# बिहार के किसान का नवाचार: महज 4 कट्ठा जमीन पर नींबू की 17 किस्में उगाकर सालाना ₹1 लाख से अधिक की कमाई

> मुजफ्फरपुर के गोविंदपुर गांव में श्रीकांत कुशवाहा ने महज दो पौधों से नींबू की बागवानी शुरू की थी, जो आज 17 किस्मों के साथ लाखों की सालाना आय दे रही है।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-10-11 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/bihar-ke-kisana-ka-navachara-mahaja-4-kattha-jamina-para-ninbu-ki-17-kismen-ugakara-salana-1-lakha-se-adhika-ki-kamai-46198 · **Language:** Hindi
**Tags:** मुजफ्फरपुर, नींबू की खेती, श्रीकांत कुशवाहा, बागवानी, कुशवाहा हर्बल गार्डन, कृषि नवाचार

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में स्थित सरैया प्रखंड के गोविंदपुर गांव में बागवानी का एक बेहद प्रेरक मॉडल सामने आया है। यहां के किसान श्रीकांत कुशवाहा ने यह साबित कर दिया है कि अगर योजनाबद्ध तरीके से खेती की जाए, तो बहुत सीमित रकबे में भी शानदार मुनाफा कमाया जा सकता है। उन्होंने केवल 4 कट्ठा जमीन पर नींबू का एक समृद्ध बगीचा तैयार किया है, जिसमें करीब 17 अलग-अलग किस्में लहलहा रही हैं। नींबू के फलों की आपूर्ति और अपनी नर्सरी से तैयार पौधों को बेचकर वह हर साल 1 लाख रुपये से अधिक का शुद्ध लाभ हासिल कर रहे हैं।

## दो पौधों से शुरू हुआ सफर और 80 पेड़ों का विस्तार
इस अनूठी बागवानी की नींव दो दशक से भी अधिक समय पहले रखी गई थी। साल 2002 में श्रीकांत कुशवाहा ने बाजार से मात्र 50 रुपये खर्च करके नींबू के दो छोटे पौधे खरीदे थे। उन्होंने किसी बड़े पैमाने पर निवेश करने के बजाय धैर्य रखा और उन दोनों शुरुआती पौधों से ही अपनी घरेलू नर्सरी तैयार की। धीरे-धीरे उन्होंने अपने काम का दायरा बढ़ाया और अब उनके बगीचे में लगभग 80 नींबू के पेड़ फल दे रहे हैं। वह विभिन्न इलाकों का दौरा करके नींबू की दुर्लभ व उन्नत किस्में जुटाते हैं और फिर ग्राफ्टिंग यानी कलम बांधने की तकनीक से नए पौधे तैयार करते हैं, जिससे उनकी आय में नर्सरी का हिस्सा भी जुड़ जाता है।

## खटुआ से लेकर हजारा तक 17 अनूठी किस्में
इस बाग की सबसे बड़ी पहचान यहां मौजूद विविधता है, जो आम तौर पर पारंपरिक खेतों में नहीं दिखती। बगीचे में खटुआ, जमीरी, पातू, काजरी, बनारसी काजरी और हजारा जैसी 17 प्रकार की किस्में मौजूद हैं। इन सभी किस्मों के नींबू का उपयोग अचार, चटनी और विभिन्न प्रकार के नमकीन खाद्य पदार्थों को तैयार करने में बड़े पैमाने पर किया जाता है। जहां कुछ सामान्य किस्मों की मांग पूरे बारह महीने बनी रहती है, वहीं कुछ विशिष्ट किस्मों की बिक्री त्योहारों और मांग वाले मौसम में कई गुना बढ़ जाती है।

## खाद्य उत्पादों में अलग-अलग किस्मों का महत्व और बाजार भाव
विभिन्न किस्मों के गुणों के कारण उनके दाम भी बाजार में अलग-अलग तय होते हैं। उदाहरण के लिए, खटुआ नींबू का उपयोग तीखे मिर्च के अचार और पारंपरिक ओल की चटनी में विशेष रूप से किया जाता है। स्थानीय बाजारों में इसकी सीमित उपलब्धता के कारण त्योहारों के समय इसकी मांग काफी तेज हो जाती है। वहीं नमकीन और अन्य स्नैक्स बनाने के लिए जमीरी किस्म के नींबू की भारी मात्रा में थोक खरीदारी की जाती है।

मूल्य निर्धारण की बात करें तो साधारण जमीरी नींबू करीब 5 रुपये प्रति पीस के भाव से बिकता है। दूसरी ओर, त्योहारी सीजन के दौरान व्यापारियों को खटुआ नींबू लगभग 10 रुपये प्रति पीस की दर से बेचा जाता है। इसके अलावा बगीचे में मौजूद कुछ चुनिंदा खास किस्मों की कीमत 15 रुपये से लेकर 20 रुपये प्रति पीस तक पहुंच जाती है।

## ‘कुशवाहा हर्बल गार्डन’ और जादूगर जी की पहचान
श्रीकांत कुशवाहा की पहचान सिर्फ एक साधारण किसान तक सीमित नहीं है। उनके इस प्रयास को इलाके में ‘कुशवाहा हर्बल गार्डन’ के नाम से जाना जाता है। इसके साथ ही वह जादू के शो भी प्रस्तुत करते हैं, जिसकी वजह से आसपास के ग्रामीण और खरीदार उन्हें आदर से ‘जादूगर जी’ कहकर बुलाते हैं। महज 50 रुपये और दो पौधों से आरंभ हुआ यह छोटा सा उपक्रम आज छोटे स्तर की बागवानी और उन्नत नर्सरी प्रबंधन के क्षेत्र में एक मजबूत उदाहरण बन चुका है।

## इसका आप पर असर
यह समाचार दिखाता है कि छोटे किसान कम जमीन में भी उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलों और नर्सरी से नियमित आय बना सकते हैं।

- **भारत में:** सीमित जोत वाले किसान पारंपरिक फसलों के बजाय नींबू की किस्मों और नर्सरी ग्राफ्टिंग को अतिरिक्त आमदनी का साधन बना सकते हैं। इससे उन्हें साल भर फलों की बिक्री के अलावा तैयार पौधों के जरिए भी नियमित नकदी मिलती रहती है।
- **मुजफ्फरपुर में:** सरैया और आसपास के उत्पादकों को स्थानीय स्तर पर ही 17 किस्मों के नींबू और ग्राफ्टेड पौधे उपलब्ध हो रहे हैं। इससे स्थानीय किसानों को बाहर से महंगे पौधे मंगाने की जरूरत नहीं पड़ती और वे घरेलू स्तर पर ही कम लागत में बागवानी शुरू कर सकते हैं।
- **घरेलू उपभोक्ताओं के लिए:** अचार और चटनी बनाने वाले खरीदारों को विशेष मौकों पर खटुआ और जमीरी जैसी दुर्लभ किस्में आसानी से मिल जाती हैं। इसके लिए उन्हें बड़े शहरों के व्यापारियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
- **व्यवसायिक विक्रेताओं के लिए:** नमकीन और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादक सीधे स्थानीय बाग से थोक भाव में कच्चा माल ले सकते हैं। इससे बिचौलियों का खर्च घटता है और ताजा उत्पाद उचित दरों पर मिल जाते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
पारंपरिक खेती में सीमित जमीन से पर्याप्त आय न होने के कारण कई किसान नवाचार और मूल्य संवर्धन की ओर रुख करते हैं। यहां शुरुआती कम पूंजी और लगातार तकनीकी प्रयोगों ने इस बागवानी मॉडल को सफल बनाया।

- **सीमित पूंजी और जोखिम प्रबंधन:** साल 2002 में केवल 50 रुपये से दो पौधे लगाकर शुरुआत की गई थी ताकि बड़ा आर्थिक जोखिम न उठाना पड़े। इसी धीमे और सुरक्षित तरीके से नर्सरी का विस्तार संभव हुआ।
- **विविधता और ग्राफ्टिंग तकनीक:** बाजार में साधारण नींबू की अधिकता के बीच अलग-अलग क्षेत्रों से किस्में लाकर ग्राफ्टिंग की गई। इस कदम ने फलों के साथ-साथ पौधों की बिक्री का एक नया बाजार खोल दिया।
- **खाद्य और प्रसंस्करण उद्योगों की विशिष्ट मांग:** नमकीन निर्माताओं और अचार बनाने वालों को अलग-अलग गुणों वाले नींबू की दरकार रहती है। इसी लक्षित मांग को पूरा करने के कारण कुछ किस्में 10 से 20 रुपये प्रति पीस तक बिक पाईं।

## सवाल-जवाब

### 1. श्रीकांत कुशवाहा कहां के रहने वाले हैं?
वह बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के सरैया प्रखंड अंतर्गत गोविंदपुर गांव के निवासी हैं।

### 2. उन्होंने नींबू की बागवानी की शुरुआत कब और कितने खर्च में की थी?
उन्होंने साल 2002 में महज 50 रुपये खर्च करके नींबू के दो पौधों से इस काम की शुरुआत की थी।

### 3. वर्तमान में उनके बगीचे में जमीन का रकबा और पेड़ों की संख्या कितनी है?
वर्तमान में उनके 4 कट्ठा जमीन के बगीचे में नींबू के लगभग 80 पेड़ लगे हुए हैं।

### 4. उनके बगीचे में नींबू की कितनी किस्में उगाई जा रही हैं?
उनके बगीचे में खटुआ, जमीरी, पातू, काजरी, बनारसी काजरी और हजारा सहित करीब 17 किस्में उगाई जा रही हैं।

### 5. नींबू की खेती और नर्सरी से उन्हें सालाना कितना मुनाफा होता है?
फलों की बिक्री और कलमबद्ध पौधों की नर्सरी से उन्हें हर साल 1 लाख रुपये से अधिक का शुद्ध मुनाफा होता है।

### 6. खटुआ और जमीरी नींबू का मुख्य उपयोग क्या है?
खटुआ नींबू का इस्तेमाल मिर्च के अचार और ओल की चटनी में होता है, जबकि जमीरी नींबू का उपयोग नमकीन बनाने में किया जाता है।

### 7. बगीचे में नींबू किस भाव पर बिकते हैं?
जमीरी नींबू करीब 5 रुपये प्रति पीस, खटुआ नींबू त्योहारों पर लगभग 10 रुपये प्रति पीस और कुछ खास किस्में 15 से 20 रुपये प्रति पीस तक बिकती हैं।

### 8. श्रीकांत कुशवाहा को इलाके में किस उपनाम से जाना जाता है?
उनके बगीचे को 'कुशवाहा हर्बल गार्डन' कहा जाता है और जादू के शो करने के कारण लोग उन्हें 'जादूगर जी' के नाम से भी जानते हैं।

## प्रेरणा और सबक
यह कहानी दर्शाती है कि सीमित संसाधनों और कम जमीन के बावजूद धैर्य, हुनर और लगन से बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

- **कम लागत से मजबूत शुरुआत:** बड़े निवेश का इंतजार करने के बजाय सिर्फ 50 रुपये और दो पौधों से काम शुरू किया गया। यह सिखाता है कि बड़े लक्ष्य पाने के लिए शुरुआत हमेशा छोटी और व्यावहारिक हो सकती है।
- **तकनीक और मूल्य संवर्धन पर जोर:** केवल फल बेचने के बजाय ग्राफ्टिंग सीखकर नर्सरी तैयार की गई। इससे उत्पाद का मूल्य बढ़ा और आय का दूसरा जरिया भी तैयार हुआ।
- **बाजार की जरूरत को पहचानना:** अचार, चटनी और नमकीन उद्योग के हिसाब से खटुआ और जमीरी जैसी किस्में चुनी गईं। बाजार की मांग समझकर की गई खेती हमेशा अधिक मुनाफा देती है।
- **धैर्य और बहुआयामी व्यक्तित्व:** दो दशक में 80 पेड़ों का बगीचा तैयार करने के साथ उन्होंने अपनी कला और जादू के शौक को भी जीवित रखा। यह दिखाता है कि सकारात्मक सोच से हर परिस्थिति में अपनी अलग पहचान बनाई जा सकती है।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._