बहराइच की थारू महिलाएं: जंगल की घास से लेकर केले के बेकार तने तक, हर चीज से गढ़ रहीं कमाई का जरिया बहराइच के जंगल किनारे बसे गांवों की थारू जनजाति की महिलाएं मूंज घास, केन, जलकुंभी, कमल का तना, केले का बेकार तना और जंगली बाँस जैसी चीजों से सजावटी और रोजमर्रा के उत्पाद बनाकर आत्मनिर्भर बन रही हैं। उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में जंगल से सटे गांवों में बसी थारू जनजाति की महिलाओं ने एक ऐसा रास्ता निकाल लिया है, जिसमें जंगल और खेत की वे चीजें भी कमाई का जरिया बन गई हैं, जिन्हें आमतौर पर लोग बेकार समझकर फेंक देते हैं। घास, बेल, नदी की जलकुंभी, फसलों के बचे डंठल और केले के तने तक — इन सबको ये महिलाएं अपने हुनर से ऐसे उत्पादों में बदल रही हैं, जिनकी बाजार में अच्छी मांग है। मूंज घास से बनते रोजमर्रा और सजावटी सामान मूंज नाम की घास सिर्फ बहराइच ही नहीं, बल्कि भारत के लगभग सभी जंगलों में पाई जाती है। बहराइच के जंगल किनारे बसे गांवों की थारू महिलाएं इसी घास से कई तरह की चीजें तैयार करती हैं — जैसे रोटी रखने के बॉक्स, फूल या सजावट के लिए पॉट और भी बहुत कुछ। इसे बनाने की प्रक्रिया भी मेहनत भरी है। सबसे पहले महिलाएं जंगल से घास काटकर लाती हैं, उसे सुखाती हैं, अच्छी तरह सफाई करती हैं और फिर पानी में भिगोकर उसकी बिनाई करती हैं और रंग चढ़ाती हैं। केन फर्नीचर: कभी नाम तक नहीं जानते थे लोग एक समय ऐसा भी था जब लोग केन फर्नीचर का नाम तक नहीं जानते थे। लेकिन वक्त बदलने के साथ यह इतना लोकप्रिय हो गया कि आज भारत के कोने-कोने में इससे कुर्सियां, टेबल, झूले और सजावट के तमाम सामान बनाए जा रहे हैं। यह जंगल में अपने आप उगने वाला पौधा है, जो झाड़ियों और बड़े-बड़े पेड़ों पर जमीन से चढ़ जाता है। इसे काटकर, सुखाकर और आकार देकर मनमोहक कुर्सियां और डाइनिंग टेबल जैसी चीजें बनाई जाती हैं। इसकी मांग अब खूब बढ़ रही है और लोग इसके जरिए अच्छी कमाई भी कर रहे हैं। नदी की जलकुंभी और गर्मी से राहत देती टोपी बहराइच का मिहिपुरवा क्षेत्र सीधे जंगल से सटा हुआ है। यहां के गांवों में रहने वाली महिलाएं जंगल की चीजों के साथ-साथ नदी में पाई जाने वाली जलकुंभी से भी कई तरह के आइटम तैयार करती हैं। इन्हीं में खास है गर्मी से बचाने वाली रूसी टोपी, जिसे लगाने पर तेज धूप में काफी राहत मिलती है। यह सीधी धूप को रोक लेती है, जिससे सिर ठंडा बना रहता है। कमल का तना भी बन रहा कमाई का साधन ग्रामीण और जंगली इलाकों की नदियों व तालाबों में अब लोग रोजगार के लिए कमल की खेती करने लगे हैं। कमल के फल और फूल का इस्तेमाल तो लंबे समय से होता आ रहा है, लेकिन अब महिलाएं इसके तने का भी उपयोग करके आत्मनिर्भर बन रही हैं और अच्छा पैसा कमा रही हैं। इसके लिए तने को लाकर सुखाया जाता है, फिर बीनकर उससे तरह-तरह के डेकोरेटिव आइटम और बैग बनाए जाते हैं। फेंके जाने वाले केले के तने से टिकाऊ उत्पाद इन महिलाओं ने सिर्फ जंगल की चीजों को ही रोजगार का जरिया नहीं बनाया, बल्कि वे केले के उस बेकार तने को भी काम में ला रही हैं, जिसे लोग खराब समझकर फेंक देते हैं। फल आने के बाद जब तने को फेंक दिया जाता है, तब महिलाएं उसे लाकर साफ करती हैं, सुखाती हैं और उससे मनमोहक चीजें बनाती हैं। इनमें डलिया और डेकोरेटिव आइटम जैसी कई वस्तुएं शामिल हैं, जो काफी टिकाऊ होती हैं और नष्ट होने के बाद भी वातावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचातीं। जंगली बाँस के हाथ पंखे समय के साथ अब लोग बाँस से भी कई तरह की चीजें बना रहे हैं। जंगल किनारे रहने वाली महिलाएं इन दिनों जंगली बाँस से गर्मी में राहत देने वाले हाथ पंखे तैयार कर रही हैं और इससे अच्छी कमाई कर रही हैं। इन्हें बनाने के लिए खोखले बाँस को लाकर बीच से सावधानी से फाड़ा जाता है और कई हिस्सों में बांटकर हाथ पंखा बनाया जाता है। फिर इन्हें अच्छे दामों पर बेचकर महिलाएं आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ अपने हुनर को भी निखार रही हैं। गेहूं के डंठल को मिला 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' का दर्जा बहराइच में गेहूं के डंठल को वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (One District One Product) में शामिल किया गया है, और इसकी शुरुआत गांव से ही हुई थी। थारू जनजाति की महिलाओं ने गेहूं के डंठल से मनमोहक कलाकृतियां बनाना शुरू किया, जो धीरे-धीरे इतनी लोकप्रिय हुईं कि सरकार ने इसे वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट का दर्जा दे दिया। आज गांव-देहात समेत तमाम महिलाएं गेहूं के डंठल से तरह-तरह की सामग्री बनाकर अच्छा पैसा कमा रही हैं और जिले के साथ-साथ पूरे प्रदेश का नाम रोशन कर रही हैं। खेत के बचे डंठल से भी कमाल थारू महिलाएं सिर्फ जंगल की बेकार चीजों से ही नहीं, बल्कि अपने खेतों में उगने वाले अनाज के अवशेषों से भी कमाल दिखा रही हैं। अरहर की खेती के बाद बचे डंठल को वे विभिन्न सामग्री बनाने में इस्तेमाल कर लेती हैं, जो देखने में सुंदर और मनमोहक होने के साथ-साथ काफी टिकाऊ भी होती हैं। इस तरह ये महिलाएं जंगल और खेत की तमाम चीजों से उपयोगी वस्तुएं बनाकर अच्छी कमाई कर रही हैं। https://trendkia.com/success-stories/baharaicha-ki-tharu-mahilaen-jngala-ki-ghasa-se-lekara-kele-ke-bekara-tane-taka--522 TrendKia — Har trend, sabse pehle.