से पहले फोन पर गैर-जरूरी चीजें स्क्रॉल करने के बाद असंतोष महसूस करते थे। दोनों वर्तमान में छात्र हैं। उत्सव गुप्ता स्टैनफोर्ड में एआई और ह्यूमन पर्पस की पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि रेबेका नेफ यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया में कंप्यूटर साइंस की छात्रा हैं। निजी अनुभव और पढ़ाई के दौरान आई दिक्कतों को देखते हुए उन्होंने खुद यह समाधान तैयार करने का फैसला किया।\n\nबिजनेस मॉडल और भविष्य की योजनाएं\nस्क्रॉलएड केवल आम पाठकों तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि इसका लक्ष्य शिक्षण संस्थान और कॉर्पोरेट ट्रेनिंग प्रोग्राम भी हैं। यह स्टार्टअप फ्रीमियम मॉडल पर काम कर रहा है, जिसमें आम यूजर्स के लिए एक मुफ्त फीड दी गई है। इसके अलावा गंभीर पाठकों के लिए एक पेड स्क्रॉलएड प्रो सब्सक्रिप्शन और कॉलेजों व संस्थानों के लिए वार्षिक लाइसेंस का विकल्प रखा गया है। शैक्षणिक संस्थान इस प्लेटफॉर्म के जरिए अपना स्टडी मैटेरियल पहुंचा सकते हैं और बदले में छात्रों के जुड़ाव, पाठ की प्रगति और सीखने के अन्य आंकड़ों की विस्तृत रिपोर्ट हासिल कर सकते हैं। कंपनी एक ऐसा इन्फ्रास्ट्रक्चर भी तैयार कर रही है जिससे शिक्षक हर छात्र की व्यक्तिगत जरूरतों का मूल्यांकन कर सकें। उत्सव गुप्ता का कहना है कि उनकी अंतिम महत्वाकांक्षा एक ऐसा सोशल नेटवर्क बनाने की है जो वास्तव में लोगों के लिए बेहतर और मददगार साबित हो।\n\nइसका आप पर असर\nयह नया प्लेटफॉर्म छात्रों और कामकाजी युवाओं के पढ़ने के तरीके को पूरी तरह बदल सकता है, जिससे सोशल मीडिया पर बर्बाद होने वाला समय पढ़ाई में इस्तेमाल हो सकेगा।\n\n• छात्रों के लिए: भारी भरकम किताबों और जटिल पीडीएफ नोट्स को छोटे-छोटे वीडियो और क्विज के रूप में समझा जा सकेगा। इससे परीक्षा की तैयारी के दौरान ध्यान भटकने की समस्या कम होगी और विषय को दोहराना बेहद आसान हो जाएगा।\n• शिक्षण संस्थानों के लिए: कॉलेज और कोचिंग संस्थान अपने पुराने पाठ्यक्रम को आधुनिक रूप में छात्रों तक पहुंचा सकेंगे। वार्षिक लाइसेंस के जरिए शिक्षक यह भी देख पाएंगे कि छात्रों ने कितना पाठ पूरा किया और उन्हें कहां मदद की जरूरत है।\n• कॉर्पोरेट कर्मचारियों के लिए: कंपनियों के ट्रेनिंग मॉड्यूल अब लंबे दस्तावेजों के बजाय संक्षिप्त और इंटरैक्टिव रील्स फॉर्मेट में उपलब्ध हो सकेंगे। इससे काम के दौरान नए कौशल सीखना आसान और कम उबाऊ बनेगा।\n• आम पाठकों के लिए: रात को सोने से पहले बिना मतलब स्क्रीन स्क्रॉल करने की जगह उपयोगी जानकारी हासिल की जा सकेगी। इससे स्क्रीन टाइम का सकारात्मक इस्तेमाल होगा और समय की बर्बादी रुकेगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nस्क्रॉलएड की शुरुआत सोशल मीडिया की लत और पारंपरिक पढ़ाई के बीच बढ़ते अंतर को पाटने के प्रयास के तौर पर हुई है।\n\n• अध्ययन सामग्री से दूरी: स्मार्टफोन और शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते चलन के कारण युवा लंबे और नीरस टेक्स्ट को पढ़ने में कठिनाई महसूस कर रहे थे। इसी व्यवहार को बदलने के बजाय उसी प्रारूप में ज्ञान देने की जरूरत महसूस हुई।\n• व्यक्तिगत असंतोष: संस्थापक उत्सव गुप्ता और रेबेका नेफ रात को सोने से पहले फोन पर व्यर्थ स्क्रॉलिंग से मानसिक रूप से परेशान होते थे। इसी निजी अनुभव ने उन्हें एक उपयोगी विकल्प तलाशने और खुद ऐप बनाने के लिए प्रेरित किया।\n• संस्थानों की आवश्यकता: कई कॉलेज और ट्रेनिंग कार्यक्रम इस बात से जूझ रहे हैं कि नई पीढ़ी को अपने पाठ्यक्रमों से कैसे जोड़े रखा जाए। स्क्रॉलएड ने इसी खाली जगह को भरने के लिए डेटा और रिपोर्टिंग से लैस टूल तैयार किया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. स्क्रॉलएड क्या है?\nस्क्रॉलएड एक मोबाइल ऐप्लिकेशन है जो किताबों और पीडीएफ फाइलों को इंस्टाग्राम रील्स या टिकटॉक जैसे वर्टिकल वीडियो, ऑडियो और क्विज में बदलता है।\n\n2. इस स्टार्टअप के संस्थापक कौन हैं?\nइसकी स्थापना उत्सव गुप्ता और उनकी पत्नी रेबेका नेफ ने मिलकर की है।\n\n3. संस्थापक किन संस्थानों से जुड़े हुए हैं?\nउत्सव गुप्ता स्टैनफोर्ड में एआई और ह्यूमन पर्पस की पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि रेबेका नेफ यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया में कंप्यूटर साइंस की छात्रा हैं।\n\n4. ऐप के अंदर नेविगेशन कैसे काम करता है?\nऊपर स्वाइप करने पर नया विषय खुलता है, जबकि साइड में स्वाइप करने से मौजूदा विषय की गहराई और अंत में एक क्विज मिलती है।\n\n5. स्क्रॉलएड का बिजनेस मॉडल क्या है?\nयह एक फ्रीमियम मॉडल पर काम करता है जिसमें फ्री वर्जन के अलावा स्क्रॉलएड प्रो पेड सब्सक्रिप्शन और संस्थानों के लिए वार्षिक लाइसेंस शामिल हैं।\n\n6. संस्थानों के लिए इस ऐप में क्या खास सुविधा है?\nसंस्थान अपना पाठ्यक्रम ऐप पर पहुंचा सकते हैं और छात्रों की प्रगति व जुड़ाव से जुड़े डेटा की रिपोर्ट प्राप्त कर सकते हैं।\n\nप्रेरणा और सबक\nसंस्थापकों ने अपनी रोजमर्रा की बुरी आदत को एक उपयोगी व्यावसायिक विचार में बदलकर लाखों छात्रों के लिए एक नया रास्ता खोला है।\n\n• अपनी समस्या से समाधान निकालना: उत्सव गुप्ता और रेबेका नेफ ने रात में फोन स्क्रॉल करने की अपनी परेशानी को नजरअंदाज करने के बजाय उस पर काम किया और एक नया स्टार्टअप खड़ा कर दिया।\n• आदतों से लड़ने के बजाय उन्हें ढालना: युवाओं की रील देखने की आदत को जबरन छुड़ाने के बजाय उन्होंने उसी आदत का उपयोग पढ़ाई के लिए करने की व्यावहारिक रणनीति अपनाई।\n• छात्र जीवन में ही शुरुआत: अपनी यूनिवर्सिटी की पढ़ाई के साथ-साथ दोनों ने अपने एआई और कंप्यूटर साइंस ज्ञान का सही तालमेल बिठाकर बूटस्ट्रैप कंपनी शुरू की।",
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  "category": "स्टार्टअप्स",
  "publishedAt": "2026-09-21",
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