# बहराइच में बाढ़ से बर्बाद हुई खेती तो दंपत्ति ने खोला फास्ट फूड स्टॉल, अब बच्चों के अच्छे स्कूल में दाखिले की तैयारी

> गांव में लगातार आने वाली बाढ़ और तंगी से परेशान होकर बहराइच के रमाशंकर और उनकी पत्नी चांदनी ने शहर में फास्ट फूड स्टॉल शुरू किया, जिसकी आमदनी से अब परिवार संवर रहा है।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-10-15 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/bahraich-men-barha-se-barbada-hui-kheti-to-dnpatti-ne-khola-phasta-phuda-stola-aba-bachchon-ke-achchhe-skula-men-dakhile-ki-taiyar-47745 · **Language:** Hindi
**Tags:** बहराइच, रमाशंकर, चांदनी, फास्ट फूड स्टॉल, सफलता की कहानी, आत्मनिर्भर भारत, महिला सशक्तिकरण

गांव में हर साल आने वाले सैलाब ने जब आजीविका का एकमात्र सहारा छीन लिया, तब बहराइच के एक ग्रामीण परिवार ने परिस्थितियों के सामने सिर झुकाने से साफ इनकार कर दिया। खेती बर्बाद होने और तंगहाली के बावजूद रमाशंकर और उनकी जीवनसंगिनी चांदनी ने अपने हौसले के दम पर जिंदगी की नई शुरुआत की है। गांव की बेबसी को पीछे छोड़ यह दंपत्ति बहराइच शहर पहुंचा और अपनी रसोई की कला को ही आजीविका का जरिया बना लिया। आज दोनों मिलकर शहर में एक लोकप्रिय फास्ट फूड स्टॉल चला रहे हैं, जहां हर रोज ग्राहकों की कतारें लगती हैं।

## फसलों पर कुदरत की मार और बढ़ती जिम्मेदारियां
रमाशंकर पहले अपने गांव में ही रहकर पारंपरिक खेती-किसानी करते थे। परिवार का गुजारा उसी जमीन से होता था, लेकिन हर साल आने वाला बाढ़ का पानी उनकी लहलहाती फसलों को बहा ले जाता था। महीनों की खून-पसीने की मेहनत चंद दिनों में जलमग्न हो जाती थी और हाथ में केवल कर्ज और मायूसी बचती थी। शादी के बाद जैसे-जैसे परिवार का दायरा बढ़ा और बच्चों की शिक्षा-दीक्षा की जरूरतें सामने आईं, वैसे-वैसे आर्थिक संकट गहराने लगा। खेती के भरोसे बच्चों का पालन-पोषण करना और उन्हें बुनियादी सुविधाएं दिलाना नामुमकिन सा लगने लगा था।

## गांव की बेबसी छोड़ शहर में नया रास्ता तलाशने की पहल
संकट के उस दौर में पत्नी चांदनी ने आगे बढ़कर परिवार को संभाला। गांव में बैठकर किस्मत या बाढ़ को कोसते रहने के बजाय उन्होंने शहर का रुख करने और खुद का कारोबार खड़ा करने की ठोस सलाह दी। चांदनी का स्पष्ट मानना था कि खाली हाथ बैठने से हालात नहीं बदलेंगे, बल्कि मेहनत करके ही संतानों को बेहतर कल दिया जा सकता है। पत्नी के इस भरोसे और मजबूत इरादे ने रमाशंकर को भी नया साहस दिया और दोनों ने अपनी ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर शहर में उद्यम शुरू करने का फैसला कर लिया।

## मेडिकल कॉलेज के पास जमाया जायके का ठिकाना
बहराइच शहर पहुंचकर इस दंपत्ति ने शर्मा होटल के सामने और मेडिकल कॉलेज के निकट अपने छोटे से फास्ट फूड स्टॉल की नींव रखी। दोनों ने मिलकर काम का बंटवारा किया और स्टॉल पर विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन परोसना शुरू किया। इनके मेन्यू में खास तंदूरी चाय, मुंबईया वड़ा पाव, गरमा-गरम मैगी, मोमोज, पारंपरिक फरा और बन-मक्खन शामिल हैं। भोजन की शुद्धता, साफ-सफाई और लजीज स्वाद के चलते बहुत कम समय में यह ठिकाना आसपास के लोगों और छात्रों की पहली पसंद बन गया। आज दोनों कंधे से कंधा मिलाकर सुबह से शाम तक स्टॉल संभालते हैं और ग्राहकों की भारी भीड़ उनके स्वाद की गवाही देती है।

## महिला सशक्तिकरण का संदेश और बेहतर भविष्य की उम्मीद
घर की चौखट लांघकर कारोबार संभालने वाली चांदनी आज क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन चुकी हैं। उनका कहना है कि कठिनाइयों से घिरी महिलाओं को कभी नाउम्मीद नहीं होना चाहिए, क्योंकि जब कोई पूरे मन से परिश्रम करने आगे आता है तो रास्ते अपने आप खुलते चले जाते हैं। वर्तमान में स्टॉल से होने वाली दैनिक कमाई से घर का सारा खर्च आराम से चल रहा है। आर्थिक स्थिरता आने के बाद अब यह दंपत्ति अपने बच्चों का दाखिला किसी प्रतिष्ठित और अच्छे स्कूल में कराने की पूरी तैयारी कर रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ी को तंगी का सामना न करना पड़े।

## इसका आप पर असर
यह कहानी दर्शाती है कि प्राकृतिक आपदा या आजीविका छिनने पर छोटे शहर में खानपान का स्थानीय व्यवसाय शुरू कर आत्मनिर्भर बना जा सकता है।

- **भारत में:** प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित ग्रामीण परिवारों के लिए स्थानीय स्ट्रीट फूड और हस्तनिर्मित व्यंजन स्वरोजगार का एक बेहद व्यावहारिक और कम लागत वाला विकल्प बन सकते हैं। इससे सरकारी सहायता की प्रतीक्षा किए बिना तत्काल आजीविका और दैनिक नकदी प्रवाह सुनिश्चित किया जा सकता है।
- **बहराइच में:** मेडिकल कॉलेज और प्रमुख होटलों के आसपास साफ-सुथरे और किफायती खानपान विकल्पों की बढ़ती मांग स्थानीय युवाओं और परिवारों को नए रोजगार अवसर प्रदान कर रही है। इससे शहर में पढ़ने वाले छात्रों और मरीजों के परिजनों को गुणवत्तापूर्ण नाश्ता आसानी से उपलब्ध हो रहा है।
- **महिला स्वरोजगार:** घरेलू महिलाओं का व्यावसायिक गतिविधियों में सीधे भागीदार बनना पारिवारिक आय को दोगुना करने के साथ-साथ उनके सामाजिक आत्मविश्वास को मजबूत करता है। संकट के समय महिलाएं आगे आकर परिवार को आर्थिक तंगी से बाहर निकालने में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं।
- **शिक्षा की निरंतरता:** नियमित दैनिक आय से ग्रामीण पृष्ठभूमि के अभिभावक अपने बच्चों को अच्छे अंग्रेजी माध्यम या निजी स्कूलों में पढ़ाने का खर्च उठाने में सक्षम हो रहे हैं। इससे आने वाली पीढ़ी को मौसम और बाढ़ की मार पर निर्भर रहने से बचाया जा सकेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
लगातार प्राकृतिक आपदाओं के कारण खेती से होने वाली आय समाप्त हो जाने और परिवार के बढ़ते शैक्षिक खर्चों ने इस दंपत्ति को शहर जाकर फास्ट फूड स्टॉल शुरू करने के लिए प्रेरित किया।

- **बाढ़ से बार-बार फसल का विनाश:** गांव में हर वर्ष आने वाली भीषण बाढ़ रमाशंकर की मेहनत और बोई गई फसलों को पूरी तरह बहा ले जाती थी। कृषि में निरंतर हो रहे भारी नुकसान के चलते खेती से परिवार का पेट भरना असंभव हो चुका था।
- **संतानों की शिक्षा और आर्थिक संकट:** विवाह के बाद जब परिवार बढ़ा और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई की उम्र आई, तो आर्थिक तंगी उनके सामने बड़ी चुनौती बन गई। बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने की चिंता ने दंपत्ति को नए वित्तीय साधन तलाशने पर मजबूर कर दिया।
- **पत्नी की सकारात्मक और व्यावहारिक पहल:** गांव में बैठकर हालात को कोसते रहने के बजाय चांदनी ने शहर में अपना स्वयं का काम शुरू करने का ठोस प्रस्ताव रखा। उनकी इस दृढ़ इच्छाशक्ति और सक्रिय सहयोग ने रमाशंकर को शहर आकर उद्यम स्थापित करने का बल दिया।
- **उपयुक्त स्थान और मांग का चयन:** दंपत्ति ने बहराइच शहर के मेडिकल कॉलेज और शर्मा होटल के निकट स्टॉल खोला, जहां राहगीरों, छात्रों और अस्पताल आने वाले लोगों का निरंतर आवागमन रहता है। विविधतापूर्ण मेन्यू और स्वाद के कारण उनका यह उद्यम तेजी से सफल हो गया।

## सवाल-जवाब

### 1. रमाशंकर और चांदनी कहां के रहने वाले हैं?
यह दंपत्ति उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले का रहने वाला है।

### 2. उन्हें गांव छोड़कर शहर में स्टॉल क्यों शुरू करना पड़ा?
गांव में हर साल आने वाली बाढ़ से उनकी फसलें बर्बाद हो जाती थीं और आर्थिक तंगी के कारण बच्चों की पढ़ाई की चिंता बढ़ रही थी।

### 3. शहर जाकर कारोबार करने की सलाह किसने दी थी?
रमाशंकर की पत्नी चांदनी ने गांव में बैठकर हालात को कोसने के बजाय शहर जाकर मेहनत करने और अपना काम शुरू करने का सुझाव दिया था।

### 4. बहराइच शहर में उनका फास्ट फूड स्टॉल कहां स्थित है?
उनका स्टॉल बहराइच शहर में शर्मा होटल के सामने और मेडिकल कॉलेज के बगल में स्थित है।

### 5. उनके फास्ट फूड स्टॉल पर कौन-कौन से व्यंजन मिलते हैं?
उनके स्टॉल पर तंदूरी चाय, वड़ा पाव, स्वादिष्ट मैगी, मोमोज, फरा और बन-मक्खन जैसी चीजें तैयार की जाती हैं।

### 6. स्टॉल से होने वाली कमाई का उपयोग परिवार किस काम के लिए कर रहा है?
स्टॉल की कमाई से घर का दैनिक खर्च आसानी से चल रहा है और दंपत्ति अपने बच्चों का अच्छे स्कूल में दाखिला कराने की तैयारी कर रहे हैं।

## प्रेरणा और सबक
आपदा और निर्धनता के सामने हार मानने के बजाय संकल्प और साझा उद्यम से रमाशंकर और चांदनी ने अपनी तकदीर खुद गढ़ी है।

- **परिस्थितियों को कोसने के बजाय पहल करें:** जब जीवन में कोई संकट आए, तो भाग्य या मुश्किलों पर रोने के बजाय अपनी क्षमता पहचानकर बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाना ही सफलता का पहला नियम है।
- **पारिवारिक साझेदारी में असीम ताकत:** पति-पत्नी जब एक-दूसरे का संबल बनकर कंधे से कंधा मिलाकर काम करते हैं, तो कोई भी आर्थिक या सामाजिक बाधा बड़ी नहीं रह जाती।
- **सम्मानजनक श्रम से ही प्रगति संभव:** काम चाहे छोटा हो या बड़ा, उसे पूरी लगन, स्वाद और गुणवत्ता के साथ किया जाए तो वह किसी भी बड़े व्यवसाय की तरह समाज में प्रतिष्ठा और आजीविका दिलाता है।
- **महिलाओं का साहस बदलता है परिवार का भाग्य:** चांदनी की तरह जब महिलाएं आगे आकर संकट में नेतृत्व संभालती हैं, तो वे न केवल परिवार को संकट से निकालती हैं बल्कि पूरे समाज को दिशा देती हैं।

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