10 घंटे रोजाना लाइब्रेरी में पढ़ाई कर चित्रकूट की प्रज्ञा पाण्डेय ने हासिल किया IISER बरहमपुर में दाखिला चित्रकूट जिले के रामनगर की रहने वाली प्रज्ञा पाण्डेय का चयन प्रतिष्ठित आईआईएसईआर बरहमपुर में हुआ है। 12वीं के बाद एक साल लाइब्रेरी में रोजाना 10 घंटे की अनुशासित स्व-अध्यायन के बल पर उन्होंने यह कामयाबी हासिल की। उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले में स्थित रामनगर की रहने वाली प्रज्ञा पाण्डेय ने अपनी लगन, निरंतरता और कठिन परिश्रम के बल पर देश के अग्रणी विज्ञान संस्थान में स्थान हासिल किया है। प्रतिष्ठित भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर) की प्रथम चरण की काउंसलिंग प्रक्रिया में उनका चयन बरहमपुर, ओडिशा परिसर के लिए हुआ है। एक बहुत ही साधारण पृष्ठभूमि से आने वाली इस छात्रा की सफलता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो सीमित संसाधन कभी भी बड़ी सफलताओं के रास्ते में रुकावट नहीं बनते। चित्रकूट के साधारण परिवार की होनहार छात्रा का बड़ा कारनामा रामनगर विकासखंड के ग्राम रामनगर की निवासी प्रज्ञा पाण्डेय का परिवार अत्यंत साधारण परिस्थितियों में जीवन यापन करता है। उनके पिता आशुतोष पाण्डेय रामनगर स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा में बैंक मित्र के पद पर सेवाएं दे रहे हैं, और प्रज्ञा उनकी सबसे छोटी बेटी हैं। जैसे ही आईआईएसईआर बरहमपुर में प्रज्ञा के चयन की खबर सार्वजनिक हुई, पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल बन गया। बधाई देने के लिए ग्रामीणों, विद्यालय के शिक्षकों, रिश्तेदारों और स्थानीय छात्र-छात्राओं का उनके घर पर तांता लग गया। प्रज्ञा की इस शानदार कामयाबी से न केवल उनका परिवार बल्कि पूरा चित्रकूट जिला गौरवान्वित महसूस कर रहा है, और यह सफलता क्षेत्र के अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा की एक नई मिसाल बन गई है। सरकारी स्कूल की शुरुआती पढ़ाई से लेकर लाइब्रेरी में 10 घंटे का अनुशासन अपनी शैक्षणिक यात्रा के बारे में जानकारी देते हुए प्रज्ञा पाण्डेय ने बताया कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा पूरी तरह से स्थानीय सरकारी और मान्यता प्राप्त संस्थानों से हुई है। उन्होंने कक्षा 1 से लेकर कक्षा 8 तक की पढ़ाई रामनगर के कर्पूरी ठाकुर पूर्व माध्यमिक विद्यालय से पूरी की। इसके बाद उन्होंने कक्षा 9 से 12वीं तक की इंटरमीडिएट शिक्षा महात्मा ज्योतिबा राव फुले इंटर कॉलेज, रामनगर से प्राप्त की। इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात उन्होंने आगे की तैयारी के लिए एक साल का ब्रेक लिया। इस दौरान उन्होंने किसी दूरस्थ शहर में जाने के बजाय स्थानीय लाइब्रेरी में नियमित रूप से स्व-अध्ययन करने का निर्णय लिया। वे रोजाना लगभग 10 घंटे तक पुस्तकालय में बैठकर अनुशासित ढंग से पढ़ाई करती थीं, और इसी नियमित तैयारी के बलबूते उन्होंने देश के इस प्रतिष्ठित विज्ञान संस्थान में अपना दाखिला पक्का किया। परिवार और गुरुजनों को दिया श्रेय, युवाओं के लिए साझा किया सफलता का मंत्र प्रज्ञा ने अपनी इस उपलब्धि का पूरा श्रेय अपने शिक्षकों, अपने दादाजी (बाबा) और अपने पिता आशुतोष पाण्डेय को दिया है। उनका कहना है कि बचपन से लेकर अब तक उनके परिवार और अध्यापकों ने हर कदम पर उनका मार्गदर्शन किया और कठिन से कठिन दौर में भी उनका आत्मविश्वास कभी कमजोर नहीं होने दिया। यही प्रोत्साहन उनकी इस यात्रा का सबसे बड़ा आधार बना। प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग ले रहे अन्य छात्र-छात्राओं के लिए संदेश देते हुए प्रज्ञा ने कहा, "किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता है।" उन्होंने युवाओं का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि यदि विद्यार्थी एक स्पष्ट लक्ष्य तय करके प्रतिदिन अनुशासित पढ़ाई करें और मुश्किल परिस्थितियों में भी हार न मानें, तो वे भी अपनी मनचाही सफलता हासिल कर सकते हैं। इसका आप पर असर • भारत में: यह सफलता दर्शाती है कि सीमित संसाधनों और ग्रामीण पृष्ठभूमियों के छात्र भी राष्ट्रीय स्तर की विज्ञान परीक्षाओं में शीर्ष प्रदर्शन कर सकते हैं। • चित्रकूट (उत्तर प्रदेश) में: स्थानीय सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को अनुशासित स्व-अध्याय के लिए प्रेरणा मिलेगी। सवाल-जवाब 1. प्रज्ञा पाण्डेय का चयन किस संस्थान में हुआ है? प्रज्ञा पाण्डेय का चयन भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर) बरहमपुर, ओडिशा में प्रथम चरण की काउंसलिंग के दौरान हुआ है। 2. प्रज्ञा पाण्डेय के पिता क्या कार्य करते हैं? उनके पिता आशुतोष पाण्डेय रामनगर स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा में बैंक मित्र के रूप में कार्यरत हैं। 3. प्रज्ञा ने अपनी स्कूली शिक्षा कहां से पूरी की? उन्होंने कक्षा 1 से 8 तक की पढ़ाई कर्पूरी ठाकुर पूर्व माध्यमिक विद्यालय और कक्षा 9 से 12 तक की पढ़ाई महात्मा ज्योतिबा राव फुले इंटर कॉलेज, रामनगर से की। 4. प्रज्ञा पाण्डेय की परीक्षा तैयारी की रणनीति क्या थी? 12वीं के बाद उन्होंने एक साल का गैप लेकर नियमित रूप से लाइब्रेरी में प्रतिदिन लगभग 10 घंटे अनुशासित स्व-अध्ययन किया। 5. प्रज्ञा ने अपनी सफलता का श्रेय किसे दिया? उन्होंने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने शिक्षकों, अपने दादाजी (बाबा) और अपने पिता को दिया है। प्रेरणा और सबक सफलता के प्रमुख सबक: • आत्म-अनुशासन का महत्व: कोचिंग या महंगे संसाधनों के बिना भी नियमित 10 घंटे की लाइब्रेरी पढ़ाई से बड़ा लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। • बुनियादी शिक्षा पर भरोसा: स्थानीय सरकारी स्कूलों (कक्षा 1 से 12 तक) से पढ़कर भी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षा निकाली जा सकती है। • धैर्य और रणनीतिक गैप ईयर: 12वीं के बाद सही दिशा में एक साल का अनुशासित स्व-अध्यायन सफलता की राह आसान कर सकता है। • परिवार और गुरुजनों का सहयोग: कठिन समय में अपनों के मार्गदर्शन और प्रोत्साहन से मनोबल बना रहता है। https://trendkia.com/success-stories/10-ghnte-rojana-laibreri-men-parhai-kara-chitrakoot-ki-pragya-pandey-ne-hasila-kiya-iiser-berhampur-men-dakhila-11723 TrendKia — Har trend, sabse pehle.