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  "type": "article",
  "title": "बहराइच की संगीता मौर्य ने पेश की मिसाल, यूट्यूब और दादी-नानी के नुस्खों से ऊन के खिलौने बनाकर कमा रहीं बंपर मुनाफा",
  "summary": "बहराइच के गौरिया गांव की संगीता मौर्य ने यूट्यूब और पारंपरिक तकनीकों की मदद से ऊन के आकर्षक हस्तशिल्प उत्पाद बनाने का व्यवसाय शुरू किया है, जिसमें उन्हें 50% तक का मुनाफा मिल रहा है।",
  "content": "बहराइच जिले के हुजूरपुर क्षेत्र के गौरिया गांव की रहने वाली संगीता मौर्य आज अपने हुनर के दम पर आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। संगीता ऊन की मदद से तरह-तरह के आकर्षक हस्तशिल्प उत्पाद तैयार कर रही हैं, जिनकी बाजार में काफी मांग है। उनके द्वारा बनाए गए खूबसूरत कछुए, प्यारी मधुमक्खियां और रंग-बिरंगे गुलदस्ते लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं। ये हस्तनिर्मित उत्पाद न केवल देखने में बेहद सुंदर लगते हैं, बल्कि घरों की सजावट में भी चार चांद लगा देते हैं। संगीता की यह पहल ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है।\n\nस्वयं सहायता समूह से शुरू हुआ सफर\nसंगीता मौर्य का यह सफर इतना आसान नहीं था। उन्होंने बताया कि जब वह शुरुआत में महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ी थीं, तब उन्हें काम के बारे में ज्यादा समझ नहीं थी। शुरुआती दो साल तक वह समूह की गतिविधियों को समझने का प्रयास करती रहीं। धीरे-धीरे जब उन्हें सारी व्यवस्था समझ में आ गई, तो उन्हें समूह की बुक्कीपर (लेखा-जोखा रखने वाली) की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके बाद वह समूह सखी बनीं और आज वह न केवल खुद आर्थिक रूप से स्वतंत्र हैं, बल्कि अपने साथ-साथ अन्य ग्रामीण महिलाओं को भी आगे बढ़ाने और उन्हें सशक्त बनाने का काम कर रही हैं।\n\nयूट्यूब और पारंपरिक कला का अनोखा संगम\nसमूह से जुड़ने के बाद संगीता के मन में अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने का विचार आया। उन्होंने कुछ अलग करने की ठानी और इसके लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया। उन्होंने यूट्यूब पर ऊन से खिलौने और सजावटी सामान बनाने के वीडियो देखना शुरू किया। इसके साथ ही उन्होंने अपनी मां और दादी द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले पारंपरिक बुनाई के तरीकों को भी इसमें शामिल किया। इस तरह आधुनिक और पारंपरिक कला के मेल से उन्होंने अद्भुत उत्पाद बनाने शुरू कर दिए। आज वह ऊन के सुंदर खिलौने, गुलदस्ते और सजावटी सामान बहुत ही कम समय में तैयार कर लेती हैं।\n\nलागत से दोगुना मुनाफा और ऑनलाइन बिक्री\nसंगीता मौर्य ने अपने इन उत्पादों की बिक्री के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों का सहारा लिया है। उनके उत्पादों को ऑनलाइन भी खरीदा जा सकता है। इसके अलावा, यदि कोई ग्राहक व्यक्तिगत रूप से इन सामानों को खरीदना चाहता है, तो वह बहराइच जिले के हुजूरपुर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले गौरिया गांव में जाकर सीधे संगीता से संपर्क कर सकता है। इस व्यवसाय में मुनाफे की बात करें तो संगीता ने बताया कि इसमें लगभग 50 प्रतिशत तक का शानदार मार्जिन मिलता है। उदाहरण के लिए, जो सामान ₹50 की लागत में बनकर तैयार होता है, वह बाजार में ₹100 में बेहद आसानी से बिक जाता है।\n\nहाथों की कारीगरी और मेहनत की कीमत\nइन मनमोहक उत्पादों को तैयार करने में महिलाओं को कई घंटों की कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। संगीता ने बताया कि इन सामानों को बनाने के लिए किसी भी तरह की मशीन का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। महिलाएं अपने हाथों से सूई और धागे की मदद से इनकी बुनाई करती हैं। अलग-अलग डिजाइन और आकार के हिसाब से हर उत्पाद को बनाने में अलग-अलग समय लगता है। इन सामानों की कीमत का निर्धारण भी इसी आधार पर किया जाता है। इसमें लगने वाली सामग्री की लागत और बनाने में लगे समय (मेहनताना) को जोड़कर ही अंतिम मूल्य तय किया जाता है, जिससे महिलाओं को उनकी मेहनत का सही दाम मिल सके।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: ग्रामीण महिलाओं के लिए यह कहानी एक बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे इंटरनेट और स्थानीय स्वयं सहायता समूहों का उपयोग करके वे घर बैठे अपना खुद का सफल लघु उद्योग शुरू कर सकती हैं।\n• बहराइच में: स्थानीय निवासी सीधे हुजूरपुर ब्लॉक के गौरिया गांव जाकर बिना किसी बिचौलिए के किफायती दामों पर पूरी तरह से हस्तनिर्मित और पर्यावरण-अनुकूल सजावटी सामान खरीद सकते हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. संगीता मौर्य कौन हैं और वह कहां की रहने वाली हैं?\nसंगीता मौर्य बहराइच जिले के हुजूरपुर क्षेत्र के गौरिया गांव की रहने वाली एक हस्तशिल्प उद्यमी और स्वयं सहायता समूह सखी हैं।\n\n2. संगीता मौर्य किस प्रकार के उत्पाद बनाती हैं?\nसंगीता मौर्य ऊन की मदद से तरह-तरह के सुंदर सजावटी खिलौने और उत्पाद बनाती हैं, जिनमें ऊनी कछुआ, हनी मधुमक्खी और गुलदस्ते शामिल हैं।\n\n3. संगीता ने ऊन के उत्पाद बनाने का हुनर कहां से सीखा?\nसंगीता ने यूट्यूब पर वीडियो देखकर और अपनी मां व दादी के पारंपरिक बुनाई के पुराने तरीकों को मिलाकर यह कला सीखी है।\n\n4. इस ऊन हस्तशिल्प व्यवसाय में मुनाफा कितना है?\nइस व्यवसाय में 50% तक का शानदार मुनाफा है। उदाहरण के लिए, जो सामान ₹50 की लागत में तैयार होता है, वह आसानी से ₹100 में बिक जाता है।\n\n5. इन ऊनी उत्पादों को खरीदने के क्या विकल्प हैं?\nइन उत्पादों को ऑनलाइन खरीदा जा सकता है। ऑफलाइन खरीदारी के लिए ग्राहक सीधे बहराइच जिले के हुजूरपुर ब्लॉक के गौरिया गांव जा सकते हैं।\n\nप्रेरणा और सबक\n• सीखने के लिए इंटरनेट का उपयोग: यूट्यूब जैसे मुफ्त डिजिटल प्लेटफॉर्म आज के समय में नए हुनर सीखने के सबसे बड़े और किफायती साधन हैं।\n• परंपरा और आधुनिकता का मेल: अपनी जड़ों की पारंपरिक कला (दादी-नानी की बुनाई शैली) को आधुनिक इंटरनेट डिज़ाइनों के साथ मिलाकर कुछ अनोखा और मांग वाला उत्पाद बनाएं।\n• धैर्य और कदम-दर-कदम प्रगति: संगीता ने जल्दबाजी करने के बजाय पहले दो साल तक स्वयं सहायता समूह में रहकर पूरी प्रक्रिया सीखी, बुक्कीपर बनीं और फिर व्यवसाय शुरू किया।\n• उच्च लाभ मार्जिन पर ध्यान दें: हस्तशिल्प और कलात्मक उत्पादों में लागत कम और कला का मूल्य अधिक होता है, जिससे 50% तक का बेहतरीन मुनाफा हासिल किया जा सकता है।",
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  "category": "सक्सेस स्टोरी",
  "publishedAt": "2026-07-08",
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