# 50 रुपये की रोज बचत और कूलर रिपेयरिंग से शुरुआत, राजीव गुप्ता ने ऐसे बनाया 300 करोड़ रुपये का अप्लायंसेज ब्रांड

> पांचवीं कक्षा से दुकान पर बैठकर हर दिन 50 रुपये बचाने वाले राजीव गुप्ता ने कभी खुद कूलर असेंबल किए थे, और आज उनकी कंपनी 300 करोड़ रुपये का टर्नओवर हासिल कर चुकी है।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-09-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/50-rupaye-ki-roja-bachata-aura-kulara-ripeyaringa-se-shuruata-rajiv-gupta-ne-aise-banaya-300-karora-rupaye-ka-aplaynseja-branda-36638 · **Language:** Hindi
**Tags:** राजीव गुप्ता, थर्मोकूल होम अप्लायंसेज, कूलर कारोबार, बिजनेस सक्सेस स्टोरी, नोएडा उद्यमी, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स

व्यापार की दुनिया में अक्सर माना जाता है कि एक बड़ा उद्यम खड़ा करने के लिए भारी-भरकम शुरुआती पूंजी अनिवार्य होती है, लेकिन लगातार मेहनत, काम सीखने की लगन और अनुशासन से भी शून्य से विशाल कारोबारी साम्राज्य तैयार किया जा सकता है। नोएडा के उद्यमी राजीव गुप्ता का जीवन सफर इसी संकल्प की जीती-जागती मिसाल पेश करता है। स्कूल के दिनों में पढ़ाई के साथ-साथ एक छोटी सी दुकान पर बैठने और अपनी मामूली कमाई में से रोजाना केवल 50-50 रुपये बचाने वाले राजीव गुप्ता ने जमीनी स्तर पर इलेक्ट्रॉनिक्स का हुनर सीखा। उन्होंने अपने हाथों से कूलर असेंबल किए, उनकी मरम्मत और सर्विसिंग की और तकनीकी बारीकियों को गहराई से समझा। दशकों की इस अनवरत साधना का नतीजा है कि आज उनकी कंपनी लगभग 300 करोड़ रुपये के सालाना टर्नओवर के मुकाम पर पहुंच चुकी है।

## बचपन का संघर्ष और 50 रुपये की दैनिक बचत
राजीव गुप्ता के कारोबारी सफर की नींव बहुत साधारण और संघर्षपूर्ण परिस्थितियों में पड़ी थी। उनके बेटे तनुज गुप्ता के अनुसार, जब राजीव गुप्ता केवल पांचवीं कक्षा में पढ़ते थे, तभी से उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा के साथ-साथ एक परचून की दुकान पर काम करना शुरू कर दिया था। दुकान के कामकाज के बीच वह जो भी कमाते, उसमें से बेहद कड़े अनुशासन के साथ हर दिन 50-50 रुपये जमा करते थे। यह छोटी सी दैनिक बचत आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी। उम्र बढ़ने के साथ वह शहर आए और वहां इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में कदम रखा। उन्होंने इस काम को केवल बाहरी तौर पर नहीं देखा, बल्कि वर्कशॉप में खुद बैठकर कूलरों को पुर्जा-पुर्जा असेंबल किया, खराब कूलरों को ठीक किया और ग्राहकों की शिकायतों को दूर किया। इस जमीनी अनुभव ने उन्हें यह सिखाया कि उपकरण कैसे काम करते हैं और ग्राहक वास्तव में किसी उत्पाद से क्या उम्मीद रखते हैं।

## 25 हजार रुपये की जमापूंजी से कंपनी की नींव
वर्षों की कड़ी मेहनत और पाई-पाई जोड़कर बचाए गए पैसों के बल पर लगभग 25 साल पहले राजीव गुप्ता ने अपने स्वतंत्र उद्यम की शुरुआत की। तनुज गुप्ता ने बताया कि उनके पिता ने अपनी 25 हजार रुपये की कुल जमापूंजी लगाकर कंपनी की नींव रखी थी। शुरुआती दौर में कंपनी ने सामान्य इलेक्ट्रिकल उत्पादों के निर्माण और बिक्री पर ध्यान दिया। इसके बाद उन्होंने मेटल यानी लोहे की बॉडी वाले कूलरों का उत्पादन शुरू किया। समय बीतने के साथ जब बाजार का रुख बदलने लगा और ग्राहकों की पसंद में बदलाव आया, तब कंपनी ने भी अपने संचालन को आधुनिक बनाया और मेटल कूलर से आगे बढ़कर प्लास्टिक बॉडी वाले कूलरों के निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाया। बाजार की नब्ज को समय रहते भांपने की इसी क्षमता ने कारोबार को लगातार विस्तार दिया।

## उत्पाद श्रृंखला का विस्तार और नई पीढ़ी का प्रवेश
बाजार की जरूरतों के अनुरूप खुद को ढालते हुए कंपनी ने अपने पोर्टफोलियो का तेजी से दायरा बढ़ाया। आज थर्मोकूल होम अप्लायंसेज लिमिटेड के पास 150 से 200 से अधिक एसकेयू (स्टॉक कीपिंग यूनिट्स) की विस्तृत उत्पाद श्रृंखला उपलब्ध है। कोविड महामारी के बाद के दौर में परिवार की नई पीढ़ी भी सक्रिय रूप से कारोबार की बागडोर संभालने आगे आई। अब कंपनी व्यापक स्तर पर इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल्स के क्षेत्र में काम कर रही है और उसका मुख्य लक्ष्य पूरे भारत में अपनी सप्लाई चेन और वितरण नेटवर्क को मजबूत बनाना है।

## कूलर उद्योग में बदलाव और उपभोक्ता प्राथमिकताओं का अध्ययन
कंपनी के मार्केटिंग विशेषज्ञ तुषार गुप्ता ने बताया कि उनकी कंपनी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स के प्रतिस्पर्धी बाजार में अपनी एक मजबूत और विश्वसनीय पहचान बनाने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है। कूलर उद्योग में हाल के वर्षों में आए बदलावों पर बात करते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि एयर कंडीशनर (एसी) की कीमतें और उनका बिजली खर्च आज भी देश के हर परिवार के बजट के अनुकूल नहीं हैं। ऐसे में भारत की एक बहुत बड़ी आबादी के लिए कूलर केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि गर्मियों में राहत देने वाला एक बुनियादी और जरूरी उत्पाद बना हुआ है। कंपनी की योजना पहले उत्तर भारत के प्रमुख बाजारों में अपनी पकड़ को और अधिक पुख्ता करने की है, जिसके बाद चरणबद्ध तरीके से देश के अन्य राज्यों में आपूर्ति का विस्तार किया जाएगा।

## ऑनलाइन शोध और ऑफलाइन खरीदारी का हाइब्रिड मॉडल
उपभोक्ता व्यवहार में आए बदलावों का विश्लेषण करते हुए तुषार गुप्ता ने कहा कि अब ग्राहक केवल सस्ता सामान तलाशने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह अपनी विशिष्ट प्राथमिकताओं के आधार पर बेहतर गुणवत्ता और अपग्रेडेड फीचर्स वाले उत्पाद चाहता है। यही कारण है कि कंपनी लगातार नए डिजाइन और उन्नत तकनीक वाली उत्पाद श्रृंखला तैयार कर रही है। इसके अतिरिक्त, कोविड महामारी के बाद खरीदारी के तौर-तरीकों में एक हाइब्रिड मॉडल तेजी से उभरा है। टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी इंटरनेट के माध्यम से उत्पादों को देखने का चलन काफी बढ़ा है। ग्राहक सबसे पहले ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर जाकर संबंधित उत्पाद के स्पेसिफिकेशंस, फीचर्स और कीमत की पूरी जानकारी जुटाता है। हालांकि, जब बात इलेक्ट्रॉनिक्स और होम अप्लायंसेज जैसे ड्यूरेबल्स की आती है, तो अधिकांश ग्राहक अंतिम फैसला लेने से पहले स्थानीय दुकान पर जाकर उत्पाद के डिजाइन, रंग, निर्माण गुणवत्ता और मजबूती को अपनी आंखों से परखना पसंद करते हैं।

## इसका आप पर असर
यह कहानी दर्शाती है कि सीमित बचत और व्यावहारिक हुनर से भी टिकाऊ बिजनेस मॉडल तैयार किया जा सकता है और घरेलू अप्लायंसेज बाजार में ग्राहकों के लिए विकल्प बढ़ रहे हैं।

- **छोटे बचतकर्ताओं और युवाओं के लिए:** दैनिक रूप से छोटी रकम की नियमित बचत आगे चलकर नए व्यवसाय की पूंजी का आधार बन सकती है। यदि आप शुरुआती काम के दौरान बचत का कड़ा नियम बनाएं, तो बिना बाहरी कर्ज के काम शुरू करना संभव हो जाता है।
- **कूलर खरीदारों के लिए:** एसी की तुलना में किफायती और कम बिजली खपत वाले कूलरों की मांग लगातार बनी हुई है। बाजार में अब 150 से अधिक प्लास्टिक और आधुनिक डिजाइन के मॉडल मिलने से मध्यम वर्गीय परिवारों के पास बजट में बेहतर विकल्प उपलब्ध हैं।
- **इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबारियों और रिटेलर्स के लिए:** ग्राहक अब खरीदारी से पहले ऑनलाइन तुलना कर रहे हैं लेकिन फाइनल खरीदारी दुकानों से ही करते हैं। स्थानीय दुकानदारों को अपने शोरूम में बेहतर डिस्प्ले और मॉडलों की वास्तविक गुणवत्ता दिखाने पर ध्यान केंद्रित करना होगा।
- **टियर-2 और टियर-3 शहरों के उपभोक्ताओं के लिए:** छोटे शहरों में भी अब प्रीमियम डिजाइन और अपग्रेडेड कूलरों की सीधी पहुंच बढ़ रही है। पैन इंडिया सप्लाई विस्तार से दूरदराज के क्षेत्रों में भी बेहतर सर्विस और पार्ट्स की उपलब्धता आसान होगी।

## ऐसा क्यों हुआ
राजीव गुप्ता के छोटे काम से 300 करोड़ रुपये का विशाल उद्यम बनने के पीछे बुनियादी तकनीकी अनुभव, समय पर बाजार की जरूरतों को समझना और लगातार उत्पादों का आधुनिकीकरण शामिल रहा।

- **जमीनी तकनीकी अनुभव:** उन्होंने केवल पूंजी निवेश नहीं किया, बल्कि स्वयं वर्कशॉप में बैठकर कूलर असेंबल और रिपेयर किए। उपकरणों की यांत्रिक और तकनीकी समझ सीधे होने के कारण वे उत्पादों की गुणवत्ता और ग्राहकों की दिक्कतों को बेहतर तरीके से सुधार पाए।
- **बाजार के बदलाव को समय पर अपनाना:** कंपनी ने शुरुआत सामान्य इलेक्ट्रिकल सामान और मेटल कूलर से की थी, लेकिन बाजार का रुख बदलते ही प्लास्टिक कूलरों का उत्पादन शुरू किया। समय रहते उत्पाद में आधुनिक बदलाव करने से कंपनी बाजार प्रतिस्पर्धा में कभी पीछे नहीं छूटी।
- **विस्तृत उत्पाद श्रृंखला और नई पीढ़ी का जुड़ाव:** कोविड के बाद परिवार की युवा पीढ़ी के प्रबंधन में आने से सप्लाई चेन और ब्रांडिंग को आधुनिक रूप मिला। 150 से 200 एसकेयू तैयार करने और पैन इंडिया सप्लाई पर फोकस करने से कंपनी का टर्नओवर 300 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच सका।

## सवाल-जवाब

### 1. राजीव गुप्ता ने अपने काम की शुरुआत कैसे की थी?
उन्होंने पांचवीं कक्षा से एक परचून की दुकान पर काम करना शुरू किया और रोजाना 50-50 रुपये बचाकर बाद में शहर जाकर कूलर असेंबल और रिपेयर करने का काम सीखा।

### 2. कंपनी की शुरुआत कितने रुपयों की पूंजी से हुई थी?
राजीव गुप्ता ने करीब 25 साल पहले अपनी 25 हजार रुपये की जमापूंजी से इस कंपनी की शुरुआत की थी।

### 3. कंपनी ने शुरुआत में कौन से उत्पाद बनाए थे?
शुरुआत में कंपनी ने इलेक्ट्रिकल उत्पाद बनाए और उसके बाद मेटल यानी लोहे की बॉडी वाले कूलरों का निर्माण किया, जिसे बाद में प्लास्टिक कूलरों में बदला गया।

### 4. थर्मोकूल होम अप्लायंसेज का वर्तमान टर्नओवर कितना है?
कंपनी का सालाना कारोबार आज लगभग 300 करोड़ रुपये के टर्नओवर तक पहुंच चुका है।

### 5. कंपनी के पास वर्तमान में कितने प्रोडक्ट्स की रेंज उपलब्ध है?
कंपनी के पास इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल्स वर्ग में 150 से 200 से अधिक एसकेयू (SKUs) की विस्तृत रेंज उपलब्ध है।

### 6. कूलर उद्योग को लेकर कंपनी का क्या आकलन है?
कंपनी के अनुसार एयर कंडीशनर आज भी हर परिवार की पहुंच में नहीं है, इसलिए भारत की एक बड़ी आबादी के लिए कूलर एक आवश्यक और बुनियादी उत्पाद है।

### 7. उपभोक्ताओं की खरीदारी की आदतों में क्या बदलाव देखा गया है?
ग्राहक अब पहले ऑनलाइन माध्यमों से उत्पाद के फीचर्स और कीमत की जांच करते हैं, लेकिन खरीदारी करने से पहले दुकान पर जाकर उसकी क्वालिटी और डिजाइन को देखना पसंद करते हैं।

## प्रेरणा और सबक
राजीव गुप्ता की सफलता सिखाती है कि साधन कम होने पर भी अगर सीखने का जज्बा और बचत का अनुशासन हो, तो जीवन की दिशा बदली जा सकती है।

- **छोटे काम से शुरुआत में कोई संकोच नहीं:** पांचवीं कक्षा से परचून की दुकान पर बैठने और बाद में वर्कशॉप में कूलर रिपेयर करने से उन्होंने काम की बारीकियां सीखीं। बुनियादी काम को गहराई से सीखने से ही आगे चलकर बड़े फैसले लेने का आत्मविश्वास मिलता है।
- **दैनिक बचत की ताकत:** रोज 50-50 रुपये बचाने का साधारण अनुशासन आगे चलकर 25 हजार रुपये की शुरुआती पूंजी बना। बड़ी पूंजी का इंतजार करने के बजाय अपनी मौजूदा कमाई में से नियमित बचत करना बिजनेस का पहला कदम होता है।
- **ग्राहकों की जरूरत के अनुसार खुद को बदलना:** मेटल कूलर से प्लास्टिक कूलर और फिर 150 से ज्यादा उत्पादों की रेंज तैयार करना यह दिखाता है कि सफल व्यापारी वही है जो बाजार और समय के साथ अपनी दिशा बदलता रहे।

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