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  "type": "article",
  "title": "भाई और पिता को खोने के बावजूद मां के साथ खड़ी रही तनु प्रिया, BPSC की 70वीं परीक्षा में 178वीं रैंक से बनीं अफसर",
  "summary": "समस्तीपुर जिले के जोरपुरा गांव की तनु प्रिया ने बचपन में भाई और पिता को खोने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी और BPSC की 70वीं परीक्षा में 178वीं रैंक हासिल कर नगर कार्यपालक पदाधिकारी बनीं. उनकी मां मृणालिनी कुमारी के अथक त्याग ने इस सफलता की नींव रखी.",
  "content": "मां के संघर्ष से निकली जीत\nबिहार के समस्तीपुर जिले के जोरपुरा गांव से एक ऐसी कहानी सामने आई है जो हर किसी को अपनी मुश्किलों के बीच और मजबूती से खड़े रहने की प्रेरणा देती है. तनु प्रिया ने बिहार लोक सेवा आयोग की 70वीं परीक्षा में 178वीं रैंक हासिल कर नगर कार्यपालक पदाधिकारी के पद पर जगह पक्की की है. लेकिन यह सफलता कितनी तपस्या और कितने आंसुओं के बाद मिली, यह जानकर मन भर आता है.\n\nबचपन में छिन गए दो अपने\nसाल 2012 में जब तनु प्रिया महज 11 साल की थीं, तब उनके इकलौते भाई की मृत्यु हो गई. यह गम अभी थमा भी नहीं था कि 2014 में एक सड़क हादसे ने उनके पिता कृष्ण चंद्र चौधरी को भी हमेशा के लिए दुनिया से दूर कर दिया. पिता घर के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे, इसलिए उनके जाने के बाद आर्थिक हालात पूरी तरह बिगड़ गए. ऊपर से परिवार के कुछ लोगों ने संपत्ति के मामले में भी साथ छोड़ दिया और आगे का रास्ता पूरी तरह अंधेरे में डूबा नजर आने लगा.\n\nमां मृणालिनी ने जलाई उम्मीद की लौ\nइन सब मुश्किलों के बीच तनु प्रिया की मां मृणालिनी कुमारी ने हिम्मत नहीं हारी. शाहपुर पटोरी के आरती जगदीश महाविद्यालय से पढ़ी-लिखी मृणालिनी ने पटोरी के वरिष्ठ पत्रकार मनोज कुमार गुप्ता के यहां कोचिंग भी ली थी. उन्होंने अपने मन में ठान लिया कि चाहे कुछ भी हो जाए, बेटी की पढ़ाई नहीं रुकेगी. इसके लिए वह अरुणाचल प्रदेश जाकर टीचिंग करने लगीं और घर की हर जिम्मेदारी खुद उठा ली ताकि बेटी अपने सपनों की राह पर चलती रहे.\n\nपढ़ाई का लंबा और कठिन सफर\nतनु प्रिया ने शुरुआती पढ़ाई अरुणाचल प्रदेश में ही पूरी की. हालात सामान्य नहीं थे लेकिन उन्होंने कभी पढ़ाई से समझौता नहीं किया. वर्ष 2022 में उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री प्राप्त की. इसके बाद IGNOU से पॉलिटिकल साइंस में मास्टर्स की डिग्री हासिल की. हर किताब, हर परीक्षा और हर रात उनके संघर्ष की गवाह बनती गई. जिन परिस्थितियों में बहुत से लोग हार मान लेते, उन्हीं में तनु ने अपने इरादे और पक्के किए.\n\nBPSC में पहली बार में मिली कामयाबी\nतनु प्रिया का मूल लक्ष्य UPSC था और वह उसी की तैयारी में जुटी थीं. तभी मन में आया कि BPSC का फॉर्म भर कर एक बार आजमा लें. बिना बड़ी उम्मीदें रखे उन्होंने यह परीक्षा दी और पहली ही कोशिश में बिहार लोक सेवा आयोग की 70वीं परीक्षा में 178वीं रैंक हासिल कर नगर कार्यपालक पदाधिकारी पद के लिए चुनी गईं. इस खबर ने पूरे परिवार को गर्व से भर दिया.\n\nमां और परिवार को दिया पूरा श्रेय\nसफलता के बाद तनु प्रिया भावुक हो उठीं. उन्होंने साफ कहा कि अगर मां मृणालिनी कुमारी का संघर्ष नहीं होता और मामा तथा नानी घर के लोगों का साथ नहीं मिलता, तो यह मुकाम उनके लिए बहुत दूर था. उनके अपने शब्दों में यह जीत सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि मां के वर्षों के त्याग की है. आज पूरा परिवार खुश है.\n\nअगला सपना: UPSC\nतनु प्रिया यहीं नहीं रुकना चाहतीं. उनका अगला लक्ष्य UPSC है और वह उसकी तैयारी में लगी हैं. यह कहानी सिर्फ एक बेटी की सफलता की नहीं, उस मां की जीत की है जिसने हर आंसू छिपाकर और हर तकलीफ खुद पर लेकर अपनी बेटी को अफसर बना दिया.\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: BPSC जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों के लिए यह कहानी यह संदेश देती है कि पारिवारिक संकट और आर्थिक कठिनाई के बावजूद सरकारी सेवा में जगह बनाई जा सकती है.\n• समस्तीपुर में: जिले के युवाओं को, खासकर ग्रामीण पृष्ठभूमि की लड़कियों को, तनु प्रिया की यह सफलता यह भरोसा दिलाती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद BPSC और UPSC जैसे बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं.\n\nसवाल-जवाब\n\n1. तनु प्रिया कहां की रहने वाली हैं?\nवह बिहार के समस्तीपुर जिले के जोरपुरा गांव की रहने वाली हैं.\n\n2. BPSC की 70वीं परीक्षा में उनकी रैंक क्या रही?\nतनु प्रिया ने 178वीं रैंक हासिल की और नगर कार्यपालक पदाधिकारी पद के लिए चुनी गईं.\n\n3. उनके पिता का निधन कब और कैसे हुआ?\n2014 में एक सड़क हादसे में उनके पिता कृष्ण चंद्र चौधरी का निधन हुआ.\n\n4. उनके भाई की मृत्यु कब हुई थी?\n2012 में, जब तनु प्रिया 11 साल की थीं, उनके इकलौते भाई की मृत्यु हो गई.\n\n5. उनकी मां का नाम क्या है और उन्होंने परिवार को कैसे संभाला?\nउनकी मां का नाम मृणालिनी कुमारी है, जो अरुणाचल प्रदेश जाकर टीचिंग करने लगीं ताकि बेटी की पढ़ाई जारी रह सके.\n\n6. मृणालिनी कुमारी ने कहां से पढ़ाई की थी?\nवह शाहपुर पटोरी के आरती जगदीश महाविद्यालय की छात्रा रही हैं और उन्होंने पटोरी के वरिष्ठ पत्रकार मनोज कुमार गुप्ता के यहां कोचिंग भी ली है.\n\n7. तनु प्रिया ने स्नातक और मास्टर्स कहां से किया?\nउन्होंने 2022 में दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक और IGNOU से पॉलिटिकल साइंस में मास्टर्स किया.\n\n8. क्या यह BPSC में उनका पहला प्रयास था?\nहां, यह उनका पहला ही प्रयास था और उन्होंने पहली बार में ही 178वीं रैंक हासिल की.\n\n9. सफलता के बाद तनु प्रिया ने किसे श्रेय दिया?\nउन्होंने मां मृणालिनी कुमारी के साथ-साथ मामा और नानी घर के लोगों को इस सफलता का श्रेय दिया.\n\n10. तनु प्रिया का अगला लक्ष्य क्या है?\nउनका अगला लक्ष्य UPSC पास करना है और वह उसकी तैयारी में जुटी हैं.",
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  "category": "सक्सेस स्टोरी",
  "publishedAt": "2026-06-21",
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