{
  "type": "article",
  "title": "बाड़मेर के तपते रेगिस्तान में 86 साल के थानाराम की निःस्वार्थ मुहिम, रोज 6 किलोमीटर पैदल चलकर बुझाते हैं अनजान राहगीरों की प्यास",
  "summary": "बाड़मेर के थानाराम कड़वासरा पिछले 19 साल से रोजाना 6 किलोमीटर पैदल चलकर बस स्टैंड पहुंचते हैं और सफर करने वालों को ठंडा पानी पिलाते हैं। 86 की उम्र में भी उनका यह सेवा-भाव लोगों के लिए मिसाल बन गया है।",
  "content": "राजस्थान के बाड़मेर में जब पारा चढ़ता है और लोग दोपहर में घर से बाहर कदम रखने से भी हिचकिचाते हैं, उस वक्त 86 साल के थानाराम घर से निकलते हैं। मंजिल है करीब 6 किलोमीटर दूर का एक छोटा सा बस स्टैंड, और इरादा सिर्फ इतना सा कि वहां से गुजरने वाले यात्रियों और राहगीरों का गला तर हो जाए। बिना किसी लालच के चल रही उनकी यह सेवा अब दो दशक के करीब पहुंच चुकी है और आसपास के लोगों के लिए एक नजीर बन गई है।\n\nआज के दौर में जब हर कोई अपने काम में इस कदर उलझा है कि दूसरों के लिए दो पल निकालना भी भारी पड़ता है, थानाराम उम्र के उस मोड़ पर इंसानियत की अलग ही तस्वीर पेश कर रहे हैं, जहां ज्यादातर लोग आराम और सेहत की फिक्र में दिन बिताते हैं। इस उम्र में भी वे हर रोज लगभग 6 किलोमीटर का रास्ता पैदल तय करते हैं और बस स्टैंड पर बैठकर जरूरतमंदों को पानी पिलाते हैं।\n\nरोज गुजरती हैं डेढ़ दर्जन से ज्यादा बसें\nचाहे झुलसा देने वाली गर्मी हो या तपता हुआ रेगिस्तान, थानाराम कड़वासरा का यह सिलसिला पिछले 19 साल से बिना रुके चल रहा है। वे रोजाना घर से 6 किलोमीटर पैदल चलकर हुड्डो की ढाणी बस स्टैंड पहुंचते हैं और यहां निःस्वार्थ भाव से लोगों को ठंडा जल पिलाते हैं। बाड़मेर के इस छोटे से बस स्टैंड से हर दिन डेढ़ दर्जन से अधिक बसें गुजरती हैं, और इनमें सफर करने वालों को यहां राहत की एक घूंट मिल जाती है।\n\nएक अकाल से शुरू हुई कहानी\nइस मुहिम की जड़ें कई साल पीछे जाती हैं। गांव में पड़े एक अकाल के दौरान एक दर्जन से ज्यादा पशु पानी की तलाश में इधर-उधर भटकते रहते थे। यह देखकर थानाराम ने पहले इन बेजुबान जानवरों को पानी पिलाना शुरू किया। इसी बीच उनकी नजर सड़क से गुजरने वाले उन लोगों पर पड़ी, जो प्यास से बेहाल रहते थे। बस उसी दिन से इंसानों की प्यास बुझाने का यह कारवां शुरू हुआ, जो आज 19 साल बाद भी उसी रफ्तार से चल रहा है।\n\nन होर्डिंग, न दानपेटी, बस मटकों का ठंडा पानी\nथानाराम की इस अनोखी प्याऊ की सबसे खास बात यह है कि यहां न तो कोई बड़ा होर्डिंग लगा है, न कोई दानपेटी रखी है और न ही उन्होंने कभी किसी से एक रुपये की मदद मांगी। करीब दो दशक से वे यह काम बिना किसी शोर-शराबे के, चुपचाप करते आ रहे हैं। पानी मटकों में रखा जाता है ताकि वह ठंडा बना रहे, और इस नेक काम में कभी-कभी उनका परिवार भी हाथ बंटा देता है। थानाराम का मानना है कि जिंदगी में किसी प्यासे को पानी पिलाने से बड़ा कोई पुण्य नहीं होता।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: भीषण गर्मी में सड़क किनारे ऐसी निःस्वार्थ प्याऊ हजारों यात्रियों को लू और डिहाइड्रेशन से बचाती है, और बताती है कि छोटी सी पहल बड़ी राहत बन सकती है।\n• बाड़मेर में: हुड्डो की ढाणी बस स्टैंड से गुजरने वाले रोजाना डेढ़ दर्जन से ज्यादा बसों के मुसाफिरों को यहां मुफ्त में ठंडा पानी मिल जाता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. थानाराम कौन हैं?\nवे बाड़मेर के 86 वर्षीय थानाराम कड़वासरा हैं, जो पिछले 19 साल से बस स्टैंड पर राहगीरों को पानी पिलाते आ रहे हैं।\n\n2. वे रोज कितनी दूर पैदल चलते हैं?\nवे हर दिन घर से करीब 6 किलोमीटर पैदल चलकर बस स्टैंड पहुंचते हैं।\n\n3. यह सेवा कहां चलती है?\nयह सेवा बाड़मेर के हुड्डो की ढाणी बस स्टैंड पर चलती है, जहां से रोज डेढ़ दर्जन से ज्यादा बसें गुजरती हैं।\n\n4. उन्होंने यह काम कैसे शुरू किया?\nगांव में पड़े अकाल के दौरान भटकते पशुओं को पानी पिलाते-पिलाते उन्होंने राहगीरों को भी प्यासा देखा और तभी से लोगों को पानी पिलाना शुरू कर दिया।\n\n5. क्या वे इसके बदले कोई पैसा लेते हैं?\nनहीं, यहां न कोई दानपेटी है और न होर्डिंग; उन्होंने कभी किसी से आर्थिक मदद नहीं मांगी।\n\n6. पानी ठंडा कैसे रखा जाता है?\nपानी मटकों में रखा जाता है ताकि वह ठंडा बना रहे, और कभी-कभी उनका परिवार भी इस काम में मदद करता है।\n\nप्रेरणा और सबक\nथानाराम की कहानी बताती है कि सेवा के लिए न बड़े संसाधन चाहिए और न दिखावा।\n\n• शुरुआत छोटी हो सकती है: उन्होंने पहले बस भटकते पशुओं को पानी पिलाया, फिर वही काम इंसानों तक पहुंचा। बड़ा बदलाव अक्सर एक छोटे कदम से शुरू होता है।\n• निरंतरता ही असली ताकत है: 19 साल तक रोज 6 किलोमीटर पैदल चलना दिखाता है कि लगातार किया गया छोटा काम बड़ी मिसाल बन जाता है।\n• उम्र सिर्फ एक संख्या है: 86 की उम्र में भी उन्होंने आराम के बजाय सेवा को चुना।\n• बिना प्रचार के नेकी: न होर्डिंग, न दानपेटी, न किसी से मदद की मांग; सच्ची सेवा चुपचाप होती है।",
  "url": "https://trendkia.com/success-stories/barmer-ke-tapate-registana-men-86-sala-ke-thanaram-ki-nihsvartha-muhima-roja-6-kilomitara-paidala-chalakara-bujhate-hain-anajana-r-2664",
  "category": "सक्सेस स्टोरी",
  "publishedAt": "2026-06-24",
  "tags": [
    "थानाराम कड़वासरा",
    "बाड़मेर",
    "निःस्वार्थ सेवा",
    "प्याऊ",
    "राजस्थान गर्मी",
    "हुड्डो की ढाणी",
    "प्रेरणादायक कहानी"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}