बरेली के युवा ने गरीबी को दी मात, भाई के हादसे के बाद आठवें प्रयास में पास की NEET 2026 उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के अल्ताफ ने तमाम आर्थिक अड़चनों को पार करते हुए आठवें प्रयास में NEET 2026 परीक्षा में सफलता हासिल की है। सड़क किनारे आलू बेचकर फीस जुटाने वाले अल्ताफ ने 563 अंक प्राप्त किए हैं। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के नवाबगंज निवासी अल्ताफ ने तमाम आर्थिक तंगियों और कठिनाइयों को पीछे छोड़ते हुए डॉक्टर बनने का अपना सपना पूरा कर लिया है। वर्षों के कड़े संघर्ष और निरंतर प्रयास के बाद उन्होंने अपनी आठवीं कोशिश में NEET-2026 की परीक्षा में सफलता प्राप्त की है। सड़क किनारे आलू बेचकर परिवार का गुजर-बसर करने वाले घर से आने वाले अल्ताफ ने 563 अंक हासिल किए हैं। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 27910 और OBC कैटेगरी में 13437वीं रैंक अर्जित की है। एक समय ऐसा भी था जब उनके परिवार के पास उन्हें कोचिंग के लिए कोटा भेजने तक के पैसे नहीं थे, लेकिन अल्ताफ के अटूट संकल्प ने उन्हें इस ऐतिहासिक मुकाम तक पहुंचा दिया। दोस्तों के नोट्स से शुरुआत और फीस के लिए आलू की बिक्री शुरुआती दिनों में आर्थिक तंगी के कारण अल्ताफ के लिए मेडिकल कोचिंग के मशहूर शहर कोटा जाना संभव नहीं था। ऐसे में उन्होंने हिम्मत हारने के बजाय एक व्यावहारिक रास्ता चुना। उन्होंने कोटा से पढ़ाई करके लौटे अपने दोस्तों से स्टडी मैटेरियल और नोट्स उधार लिए और घर पर ही तैयारी शुरू कर दी। हालांकि, कुछ समय बाद उन्हें अहसास हुआ कि नीट जैसी कठिन परीक्षा को पास करने के लिए बेहतर गाइडेंस और संगठित कोचिंग बेहद जरूरी है। इसके बाद उन्होंने अपने पिता के साथ सड़क किनारे आलू की फड़ पर बैठकर काम करना शुरू किया। पिता और पुत्र की दिन-रात की मेहनत से जो पैसे जुड़े, उससे कोचिंग की फीस का इंतजाम हुआ और अल्ताफ कोटा पहुंच सके। 2019 से 2026 तक अंकों का उतार-चढ़ाव और लंबा संघर्ष डॉक्टर बनने की यह राह अल्ताफ के लिए आसान नहीं रही और उन्हें हर कदम पर परीक्षा देनी पड़ी। साल 2019 में जब उन्होंने पहली बार परीक्षा दी, तो उन्हें केवल 323 अंक मिले थे। इसके बाद उन्होंने ऑनलाइन लेक्चर और दोस्तों की किताबों के सहारे अपनी पढ़ाई जारी रखी। साल 2022 में उनका स्कोर बढ़कर 516 अंक हो गया। मेहनत का यह सिलसिला आगे भी जारी रहा और साल 2023 तथा 2024 में उन्होंने 590 अंक तक हासिल किए। हालांकि, कटऑफ अधिक रहने की वजह से उन्हें मेडिकल कॉलेज में दाखिला नहीं मिल सका। साल 2025 में उनके अंक घटकर 501 रह गए, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और आखिरकार 2026 में आठवीं बार प्रयास करके सफलता हासिल कर ली। बड़े भाई के सड़क हादसे ने बदला जीवन का लक्ष्य 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद अल्ताफ अपने पिता के साथ आलू बेचने के काम में हाथ बंटाने लगे थे। इसी दौरान एक ऐसी दुखद घटना घटी जिसने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी। उनके बड़े भाई रोजाना देर रात करीब 2 बजे आलू खरीदने के लिए बरेली मंडी जाया करते थे। एक रात मंडी जाते समय उनके भाई का गंभीर सड़क हादसा हो गया। इस दर्दनाक दुर्घटना ने अल्ताफ को भीतर तक हिलाकर रख दिया। भाई के साथ हुए इस हादसे के बाद उन्होंने तय कर लिया कि चाहे कितनी भी रुकावटें आएं, वे हर हाल में डॉक्टर बनकर ही रहेंगे। दो कमरों के कच्चे मकान से निकलकर रची सफलता की कहानी अल्ताफ का परिवार बेहद साधारण और सीमित संसाधनों में जीवन जीने वाला परिवार है। उनके पिता इकबाल हुसैन केवल नौवीं कक्षा तक पढ़े हैं, जबकि उनकी मां निरक्षर हैं। परिवार में 8 बहनें और 1 बड़ा भाई है। साल 2015 तक परिवार के सभी 12 सदस्य महज दो कमरों के एक कच्चे मकान में रहते थे। पिता पर घर के खर्च के साथ-साथ सभी आठों बेटियों की शादी की बहुत बड़ी जिम्मेदारी भी थी। ऐसी आर्थिक तंगी के बावजूद अल्ताफ ने अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं हटने दिया। मेहनत से जुटाए पैसों के बल पर उन्होंने कोटा में अपनी तैयारी को नई उड़ान दी और आज वे सीमित संसाधनों में बड़े सपने देखने वाले देश के युवाओं के लिए एक प्रेरणा बन चुके हैं। इसका आप पर असर • भारत में: यह सफलता देश भर के उन आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को प्रेरित करती है जो सीमित संसाधनों के बावजूद नीट जैसी राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं में डॉक्टर बनने का सपना देखते हैं। • बरेली और उत्तर प्रदेश में: स्थानीय युवाओं और ग्रामीण परिवारों के लिए यह एक मिसाल है कि कड़ी मेहनत और सही रणनीति से सरकारी मेडिकल सीटों तक पहुंचा जा सकता है। सवाल-जवाब 1. अल्ताफ ने नीट 2026 में कितने अंक और कौन सी रैंक हासिल की? अल्ताफ ने नीट 2026 में 563 अंक हासिल किए, जिससे उनकी ऑल इंडिया रैंक 27910 और ओबीसी कैटेगरी रैंक 13437 रही। 2. अल्ताफ किस जिले और राज्य के रहने वाले हैं? अल्ताफ उत्तर प्रदेश के बरेली जिले की नवाबगंज तहसील के रहने वाले हैं। 3. अल्ताफ ने नीट परीक्षा पास करने के लिए कितने प्रयास किए? अल्ताफ ने नीट परीक्षा में सफलता पाने के लिए कुल आठ प्रयास किए। 4. अल्ताफ ने कोचिंग की फीस के पैसे कैसे जुटाए? उन्होंने अपने पिता के साथ सड़क किनारे आलू की फड़ पर काम करके कोचिंग की फीस के पैसे जमा किए। 5. अल्ताफ के डॉक्टर बनने के निर्णय का टर्निंग पॉइंट क्या था? बरेली मंडी आलू लेने जाते समय उनके बड़े भाई का रात 2 बजे भयानक सड़क हादसा हो गया था, जिसने उन्हें डॉक्टर बनने के संकल्प के लिए प्रेरित किया। 6. अल्ताफ का 2019 में पहले प्रयास में क्या स्कोर था? साल 2019 में अपने पहले प्रयास में अल्ताफ ने 323 अंक हासिल किए थे। प्रेरणा और सबक • संसाधनों की कमी को बाधा न बनने दें: कोटा जाने के पैसे न होने पर दोस्तों के नोट्स और ऑनलाइन लेक्चर से शुरुआती पढ़ाई की। • असफलता से सीखें और टिके रहें: 2019 से 2025 के बीच अंकों के उतार-चढ़ाव और कटऑफ में छूटने के बावजूद 8वें प्रयास तक हार नहीं मानी। • पारिवारिक परिस्थितियों से प्रेरणा लें: भाई के हादसे के बाद अपने लक्ष्य के प्रति संकल्प को और मजबूत किया। • ईमानदार मेहनत से लक्ष्य प्राप्त करें: पिता के साथ आलू बेचकर खुद फीस के पैसे जुटाए और सफलता हासिल की। https://trendkia.com/success-stories/bareilly-ke-yuva-ne-garibi-ko-di-mata-bhai-ke-hadase-ke-bada-athaven-prayasa-men-pasa-ki-neet-2026-22317 TrendKia — Har trend, sabse pehle.