बस्तर के आदिवासी अंचल में मेडिकल क्रांति, मुफ्त ज्ञानगुड़ी कोचिंग से 50 छात्रों ने क्रैक किया NEET बस्तर जिला प्रशासन द्वारा संचालित निशुल्क ज्ञानगुड़ी कोचिंग के 50 से अधिक छात्रों ने इस साल प्रतिष्ठित NEET परीक्षा पास कर इतिहास रच दिया है। सुदूर और नक्सल प्रभावित इलाकों के ये होनहार छात्र अब बेहतरीन संस्थानों से मेडिकल की पढ़ाई कर अपने ही गांवों में स्वास्थ्य सेवाएं देने की तैयारी कर रहे हैं। बस्तर के घने जंगलों और सुदूर आदिवासी अंचलों से आने वाले युवा अब शिक्षा के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का शानदार लोहा मनवा रहे हैं। साबित हो गया है कि आर्थिक तंगी और भौगोलिक दूरियां किसी भी मजबूत इरादे को तोड़ नहीं सकती हैं। इस साल ज्ञानगुड़ी कोचिंग केंद्र से पढ़ाई करने वाले पचास से अधिक होनहार छात्रों ने अत्यंत कठिन माने जाने वाली NEET परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की है। यह ऐतिहासिक परिणाम इन युवाओं के लिए काउंसलिंग प्रक्रिया के बाद सीधे तौर पर प्रतिष्ठित MBBS, BAMS और उच्च स्तरीय नर्सिंग जैसे मेडिकल कोर्सेज में दाखिला लेने का एक मजबूत रास्ता साफ करता है। शिक्षा विभाग की अनूठी और निशुल्क पहल ज्ञानगुड़ी मुख्य रूप से जिला प्रशासन द्वारा शुरू किया गया एक बेहद खास और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है, जिसका सीधा संचालन शिक्षा विभाग करता है। इस अनोखी पहल का प्राथमिक उद्देश्य उन गरीब और पिछड़े युवाओं को उच्च स्तर की मुफ्त कोचिंग देना है जो भारी-भरकम फीस के कारण बड़े शहरों के निजी संस्थानों का रुख बिल्कुल नहीं कर सकते। केंद्र के प्रशासनिक प्रभारी एलेक्जेंडर चेरियन ने जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि पिछले शैक्षणिक वर्ष में इस संस्थान में कुल नब्बे बच्चों को प्रवेश दिया गया था। परिणाम बेहद उत्साहजनक रहे हैं, क्योंकि इनमें से आधे से अधिक छात्रों ने इस राष्ट्रीय स्तर की कठिन परीक्षा को पास करके एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है। इसके अतिरिक्त, यहां के कई छात्रों ने राज्य स्तरीय कठिन नर्सिंग परीक्षाओं में भी शानदार रैंक प्राप्त की है। ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो अब तक यह संस्थान तीन सौ से अधिक छात्रों को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के शिखर तक पहुंचा चुका है। सुबह से शाम तक चलने वाली कड़ी मेहनत इतनी बड़ी सफलता यूं ही नहीं मिलती, इसके पीछे एक बेहद सख्त और अनुशासित दिनचर्या का हाथ है। जगदलपुर में स्थित इस कोचिंग केंद्र का पढ़ाई का शेड्यूल काफी कड़ा रखा गया है। यहां हर दिन सुबह आठ बजे से लेकर शाम पांच बजे तक लगातार कक्षाएं संचालित होती हैं। छात्रों के अनुसार, यहां पढ़ाने वाले अनुभवी शिक्षक केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहते, बल्कि वे पाठ्यक्रम से भी आगे जाकर विषयों की बहुत गहरी जानकारी प्रदान करते हैं। सफलता प्राप्त करने वाली होनहार छात्रा कृष्ण सेन ने बताया कि उनकी तैयारी को पूरी तरह से अचूक बनाने के लिए संस्थान में हर सोमवार को बिल्कुल मुख्य परीक्षा के पैटर्न पर एक कड़ा टेस्ट आयोजित किया जाता है। इस लगातार साप्ताहिक मूल्यांकन और शिक्षकों के सटीक मार्गदर्शन ने बच्चों के आत्मविश्वास को काफी ऊंचे स्तर पर पहुंचा दिया है। बुनियादी कमजोरियों और आर्थिक बाधाओं का समाधान अंदरूनी और दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले आम परिवारों के लिए लाखों रुपये की कोचिंग फीस देना सपने में भी संभव नहीं है। ऐसे कठिन समय में ज्ञानगुड़ी की यह निशुल्क सुविधा उनके लिए एक सच्चे वरदान के रूप में उभरी है। दंतेवाड़ा जिले की मूल निवासी प्रेरणा नाग ने अपनी तैयारी के संघर्षपूर्ण सफर को विस्तार से साझा किया। उन्होंने बताया कि पिछले साल जुलाई के महीने से उन्होंने अपनी गंभीर पढ़ाई शुरू की थी। प्रेरणा ने बड़ी ईमानदारी से यह बात मानी कि ग्यारहवीं और बारहवीं कक्षा में उनके बुनियादी विज्ञान के कॉन्सेप्ट बहुत ज्यादा कमजोर थे। शिक्षकों ने अतिरिक्त समय देकर उनके एक-एक संशय को पूरी तरह से स्पष्ट किया। प्रेरणा ने पूरे उत्साह के साथ कहा, "मैंने बहुत मेहनत की और शिक्षकों ने भी काफी मेहनत करवाई।" गांव में ही रहकर सेवाएं देने का मजबूत संकल्प इन सफल छात्रों का अंतिम लक्ष्य सिर्फ एक अच्छी और मोटी तनख्वाह वाली नौकरी पाना बिल्कुल नहीं है, बल्कि अपने पिछड़े हुए समाज को वापस कुछ सार्थक देना भी है। बस्तर के ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं का भारी अभाव देखा जाता है। इसी गंभीर समस्या को बचपन से देखते आ रही कृष्ण सेन ने अपनी भविष्य की योजनाओं के बारे में बात करते हुए अपना लक्ष्य बिल्कुल स्पष्ट कर दिया। "मैं डॉक्टर बनकर अपने गांव में काम करना चाहती हूं क्योंकि वहां स्वास्थ्य सुविधाएं अच्छी नहीं हैं," उन्होंने कहा। ज्ञानगुड़ी की यह शानदार पहल न केवल आदिवासी अंचलों में शिक्षा के गिरते स्तर को तेजी से सुधार रही है, बल्कि भविष्य में बस्तर की स्थानीय मेडिकल जरूरतों को भी पूरी तरह से पूरा करने की एक ठोस नींव रख रही है। इसका आप पर असर • भारत में: सरकारी प्रशासन द्वारा संचालित निशुल्क और गुणवत्तापूर्ण कोचिंग पहलें ग्रामीण और शहरी शिक्षा के बीच की खाई को पाटने का एक शानदार मॉडल पेश कर रही हैं। • बस्तर में: सुदूर गांवों के छात्रों को अब मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ेगा, जिससे स्थानीय स्तर पर ही भविष्य के डॉक्टर तैयार होंगे और चिकित्सा सुविधाओं में सुधार आएगा। सवाल-जवाब 1. ज्ञानगुड़ी पहल क्या है? ज्ञानगुड़ी बस्तर जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग द्वारा शुरू की गई एक पहल है जो छात्रों को NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए निशुल्क कोचिंग प्रदान करती है। 2. इस साल कितने छात्रों ने NEET परीक्षा पास की है? ज्ञानगुड़ी केंद्र के 90 छात्रों के बैच में से 50 से अधिक होनहार छात्रों ने इस साल NEET की परीक्षा पास की है। 3. कोचिंग की टाइमिंग क्या होती है? जगदलपुर स्थित इस निशुल्क कोचिंग केंद्र में हर दिन सुबह 8 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक कक्षाएं संचालित होती हैं। 4. छात्र डॉक्टर बनकर अपने गांव क्यों लौटना चाहते हैं? कई सफल छात्र डॉक्टर बनकर वापस अपने गांवों में सेवाएं देना चाहते हैं क्योंकि उनके सुदूर ग्रामीण इलाकों में वर्तमान में स्वास्थ्य सुविधाएं बहुत खराब स्थिति में हैं। प्रेरणा और सबक • आर्थिक तंगी कोई बाधा नहीं: यदि सही मार्गदर्शन और संसाधन मिलें, तो गरीबी और भौगोलिक दूरी किसी भी छात्र को बड़े सपने पूरे करने से नहीं रोक सकती। • कमजोरियों को स्वीकारना: अपनी बुनियादी शिक्षा की कमजोरियों को पहचान कर उन्हें सुधारने पर काम करना ही राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में सफलता की पहली सीढ़ी है। • अनुशासन और निरंतरता: सुबह आठ से शाम पांच बजे तक की कड़ी पढ़ाई और हर सोमवार होने वाले टेस्ट यह साबित करते हैं कि सफलता शॉर्टकट से नहीं, अनुशासन से मिलती है। • समाज सेवा का जज्बा: सच्ची सफलता तब और बड़ी हो जाती है जब आपका अंतिम उद्देश्य अपनी शिक्षा का उपयोग अपने पिछड़े हुए समाज की भलाई के लिए करना हो। https://trendkia.com/success-stories/bastar-ke-adivasi-anchala-men-medikala-kranti-muphta-gyangudi-kochinga-se-50-chhatron-ne-kraika-kiya-neet-9789 TrendKia — Har trend, sabse pehle.