# अंतरराष्ट्रीय स्ट्रेंथ लिफ्टिंग में 192.5 किलोग्राम वजन उठाकर सीकर की अर्चना बिलोनिया ने कायम किया नया वर्ल्ड रिकॉर्ड

> सीकर जिले के रायपुरा गांव की अर्चना बिलोनिया ने थाईलैंड में 192.5 किलोग्राम भार उठाकर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया है। आर्थिक तंगी और कई किलोमीटर पैदल चलकर ट्रेनिंग करने वाली इस खिलाड़ी की नजरें अब किर्गिजस्तान प्रतियोगिता पर हैं।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-09-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/antararashtriya-strentha-liphtinga-men-192-5-kilograma-vajana-uthakara-sikar-ki-archana-bilonia-ne-kayama-kiya-naya-varlda-rikorda-26092 · **Language:** Hindi
**Tags:** अर्चना बिलोनिया, सीकर, स्ट्रेंथ लिफ्टिंग, वर्ल्ड रिकॉर्ड, पावरलिफ्टिंग, राजस्थान खेल, थाईलैंड चैंपियनशिप, राजस्थान

अंतरराष्ट्रीय खेल जगत में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वाली सीकर जिले के रायपुरा गांव की रहने वाली अर्चना बिलोनिया की सफलता हर किसी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। एक समय ऐसा भी था जब अभ्यास करने के लिए उन्हें रोजाना कई किलोमीटर पैदल चलकर जिला खेल स्टेडियम तक पहुंचना पड़ता था। बेहद साधारण मजदूर परिवार से आने के कारण उनके सामने आर्थिक तंगी और आधुनिक खेल उपकरणों की भारी कमी थी। इन तमाम विषम परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कभी अपने कदमों को पीछे नहीं हटने दिया और अपनी अटूट लगन के बल पर स्ट्रेंथ लिफ्टिंग में भारत का झंडा बुलंद किया।

## अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन और पदकों की बौछार
अर्चना बिलोनिया के खेल जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि थाईलैंड के पटाया शहर में आयोजित 12वीं वर्ल्ड स्ट्रेंथ लिफ्टिंग एंड बेंच प्रेस चैंपियनशिप के दौरान सामने आई। इस वैश्विक मंच पर उन्होंने स्ट्रेंथ लिफ्टिंग स्पर्धा में 192.5 किलोग्राम का भारी वजन उठाकर नया विश्व रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज कराया। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में उन्होंने न केवल ऐतिहासिक रिकॉर्ड कायम किया बल्कि भारत के लिए दो स्वर्ण पदक भी हासिल किए। इससे पूर्व वर्ष 2024 में कजाकिस्तान में आयोजित 11वीं वर्ल्ड स्ट्रेंथ लिफ्टिंग चैंपियनशिप में भी उन्होंने असाधारण प्रदर्शन करते हुए एक स्वर्ण पदक और इनक्लाइन बेंच प्रेस स्पर्धा में एक रजत पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया था।

अपनी खेल यात्रा के दौरान अर्चना ने पावर लिफ्टिंग और स्ट्रेंथ लिफ्टिंग दोनों ही श्रेणियों में कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पदक जीते हैं। यदि उनकी कुल उपलब्धियों पर नजर डालें तो पावर लिफ्टिंग में उनके नाम एक स्वर्ण पदक, चार रजत पदक और पांच कांस्य पदक दर्ज हैं। इसके अलावा स्ट्रेंथ लिफ्टिंग के क्षेत्र में वह अब तक कुल चार स्वर्ण पदक अपने नाम कर चुकी हैं। राष्ट्रीय स्तर की विभिन्न प्रतियोगिताओं में भी उन्होंने अपनी क्षमता का प्रदर्शन करते हुए चार कांस्य पदक हासिल किए हैं। अभावों के बीच शुरू हुआ उनका यह सफर आज अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड के रूप में चमचमा रहा है।

## शॉटपुट एथलीट से पावरलिफ्टर बनने की प्रेरक कहानी
अर्चना की शुरुआत खेल जगत में एक एथलीट के रूप में हुई थी। सीकर स्थित श्री कल्याण कन्या महाविद्यालय में अपनी पढ़ाई के दौरान वह मुख्य रूप से शॉटपुट की तैयारी कर रही थीं। उसी दौरान कॉलेज में अभ्यास करते समय कोच कैप्टन दुर्जन सिंह शेखावत की नजर अर्चना की शारीरिक क्षमता और नैसर्गिक ताकत पर पड़ी। कोच ने अर्चना के भीतर छिपी हुई अद्भुत क्षमता को तुरंत पहचान लिया और उन्हें शॉटपुट छोड़कर पावर लिफ्टिंग के क्षेत्र में कदम रखने के लिए प्रेरित किया।

कोच कैप्टन दुर्जन सिंह शेखावत के मार्गदर्शन में अर्चना के प्रशिक्षण शेड्यूल में बड़ा बदलाव किया गया। उन्होंने अपने ध्यान को पूरी तरह से वजन उठाने वाले इस कठिन खेल की ओर मोड़ दिया। इसके बाद अर्चना ने दिन-रात कड़ी मेहनत की और अपनी एकाग्रता के दम पर पावर लिफ्टिंग और स्ट्रेंथ लिफ्टिंग स्पर्धाओं में एक के बाद एक मुकाम हासिल करना शुरू कर दिया।

## पैदल सफर, पारिवारिक सहयोग और भामाशाहों की मदद
अर्चना के शुरुआती दौर में सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक संसाधनों का अभाव था। उनके पिता बंशीलाल बिलोनिया एक श्रमिक के रूप में कार्य करते हैं और उनकी माता मोहनी देवी गृहिणी हैं। सीमित आय के बावजूद परिवार ने अर्चना के सपनों के आड़े गरीबी को नहीं आने दिया और हमेशा उनका ढांढस बंधाया। घर में मूलभूत सुविधाओं की कमी के बावजूद माता-पिता ने अपनी बेटी का मनोबल बनाए रखा और खेल जारी रखने के लिए प्रेरित किया।

इसके साथ ही स्थानीय समाजसेवियों और भामाशाहों ने भी अर्चना की प्रतिभा को देखते हुए आगे आकर मदद की। उन्होंने अर्चना को अभ्यास के लिए आवश्यक खेल उपकरण, विशेष जूते और जरूरी किट उपलब्ध कराई। परिवार के भावनात्मक सहयोग और समाज से मिले इस आर्थिक समर्थन ने अर्चना के संघर्ष को नई ताकत दी, जिसके चलते वह स्टेडियम तक पैदल चलकर अभ्यास जारी रख सकीं।

## जयपुर में कठिन प्रशिक्षण और स्व-वित्तपोषित आहार प्रबंधन
वर्तमान समय में अर्चना अपने दैनिक अभ्यास, उच्च गुणवत्ता वाले आहार और फिटनेस पर होने वाले तमाम खर्चों का वहन खुद ही कर रही हैं। वह जयपुर के विद्याधर नगर क्षेत्र में कोच उदयभान रावत के कुशल निर्देशन में नियमित रूप से कड़ा प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर की वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए एक खिलाड़ी को विशेष प्रकार की डाइट, सप्लीमेंट्स और शारीरिक देखभाल की आवश्यकता होती है, जिस पर काफी बजट खर्च होता है।

आर्थिक दबावों और व्यक्तिगत खर्चों के बावजूद अर्चना ने अपनी एकाग्रता को कमजोर नहीं होने दिया है। वह पूरी निष्ठा और कठोर अनुशासन के साथ अपने प्रशिक्षण में जुटी हुई हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि यदि मन में दृढ़ संकल्प और निरंतर मेहनत करने का जज्बा हो, तो किसी भी वित्तीय या सामाजिक बाधा को पार किया जा सकता है। वह आगामी समय में भारतीय तिरंगे का मान और अधिक बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

## किर्गिजस्तान में होने वाली आगामी चैंपियनशिप पर टिकी निगाहें
विश्व रिकॉर्ड कायम करने के बाद अब अर्चना बिलोनिया का पूरा ध्यान किर्गिजस्तान में आयोजित होने वाली अगली बड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता पर केंद्रित है। किर्गिजस्तान में 8 सितंबर से 12 सितंबर तक 13वीं इंटरनेशनल स्ट्रेंथ लिफ्टिंग एंड इनक्लाइन बेंच प्रेस 2026 चैंपियनशिप का आयोजन होने जा रहा है।

अर्चना इस आगामी टूर्नामेंट के लिए दिन-रात पसीना बहा रही हैं। उनकी योजना किर्गिजस्तान की धरती पर एक बार फिर भारतीय दल का प्रतिनिधित्व करते हुए देश के लिए स्वर्ण पदक जीतने की है। पैदल चलकर अभ्यास की शुरुआत करने वाली अर्चना की यह सफलता उन सभी युवाओं के लिए एक मिसाल है जो विषम परिस्थितियों से जूझते हुए अपने सपनों को साकार करना चाहते हैं।

## इसका आप पर असर
सीकर की अर्चना बिलोनिया द्वारा स्थापित विश्व रिकॉर्ड ग्रामीण इलाकों के खिलाड़ियों के लिए नए अवसर और प्रेरणा लेकर आया है।

- **भारत में:** अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय खिलाड़ियों की सफलता से स्ट्रेंथ लिफ्टिंग जैसे गैर-पारंपरिक खेलों को राष्ट्रीय स्तर पर अधिक पहचान मिलेगी। इसके परिणामस्वरूप केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा ऐसे खेलों के लिए विशेष अनुदान और छात्रवृत्तियों की घोषणा की जा सकती है।
- **सीकर (राजस्थान) में:** जिला स्तर पर स्थानीय खेल सुविधाओं और स्टेडियम के रखरखाव में सुधार के लिए प्रशासनिक प्रयास तेज होंगे। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के युवा खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए आधुनिक उपकरण और बेहतर कोचिंग सुविधाएं प्राप्त हो सकेंगी।
- **युवा एथलीटों के लिए:** संसाधनों की कमी से जूझ रहे युवा खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा साबित करने का एक व्यावहारिक ढांचा और दिशा मिलेगी। वे स्थानीय स्तर पर उपलब्ध मार्गदर्शन का लाभ उठाकर पेशेवर पावरलिफ्टिंग में अपना करियर बना सकेंगे।
- **खेल अकादमियों के लिए:** राजस्थान में निजी और सरकारी प्रशिक्षण केंद्रों में महिला भारोत्तोलकों के लिए नए बैच और कोच तैनात किए जाएंगे। इससे आने वाली प्रतियोगिताओं के लिए नई खेल प्रतिभाओं की खोज और तैयारी को गति मिलेगी।

## सवाल-जवाब

### 1. अर्चना बिलोनिया ने हाल ही में क्या रिकॉर्ड बनाया है?
अर्चना बिलोनिया ने थाईलैंड के पटाया में आयोजित 12वीं वर्ल्ड स्ट्रेंथ लिफ्टिंग एंड बेंच प्रेस चैंपियनशिप में 192.5 किलोग्राम भार उठाकर नया विश्व रिकॉर्ड कायम किया और दो स्वर्ण पदक जीते।

### 2. अर्चना बिलोनिया मूल रूप से कहां की रहने वाली हैं और उनके परिवार की क्या स्थिति रही है?
वह राजस्थान के सीकर जिले के रायपुरा गांव की रहने वाली हैं। उनके पिता बंशीलाल बिलोनिया एक श्रमिक हैं और माता मोहनी देवी गृहिणी हैं।

### 3. अर्चना ने पावरलिफ्टिंग खेलना कैसे शुरू किया?
कॉलेज में पढ़ाई के दौरान वह शॉटपुट की तैयारी कर रही थीं, जहां कोच कैप्टन दुर्जन सिंह शेखावत ने उनकी प्रतिभा पहचानकर उन्हें पावरलिफ्टिंग अपनाने के लिए प्रेरित किया।

### 4. अर्चना के नाम पावरलिफ्टिंग और स्ट्रेंथ लिफ्टिंग में कुल कितने पदक हैं?
पावरलिफ्टिंग में उनके नाम 1 स्वर्ण, 4 रजत और 5 कांस्य पदक हैं। स्ट्रेंथ लिफ्टिंग में वह 4 स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं और राष्ट्रीय स्तर पर 4 कांस्य पदक हासिल किए हैं।

### 5. अर्चना बिलोनिया की आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता कौन सी है?
वह 8 से 12 सितंबर 2026 तक किर्गिजस्तान में होने वाली 13वीं इंटरनेशनल स्ट्रेंथ लिफ्टिंग एंड इनक्लाइन बेंच प्रेस चैंपियनशिप की तैयारी कर रही हैं।

## प्रेरणा और सबक
सीकर की अर्चना बिलोनिया का जीवन सफर दर्शाता है कि सीमित संसाधनों के बावजूद अटूट निष्ठा से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। उनके संघर्ष और सफलता से निम्नलिखित महत्वपूर्ण सबक मिलते हैं:

- **प्रारंभिक बाधाओं को लक्ष्य के आड़े न आने देना:** अभ्यास के लिए कई किलोमीटर पैदल चलने और आर्थिक तंगी के बावजूद अर्चना ने कभी अपने समर्पण को कम नहीं होने दिया।
- **विशेषज्ञों के मार्गदर्शन पर भरोसा:** शॉटपुट से पावरलिफ्टिंग की ओर रुख करने का कोच का सुझाव मानकर उन्होंने अपनी वास्तविक ताकत को पहचाना और निधारा।
- **स्वावलंबन और निरंतरता:** अपनी डाइट और ट्रेनिंग का खर्च खुद उठाते हुए भी उन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं पर अपना ध्यान केंद्रित रखा।
- **सकारात्मक सोच और समाज का सहयोग:** कठिन समय में परिवार और स्थानीय सहयोगियों की मदद स्वीकार कर अपने सपनों की दिशा में आगे बढ़ना जारी रखा।

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