# बिहार के किसानों को बड़ी राहत, भागलपुर में तैयार विंटर डॉन पौधों से महाराष्ट्र पर निर्भरता खत्म

> भागलपुर के किसान गूंजेश गुंजन ने इटली की विंटर डॉन स्ट्रॉबेरी किस्म के पौधे स्थानीय स्तर पर तैयार किए हैं। अब किसानों को 14 रुपये के बजाय महज 10 रुपये में पौधे उपलब्ध होंगे।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-08-27 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/bihar-ke-kisanon-ko-bari-rahata-bhagalpur-men-taiyara-winter-dawn-paudhon-se-maharashtra-para-nirbharata-khatma-23273 · **Language:** Hindi
**Tags:** भागलपुर स्ट्रॉबेरी खेती, विंटर डॉन किस्म, गूंजेश गुंजन, बिहार कृषि, महाराष्ट्र पौधे, बागवानी तकनीक

बिहार के भागलपुर जिले में पारंपरिक फसलों को छोड़कर अधिक मुनाफा देने वाली बागवानी की ओर किसानों का रुझान तेजी से बढ़ रहा है। मौसमी सब्जियों और फलों की खेती में स्ट्रॉबेरी अब एक प्रमुख विकल्प बनकर उभरी है। हालांकि स्ट्रॉबेरी की खेती में शुरुआती लागत और महंगे पौधों का चयन हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। इस समस्या का समाधान तलाशते हुए स्थानीय स्तर पर ही पौधे तैयार करने की सफल कोशिश की गई है।

## भागलपुर में तैयार हुए विंटर डॉन के पौधे
बागवानी के क्षेत्र में काम कर रहे किसान गूंजेश गुंजन ने स्ट्रॉबेरी की खेती को आसान और किफायती बनाने के लिए महत्वपूर्ण पहल की है। उन्होंने इटली की प्रसिद्ध किस्म विंटर डॉन के पौधों को भागलपुर की जलवायु के अनुकूल स्थानीय स्तर पर तैयार करने में सफलता हासिल की है। अब तक राज्य के किसानों को इन पौधों की आपूर्ति के लिए पूरी तरह अन्य राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता था।

## लागत में गिरावट और स्थानीय वातावरण का फायदा
पहले बिहार के किसान महाराष्ट्र से विंटर डॉन किस्म के पौधे 14 रुपये प्रति पौधे की दर से मंगवाते थे, जिससे परिवहन और पौधे खराब होने का जोखिम बना रहता था। गूंजेश गुंजन अब यही पौधे स्थानीय किसानों को मात्र 10 रुपये प्रति पौधे की कीमत पर उपलब्ध करा रहे हैं। स्थानीय पर्यावरण में तैयार होने के कारण इन पौधों की सहनशीलता अधिक है और खेतों में रोपते ही इनकी वृद्धि तेजी से होती है, जिससे फल की गुणवत्ता में सुधार आता है।

## मार्च के अंत तक लगातार फलन और अधिक उपज
विंटर डॉन किस्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी उच्च उत्पादन क्षमता है। यह किस्म अन्य साधारण प्रजातियों की तुलना में अधिक उपज देती है और मार्च के अंतिम सप्ताह तक इसमें लगातार फल आते रहते हैं। इसके अलावा इस किस्म के फलों की भण्डारण क्षमता यानी शेल्फ लाइफ काफी बेहतर होती है, जिससे दूर-दराज के बाजारों तक भेजने में सड़ने का खतरा कम रहता है।

## स्थानीय बाजार में बढ़ी मांग और उपभोक्ताओं को लाभ
क्षेत्र में स्ट्रॉबेरी का उत्पादन बढ़ने से स्थानीय बाजारों में ताजा फल आसानी से बिक्री के लिए उपलब्ध हो रहे हैं। उपभोक्ताओं को अब सस्ते दामों पर ताजा स्ट्रॉबेरी मिल रही है, जिससे इसकी मांग लगातार बनी हुई है। बाजार में मजबूत मांग के कारण किसानों को अपनी उपज बेचने में किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा है।

## इसका आप पर असर
भागलपुर में विंटर डॉन स्ट्रॉबेरी के स्थानीय पौधे तैयार होने से बिहार के किसानों की लागत घटेगी और स्थानीय उपभोक्ताओं को ताजा फल मिलेगा।

- **भारत में:** अन्य राज्यों के किसानों के लिए स्थानीय स्तर पर पौधशालाएं विकसित करने का एक मॉडल तैयार हुआ है। इससे लंबी दूरी के परिवहन में पौधों के खराब होने का जोखिम कम होता है।
- **बिहार में:** राज्य के किसानों को महाराष्ट्र से 14 रुपये में मिलने वाला पौधा अब भागलपुर में केवल 10 रुपये में मिलेगा। इससे प्रति पौधा 4 रुपये की सीधी बचत होगी और मार्च के अंत तक फल मिलने से मुनाफा बढ़ेगा।

## सवाल-जवाब

### 1. भागलपुर में विंटर डॉन स्ट्रॉबेरी के पौधे की कीमत क्या है?
भागलपुर में तैयार विंटर डॉन स्ट्रॉबेरी का पौधा किसानों को मात्र 10 रुपये प्रति पौधे की कीमत पर उपलब्ध कराया जा रहा है।

### 2. महाराष्ट्र से आने वाले पौधे की तुलना में स्थानीय पौधे में कितनी बचत हो रही है?
महाराष्ट्र से आने वाले पौधे की कीमत 14 रुपये थी, जबकि स्थानीय पौधा 10 रुपये में मिलने से किसानों को प्रति पौधा 4 रुपये की बचत हो रही है।

### 3. विंटर डॉन स्ट्रॉबेरी किस देश की किस्म है?
विंटर डॉन स्ट्रॉबेरी इटली की एक प्रसिद्ध और उच्च उपज देने वाली किस्म है।

### 4. विंटर डॉन किस्म की मुख्य खासियत क्या है?
यह किस्म मार्च के अंत तक लगातार फलन देती है, इसकी उत्पादन क्षमता अधिक है और इसके फलों की भण्डारण क्षमता बेहतर होती है।

## प्रेरणा और सबक
भागलपुर के किसान गूंजेश गुंजन की यह पहल यह दर्शाती है कि स्थानीय समस्याओं का समाधान खोजकर खेती को अधिक लाभदायक बनाया जा सकता है।

- **बाहरी निर्भरता कम करना:** महंगे आयात पर निर्भर रहने के बजाय स्थानीय स्तर पर विकल्प विकसित करने से लागत में भारी कटौती संभव है।
- **जलवायु अनुकूल नवाचार:** स्थानीय वातावरण के अनुसार पौधों का विकास करने से फसल की जीवित रहने की दर और उत्पादन दोनों में सुधार होता है।
- **सही किस्म का चयन:** बाजार की मांग और लंबे समय तक चलने वाली विंटर डॉन जैसी किस्मों को चुनकर किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं।

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