बिहार के इंजीनियरिंग छात्रों का साइबर शील्ड, ईमेल घोटालों की पहले ही पोल खोलेगा थ्रेट लेंस ऐप जहानाबाद इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों ने मशीन लर्निंग से लैस थ्रेट लेंस ऐप तैयार किया है, जो संदिग्ध ईमेल, फर्जी सेंडर और छुपे हुए आईपी पते की पहचान कर साइबर ठगी से बचाएगा। डिजिटल दुनिया में लगातार बढ़ रहे ऑनलाइन घोटालों के बीच आम इंटरनेट उपभोक्ताओं की मेहनत की कमाई पर सबसे बड़ा खतरा फर्जी ईमेल के जरिए मंडराता है। इसी गंभीर चुनौती का तकनीकी हल ढूंढते हुए बिहार के जहानाबाद इंजीनियरिंग कॉलेज के विद्यार्थियों ने एक विशेष सुरक्षा कवच तैयार किया है। छात्र पीयूष कुमार और उनकी टीम द्वारा विकसित यह खास सॉफ्टवेयर मशीन लर्निंग तकनीक पर आधारित है, जिसका नाम थ्रेट लेंस रखा गया है। यह एप्लीकेशन इनबॉक्स में आने वाले संदिग्ध संदेशों का बारीकी से विश्लेषण करके यह सुनिश्चित करता है कि कहीं कोई उपभोक्ता किसी शातिर साइबर जालसाज के बिछाए जाल में न फंस जाए। इस पूरे प्रोजेक्ट का मूल विचार छात्रों को प्रतिष्ठित स्मार्ट इंडिया हैकथॉन के दौरान मिला था, जहां ईमेल सुरक्षा से जुड़ी जटिल समस्याओं को सुलझाने के लिए व्यावहारिक समाधान तलाशने की प्रेरणा मिली। संदिग्ध संदेशों की पहचान और तकनीकी जांच की व्यवस्था थ्रेट लेंस एप्लीकेशन की कार्यप्रणाली बेहद आधुनिक और बहुस्तरीय है। जब कोई उपभोक्ता किसी ईमेल को इस प्लेटफॉर्म पर जांच के लिए डालता है, तो सिस्टम उसमें छिपे सुरक्षा जोखिमों का तुरंत विश्लेषण करता है। यह टूल केवल सामान्य चेतावनी ही नहीं देता, बल्कि संदेश को अलग-अलग श्रेणियों में बांटता है, जिससे यह साफ हो जाता है कि पत्र स्पैम की श्रेणी में आता है या फिर किसी खतरनाक धोखाधड़ी का हिस्सा है। इसके अलावा, एप्लीकेशन संदेश भेजने वाले की वास्तविक पहचान उजागर करने में सक्षम है। यह ईमेल के मूल लोकेशन और उसके आईपी एड्रेस को ट्रैक करके यह स्पष्ट कर देता है कि संदेश असल में किस भौगोलिक स्थान और नेटवर्क से भेजा गया है। ऐसे कई तकनीकी फीचर्स एक साथ जुड़ने से आम लोगों के लिए फर्जी ईमेल पहचानना बहुत आसान हो जाता है। वैश्विक साइबर अपराधों से बचाव का नया रास्ता साइबर अपराध की व्यापकता को रेखांकित करते हुए पीयूष कुमार ने साझा किया कि दुनिया भर में लगभग 4 बिलियन अपराध ईमेल के जरिए अंजाम दिए जाते हैं। इतनी बड़ी संख्या में होने वाली धोखाधड़ी से निपटने के लिए यह टूल काफी मददगार साबित हो सकता है। डिजिटल अपराधी अक्सर अनचाहे पैसे मांगने, वित्तीय झांसा देने या उत्पीड़न और डराने-धमकाने वाले संदेश भेजकर लोगों को मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान करते हैं। थ्रेट लेंस का एल्गोरिदम ऐसे हर दुर्भावनापूर्ण प्रयास को पहले ही पकड़ लेता है, जिससे उपभोक्ता बिना किसी भय या धोखे के अपने दैनिक डिजिटल काम पूरे कर सकते हैं। स्मार्टफोन में इस्तेमाल और लॉगिन करने की पूरी प्रक्रिया आम उपयोगकर्ताओं के लिए इस एप्लीकेशन को बेहद सरल और सुलभ बनाया गया है। मोबाइल पर इसका लाभ उठाने के लिए उपयोगकर्ताओं को सबसे पहले थ्रेट लेंस एप्लीकेशन को डाउनलोड करना होगा। इसके बाद इसे अपने जीमेल खाते से जोड़ना होता है। जैसे ही ईमेल खाता इस ऐप से लिंक हो जाता है, उपयोगकर्ता का पूरा इनबॉक्स एप्लीकेशन के सुरक्षित इंटरफेस में प्रदर्शित होने लगता है। यदि उपभोक्ता को किसी विशेष ईमेल पर संदेह होता है, तो वह उस पर टैप करके जांच शुरू कर सकता है। प्रणाली कुछ ही सेकंड में उस संदेश का विस्तृत सुरक्षा ब्योरा स्क्रीन पर पेश कर देती है, जिससे किसी भी अनजाने लिंक पर क्लिक करने से पहले ही संभावित साइबर खतरे को टाला जा सकता है। इसका आप पर असर इस नए तकनीकी समाधान से आम इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को ईमेल आधारित ऑनलाइन ठगी और फर्जी संदेशों से तुरंत सुरक्षा मिल सकेगी। • भारत में: डिजिटल लेनदेन और ईमेल का उपयोग करने वाले करोड़ों लोग संदिग्ध ईमेल लिंक पर क्लिक करने से बच सकेंगे। इससे बैंकिंग फ्रॉड और व्यक्तिगत डेटा चोरी के मामलों में सीधे तौर पर कमी लाई जा सकती है। • बिहार में: राज्य के तकनीकी संस्थानों की नवाचार क्षमता को पहचान मिलेगी और स्थानीय स्तर पर साइबर जागरूकता बढ़ेगी। इससे जहानाबाद और आसपास के युवा साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में नए समाधान तलाशने के लिए प्रेरित होंगे। • आर्थिक सुरक्षा: ईमेल पर आने वाले फर्जी लॉटरी या पैसे की मांग वाले संदेशों की पहचान पहले ही हो जाएगी। इससे आम उपभोक्ता अपनी मेहनत की जमा पूंजी को ठगों के खातों में जाने से सुरक्षित रख पाएंगे। • निजी सुरक्षा: धमकी भरे या उत्पीड़न वाले संदेश भेजने वालों के वास्तविक आईपी पते का पता लगाया जा सकेगा। इसके आधार पर पीड़ित समय रहते कानूनी और तकनीकी कदम उठाने में सक्षम होंगे। ऐसा क्यों हुआ ऑनलाइन साइबर ठगी की लगातार बढ़ती घटनाओं और ईमेल के माध्यम से होने वाली भारी धोखाधड़ी ने छात्रों को यह सुरक्षा टूल विकसित करने के लिए प्रेरित किया। • साइबर अपराधों की भारी संख्या: दुनिया भर में करीब 4 बिलियन अपराध ईमेल के जरिए संचालित होते हैं, जिनमें लोगों की जमा पूंजी को निशाना बनाया जाता है। इतने विशाल पैमाने पर होने वाले नुकसान से आम उपयोगकर्ताओं को बचाने के लिए ठोस समाधान की जरूरत थी। • स्मार्ट इंडिया हैकथॉन की प्रेरणा: छात्रों को इस एप्लीकेशन को तैयार करने का विचार स्मार्ट इंडिया हैकथॉन के मंच से मिला। वहां ईमेल से जुड़ी तकनीकी समस्याओं और साइबर खतरों को हल करने के वास्तविक तरीकों पर चर्चा की गई थी। • सेंडर की पहचान छिपाने का चलन: जालसाज अक्सर फर्जी ईमेल पते बनाकर पैसे मांगने या प्रताड़ित करने का काम करते हैं। इस वजह से मशीन लर्निंग आधारित एक ऐसे टूल की आवश्यकता महसूस हुई जो छिपे हुए आईपी पते और जोखिम को तुरंत पकड़ सके। सवाल-जवाब 1. थ्रेट लेंस एप्लीकेशन का मुख्य काम क्या है? यह एप्लीकेशन मशीन लर्निंग तकनीक से ईमेल का विश्लेषण करता है, स्पैम और फ्रॉड की पहचान करता है तथा भेजने वाले का आईपी एड्रेस बताता है। 2. इस एप्लीकेशन को किन छात्रों ने तैयार किया है? इसे जहानाबाद इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र पीयूष कुमार और उनकी टीम के विद्यार्थियों ने विकसित किया है। 3. छात्रों को इस ऐप को बनाने की प्रेरणा कहां से मिली? छात्रों को थ्रेट लेंस ऐप बनाने का विचार स्मार्ट इंडिया हैकथॉन के दौरान ईमेल सुरक्षा समस्याओं को हल करने से मिला। 4. विश्व भर में ईमेल से जुड़े अपराधों का क्या आंकड़ा बताया गया है? छात्रों के अनुसार पूरी दुनिया में लगभग 4 बिलियन अपराध ईमेल के माध्यम से अंजाम दिए जाते हैं। 5. उपयोगकर्ता अपने फोन में इस ऐप का इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं? उपयोगकर्ताओं को थ्रेट लेंस ऐप डाउनलोड करके उसे अपने जीमेल खाते से जोड़ना होता है, जिसके बाद किसी भी ईमेल की जांच की जा सकती है। प्रेरणा और सबक जहानाबाद के कॉलेज छात्रों की यह उपलब्धि साबित करती है कि व्यावहारिक सोच और नवाचार से स्थानीय स्तर पर भी वैश्विक समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है। • समस्या की सही पहचान: छात्रों ने साइबर ठगी की बढ़ती वैश्विक समस्या को बारीकी से समझा और उसके तकनीकी समाधान पर ध्यान केंद्रित किया। जीवन में सफलता पाने के लिए सबसे पहले आसपास की वास्तविक समस्याओं को पहचानना जरूरी है। • प्रतियोगिता के मंच का सदुपयोग: स्मार्ट इंडिया हैकथॉन जैसे राष्ट्रीय मंच पर मिली चुनौती को छात्रों ने एक सफल प्रोजेक्ट में तब्दील कर दिया। सही मार्गदर्शन और मंच का उपयोग करके अपने विचारों को वास्तविक रूप दिया जा सकता है। • आधुनिक तकनीक का सही प्रयोग: इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान मशीन लर्निंग जैसी उन्नत विधा का इस्तेमाल समाज की सुरक्षा के लिए किया गया। ज्ञान का सच्चा मूल्य तब होता है जब उसका लाभ आम जनता तक पहुंचे। https://trendkia.com/success-stories/bihar-ke-injiniyaringa-chhatron-ka-saibara-shilda-imela-ghotalon-ki-pahale-hi-pola-kholega-threat-lens-app-47405 TrendKia — Har trend, sabse pehle.