# बहराइच में छह मोटे अनाजों और देसी घी से तैयार हो रहे खास मिलेट्स लड्डू, सेहत के शौकीनों में जबरदस्त मांग

> बहराइच के कृषि भवन स्थित मिलेट्स गैलरी में बिना चीनी के ज्वार, बाजरा, रागी, कोदो, चीना और कुट्टू से पौष्टिक लड्डू बनाए जा रहे हैं। शुद्ध देसी घी, गुड़ और मेवों से बने इन लड्डुओं की मांग लखनऊ और बाराबंकी तक पहुंच चुकी है।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-10-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/bahraich-men-chhaha-mote-anajon-aura-desi-ghi-se-taiyara-ho-rahe-khasa-millets-laddu-sehata-ke-shaukinon-men-jabaradasta-manga-41024 · **Language:** Hindi
**Tags:** मोटे अनाज, मिलेट्स लड्डू, बहराइच, देसी घी, शिवांग जायसवाल, कृषि भवन, स्वास्थ्य, गुड़

बाजार में बिकने वाली पारंपरिक मिठाइयों के बीच सेहत को प्राथमिकता देने वाले खरीदारों के लिए शुद्ध और पौष्टिक विकल्प तलाशना हमेशा से एक चुनौती रहा है। इसी मांग को समझते हुए बहराइच के कृषि भवन स्थित मिलेट्स गैलरी में मोटे अनाज और सूखे मेवों के मेल से बने खास लड्डू तैयार किए जा रहे हैं। पूरी तरह से शक्कर-मुक्त और शुद्ध देसी घी में बने यह लड्डू स्वाद में उम्दा होने के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिहाज से भी पूरी तरह सुरक्षित और फायदेमंद साबित हो रहे हैं।

## बिना शक्कर के छह मोटे अनाजों और मेवों का खास मेल
मिलेट्स गैलरी का संचालन कर रहे शिवांग जायसवाल ने बताया कि इन खास लड्डुओं में शक्कर का एक प्रतिशत भी इस्तेमाल नहीं किया जाता है। मिठास और पोषण के लिए इन्हें पूरी तरह से शुद्ध देसी घी और प्राकृतिक गुड़ के मिश्रण से तैयार किया जाता है। इसके निर्माण में छह प्रकार के पौष्टिक मोटे अनाजों का उपयोग प्रमुखता से होता है, जिनमें ज्वार, बाजरा, रागी, कोदो, चीना और कुट्टू शामिल हैं। इसके साथ ही मिश्रण में विभिन्न प्रकार के मेवों को भी प्रचुर मात्रा में मिलाया जाता है, जिससे इसका पोषण स्तर काफी बढ़ जाता है।

## धीमी आंच पर पकने की पारंपरिक और अनूठी विधि
शिवांग जायसवाल के अनुसार, इन लड्डुओं को तैयार करने की पूरी विधि बाजार की आम मिठाइयों से काफी अलग और समय लेने वाली है। निर्माण प्रक्रिया के दौरान सबसे पहले सभी मोटे अनाजों के आटे और सूखे मेवों को शुद्ध देसी घी में धीमी आंच पर अच्छी तरह भुना जाता है। भूनने का काम पूरा होने के बाद इसमें पिघला हुआ गुड़ मिलाया जाता है और इस पूरे मिश्रण को करीब 1 से 1.5 घंटे तक लगातार पकाया जाता है। जब पूरा मिश्रण एकसार होकर तैयार हो जाता है, तब इसे आंच से नीचे उतारकर कुशल कारीगरों द्वारा गोल लड्डू बांधे जाते हैं।

## ₹600 प्रति किलो कीमत और लखनऊ तक पहुंची मांग
गुणवत्ता और पौष्टिकता से भरपूर इन लड्डुओं की बिक्री दर ₹600 प्रति किलोग्राम तय की गई है। प्राकृतिक स्वाद और शुद्धता के चलते कम समय में ही इनकी लोकप्रियता बहुत तेजी से बढ़ी है। अब बहराइच के स्थानीय निवासियों के अलावा लखनऊ और बाराबंकी जैसे पड़ोसी जनपदों से भी लोग विशेष रूप से इन लड्डुओं की खरीदारी करने के लिए पहुंच रहे हैं। यहां तक कि जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, जिनमें डीएम और सीडीओ भी शामिल हैं, अपनी दैनिक और पारिवारिक जरूरतों के लिए इन लड्डुओं को नियमित रूप से मंगवाते हैं।

## मिलावट से दूर और स्वास्थ्य के लिए सहज विकल्प
मिलेट्स गैलरी से इन लड्डुओं को खरीदने पहुंचे ग्राहक अरविंद कुमार ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह उत्पाद बाजार में बिकने वाली मिलावटी और रसायन युक्त मिठाइयों का एक बेहद सुरक्षित विकल्प है। उन्होंने बताया कि यह लड्डू बाजरा और रागी जैसे पारंपरिक अनाजों से सीधे किसानों के जरिए मिलने वाली सामग्री से तैयार किए जा रहे हैं। इसमें किसी भी प्रकार के रसायन अथवा कीटनाशक का कोई अंश मौजूद नहीं होता, जिसके कारण यह पाचन क्रिया के लिए बेहद आसान और शरीर के लिए अत्यंत गुणकारी साबित होते हैं। रसायन-मुक्त और शुद्ध सामग्री से तैयार इन लड्डुओं को इच्छुक ग्राहक कृषि भवन स्थित मिलेट्स गैलरी से सीधे प्राप्त कर सकते हैं।

## इसका आप पर असर
यह पहल पारंपरिक मिठाइयों के स्थान पर बिना चीनी और बिना रसायन वाले शुद्ध आहार का सुरक्षित विकल्प उपलब्ध कराती है।

- **उत्तर प्रदेश में:** लखनऊ, बाराबंकी और बहराइच के उपभोक्ताओं को स्थानीय स्तर पर तैयार पौष्टिक और मिलावट-रहित मिलेट्स उत्पाद सीधे मिल रहे हैं। इससे क्षेत्रीय स्तर पर मोटे अनाज उगाने वाले किसानों को भी अपनी उपज की सीधी खपत का लाभ मिल रहा है।
- **भारत में:** खानपान में ज्वार, बाजरा और रागी जैसे पारंपरिक अनाजों को शामिल करने से जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से बचाव में मदद मिलती है। बाजार में ₹600 प्रति किलो की दर पर ऐसे स्वस्थ विकल्प मिलने से लोग मिलावटी चीनी वाली मिठाइयों से दूरी बना सकते हैं।
- **दैनिक खानपान पर असर:** चीनी के स्थान पर गुड़ और देसी घी से बने उत्पाद पचने में हल्के और ऊर्जा देने वाले होते हैं। रोजमर्रा के मीठे की तलब को बिना वजन या शुगर बढ़ने की चिंता के पूरा किया जा सकता है।
- **खरीदारी की सुविधा:** इच्छुक ग्राहक बहराइच के कृषि भवन स्थित मिलेट्स गैलरी काउंटर पर जाकर सीधे यह उत्पाद खरीद सकते हैं। इस प्रकार की पहल अन्य शहरों में भी मोटे अनाज के खुदरा केंद्रों को बढ़ावा दे सकती है।

## ऐसा क्यों हुआ
त्योहारी व सामान्य दिनों में बाजार में मिलने वाली मिठाइयों में बढ़ती मिलावट और अत्यधिक रिफाइंड चीनी के कारण स्वास्थ्य के प्रति सचेत लोग प्राकृतिक और पौष्टिक विकल्पों की मांग कर रहे थे। इसी आवश्यकता की पूर्ति के लिए कृषि भवन के सहयोग से मोटे अनाजों को आधुनिक खानपान से जोड़ने की यह पहल शुरू की गई।

- **मिलावटी मिठाइयों का बढ़ता संकट:** पारंपरिक मिठाई बाजार में कृत्रिम रंगों, रसायनों और अत्यधिक शक्कर के इस्तेमाल ने लोगों में शुद्धता को लेकर संशय पैदा किया था। इसके समाधान के रूप में किसानों से सीधे खरीदे गए बिना कीटनाशक वाले अनाजों से यह उत्पाद तैयार किया गया।
- **मिलेट्स को बढ़ावा देने की योजना:** केंद्र व राज्य स्तर पर मोटे अनाजों को दैनिक आहार का हिस्सा बनाने के प्रयासों के तहत कृषि भवन परिसरों में मिलेट्स गैलरी स्थापित की गई हैं। इसी मंच का उपयोग करके स्थानीय उद्यमियों ने पौष्टिक उत्पाद बनाने की शुरुआत की।
- **स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता:** आम लोगों के साथ-साथ प्रशासनिक अधिकारियों में भी डायबिटीज और मोटापे से बचाव के लिए चीनी-मुक्त खाद्य पदार्थों की मांग तेजी से बढ़ी है। गुड़ और शुद्ध घी से बनी पारंपरिक पाक कला ने इस आवश्यकता को व्यावसायिक रूप से व्यावहारिक बनाया।

## सवाल-जवाब

### 1. बहराइच के इस विशेष लड्डू में कौन-से छह मोटे अनाज मिलाए जाते हैं?
इस लड्डू को बनाने में ज्वार, बाजरा, रागी, कोदो, चीना और कुट्टू के आटे का इस्तेमाल किया जाता है।

### 2. क्या इन लड्डुओं में चीनी का इस्तेमाल किया जाता है?
नहीं, इनमें एक प्रतिशत भी चीनी का प्रयोग नहीं होता; इन्हें केवल शुद्ध देसी घी, गुड़ और मेवों से बनाया जाता है।

### 3. इन मिलेट्स लड्डुओं की कीमत क्या रखी गई है?
इन पौष्टिक मिलेट्स लड्डुओं की बिक्री दर ₹600 प्रति किलोग्राम निर्धारित की गई है।

### 4. यह लड्डू कहां से खरीदे जा सकते हैं?
इन्हें बहराइच में कृषि भवन परिसर के अंदर स्थित मिलेट्स गैलरी से सीधे खरीदा जा सकता है।

### 5. इन लड्डुओं को पकाने में कितना समय लगता है?
अनाज और मेवों को धीमी आंच पर भूनने के बाद पिघला हुआ गुड़ मिलाकर इस मिश्रण को लगभग 1 से 1.5 घंटे तक पकाया जाता है।

## प्रेरणा और सबक
शिवांग जायसवाल ने पारंपरिक मोटे अनाजों को मूल्यवर्धित उत्पाद में बदलकर यह साबित किया कि पारंपरिक भारतीय खानपान को आधुनिक व्यापार का सफल मॉडल बनाया जा सकता है।

- **समस्या में अवसर पहचानना:** बाजार में मिलावटी मिठाइयों की भरमार के बीच शिवांग ने शुद्ध और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प की कमी को भांपकर नया उद्यम खड़ा किया।
- **पारंपरिक ज्ञान का सम्मान:** छह प्राचीन मोटे अनाजों और धीमी आंच पर पकाने की पारंपरिक भारतीय विधि को अपनाकर उन्होंने बिना किसी केमिकल के उच्च गुणवत्ता हासिल की।
- **गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं:** शक्कर को पूरी तरह बाहर रखकर और केवल शुद्ध देसी घी व गुड़ का उपयोग करके उन्होंने ग्राहकों और प्रशासनिक अधिकारियों का पक्का भरोसा जीता।
- **किसानों के साथ सीधा जुड़ाव:** सामग्री को सीधे किसानों से जोड़कर न केवल उत्पाद को रसायन-मुक्त रखा, बल्कि स्थानीय कृषि अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दी।

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