42 साल रिक्शा चलाकर पाला परिवार, अब पोता आदित्य बना नॉर्थ बिहार में NEET टॉपर मुजफ्फरपुर के आदित्य राज ने NEET UG 2026 में 659 अंक लाकर नॉर्थ बिहार में टॉपर का खिताब हासिल किया, जबकि उनके दादा सौखी सहनी ने 42 साल तक पटना में रिक्शा चलाकर परिवार पाला था. बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक ऐसी कहानी सामने आई है जो मेहनत और परिवार के त्याग की मिसाल बन गई है. यहां के आदित्य राज ने NEET UG 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए नॉर्थ बिहार में टॉपर का खिताब अपने नाम किया है. इस खबर के बाद से आदित्य के घर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है और परिवार में मिठाइयां बांटी जा रही हैं. परिवार में हर किसी ने निभाई अपनी भूमिका आदित्य के पिता हरेन्द्र कुमार सहनी मुजफ्फरपुर में निजी नौकरी करते हैं और मां देवमती कुमारी गांव में श्रृंगार यानी कॉस्मेटिक की एक छोटी दुकान चलाकर घर खर्च में हाथ बंटाती हैं. परिवार में आदित्य की बड़ी बहन अर्पणा राज की शादी हो चुकी है, जबकि छोटा भाई अनिकेत राज फिलहाल 12वीं कक्षा में पढ़ाई कर रहा है. सीमित आमदनी के बावजूद परिवार ने हमेशा बच्चों की पढ़ाई को प्राथमिकता दी. सरकारी स्कूल से कोचिंग संस्थान तक का सफर आदित्य ने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव के ही एक सरकारी विद्यालय से पूरी की. 10वीं पास करने के बाद उन्होंने इंटरमीडिएट में दाखिले के लिए मुजफ्फरपुर के आरडीएस कॉलेज को चुना. यहीं से डॉक्टर बनने का सपना संजोते हुए उन्होंने शहर के एक निजी कोचिंग संस्थान में NEET की तैयारी शुरू कर दी. खास बात यह रही कि उन्होंने इंटर की पढ़ाई और मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी, दोनों को एक साथ बखूबी संभाला और किसी को भी नजरअंदाज नहीं होने दिया. पहली बार में मिली नाकामी, दूसरी बार में रचा इतिहास आदित्य की राह इतनी आसान नहीं थी. साल 2025 में हुए NEET एग्जाम में उन्हें 460 अंक मिले थे, लेकिन इतने नंबरों पर किसी मेडिकल कॉलेज में सीट नहीं मिल सकी. उस दौर में उन्हें अपना डॉक्टर बनने का सपना अधूरा रह जाने का डर सताने लगा था. मगर आदित्य ने हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने अपनी कमजोरियों को पहचाना, तैयारी में जरूरी बदलाव किए और दोबारा पूरी मेहनत से जुट गए. नतीजा यह निकला कि अगले ही प्रयास में उन्होंने 659 अंक हासिल कर लिए और इसी प्रदर्शन के दम पर वह NEET UG 2026 में नॉर्थ बिहार के टॉपर बन गए. दादी की बीमारी ने बदल दी सोच आदित्य बताते हैं कि बचपन में वह क्रिकेटर बनना चाहते थे, लेकिन संसाधनों की कमी की वजह से यह सपना पूरा नहीं हो पाया. उनकी जिंदगी में असली मोड़ तब आया जब उनकी दादी गंभीर रूप से बीमार पड़ गईं. दादी लंबे समय तक कैंसर और अस्थमा जैसी बीमारियों से जूझती रहीं और आगे चलकर लकवाग्रस्त हो गईं. कोरोना के दौर में उनका निधन हो गया. दादी को असहाय हालत में देखकर आदित्य ने उसी वक्त तय कर लिया था कि वह डॉक्टर बनेंगे, ताकि आगे चलकर बीमार और जरूरतमंद लोगों की बेहतर तरीके से सेवा कर सकें. यही संकल्प आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत और प्रेरणा बना. 42 साल रिक्शा चलाकर परिवार पाला दादा ने आदित्य की इस कामयाबी के पीछे उनके दादा सौखी सहनी का त्याग भी उतना ही बड़ा है. सौखी सहनी ने लगातार 42 वर्षों तक पटना की सड़कों पर रिक्शा चलाकर अपने परिवार का पेट पाला. संसाधन सीमित थे, फिर भी उन्होंने परिवार की पढ़ाई और भविष्य को कभी दांव पर नहीं लगने दिया. आज जब उनका पोता NEET UG 2026 में नॉर्थ बिहार का टॉपर बना है, तो परिवार के वर्षों के संघर्ष को जैसे नई पहचान मिल गई है. दादा की आंखों में इस पल खुशी के आंसू हैं और पूरा परिवार इसे अपनी सबसे बड़ी जीत मान रहा है. सफलता का श्रेय परिवार को, दूसरों के लिए संदेश अपनी इस कामयाबी का श्रेय आदित्य अपने माता-पिता, शिक्षकों और परिवार के हर सदस्य को देते हैं. दूसरे छात्रों के लिए उनका कहना है कि असफलता से घबराने के बजाय उससे सीखना चाहिए. आदित्य कहते हैं, "सफलता एक दिन में नहीं मिलती. इसके लिए निरंतर मेहनत, धैर्य और ईमानदारी से प्रयास करना पड़ता है. यदि आप पूरी लगन के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहेंगे, तो सफलता एक दिन जरूर आपके कदम चूमेगी." इसका आप पर असर यह कहानी सीधे तौर पर किसी नीति या कीमत से नहीं जुड़ी है, लेकिन इसका असर NEET की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों और उनके परिवारों पर जरूर पड़ता है. • भारत में: देशभर में NEET की तैयारी कर रहे छात्रों और असफल हो चुके अभ्यर्थियों के लिए यह कहानी बताती है कि एक बार की नाकामी अंतिम नहीं होती और दोबारा मेहनत से बड़ी सफलता मिल सकती है. • मुजफ्फरपुर में: स्थानीय स्तर पर आदित्य राज और उनके परिवार को यह उपलब्धि नई पहचान और सम्मान दिलाएगी, साथ ही इलाके के दूसरे छात्रों के लिए भी यह एक मिसाल बनेगी. सवाल-जवाब 1. आदित्य राज ने NEET UG 2026 में कितने अंक हासिल किए? उन्होंने 659 अंक हासिल किए और नॉर्थ बिहार के टॉपर बने. 2. आदित्य किस शहर के रहने वाले हैं? वह बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के रहने वाले हैं. 3. NEET 2025 में आदित्य को कितने अंक मिले थे? उन्हें 460 अंक मिले थे, जिससे उन्हें कोई मेडिकल कॉलेज नहीं मिल सका था. 4. आदित्य के दादा क्या काम करते थे? उनके दादा सौखी सहनी ने 42 साल तक पटना की सड़कों पर रिक्शा चलाकर परिवार का भरण-पोषण किया. 5. आदित्य को डॉक्टर बनने की प्रेरणा कहां से मिली? अपनी दादी को कैंसर, अस्थमा और बाद में लकवे से जूझते और लाचार होते देखकर उन्होंने डॉक्टर बनने का संकल्प लिया. 6. आदित्य के परिवार में कौन-कौन हैं? पिता हरेन्द्र कुमार सहनी, मां देवमती कुमारी, बड़ी बहन अर्पणा राज और छोटा भाई अनिकेत राज. 7. आदित्य ने अपनी पढ़ाई कहां से की? शुरुआती पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से और इंटरमीडिएट मुजफ्फरपुर के आरडीएस कॉलेज से की, साथ ही एक निजी कोचिंग संस्थान से NEET की तैयारी की. प्रेरणा और सबक आदित्य राज की कहानी बताती है कि सीमित संसाधन और शुरुआती असफलता किसी के सपने को रोक नहीं सकते, अगर इरादा मजबूत हो. • असफलता को अंत मत मानिए: NEET 2025 में 460 अंक और सीट न मिलने के बाद भी आदित्य ने कोशिश जारी रखी और अगली बार 659 अंक हासिल किए. • कमजोरियों पर काम करें: पहली नाकामी के बाद उन्होंने अपनी तैयारी की खामियों को पहचाना और उन्हें दुरुस्त किया, यही उनकी सफलता की असली वजह बनी. • निजी दर्द को मकसद बनाएं: दादी की बीमारी और लाचारी देखकर आदित्य ने डॉक्टर बनने का जो संकल्प लिया, वही उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा बन गया. • परिवार का त्याग बेकार नहीं जाता: दादा सौखी सहनी के 42 साल के रिक्शा चलाने के संघर्ष ने दिखाया कि अगली पीढ़ी की शिक्षा में किया गया निवेश देर से ही सही, रंग जरूर लाता है. • पढ़ाई और तैयारी को साथ संभालें: आदित्य ने इंटर की पढ़ाई और NEET की तैयारी को एक साथ मैनेज कर दिखाया कि सही योजना से दोनों काम एक साथ संभव हैं. https://trendkia.com/success-stories/42-sala-riksha-chalakara-pala-parivara-aba-pota-aditya-bana-northa-bihar-men-neet-topara-8822 TrendKia — Har trend, sabse pehle.