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  "type": "article",
  "title": "आईटी सेक्टर में नाकामी के बाद नागेंद्र साई ने रचा कमाल, एक साल में जीते 13 सरकारी नौकरियों के प्रस्ताव",
  "summary": "IIT खड़गपुर से पढ़े आंध्र प्रदेश के नागेंद्र साई लोमड ने कोविड में आईटी सेक्टर की नौकरी छूटने के बाद सरकारी परीक्षाओं का रुख किया और 2025 में महज एक साल में 13 सरकारी नौकरियों के ऑफर हासिल कर लिए।",
  "content": "29 साल के नागेंद्र साई लोमड की कहानी हर उस उम्मीदवार के लिए मिसाल है जो बार-बार असफल होकर हिम्मत हारने लगता है। आंध्र प्रदेश के कडपा जिले के राजा रेड्डी स्ट्रीट में रहने वाले नागेंद्र साई ने IIT खड़गपुर से इंडस्ट्रियल एंड सिस्टम्स इंजीनियरिंग में बीटेक-एमटेक की पढ़ाई की, लेकिन सबसे बड़ी उपलब्धि उन्हें डिग्री के बाद मिली, जब साल 2025 में सिर्फ एक साल के भीतर उनके नाम केंद्र सरकार की 13 अलग-अलग नौकरियों के ऑफर लेटर आए।\n\nमाता-पिता के संस्कार और आईटी सेक्टर में लगा झटका\nनागेंद्र साई के पिता अश्वनी कुमार रिटायर्ड APSRTC अधिकारी हैं, जबकि मां राजराजेश्वरी स्कूल शिक्षिका हैं। बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल रहे नागेंद्र साई ने स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद IIT खड़गपुर से 5-वर्षीय इंटीग्रेटेड डिग्री हासिल की। शुरुआती योजना आईटी सेक्टर में करियर बनाने की थी, लेकिन जिस वक्त वह कैंपस प्लेसमेंट के लिए तैयार हो रहे थे, ठीक उसी दौर में कोविड-19 महामारी ने देशभर की भर्तियों को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। नतीजा यह हुआ कि आईटी इंडस्ट्री में नौकरी का उनका रास्ता अटक गया। इस अनिश्चितता से बाहर निकलने और करियर में स्थिरता पाने के मकसद से उन्होंने जून 2022 से सरकारी नौकरी की तैयारी शुरू करने का फैसला किया।\n\nनाकामियों को सीढ़ी बनाकर तैयार की मजबूत रणनीति\nसरकारी नौकरी की राह भी शुरुआत में आसान साबित नहीं हुई। 2023 में एसएससी की परीक्षा में नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया की वजह से नागेंद्र साई मामूली अंतर से चूक गए। हार न मानते हुए उन्होंने 2024 में हैदराबाद जाकर कोचिंग भी ली, लेकिन इस बार एसएससी मेन्स की परीक्षा में असफलता हाथ लगी। लगातार दो झटकों के बाद भी उन्होंने पढ़ाई छोड़ने के बजाय अपनी हर गलती से सबक लिया। माता-पिता के लगातार हौसले और साथ की बदौलत उन्होंने अप्रैल 2025 से पहले से दोगुने जुनून के साथ दोबारा तैयारी शुरू कर दी और अपनी रणनीति को पहले से कहीं ज्यादा पैना बनाया।\n\n2025 में मिले 13 सरकारी नौकरियों के ऑफर\nयही मेहनत आखिरकार रंग लाई। साल 2025 में करीब 30 प्रतियोगी परीक्षाएं देने के बाद नागेंद्र साई का नाम 13 अलग-अलग सरकारी विभागों की चयन सूची में शामिल हुआ। एम्स की केंद्रीयकृत भर्ती परीक्षा यानी एम्स सीआरई (AIIMS CRE) में उन्हें सोशल सिक्योरिटी ऑफिसर (लेवल-7) और अपर डिवीजन क्लर्क यानी यूडीसी (UDC, लेवल-4), दोनों पदों पर चयन मिला। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी सीपीसीबी (CPCB) में भी उन्हें अपर डिवीजन क्लर्क (UDC, लेवल-4) का पद मिला। एसएससी सीजीएल 2025 (SSC CGL 2025) में उनका चयन स्टैटिस्टिकल इन्वेस्टिगेटर ग्रेड-II (लेवल-6) के पद पर हुआ। इसके अलावा एसएससी फेज-XIII (SSC Phase-XIII) के तहत उन्हें सर्वेयर, असिस्टेंट कम्यूनिकेशन ऑफिसर, टेलीकॉम असिस्टेंट, फ्यूमिगेशन असिस्टेंट, सर्विलांस असिस्टेंट, फील्डमैन, असिस्टेंट एडमिनिस्ट्रेटर (एचआर) और असिस्टेंट विलेज इंडस्ट्री एडमिनिस्ट्रेटर जैसे लेवल 2 से लेवल 6 तक के कुल आठ पदों पर भी चयन के ऑफर मिले। इस तरह एक ही साल में उनके नाम कुल 13 सरकारी नौकरियों के ऑफर लेटर दर्ज हो गए।\n\nअभी महबूबनगर में ईएसआईसी की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं\nइतने सारे विकल्प मिलने के बाद नागेंद्र साई ने अपने लिए सबसे उपयुक्त पद चुनने का फैसला किया। फिलहाल वह तेलंगाना के महबूबनगर में कर्मचारी राज्य बीमा निगम यानी ईएसआईसी (ESIC) के ब्रांच मैनेजर के तौर पर काम कर रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने नौसेना की 9 आईएनसीईटी (Navy INCET) परीक्षाओं में भी बेहतरीन प्रदर्शन किया है, हालांकि इनके अंतिम नतीजे आना अभी बाकी है।\n\nअन्य उम्मीदवारों के लिए नागेंद्र साई का गुरुमंत्र\nनागेंद्र साई का मानना है कि ज्यादातर बेरोजगार युवा खुद को सिर्फ चंद जानी-मानी भर्तियों तक सीमित रख लेते हैं, जबकि केंद्र सरकार हर साल दर्जनों छोटे-बड़े नोटिफिकेशन जारी करती है, जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। उनकी सलाह है कि उम्मीदवारों को ज्यादा से ज्यादा फॉर्म भरने चाहिए, ताकि सिलेक्शन के मौके बढ़ सकें। उनके मुताबिक सरकारी नौकरी की तैयारी करने वालों को रोजाना 10 से 12 घंटे अनुशासित पढ़ाई करनी चाहिए और साथ ही डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का सही तरीके से इस्तेमाल करना चाहिए। नागेंद्र साई कहते हैं कि असफलता से घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यही नाकामी आगे चलकर जीत की सबसे मजबूत नींव बनती है।\n\nइसका आप पर असर\nयह कहानी सीधे तौर पर देशभर के सरकारी नौकरी उम्मीदवारों के काम की है।\n\n• भारत में: जो उम्मीदवार बार-बार परीक्षा में असफल होकर तैयारी छोड़ने की सोच रहे हैं, उनके लिए यह उदाहरण दिखाता है कि सिर्फ बड़ी भर्तियों के बजाय ज्यादा से ज्यादा सरकारी नोटिफिकेशन में आवेदन करने से चयन के मौके बढ़ सकते हैं।\n• आंध्र प्रदेश में: कडपा जैसे शहरों के छात्रों के लिए नागेंद्र साई की सफलता एक स्थानीय मिसाल बन गई है, जो दिखाती है कि छोटे शहर से निकलकर भी लगातार मेहनत से केंद्र सरकार की नौकरियों तक पहुंचा जा सकता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. नागेंद्र साई लोमड कौन हैं?\nवह आंध्र प्रदेश के कडपा जिले के रहने वाले 29 वर्षीय इंजीनियर हैं, जिन्होंने IIT खड़गपुर से इंडस्ट्रियल एंड सिस्टम्स इंजीनियरिंग में बीटेक-एमटेक किया है।\n\n2. उन्हें कितनी सरकारी नौकरियों के ऑफर मिले?\nसाल 2025 में सिर्फ एक साल के भीतर उन्हें 13 अलग-अलग सरकारी विभागों से नौकरी के ऑफर मिले।\n\n3. उन्होंने इसके लिए कितनी परीक्षाएं दीं?\nउन्होंने 2025 में करीब 30 प्रतियोगी परीक्षाएं दीं।\n\n4. उन्हें आईटी सेक्टर में करियर बनाने में दिक्कत क्यों हुई?\nकोविड-19 महामारी के दौरान कैंपस प्लेसमेंट बुरी तरह प्रभावित हुए, जिससे उनका आईटी सेक्टर में जाने का रास्ता अटक गया।\n\n5. उन्होंने सरकारी नौकरी की तैयारी कब शुरू की थी?\nउन्होंने जून 2022 से सरकारी नौकरी की तैयारी शुरू की थी।\n\n6. वह फिलहाल कौन सी नौकरी कर रहे हैं?\nवह अभी तेलंगाना के महबूबनगर में ईएसआईसी के ब्रांच मैनेजर के तौर पर कार्यरत हैं।\n\n7. क्या उनके सभी नतीजे आ चुके हैं?\nनहीं, नौसेना की 9 आईएनसीईटी परीक्षाओं के अंतिम नतीजे आना अभी बाकी है।\n\n8. नागेंद्र साई के माता-पिता क्या करते हैं?\nउनके पिता अश्वनी कुमार रिटायर्ड APSRTC अधिकारी हैं और मां राजराजेश्वरी स्कूल शिक्षिका हैं।\n\nप्रेरणा और सबक\nनागेंद्र साई लोमड की कहानी से मिलने वाले सबक:\n\n• असफलता को आखिरी शब्द न मानें: आईटी सेक्टर में झटका लगने के बाद भी उन्होंने नई राह चुनी और उसे पूरी गंभीरता से अपनाया।\n• हर नाकामी से सीखें: 2023 और 2024 की असफलताओं के बाद हार मानने के बजाय उन्होंने अपनी कमियां सुधारीं और रणनीति बेहतर बनाई।\n• परिवार का साथ मजबूती देता है: माता-पिता के लगातार हौसले ने उन्हें अप्रैल 2025 से दोगुने जुनून के साथ दोबारा तैयारी शुरू करने की ताकत दी।\n• सीमित दायरे से बाहर निकलें: सिर्फ चर्चित भर्तियों तक सीमित रहने के बजाय उन्होंने करीब 30 अलग-अलग परीक्षाएं दीं, जिससे उनके चयन के मौके कई गुना बढ़ गए।\n• अनुशासन जरूरी है: रोजाना 10 से 12 घंटे की मेहनत और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के सही इस्तेमाल को वह सफलता की बुनियाद मानते हैं।",
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  "category": "सक्सेस स्टोरी",
  "publishedAt": "2026-08-03",
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