# 23 की उम्र, 19 सरकारी परीक्षाएं और एक गोल्ड मेडल — छत्तीसगढ़ की चारु पांडे की मिसाल बन गई कहानी

> रायपुर के टिल्डा-नेवरा की चारु पांडे ने महज 23 साल की उम्र में केंद्र और राज्य की 19 प्रतियोगी परीक्षाएं पास कीं और अब स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों गोल्ड मेडल पाएंगी।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-06-13 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/23-ki-umra-19-sarakari-parikshaen-aura-eka-golda-medala-chhattisgarh-ki-charu-pa-586 · **Language:** Hindi
**Tags:** चारु पांडे, सरकारी नौकरी, प्रतियोगी परीक्षा, छत्तीसगढ़, सफलता की कहानी, CAG, गोल्ड मेडल, द्रौपदी मुर्मू

सरकारी नौकरी की एक परीक्षा निकालने में जहां ज्यादातर उम्मीदवारों के कई-कई साल लग जाते हैं, वहीं छत्तीसगढ़ की एक बेटी ने इस पैमाने को ही बदल कर रख दिया है। रायपुर के टिल्डा-नेवरा की रहने वाली चारु पांडे ने सिर्फ 23 साल की उम्र में केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा कराई गई 19 प्रतियोगी परीक्षाएं पास कर डाली हैं। यह आंकड़ा अपने आप में बताता है कि किसी एक मंजिल पर रुकने के बजाय उन्होंने एक के बाद एक कई दरवाजे खटखटाए और हर बार कामयाबी हासिल की।

## एक नहीं, 19 परीक्षाओं का रिकॉर्ड
चारु ने जिन परीक्षाओं को पास किया है, उनकी सूची काफी लंबी है — बैंक PO, SSC, IBPC, SBI, रेलवे, ट्रांसपोर्ट ऑफिसर और पुलिस सब इंस्पेक्टर जैसी तमाम सरकारी प्रतियोगी परीक्षाएं इसमें शामिल हैं। खास बात यह है कि इनमें से कई परीक्षाएं उन्होंने पहले ही प्रयास में निकाल लीं और कुछ में तो टॉप तक किया। इस तरह की सफलता दोहरा पाना किसी के लिए भी आसान नहीं है, और यही वजह है कि उनकी कहानी पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।

## अभी चेन्नई के CAG दफ्तर में तैनात
फिलहाल चारु पांडे चेन्नई स्थित कैग (CAG) कार्यालय में असिस्टेंट ऑडिट ऑफिसर के पद पर काम कर रही हैं। लगातार तैयारी और बार-बार के प्रयासों के बाद उन्हें यह मुकाम मिला है। अब उनकी इस उपलब्धि को बड़ी पहचान मिलने जा रही है — स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उन्हें गोल्ड मेडल से सम्मानित करेंगी। उनकी इस कामयाबी पर पूरा छत्तीसगढ़ गर्व महसूस कर रहा है।

## तैयारी आसान नहीं थी
राष्ट्रपति के हाथों मेडल मिलने को लेकर चारु बताती हैं कि उनके परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं है और इससे परिवार का मान बढ़ा है। वह कहती हैं, "मैंने कभी सोचा नहीं था कि मैं इतने सारे एग्जाम दूंगी। मैंने ये सारे एग्जाम इसलिए दिए कि किसी ना किसी में नौकरी लग जाए। मैंने एसएससी की सारी परीक्षाएं दीं, रेलवे और बैंक के एग्जाम दिए।" वह यह भी बताती हैं कि उनके माता-पिता सोचते थे कि वह टीचिंग डिपार्टमेंट में जाकर शिक्षिका बनेंगी।

अपनी मेहनत के बारे में वह कहती हैं कि तैयारी के दौरान बहुत ज्यादा परिश्रम करना पड़ा। स्कूल के दिनों में वह एक औसत छात्रा ही थीं। नौकरी को लेकर उनकी सोच साफ थी — "बिजनेस में उतार-चढ़ाव होते रहते हैं, मैं सरकारी नौकरी करना चाहती थी।"

## फेल होने का डर कभी नहीं रहा
क्या परीक्षा में असफल होने का डर सताता था? इस सवाल पर चारु का जवाब था, "मैं कभी फेल नहीं हुई। एक बार एग्जाम देकर आती थी, तो उसके बारे में सोचती ही नहीं थी।" वह बताती हैं कि पढ़ाई के साथ-साथ उन्हें ट्रेवलिंग और कुकिंग का बहुत शौक है। शाम को जब वह पढ़ती थीं, तो घूमने जरूर जाती थीं। आगे की योजना के बारे में उन्होंने कहा कि उन्हें पीएचडी पूरी करनी है और अगर समय मिला तो वह यूपीएससी की तैयारी भी करना चाहती हैं।

## युवाओं के नाम संदेश
नई पीढ़ी के लिए चारु का साफ संदेश है कि किसी एक परीक्षा में नाकामी पर डिप्रेशन में नहीं जाना चाहिए — "ऐसा नहीं है कि एक ही एग्जाम होता है।" उनकी पढ़ाई की लगन और अटूट हौसला इस बात की गवाही देता है कि अगर सही दिशा में मेहनत की जाए, तो कामयाबी मिलनी तय है।

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