जहानाबाद के उपेंद्र की बदली तकदीर, ट्रैक्टर चलाने से लेकर मुख्यमंत्री उद्यमी योजना से शुरू किया ब्लॉक बनाने का कारोबार बिहार के जहानाबाद जिले के रहने वाले उपेंद्र कुमार ने मुख्यमंत्री उद्यमी योजना की मदद से सीमेंट की ईंट का कारोबार शुरू किया और आज वह हर महीने एक लाख रुपये तक की कमाई कर रहे हैं। जहानाबाद जिले के एरकी गांव के रहने वाले उपेंद्र कुमार का जीवन एक समय आर्थिक तंगी और अनिश्चितता से घिरा हुआ था। शादी के बाद घर की जिम्मेदारियां और बढ़ गईं, लेकिन कम पढ़े-लिखे होने के कारण उन्हें कोई नियमित नौकरी नहीं मिल पाई। परिवार का भरण-पोषण करना भी एक बड़ी चुनौती बन गया था। हालांकि उनके मन में हमेशा से कुछ ऐसा बड़ा करने की इच्छा थी, जिससे न केवल उनका अपना घर चले बल्कि दूसरों को भी रोजगार मिल सके। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए उन्होंने कई वर्षों तक संघर्ष किया, लेकिन शुरुआती तीन सालों तक कोई स्पष्ट राह नहीं सूझी। ट्रैक्टर से शुरुआत और संघर्ष के दिन जब नौकरी के सारे रास्ते बंद नजर आए, तब उपेंद्र कुमार ने अपनी कुछ जमा पूंजी का इस्तेमाल करके एक पुराना ट्रैक्टर खरीदा। इस ट्रैक्टर के सहारे उन्होंने खेतों में जुताई, मिट्टी भराई, और गिट्टी-बालू ढोने जैसे छोटे-मोटे काम करना शुरू किए। इस मेहनत से मिलने वाली कमाई से किसी तरह उनके परिवार का खर्च चल पाता था। उन्होंने करीब दो साल तक इसी तरह से दिन-रात मेहनत की। काम मुश्किल जरूर था, लेकिन उनके भीतर एक बड़े व्यापार की चाहत हमेशा जिंदा रही, जो उन्हें लगातार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती रही। मुख्यमंत्री उद्यमी योजना से मिली नई उड़ान उपेंद्र कुमार के जीवन में असली बदलाव तब आया जब उन्हें बिहार सरकार की मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने बिना देर किए इस योजना के तहत आवेदन कर दिया। उन्होंने पेवर ब्लॉक यानी कंक्रीट की ईंट बनाने के व्यवसाय के लिए प्रस्ताव रखा था। इस पूरी प्रक्रिया में जहानाबाद जिला उद्योग विभाग ने भी उनकी काफी सहायता की। सरकार की इस योजना के तहत उन्हें 10 लाख रुपये की राशि प्राप्त हुई, जिसने उनके सपनों को पंख दे दिए और यहीं से उनके कारोबार का असली सफर शुरू हुआ। लाखों की कमाई और दूसरों को रोजगार आर्थिक सहायता मिलते ही उन्होंने सीमेंट की ईंट बनाने के प्लांट की शुरुआत की। धीरे-धीरे उनके व्यापार का दायरा बढ़ता गया और आज स्थिति यह है कि वह हर महीने लगभग एक लाख ईंट की सप्लाई कर रहे हैं। उनकी इस सीमेंट ईंट की मांग जहानाबाद के अलावा अरवल, पटना, गयाजी और नालंदा जिलों के कई हिस्सों में है। कई बार मांग इतनी बढ़ जाती है कि ईंटों की पूर्ति करना भी मुश्किल हो जाता है। इस सफल कारोबार से उन्हें हर महीने 80 हजार से 90 हजार रुपये की शुद्ध कमाई होती है, जो कभी-कभी एक लाख रुपये तक पहुंच जाती है। इस व्यवसाय से उनके साथ एक दर्जन से अधिक लोग जुड़े हुए हैं, जिनकी आजीविका भी अब इसी से चल रही है। इसका आप पर असर यह सफलता की कहानी उन लोगों के लिए एक बड़ा उदाहरण है जो सीमित संसाधनों के बीच स्वरोजगार शुरू करना चाहते हैं। • भारत में: सरकारी योजनाओं के माध्यम से छोटे उद्यमियों को मिलने वाली वित्तीय सहायता किस प्रकार जीवन बदल सकती है, यह इसका जीवंत उदाहरण है। • जहानाबाद में: स्थानीय युवाओं और बेरोजगार लोगों को सरकारी योजनाओं की जानकारी लेकर स्वरोजगार और विनिर्माण क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। ऐसा क्यों हुआ यह सफलता पारंपरिक रोजगार की कमी से उपजी मजबूरी और सही समय पर सरकारी सहायता मिलने के मेल से संभव हुई। • सीमित अवसर: कम शिक्षा के कारण पारंपरिक नौकरी न मिलने से स्वरोजगार की तलाश करना अनिवार्य हो गया था। • सरकारी सहायता: मुख्यमंत्री उद्यमी योजना और जिला उद्योग विभाग के सहयोग से 10 लाख रुपये का लोन मिलने से आवश्यक पूंजी जुटाई जा सकी। • बाजार की मांग: निर्माण कार्यों के लिए कंक्रीट ईंटों और पेवर ब्लॉक की लगातार बढ़ती मांग ने इस व्यवसाय को तेजी से बढ़ने का अवसर दिया। सवाल-जवाब 1. उपेंद्र कुमार किस जिले के रहने वाले हैं? उपेंद्र कुमार बिहार के जहानाबाद जिले के एरकी के रहने वाले हैं। 2. उन्होंने व्यापार शुरू करने से पहले क्या काम किया था? उन्होंने कुछ पैसों से ट्रैक्टर खरीदा था और दो साल तक खेतों की जुताई, मिट्टी भराई तथा गिट्टी-बालू ढोने का काम किया था। 3. उन्हें किस सरकारी योजना का लाभ मिला? उन्हें बिहार सरकार की मुख्यमंत्री उद्यमी योजना का लाभ मिला। 4. योजना के तहत कितनी राशि प्राप्त हुई थी? इस योजना के तहत उन्हें 10 लाख रुपये की राशि प्राप्त हुई थी। 5. वह किस चीज का व्यवसाय करते हैं? वह पेवर ब्लॉक यानी सीमेंट वाली ईंट का निर्माण और व्यापार करते हैं। 6. उनकी वर्तमान मासिक कमाई कितनी है? उनकी मासिक कमाई 80 हजार से 90 हजार रुपये है, जो कभी-कभी एक लाख रुपये तक पहुंच जाती है। 7. उनकी ईंटों की सप्लाई किन-किन जिलों में होती है? उनकी ईंटों की सप्लाई जहानाबाद के अलावा अरवल, पटना, गयाजी और नालंदा जिलों में होती है। 8. इस व्यवसाय से कितने लोगों को रोजगार मिला है? इस व्यवसाय से लगभग एक दर्जन लोगों को रोजगार मिला है। प्रेरणा और सबक उपेंद्र कुमार के संघर्ष से यह प्रेरणा मिलती है कि विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य और सही दिशा में प्रयास करने से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। • कठिन समय में हार न मानें: ट्रैक्टर चलाने जैसे छोटे काम से शुरुआत करके भी बड़े लक्ष्य की तरफ कदम बढ़ाए जा सकते हैं। • सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएं: अपनी योग्यता और रुचि के अनुसार सरकारी सहायता का सही समय पर आवेदन करके व्यापार शुरू किया जा सकता है। • दूसरों को भी रोजगार दें: व्यवसाय को केवल अपने तक सीमित न रखकर स्थानीय स्तर पर लोगों को जोड़कर सामाजिक बदलाव लाया जा सकता है। https://trendkia.com/success-stories/bihar-ke-jahanabada-ke-upendra-kumar-ki-badali-takadira-traiktara-chalane-se-lekara-mukhyamantri-udyami-yojana-se-shuru-kiya-bloka-30608 TrendKia — Har trend, sabse pehle.