बहराइच की महिलाओं ने तानों को बनाया ताकत, संजू देवी के बायो रिसर्च सेंटर से बदलीं ग्रामीण जिंदगियां उत्तर प्रदेश के बहराइच में रूढ़ियों को तोड़कर संजू देवी ने 12 महिलाओं के साथ मिलकर जैविक कृषि उत्पाद तैयार करने का सफल उद्यम शुरू किया है। उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले से महिला सशक्तिकरण की एक बेहद प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जहां विपरीत परिस्थितियों और सामाजिक बाधाओं को पार करते हुए एक महिला ने न केवल खुद को आत्मनिर्भर बनाया बल्कि कई अन्य महिलाओं के जीवन को भी एक नई दिशा दी। कैसरगंज विकास खंड के अंतर्गत आने वाले बीबियापारा गांव की रहने वाली संजू देवी ने ग्रामीण परिवेश की रूढ़ियों को तोड़ते हुए एक अनूठी मिसाल पेश की है। एक दौर ऐसा था जब उन्हें जैविक खेती के बारे में कोई बुनियादी जानकारी भी नहीं थी, लेकिन आज वे एक सफल बायो रिसर्च सेंटर का संचालन कर रही हैं। उनकी यह यात्रा चुनौतियों से भरी रही है, लेकिन उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति ने नामुमकिन को भी मुमकिन बना दिया। विरोध और तानों को बनाया कामयाबी का हथियार जब संजू देवी ने पहली बार इस क्षेत्र में कदम रखने का फैसला किया, तो उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती तकनीक या पूंजी की नहीं, बल्कि सामाजिक मानसिकता की थी। उन्होंने TCL संस्था के माध्यम से इस काम को समझने और गांव की अन्य ग्रामीण महिलाओं को इससे जोड़ने का प्रयास शुरू किया। इस पहल पर गांव और आसपास के समाज से उन्हें तीखी प्रतिक्रियाओं का सामना करना पड़ा। लोग राह चलते उन पर और उनके साथ काम करने वाली लड़कियों पर तरह-तरह के तंज कसते थे। समाज के लोग कहते थे कि घर की बहुएं और बेटियां बाहर जाकर क्या काम करेंगी और यह सब इनके बस की बात नहीं है। इन नकारात्मक टिप्पणियों से निराश होने के बजाय संजू देवी ने इसे एक चुनौती के रूप में स्वीकार किया। उन्होंने और उनकी साथी महिलाओं ने इन तानों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया, बल्कि इसे अपनी सबसे बड़ी ताकत में बदल लिया और लगातार आगे बढ़ती रहीं। सहयोग और सुनियोजित संगठन का गठन इस अभियान को अमलीजामा पहनाने के लिए संजू देवी को TCL के FC सर का मार्गदर्शन मिला। उनके कुशल निर्देशन में संजू देवी ने गांव की अत्यंत गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर 12 महिलाओं को एकजुट किया और एक मजबूत समूह का निर्माण किया। बायो रिसर्च सेंटर (BRC) के कार्यों को सुचारू और पारदर्शी तरीके से चलाने के लिए उन्होंने एक व्यवस्थित ढांचा तैयार किया। इसके तहत तीन प्रमुख पदों का सृजन किया गया, जिसमें अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष शामिल हैं। ये तीनों पदाधिकारी बैंक के लेन-देन, वित्तीय प्रबंधन और आधिकारिक दस्तावेजों व रजिस्टरों के रखरखाव की जिम्मेदारी पूरी मुस्तैदी से संभालते हैं। समूह के बाकी सदस्यों के बीच भी उनकी योग्यताओं के अनुसार जिम्मेदारियों का बंटवारा किया गया है। यह सुनियोजित विभाजन ही इस केंद्र की सफलता का मुख्य आधार बना, जहां सभी महिलाएं मिलकर जैविक कृषि के लिए उत्कृष्ट उत्पाद तैयार कर रही हैं। कृषि को नई दिशा देने वाले तीन मुख्य उत्पाद इस बायो रिसर्च सेंटर में मुख्य रूप से तीन प्रकार के जैविक उत्पाद तैयार किए जाते हैं, जो फसलों की पैदावार बढ़ाने और मिट्टी की सेहत सुधारने में बेहद प्रभावी साबित हो रहे हैं। पहला उत्पाद 'पौध पोषक' है, जो पौधों के तेजी से विकास को सुनिश्चित करता है। इसके नियमित छिड़काव से फसल के दाने न केवल मजबूत और चमकदार बनते हैं, बल्कि उनकी समग्र गुणवत्ता में भी भारी सुधार होता है। दूसरा उत्पाद 'फसल रक्षक' है, जो फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले हानिकारक कीटों और पत्तियों के सिकुड़ने वाले घातक रोगों से बचाने में पूरी तरह सक्षम है। तीसरा अत्यंत महत्वपूर्ण उत्पाद 'मृदा शक्ति' है, जिसे उपयोग करने का एक विशेष तरीका है। किसान 1 किलोग्राम मृदा शक्ति को 15 किलोग्राम जैविक खाद में मिलाकर छांव में सुखाते हैं और फिर इसे खेतों में डालते हैं। यह मिट्टी की नमी को लंबे समय तक बनाए रखता है, जिससे किसानों को बार-बार सिंचाई करने की जरूरत नहीं पड़ती और पानी की भारी बचत होती है। आत्मनिर्भरता और सम्मान की नई सुबह जब इस महिला समूह ने इन जैविक दवाइयों और उत्पादों को व्यावसायिक स्तर पर तैयार कर बेचना शुरू किया, तो इसके नतीजे बेहद चौंकाने वाले और उत्साहजनक रहे। किसानों को इन उत्पादों के इस्तेमाल से बेहतरीन परिणाम मिले, जिससे बाजार में इनकी मांग तेजी से बढ़ी। इसके फलस्वरूप समूह की महिलाओं को अच्छी आमदनी होने लगी। जिन महिलाओं के पास पहले कमाई का कोई साधन नहीं था और वे पूरी तरह दूसरों पर निर्भर थीं, वे आज हर महीने एक सम्मानजनक और स्थिर आय अर्जित कर रही हैं। संजू देवी का कहना है कि इस बदलाव ने उन्हें न केवल आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाया है, बल्कि मानसिक रूप से भी बेहद मजबूत किया है। अब वे अपने परिवार के महत्वपूर्ण फैसलों में अपनी राय पूरे आत्मविश्वास के साथ रखती हैं। सबसे बड़ा बदलाव तो यह आया है कि जो लोग कभी उन्हें हतोत्साहित करते थे और तंज कसते थे, आज वही लोग उनके पास आकर इस BRC समूह में शामिल होने की इच्छा जता रहे हैं। संजू देवी अब खुद आगे बढ़ने के साथ-साथ दूसरी महिलाओं को भी तरक्की की राह दिखा रही हैं। इसका आप पर असर इस सफल मॉडल से ग्रामीण महिलाओं के लिए नए आर्थिक रास्ते खुल रहे हैं और जैविक कृषि को बढ़ावा मिल रहा है। • देशभर में: यह पहल भारत के अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को स्वयं सहायता समूह बनाने और उद्यमिता अपनाने के लिए प्रेरित करती है। इससे महिला सशक्तिकरण के साथ-साथ पर्यावरण-अनुकूल जैविक खेती को राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा मिलेगा। • बहराइच और उत्तर प्रदेश में: स्थानीय किसानों को कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाले जैविक कृषि उत्पाद जैसे पौध पोषक और फसल रक्षक आसानी से उपलब्ध होंगे। इसके अतिरिक्त, जिले की अन्य ग्रामीण महिलाओं को सम्मानजनक रोजगार के अवसर मिलेंगे जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। ऐसा क्यों हुआ संजू देवी के बायो रिसर्च सेंटर की सफलता मुख्य रूप से सुनियोजित प्रबंधन और जैविक उत्पादों की उच्च प्रभावशीलता के कारण संभव हो सकी है। • संस्थागत सहयोग: TCL संस्था के मार्गदर्शक और FC सर के तकनीकी सहयोग ने महिलाओं को आवश्यक प्रशिक्षण और संबल प्रदान किया। इस मार्गदर्शन के बिना ग्रामीण महिलाओं के लिए जैविक खेती की बारीकियों को समझना कठिन था। • व्यवस्थित संगठनात्मक ढांचा: समूह के भीतर अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष के पदों का गठन कर वित्तीय कार्यों में पारदर्शिता लाई गई। काम के इस स्पष्ट बंटवारे ने आंतरिक विवादों की गुंजाइश को पूरी तरह समाप्त कर दिया। • उत्पादों की बेहतर कार्यक्षमता: निर्मित जैविक उत्पादों ने फसल सुरक्षा और मिट्टी की नमी बनाए रखने में रासायनिक खादों से बेहतर परिणाम दिए। इससे किसानों का विश्वास बढ़ा और उत्पादों की मांग में निरंतर वृद्धि दर्ज की गई। सवाल-जवाब 1. संजू देवी ने बायो रिसर्च सेंटर (BRC) की शुरुआत कहां की है? उन्होंने उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के कैसरगंज ब्लॉक में स्थित ग्राम पंचायत बीबियापारा में इस सेंटर की शुरुआत की है। 2. इस बायो रिसर्च सेंटर की शुरुआत में संजू देवी को किस संगठन से सहयोग मिला? उन्हें इस पहल को शुरू करने और आगे बढ़ाने में TCL संस्था के FC सर का महत्वपूर्ण मार्गदर्शन और सहयोग प्राप्त हुआ। 3. इस महिला समूह द्वारा निर्मित 'मृदा शक्ति' उत्पाद का उपयोग कैसे किया जाता है? 1 किलोग्राम मृदा शक्ति को 15 किलोग्राम खाद में मिलाकर छांव में सुखाया जाता है, और फिर इसे खेतों में डाला जाता है जिससे मिट्टी की नमी बनी रहती है। 4. इस समूह का प्रशासनिक और वित्तीय काम कैसे संभाला जाता है? समूह के सुचारू संचालन के लिए तीन मुख्य पद (अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष) बनाए गए हैं, जो बैंक लेन-देन, वित्तीय प्रबंधन और रजिस्टरों के रखरखाव का काम संभालती हैं। 5. इस सेंटर में कौन से तीन मुख्य जैविक उत्पाद तैयार किए जाते हैं? यहाँ मुख्य रूप से तीन जैविक उत्पाद तैयार किए जाते हैं: पौध पोषक (पौधों के विकास के लिए), फसल रक्षक (कीटों से सुरक्षा के लिए), और मृदा शक्ति (मिट्टी की नमी बनाए रखने के लिए)। प्रेरणा और सबक संजू देवी की यह प्रेरक यात्रा हमें सिखाती है कि विपरीत सामाजिक परिस्थितियों के बावजूद आत्मनिर्भरता कैसे हासिल की जा सकती है। • दृढ़ संकल्प: सामाजिक आलोचनाओं और नकारात्मक टिप्पणियों को अपनी कमजोरी बनाने के बजाय उन्हें अपनी ताकत में तब्दील करें। दृढ़ विश्वास के साथ आगे बढ़ने पर अंततः समाज भी आपकी सफलता का सम्मान करता है। • संगठित टीमवर्क: किसी भी बड़े काम को अकेले करने के बजाय समान विचारधारा वाले लोगों का एक समूह बनाकर जिम्मेदारियां बांटना सफलता की कुंजी है। नेतृत्व की स्पष्टता काम को आसान और व्यवस्थित बनाती है। • पर्यावरण-अनुकूल नवाचार: पारंपरिक तरीकों से हटकर पर्यावरण के अनुकूल नए विकल्पों को अपनाना और उनका व्यवसाय करना दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित करता है। जैविक उत्पादों का निर्माण पर्यावरण और आजीविका दोनों के लिए वरदान है। https://trendkia.com/success-stories/bahraich-ki-mahilaon-ne-tanon-ko-banaya-takata-sanju-devi-ke-bayo-risarcha-sentara-se-badalin-gramina-jindagiyan-38818 TrendKia — Har trend, sabse pehle.