# बालोद में मानसून आते ही बढ़ा गर्मागर्म मुंगेड़ी का क्रेज, कभी 5 हजार से शुरू हुआ यह सफर आज बना कमाऊ व्यवसाय

> छत्तीसगढ़ के बालोद में दीपक यादव का यादव मुंगेड़ी सेंटर बारिश के मौसम में लोगों की पहली पसंद बन गया है, जहां महज 30 रुपये प्लेट में मिलने वाले गर्मागर्म नाश्ते की भारी मांग है।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-07-11 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/balod-men-manasuna-ate-hi-barha-garmagarma-mungeri-ka-kreja-kabhi-5-hajara-se-shuru-hua-yaha-saphara-aja-bana-kamau-vyavasaya-6822 · **Language:** Hindi
**Tags:** बालोद, दीपक यादव, स्ट्रीट फूड, छत्तीसगढ़, सफलता की कहानी, मुंगेड़ी रेसिपी

छत्तीसगढ़ राज्य के बालोद जिले में जैसे ही मानसून की बारिश का आगमन होता है, स्थानीय बाजारों और सड़कों पर गरमा-गरम और स्वादिष्ट नाश्ते की खुशबू बिखरने लगती है। इस सुहावने और ठंडे मौसम में लोगों की पहली पसंद कुछ चटपटा खाने की होती है। ऐसे समय में बालोद शहर के प्रसिद्ध जयस्तंभ चौक के पास संचालित होने वाला यादव मुंगेड़ी सेंटर भोजन प्रेमियों के लिए एक मुख्य आकर्षण केंद्र बन गया है। इस दुकान पर मिलने वाली अत्यंत कुरकुरी मुंगेड़ी, ब्रेड पकौड़ा, आलूगुंडा और तीखी मिर्ची भजिया का अनोखा स्वाद हर किसी के दिल को जीत रहा है। सबसे विशेष बात यह है कि यहां उपलब्ध होने वाला हर एक स्वादिष्ट नाश्ता केवल 30 रुपये प्रति प्लेट की दर पर मिलता है। इसी वजह से सुबह की शुरुआत से लेकर देर शाम तक ग्राहकों की भारी भीड़ इस दुकान पर उमड़ी रहती है।

## बालोद के स्थानीय स्वाद की अनोखी पहचान
बालोद के ही पाररास क्षेत्र के निवासी दीपक यादव पिछले कई वर्षों से इस प्रसिद्ध जयस्तंभ चौक के समीप अपने नाश्ते की दुकान का संचालन कर रहे हैं। वे हर रोज सुबह से ही ग्राहकों के लिए ब्रेड पकौड़ा, स्वादिष्ट आलूगुंडा, कुरकुरी मुंगेड़ी और तीखी मिर्ची भजिया तैयार करने में जुट जाते हैं। यहां परोसे जाने वाले सभी व्यंजन बिल्कुल ताजे और गर्म तेल से सीधे निकालकर परोसे जाते हैं। वैसे तो उनके मेन्यू में शामिल सभी व्यंजन काफी ज्यादा लोकप्रिय हैं, लेकिन सामान्य दिनों की तुलना में बरसात के मौसम के आते ही यहां की विशेष मुंगेड़ी की मांग काफी ज्यादा बढ़ जाती है। सामान्य मौसम के दौरान ब्रेड पकौड़े की बिक्री काफी अच्छी रहती है।

## दैनिक बिक्री और मौसम का जादुई असर
दुकान के संचालक दीपक यादव बताते हैं कि एक सामान्य दिन में उनके यहाँ ब्रेड पकौड़े की करीब 100 प्लेटें रोजाना आसानी से बिक जाती हैं। लेकिन जब आसमान में बादल घिर आते हैं और बारिश का सिलसिला शुरू होता है, तब उनकी खास मुंगेड़ी की मांग में अचानक भारी उछाल आता है। इस बरसाती मौसम में गरमा-गरम मुंगेड़ी की मांग इतनी बढ़ जाती है कि रोजाना लगभग 100 प्लेटें हाथों-हाथ बिक जाती हैं। अगर दुकान पर मिलने वाले सभी तरह के नाश्तों की कुल बिक्री का आकलन किया जाए, तो हर रोज 300 प्लेट से भी ज्यादा का कारोबार हो जाता है, जिससे उनकी अच्छी-खासी आमदनी होती है।

## स्वाद का सीक्रेट और बनाने की अनूठी विधि
दीपक यादव की मुंगेड़ी का बेहतरीन स्वाद आज पूरे बालोद जिले में अपनी एक अलग और खास पहचान रखता है। उनके इस व्यंजन के प्रसिद्ध होने के पीछे इसे तैयार करने का एक विशेष और पारंपरिक तरीका है। मुंगेड़ी के लिए तैयार किए जाने वाले दाल के मिश्रण में वे साधारण मसालों के बजाय प्याज, अजवाइन, सौंफ और असली हींग का संतुलित उपयोग करते हैं। इन खास मसालों के मिश्रण से मुंगेड़ी का स्वाद तो निखरता ही है, साथ ही इसकी खुशबू भी बेहद लाजवाब हो जाती है। इसके अलावा, वे मुंगेड़ी को तेज आंच पर तलने के बजाय हल्की और धीमी आंच पर तब तक पकाते हैं जब तक कि वह पूरी तरह सुनहरी और अंदर तक कुरकुरी न हो जाए। इसी अनूठी तकनीक के कारण एक बार जो भी इस दुकान का स्वाद चख लेता है, वह बार-बार यहाँ खिंचा चला आता है।

## गन्ने के रस से मुंगेड़ी तक का शानदार सफर
दीपक यादव ने इस लाभदायक व्यवसाय की शुरुआत वर्ष 2008 में की थी। इस व्यवसाय में आने से पहले वे अपनी आजीविका चलाने के लिए गन्ने का रस बेचने का काम किया करते थे। उसी दौर में उनके भाई, जो नांदगांव में पहले से ही मुंगेड़ी बेचने का काम करते थे, ने उन्हें मानसून के महीनों में मुंगेड़ी की दुकान लगाने का एक बेहद व्यावहारिक सुझाव दिया। दीपक को अपने भाई का यह सुझाव काफी पसंद आया। इसके बाद उन्होंने मात्र 5 हजार रुपये की एक बहुत छोटी सी प्रारंभिक पूंजी लगाकर इस कार्य की शुरुआत कर दी।

आज वही छोटा सा मौसमी प्रयोग दीपक यादव का सबसे प्रमुख और पक्का व्यवसाय बन चुका है। अपनी निरंतर गुणवत्ता, लाजवाब स्वाद और हर वर्ग की जेब के अनुकूल कीमतों के बल पर उनके इस नाश्ता सेंटर ने बालोद शहर में अपनी एक विशेष साख कायम कर ली है। खासकर बरसात के दिनों में गरमा-गरम मुंगेड़ी का आनंद लेने के लिए दूर-दराज के इलाकों से लोग यहां खींचे चले आते हैं, जिसके कारण हर साल मानसून के आगमन के साथ ही दीपक का यह कारोबार और अधिक गति पकड़ लेता है।

## इसका आप पर असर
- **स्थानीय स्तर पर (बालोद में):** निवासियों को मानसून के दौरान केवल 30 रुपये में ताजा और गुणवत्तापूर्ण नाश्ता मिल रहा है।
- **आर्थिक दृष्टिकोण से:** यह कहानी दर्शाती है कि न्यूनतम पूंजी (5,000 रुपये) के साथ भी एक टिकाऊ और लाभदायक स्थानीय व्यवसाय खड़ा किया जा सकता है।

## सवाल-जवाब

### 1. यादव मुंगेड़ी सेंटर कहां स्थित है?
यह प्रसिद्ध नाश्ता सेंटर छत्तीसगढ़ के बालोद शहर में जयस्तंभ चौक के पास स्थित है।

### 2. दीपक यादव ने अपने व्यवसाय की शुरुआत कब और कितने निवेश के साथ की थी?
दीपक यादव ने इस व्यवसाय की शुरुआत वर्ष 2008 में महज 5,000 रुपये की शुरुआती पूंजी के साथ की थी।

### 3. यादव मुंगेड़ी सेंटर के व्यंजनों की प्रति प्लेट कीमत कितनी है?
यहां मिलने वाले सभी गर्मागर्म नाश्ते (जैसे मुंगेड़ी, ब्रेड पकौड़ा, आलूगुंडा) मात्र 30 रुपये प्रति प्लेट की किफायती दर पर उपलब्ध हैं।

### 4. बारिश के मौसम में वहां किस विशेष व्यंजन की मांग सबसे अधिक रहती है?
बारिश के मौसम में दुकान पर विशेष रूप से तैयार की जाने वाली मुंगेड़ी की मांग सबसे ज्यादा होती है, जिसकी रोजाना करीब 100 प्लेटें बिक जाती हैं।

### 5. दीपक यादव की मुंगेड़ी के अनोखे स्वाद का रहस्य क्या है?
उनकी मुंगेड़ी के अनोखे स्वाद का कारण दाल के घोल में प्याज, अजवाइन, सौंफ और हींग का संतुलित मिश्रण है, जिसे धीमी आंच पर सुनहरा होने तक तला जाता है।

## प्रेरणा और सबक
- **छोटे स्तर से शुरुआत:** बड़े निवेश की प्रतीक्षा करने के बजाय, उपलब्ध सीमित संसाधनों (जैसे 5,000 रुपये) से काम शुरू करना बुद्धिमानी है।
- **मौसम और मांग की समझ:** व्यवसाय में सफलता के लिए सीजन के अनुसार अपनी रणनीति बदलना बेहद जरूरी है, जैसे गन्ने के रस के बाद मानसून में मुंगेड़ी बेचना।
- **गुणवत्ता और मूल्य में संतुलन:** कम कीमत (30 रुपये प्रति प्लेट) रखकर और स्वाद की उच्च गुणवत्ता बनाए रखकर ग्राहकों का भरोसा जीता जा सकता है।
- **पारिवारिक सलाह का महत्व:** अपने करीबी लोगों के व्यावहारिक सुझावों को सुनना और उन्हें सही समय पर लागू करना प्रगति का द्वार खोल सकता है।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._