10वीं बोर्ड परीक्षा में 54 फीसदी अंक से आईआईटी बॉम्बे तक: बिहार के जैनेंद्रजीत की संघर्ष और सफलता की कहानी बिहार के बेतिया निवासी जैनेंद्रजीत ने 10वीं कक्षा में बीमारी के चलते सिर्फ 54 फीसदी अंक हासिल किए थे। इसके बावजूद कठिन परिश्रम से उन्होंने जेईई एडवांस्ड में ऑल इंडिया 349वीं रैंक हासिल कर आईआईटी बॉम्बे में कंप्यूटर साइंस में दाखिला लिया। अक्सर यह माना जाता है कि स्कूल के बोर्ड परीक्षा का परिणाम किसी छात्र के पूरे भविष्य का पैमाना तय कर देता है, लेकिन मजबूत इच्छाशक्ति और सही दिशा में की गई मेहनत से इस धारणा को बदला जा सकता है। बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के निवासी जैनेंद्रजीत का शैक्षणिक सफर इस बात की एक अद्भुत मिसाल प्रस्तुत करता है। एक दौर ऐसा भी था जब 10वीं कक्षा के नतीजों को देखकर आसपास के लोगों ने उनकी क्षमताओं पर सवाल उठाए थे और ताने कसे थे। हालांकि, जैनेंद्रजीत ने निराशा में डूबने के बजाय उस दौर को अपनी सबसे बड़ी प्रेरणा बना लिया। 10वीं में गंभीर बीमारी के कारण केवल 54 प्रतिशत अंक लाने वाले इस युवा ने अपनी रणनीति बदली और देश के सबसे कठिन इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में शानदार सफलता दर्ज करते हुए आईआईटी बॉम्बे के प्रतिष्ठित कंप्यूटर साइंस (CSE) विभाग में अपनी जगह पक्की की। उन्होंने जेईई मेन 2023 में 99.98 परसेंटाइल और जेईई एडवांस्ड में ऑल इंडिया 349वीं रैंक हासिल करके यह साबित कर दिया कि एक असफलता करियर का अंत नहीं होती। बीमारी की वजह से प्रभावित हुआ 10वीं कक्षा का परिणाम जैनेंद्रजीत बिहार के बेतिया स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय (वृंदावन) के छात्र रहे हैं। वे अपनी 10वीं बोर्ड परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने के प्रति काफी आशान्वित थे, लेकिन परीक्षा से ठीक पहले उनकी सेहत अचानक खराब हो गई। गंभीर बीमारी की वजह से उन्हें लगभग 40 से 50 दिनों तक लगातार बिस्तर पर रहना पड़ा, जिसके कारण उनकी परीक्षा की तैयारी अधूरी रह गई। जब बोर्ड परीक्षा का परिणाम घोषित हुआ, तो उनके प्राप्तांक बेहद निराशाजनक थे। उन्हें गणित विषय में 41 अंक, साइंस में 48 अंक और हिंदी में 49 अंक प्राप्त हुए, जिससे उनका कुल परिणाम महज 54 प्रतिशत पर सिमट गया। जहां उनके अन्य सहपाठी 90 प्रतिशत से अधिक अंक पाकर खुशियां मना रहे थे, वहीं जैनेंद्रजीत को लोगों की आलोचनाओं और तानों का सामना करना पड़ रहा था। इस कठिन परिस्थिति ने उन्हें अंदर से झकझोर दिया, पर उन्होंने हार मानने से साफ इनकार कर दिया। पढ़ाई की रणनीति में बदलाव और कड़ा अनुशासन कम अंकों को अपने करियर की सीमा मानने के बजाय जैनेंद्रजीत ने अपनी गलतियों का विश्लेषण किया और पढ़ाई का तरीका पूरी तरह बदल दिया। 12वीं कक्षा की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अपना पूरा ध्यान देश की सबसे प्रतिष्ठित और चुनौतीपूर्ण परीक्षा जेईई पर केंद्रित कर दिया। उन्होंने अपनी दिनचर्या को पूरी तरह अनुशासित किया। तैयारी के दौरान किसी भी प्रकार का ध्यान भटकने से बचाने के लिए उन्होंने सोशल मीडिया के सभी माध्यमों से पूरी तरह दूरी बना ली। उनका एकमात्र उद्देश्य देश के किसी शीर्ष भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान में प्रवेश हासिल करना था, जिसके लिए उन्होंने दिन-रात एक कर दिया। जेईई एडवांस्ड की तैयारी का विशेष रूटीन प्रतियोगी परीक्षा में बेहतर रैंक पाने के लिए जैनेंद्रजीत ने एक सुव्यवस्थित और वैज्ञानिक योजना बनाई। उन्होंने रोज 10 घंटे समर्पित भाव से पढ़ाई करने का समय निर्धारित किया। अपनी तैयारी को अधिक प्रभावी बनाने के लिए उन्होंने चार प्रमुख सिद्धांतों का पालन किया • प्री-क्लास प्रिपरेशन (एडवांस लर्निंग): कोचिंग या क्लास रूम लेक्चर में शामिल होने से पहले वे आगामी विषय के बुनियादी सिद्धांतों को समझने के लिए उससे जुड़े शैक्षणिक वीडियो देख लेते थे। इस अभ्यास से क्लास में कठिन से कठिन कॉन्सेप्ट को समझना काफी आसान हो जाता था। • छोटे और स्पष्ट लक्ष्य: पूरे पाठ्यक्रम का बोझ एक साथ उठाने के बजाय उन्होंने दैनिक आधार पर छोटे-छोटे और आसानी से पूरे होने वाले लक्ष्य तय किए, जिससे पढ़ाई का तनाव कम हुआ। • स्मार्ट रिवीजन और मॉक टेस्ट: उन्होंने पिछले वर्षों के प्रश्न पत्रों (PYQs) को हल करने पर सबसे ज्यादा जोर दिया। इसके साथ ही नियमित रूप से मॉक टेस्ट दिए, जिससे प्रश्नों को हल करने की गति और सटीकता में जबरदस्त सुधार हुआ। • ध्यान भटकाने वाली चीजों का त्याग: तैयारी के पूरे दौर में उन्होंने स्मार्टफोन के गैर-जरूरी इस्तेमाल पर पाबंदी लगाई और सिर्फ अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित रखा। सफलता के बाद सोशल मीडिया पर बने प्रेरणा स्रोत आईआईटी बॉम्बे में दाखिला मिलने के बाद जैनेंद्रजीत आज सोशल मीडिया पर लाखों छात्रों के लिए एक प्रेरणा स्रोत बन चुके हैं। अकेले इंस्टाग्राम पर ही उनके 63 हजार से अधिक फॉलोअर्स हैं। वे सोशल मीडिया और यूट्यूब पर अपनी कॉलेज लाइफ, फिटनेस रूटीन और प्रेरणादायक सामग्री साझा करते हैं। उन्होंने अपने औसत छात्र से लेकर आईआईटी बॉम्बे तक पहुंचने के पूरे सफर को इंस्टाग्राम पर शेयर किया था, जिसे युवाओं द्वारा काफी पसंद किया गया। जैनेंद्रजीत ने अपनी 10वीं कक्षा की मार्कशीट की तस्वीर भी सोशल मीडिया पर साझा की, ताकि वे उन सभी छात्रों का हौसला बढ़ा सकें जो किसी एक परीक्षा में कम अंक आने की वजह से निराश हो जाते हैं। इसका आप पर असर यह सफलता की कहानी भारत भर के प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों और अभिभावकों के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक है। • भारत में छात्रों के लिए: यह साबित करता है कि 10वीं या 12वीं के बोर्ड परीक्षा के अंक किसी विद्यार्थी की वास्तविक प्रतिभा या भविष्य की संभावनाओं की सीमा तय नहीं करते। कम अंक आने पर हतोत्साहित होने के बजाय सही दिशा और रणनीति के साथ किसी भी कठिन राष्ट्रीय परीक्षा जैसे JEE में सफलता प्राप्त की जा सकती है। • बिहार और क्षेत्रीय क्षेत्रों में: पश्चिम चंपारण और बेतिया जैसे छोटे शहरों के नवोदय विद्यालयों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए यह एक सीधा उदाहरण है कि सीमित संसाधनों और प्रारंभिक असफलताओं के बावजूद देश के शीर्ष संस्थानों जैसे IIT Bombay में दाखिला पाया जा सकता है। • अभिभावकों और शिक्षकों के लिए: यह संदेश देता है कि परीक्षा में कम अंक आने पर बच्चों को ट्रोल करने या ताने देने के बजाय उन्हें अपनी गलतियों से सीखने और बेहतर तैयारी करने का मौका देना चाहिए। • रणनीतिक तैयारी का प्रभाव: दैनिक 10 घंटे का अध्ययन, एडवांस लर्निंग, मॉक टेस्ट और सोशल मीडिया से दूरी जैसे अनुशासन को अपनाकर कोई भी छात्र अपनी परीक्षा की तैयारी की गति और सटीकता को कई गुना बढ़ा सकता है। ऐसा क्यों हुआ 10वीं में कम अंक आने और बाद में देश की सबसे कठिन परीक्षा जेईई में ऑल इंडिया 349वीं रैंक हासिल करने के पीछे स्पष्ट कारण और रणनीतिक बदलाव मौजूद रहे। • 10वीं में कम अंकों का कारण: बोर्ड परीक्षा से ठीक 40-50 दिन पहले जैनेंद्रजीत गंभीर बीमारी के कारण बिस्तर पर रहे, जिससे उनकी तैयारी अधूरी रह गई और उन्हें गणित में 41, साइंस में 48 और हिंदी में 49 अंकों के साथ केवल 54% अंक ही मिल सके। • मानसिक सोच में बदलाव: लोगों के तानों और आलोचनाओं को कमजोरी बनाने के बजाय उन्होंने उसे अपनी ताकत बनाया और असफलता को करियर का अंत मानने से इनकार कर दिया। • सख्त अनुशासन और ध्यान केंद्रित करना: 12वीं के बाद उन्होंने सोशल मीडिया को पूरी तरह अलविदा कह दिया और अपना पूरा ध्यान दिन में 10 घंटे की अनुशासित पढ़ाई पर लगाया। • वैज्ञानिक अध्ययन रणनीति: क्लास से पहले एडवांस वीडियो लर्निंग, दैनिक स्तर पर छोटे-छोटे लक्ष्य तय करना, और पिछले वर्षों के प्रश्नों (PYQs) व मॉक टेस्ट के निरंतर अभ्यास ने उनकी सवाल हल करने की क्षमता और गति में बड़ा सुधार किया। सवाल-जवाब 1. जैनेंद्रजीत को 10वीं बोर्ड परीक्षा में कितने अंक प्राप्त हुए थे? जैनेंद्रजीत को 10वीं की बोर्ड परीक्षा में कुल 54 प्रतिशत अंक मिले थे, जिसमें गणित में 41, साइंस में 48 और हिंदी में 49 अंक शामिल थे। 2. 10वीं परीक्षा में जैनेंद्रजीत के कम अंक आने की मुख्य वजह क्या थी? बोर्ड परीक्षा से ठीक पहले वे गंभीर रूप से बीमार हो गए थे और लगभग 40 से 50 दिनों तक बिस्तर पर रहे थे, जिससे उनकी तैयारी अधूरी रह गई थी। 3. जेईई एडवांस्ड परीक्षा में जैनेंद्रजीत ने कौन सी रैंक हासिल की? जैनेंद्रजीत ने जेईई मेन 2023 में 99.98 परसेंटाइल और जेईई एडवांस्ड परीक्षा में ऑल इंडिया 349वीं रैंक प्राप्त की। 4. जैनेंद्रजीत वर्तमान में किस संस्थान और कोर्स में पढ़ाई कर रहे हैं? वे वर्तमान में देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी बॉम्बे से कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (CSE) की पढ़ाई कर रहे हैं। 5. जैनेंद्रजीत बिहार के किस जिले और स्कूल से पढ़े हैं? वे बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के निवासी हैं और उन्होंने बेतिया स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय (वृंदावन) से पढ़ाई की है। 6. जेईई परीक्षा की तैयारी के दौरान जैनेंद्रजीत का डेली स्टडी रूटीन क्या था? वे रोजाना 10 घंटे पढ़ाई करते थे, क्लास से पहले वीडियो देखकर एडवांस लर्निंग करते थे, छोटे daily टारगेट्स बनाते थे, PYQs और मॉक टेस्ट हल करते थे तथा सोशल मीडिया से दूर रहते थे। 7. सोशल मीडिया पर जैनेंद्रजीत के कितने फॉलोअर्स हैं? सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर जैनेंद्रजीत के 63 हजार से भी अधिक फॉलोअर्स हैं। प्रेरणा और सबक जैनेंद्रजीत की सफलता की कहानी हर उस छात्र के लिए कई व्यावहारिक और प्रेरणादायक सबक देती है जो अपने जीवन में किसी असफलता या कम अंकों से निराश महसूस करता है। • असफलता को अंतिम परिणाम न समझें: 10वीं बोर्ड के 54% अंक जैनेंद्रजीत की क्षमता का अंतिम पैमाना नहीं बने; उन्होंने एक असफलता को खुद पर हावी नहीं होने दिया और बड़े लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखा। • आलोचना को ऊर्जा में बदलें: जब आसपास के लोगों ने उनके परिणाम पर ताने दिए, तो उन्होंने निराश होने के बजाय उन तानों को अपनी सबसे बड़ी प्रेरणा और ताकत बना लिया। • पूर्व तैयारी (Pre-Class Preparation) अपनाएं: क्लास में कठिन विषयों को आसानी से समझने के लिए उन्होंने व्याख्यान से पहले ही वीडियो देखकर बेसिक्स समझे, जिससे सीखने की गति तेज हो गई। • छोटे और स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करें: एक साथ पूरे सिलेबस का तनाव लेने के बजाय उन्होंने हर दिन पूरा होने वाले छोटे-छोटे लक्ष्य तय किए, जिससे अनुशासन बना रहा। • अनुशासन और त्याग आवश्यक हैं: अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए उन्होंने सोशल मीडिया जैसी ध्यान भटकाने वाली चीजों से पूरी दूरी बना ली और रोजाना 10 घंटे की मेहनत को अपनी आदत बनाया। https://trendkia.com/success-stories/10vin-men-sirpha-54-phisadi-anka-pane-vale-jainendrajeet-ne-jee-men-laharaya-parachama-pahunche-iit-bombay-26240 TrendKia — Har trend, sabse pehle.