191 देशों की साइकिल यात्रा कर हमीरपुर पहुंचे सोमेन देबनाथ, साझा किए तालिबान और उल्फा की कैद के अनुभव 20 साल में सातों महाद्वीपों के 191 देशों की साइकिल यात्रा पूरी करने के बाद पश्चिम बंगाल के सोमेन देबनाथ अब भारत भ्रमण पर हैं और हिमाचल के हमीरपुर पहुंचे हैं। पश्चिम बंगाल के सुंदरबन निवासी सोमेन देबनाथ पिछले दो दशकों से अधिक समय में सातों महाद्वीपों के 191 देशों की साइकिल यात्रा सफलतापूर्वक पूरी करने के बाद अब अपने देश में भारत भ्रमण अभियान पर निकले हैं। इसी कड़ी में शुक्रवार को वे हिमाचल प्रदेश के जिला हमीरपुर पहुंचे, जहां उन्होंने अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी (ADC) अभिषेक गर्ग और पुलिस अधीक्षक (SP) बलबीर सिंह ठाकुर से शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान सोमेन ने वैश्विक भ्रमण के दौरान मिले अपने अभूतपूर्व अनुभवों, खतरनाक मोड़ और जीवन रक्षा के कई रोमांचक संस्मरण प्रशासनिक अधिकारियों के साथ साझा किए। 20 वर्षों की कठिन विश्व यात्रा में तय की 2 लाख किलोमीटर की दूरी सोमेन देबनाथ ने अपने विश्व साइकिल अभियान का शुभारंभ 27 मई 2004 को किया था, जब उनकी आयु मात्र 23 वर्ष थी। लगभग 20 वर्षों तक निरंतर जारी रहे इस महाभियान में उन्होंने पृथ्वी के सभी 7 महाद्वीपों पर स्थित 191 देशों की यात्रा साइकिल के माध्यम से पूरी की। इस लंबी अवधि में उन्होंने अपनी साइकिल पर तकरीबन दो लाख किलोमीटर का सफर तय किया। सोमेन के अनुसार, उनकी यह दूरगामी यात्रा महज अलग-अलग देशों को देखने या व्यक्तिगत रिकॉर्ड बनाने का साधन नहीं थी, बल्कि इसका मुख्य ध्येय सामाजिक जागरूकता बढ़ाना, मानव सेवा को बढ़ावा देना, पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना और दुनिया भर में भारतीय संस्कृति तथा आपसी भाईचारे की मिसाल कायम करना था। तालिबान की कैद, उल्फा बंधक, सुनामी और बर्फीले अंटार्कटिका की चुनौतियां दो दशकों तक चले इस अभियान के दौरान सोमेन देबनाथ को कई विषम और जानलेवा परिस्थितियों से गुजरना पड़ा। वर्ष 2006 में असम प्रवास के दौरान उल्फा उग्रवादियों ने उन्हें लगातार पांच दिनों तक बंधक बनाकर रखा था। इसके ठीक अगले वर्ष यानी 2007 में जब वे अफगानिस्तान में काबुल से हेरात की ओर बढ़ रहे थे, तब तालिबान के लड़ाकों ने उन्हें जासूस समझकर 24 दिनों तक अपनी सख्त कैद में रखा। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2004 में श्रीलंका में आई विनाशकारी सुनामी का मंजर उन्होंने अपनी आंखों से देखा था। उन्होंने शून्य से भी नीचे तापमान वाले अंटार्कटिका महाद्वीप की बर्फीली सतह पर भी साइकिल चलाने का साहस दिखाया और वर्ष 2020 में चीन की यात्रा के दौरान वे कोविड-19 महामारी से भी संक्रमित हुए थे। बचपन का अभाव, उच्च शिक्षा और विदेश मंत्रालय का ऐतिहासिक सहयोग अपनी प्रारंभिक जीवन यात्रा का स्मरण करते हुए सोमेन ने बताया कि आर्थिक तंगी और पारिवारिक कठिनाइयों के बावजूद उनके पिता ने बचपन में उन्हें एक साइकिल खरीदकर दी थी, जिसने आगे चलकर उनके जीवन की दिशा ही बदल दी। शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने जूलॉजी (प्राणि विज्ञान) और फाइन आर्ट्स में स्नातक की डिग्रियां प्राप्त कीं। पढ़ाई पूरी करने के पश्चात उन्होंने विभिन्न विद्यालयों में जाकर छात्र-छात्राओं को HIV/AIDS के प्रति जागरूक करने के लिए व्याख्यान देने शुरू किए। इसी दौरान उनके भीतर संपूर्ण विश्व का भ्रमण करने और वैश्विक पटल पर भारतीय संस्कृति के गौरवशाली मूल्यों का प्रचार-प्रसार करने की इच्छा बलवती हुई। वर्ष 2004 में जब वे दिल्ली पहुंचे, तब उनकी मुलाकात तत्कालीन विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी से हुई। तत्कालीन विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने सोमेन के विजन की सराहना करते हुए उनका हौसला बढ़ाया और पासपोर्ट, वीजा तथा अन्य आवश्यक कूटनीतिक औपचारिकताओं को पूरा कराने में व्यक्तिगत सहायता प्रदान की। 'रीयूनियन भारत' अभियान और संस्मरणों पर आधारित पुस्तक विश्व यात्रा से प्राप्त समृद्ध अनुभवों को संजोने के लिए सोमेन देबनाथ वर्तमान में 'द वर्ल्ड बाइकिंग ओडिसी: 191 कंट्रीज' नामक एक विस्तृत पुस्तक का लेखन कर रहे हैं। इस पुस्तक में वे विभिन्न संस्कृतियों, जीवनशैलियों और मानवीय संबंधों की अपनी समझ को पाठकों के समक्ष रखेंगे। इसके साथ ही उन्होंने अब 'रीयूनियन भारत: वन ट्री, वन लाइफ, इंडियन यूथ एंड स्पोर्ट्स' नाम से एक नए राष्ट्रीय अभियान की शुरुआत की है। 27 मई 2026 से शुरू होकर 27 मई 2027 तक चलने वाले इस एक वर्षीय साइकिल अभियान के अंतर्गत वे संपूर्ण भारत का भ्रमण कर रहे हैं। इस राष्ट्रव्यापी यात्रा का उद्देश्य राष्ट्रीय अखंडता, वृक्षारोपण, पर्यावरण सुरक्षा, युवा सशक्तीकरण और खेलों के प्रति जन जागरूकता जगाना है। सोमेन का कहना है कि वे इस यात्रा के माध्यम से यह भी अनुभव करना चाहते हैं कि पिछले 22 वर्षों में भारत में किस तरह के सामाजिक और बुनियादी बदलाव आए हैं और वर्तमान भारत की प्रगति का स्वरूप कैसा दिखता है। हमीरपुर पुलिस प्रशासन द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मान हमीरपुर आगमन पर एसपी बलबीर सिंह ठाकुर ने सोमेन देबनाथ के अद्भुत साहस, समर्पण और राष्ट्र सेवा की भावना को देखते हुए उन्हें प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया। एसपी बलबीर सिंह ठाकुर ने कहा कि इस युवा साइकिल चालक ने भारतीय संस्कृति और उच्च आदर्शों को विश्व के कोने-कोने तक पहुंचाने का प्रशंसनीय कार्य किया है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि विभिन्न देशों के शीर्ष राष्ट्रप्रमुखों और अंतरराष्ट्रीय हस्तियों से मुलाकात कर भारतीय मूल्यों का अलख जगाना देश के लिए अत्यंत गौरव की बात है। इसका आप पर असर इस समाचार के प्रमुख सामाजिक व स्थानिक पहलू: • भारत में: सोमेन देबनाथ की यह यात्रा देश भर के युवाओं में पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य जागरूकता, खेल भावना और राष्ट्रीय एकता का एक सकारात्मक संदेश प्रसारित करती है। • हमीरपुर में: हमीरपुर और हिमाचल प्रदेश के युवाओं को स्थानीय स्तर पर एक प्रेरणादायक वैश्विक व्यक्तित्व से मिलने और उनके जमीनी अनुभवों से सीखने का अवसर मिला है। सवाल-जवाब 1. सोमेन देबनाथ कौन हैं और वे क्यों चर्चा में हैं? सोमेन देबनाथ पश्चिम बंगाल के सुंदरबन के रहने वाले एक साइकिल यात्री हैं, जिन्होंने 20 वर्षों में 191 देशों की साइकिल यात्रा पूरी की है और हाल ही में हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर पहुंचे हैं। 2. सोमेन देबनाथ ने अपनी विश्व साइकिल यात्रा कब शुरू की थी? उन्होंने 27 मई 2004 को 23 वर्ष की उम्र में अपनी विश्व यात्रा शुरू की थी। 3. अपनी यात्रा के दौरान सोमेन को किन प्रमुख खतरों का सामना करना पड़ा? उन्हें 2006 में असम में उल्फा उग्रवादियों ने 5 दिनों तक और 2007 में अफगानिस्तान में तालिबान ने जासूस समझकर 24 दिनों तक बंधक बनाकर रखा था। 4. सोमेन देबनाथ का वर्तमान अभियान 'रीयूनियन भारत' क्या है? यह 27 मई 2026 से 27 मई 2027 तक चलने वाला साइकिल अभियान है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय एकता, पर्यावरण संरक्षण, युवा सशक्तिकरण और खेलों के प्रति जागरूकता फैलाना है। 5. सोमेन देबनाथ की आने वाली पुस्तक का क्या नाम है? उनकी आने वाली पुस्तक का नाम 'द वर्ल्ड बाइकिंग ओडिसी: 191 कंट्रीज' (The World Biking Odyssey: 191 Countries) है। प्रेरणा और सबक सोमेन देबनाथ के संघर्षमय सफर से मिलने वाली मुख्य प्रेरणाएं: • दृढ़ संकल्प और स्पष्ट लक्ष्य: आर्थिक बाधाओं और सीमित संसाधनों के बावजूद बचपन से साइकिल चलाने का शौक रखकर विश्व भ्रमण का बड़ा सपना साकार किया। • कठिन परिस्थितियों में साहस: तालिबान और उल्फा जैसी आतंकवादी व उग्रवादी समूहों की कैद में रहने के बावजूद अपने सामाजिक उद्देश्य से पीछे नहीं हटे। • सामाजिक चेतना का प्रसार: केवल व्यक्तिगत रिकॉर्ड बनाने के बजाय HIV/AIDS जागरूकता, भारतीय संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण को अपनी यात्रा का मूल आधार बनाया। • निरंतरता और अनुकूलन क्षमता: अंटार्कटिका की जमा देने वाली ठंड से लेकर कोरोना संक्रमण जैसी स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करते हुए 20 साल तक निरंतर सफर जारी रखा। https://trendkia.com/success-stories/191-deshon-ki-saikila-yatra-kara-hamirpur-pahunche-somen-debnath-sajha-kie-taliban-aura-ulfa-ki-kaida-ke-anubhava-19704 TrendKia — Har trend, sabse pehle.