भारत में 40 लाख की आरामदायक जिंदगी छोड़कर अमेज़न इंजीनियर हारिका सत्ती क्यों गईं अमेरिका, 1.9 करोड़ रुपये के पैकेज के पीछे की बताई बड़ी वजह अमेज़न की मशीन लर्निंग इंजीनियर हारिका सत्ती ने बताया कि करियर के विकास और आधुनिक तकनीक पर काम करने के लिए भारत के बजाय अमेरिका में नौकरी करना कहीं अधिक फायदेमंद है। भारतीय आईटी पेशेवरों और सॉफ्टवेयर इंजीनियरों के बीच हमेशा से यह एक बड़ा सवाल रहा है कि भारत में रहकर ही एक शानदार डोमेस्टिक पैकेज पर काम किया जाए या फिर विदेशों में जाकर भारी-भरकम सैलरी पैकेज वाली नौकरी की जाए। इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर अमेज़न में कार्यरत मशीन लर्निंग इंजीनियर हारिका सत्ती ने अपनी राय साझा की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इस बात का खुलासा किया कि वे भारत में सालाना 40 लाख रुपये की सुख-सुविधाओं से भरपूर नौकरी के मुकाबले अमेरिका में मिलने वाले 2 लाख USD यानी करीब 1.9 करोड़ रुपये के पैकेज को क्यों ज्यादा बेहतर मानती हैं। भारतीय लाइफस्टाइल की सहूलियत बनाम अमेरिकी करियर का अनुभव अमेज़न के सिएटल कार्यालय में मशीन लर्निंग इंजीनियर के रूप में कार्यरत हारिका सत्ती ने कंटेंट क्रिएटर उमंग चौधरी के साथ एक बातचीत के दौरान अपने इस बड़े फैसले के पीछे के व्यावहारिक कारणों को स्पष्ट किया। हारिका का मानना है कि भारत में मिलने वाला 40 लाख रुपये का सालाना पैकेज रहने-खाने और रोजमर्रा की लाइफस्टाइल के लिहाज से बेहद शानदार है। भारत में इस सैलरी के साथ बेहद आरामदायक और लग्जरी जिंदगी जी जा सकती है, जहां घरेलू सहायकों की मदद से काम बहुत आसान हो जाता है। इसके बावजूद, उन्होंने अमेरिका को सिर्फ पैसों की खातिर नहीं, बल्कि वहां मिलने वाले करियर एक्पोजर और सीखने के माहौल की वजह से चुना। एडवांस्ड इंफ्रास्ट्रक्चर और भारी रिसर्च बजट का महत्व हारिका ने बताया कि तकनीकी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए सिर्फ व्यक्तिगत आराम ही काफी नहीं होता है। अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियों के पास भारी रिसर्च बजट होते हैं और वे अत्याधुनिक कंप्यूटिंग रिसोर्सेज का इस्तेमाल करती हैं। सिएटल जैसे वैश्विक तकनीकी हब में काम करने का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि वहां बिल्कुल नई और अल्ट्रा-मॉडर्न टेक्नोलॉजी पर सीधे काम करने का मौका मिलता है। मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में यह तकनीकी एक्सपोज़र किसी भी इंजीनियर के करियर को काफी तेजी से आगे बढ़ाने में मदद करता है। करियर के प्रति नजरिए और कामकाजी संस्कृति में आया बड़ा बदलाव हारिका अपने अमेरिका जाने के फैसले को पूरी तरह सही मानती हैं। उन्होंने बताया कि भारत में पढ़ाई पूरी करने के बाद उनका प्राथमिक उद्देश्य सिर्फ एक सुरक्षित नौकरी हासिल करना, सही समय पर सेटल होना और एक अच्छी सैलरी कमाना था। लेकिन सिएटल आने के बाद उनके सोचने का पूरा तरीका बदल गया। अब वह केवल वीकेंड का इंतजार नहीं करतीं, बल्कि हर नए दिन अपने काम को लेकर काफी उत्साहित और महत्वाकांक्षी महसूस करती हैं। काम के प्रति यह गहरा जुड़ाव और जुनून उन्हें अमेरिका के काम करने वाले माहौल से ही मिला है। अमेज़न में MLE-II पद का सैलरी स्ट्रक्चर वर्तमान में अमेज़न में मशीन लर्निंग इंजीनियर II यानी MLE-II के पद पर कार्यरत हारिका सत्ती ने सैलरी के बुनियादी ढांचे के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। उनके अनुसार, इस विशिष्ट भूमिका के लिए बेस सैलरी आमतौर पर 150,000 USD से लेकर 200,000 USD के बीच होती है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 1.3 करोड़ रुपये से लेकर 1.9 करोड़ रुपये तक बैठती है। इसके अलावा, टेक कंपनियों की तरफ से कर्मचारियों को बड़े पैमाने पर बोनस और स्टॉक ऑप्शंस भी दिए जाते हैं, जिससे उनका कुल पैकेज काफी ज्यादा हो जाता है। स्मार्ट बजटिंग और सिएटल में 65 प्रतिशत तक की बचत अक्सर माना जाता है कि विदेशों में रहने का खर्च भारतीय शहरों की तुलना में बेहद ज्यादा होता है, जिससे बचत करना मुश्किल हो जाता है। लेकिन हारिका ने स्मार्ट तरीके से अपना बजट तैयार किया है। टैक्स कटने के बाद मिलने वाले कुल वेतन का लगभग 15 प्रतिशत हिस्सा उनके मकान के किराये में जाता है। इसके अलावा, करीब 10 प्रतिशत हिस्सा खाने-पीने और यात्रा करने में खर्च होता है। सिएटल शहर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था बहुत अच्छी होने के कारण उन्हें कार खरीदने की जरूरत नहीं पड़ी, जिससे एक बड़ा खर्च बच गया। इस समझदारी भरे वित्तीय प्रबंधन के दम पर वे हर महीने अपनी कुल कमाई का 60 से 65 प्रतिशत हिस्सा आसानी से बचा लेती हैं। इसका आप पर असर भारतीय तकनीकी पेशेवरों के लिए: यह जानकारी उन इंजीनियरों को एक स्पष्ट नजरिया देती है जो भारत और विदेशों में करियर के विकल्पों के बीच असमंजस में हैं। यह दिखाता है कि करियर के शुरुआती चरण में सिर्फ आराम के बजाय वैश्विक स्तर के एक्सपोज़र को चुनना भविष्य के विकास के लिए कितना फायदेमंद हो सकता है। सवाल-जवाब 1. हारिका सत्ती वर्तमान में किस कंपनी में और किस पद पर कार्यरत हैं? हारिका सत्ती वर्तमान में अमेरिका के सिएटल में प्रसिद्ध टेक कंपनी अमेज़न में मशीन लर्निंग इंजीनियर II (MLE-II) के पद पर कार्यरत हैं। 2. हारिका ने भारत में 40 लाख की नौकरी के बजाय अमेरिका जाने का निर्णय क्यों लिया? उनके अनुसार, भारत में आरामदायक लाइफस्टाइल तो मिल सकती है, लेकिन अमेरिका में बड़ी टेक कंपनियों के भारी रिसर्च बजट और एडवांस्ड इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण वहां सीखने और करियर ग्रोथ के शानदार अवसर मिलते हैं। 3. अमेज़न में MLE-II पद का बेस सैलरी पैकेज कितना होता है? अमेज़न में इस पद के लिए बेस सैलरी आमतौर पर 150,000 USD से लेकर 200,000 USD (लगभग 1.3 करोड़ से 1.9 करोड़ रुपये) के बीच होती है, जिसमें बोनस और स्टॉक्स अलग से शामिल होते हैं। 4. सिएटल जैसे महंगे शहर में हारिका हर महीने कितनी बचत कर लेती हैं? बेहतर वित्तीय प्रबंधन और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करके, हारिका अपनी कुल मासिक आय का लगभग 60% से 65% हिस्सा आसानी से बचा लेती हैं। प्रेरणा और सबक हारिका सत्ती के करियर सफर से मिलने वाली सीख: • तकनीकी अनुभव को प्राथमिकता दें: अपने करियर की शुरुआत में केवल आरामदायक जीवनशैली के बजाय हमेशा ऐसे अवसरों को चुनें जहां आपको आधुनिक तकनीकों और रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम करने का मौका मिले। • स्मार्ट बजटिंग से करें बचत: उच्च लागत वाले विदेशी शहरों में भी यदि सही बजट और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग किया जाए, तो अपनी आय का 60 से 65 प्रतिशत तक बचाना संभव है। • काम के प्रति अपना दृष्टिकोण बदलें: नौकरी को केवल आजीविका या वीकेंड के इंतजार का जरिया न बनाएं, बल्कि दैनिक कार्यों में गहरी रुचि और महत्वाकांक्षा पैदा करें। https://trendkia.com/success-stories/bharata-men-40-lakha-ki-aramadayaka-jindagi-chhorakara-amazon-injiniyara-harika-satti-kyon-gain-amerika-1-9-karora-rupaye-ke-paike-10549 TrendKia — Har trend, sabse pehle.