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  "type": "article",
  "title": "बिहार के मोहम्मद साजिद बने 'BBA बटेर वाले', नेपाल से दिल्ली तक फैलाया कारोबार",
  "summary": "मुजफ्फरपुर के युवा मोहम्मद साजिद ने बीबीए की पढ़ाई के बाद बटेर पालन को अपना व्यवसाय बनाया और आज वह नेपाल से लेकर दिल्ली तक अपने कारोबार का विस्तार कर चुके हैं।",
  "content": "मुजफ्फरपुर में यदि किसी व्यक्ति के भीतर कुछ अलग करने की तीव्र इच्छा हो, तो वह अपनी पढ़ाई पूरी होने के बाद रोजगार की तलाश में इधर-उधर भटकने के बजाय अपना खुद का कारोबार सफलतापूर्वक खड़ा कर सकता है। मुजफ्फरपुर निवासी मोहम्मद साजिद ने इस बात का एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया है। बेचलर इन बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन यानी बीबीए की डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने पारंपरिक नौकरी के रास्ते को छोड़कर बटेर फार्मिंग को अपना मुख्य करियर चुना। आज वह हर महीने लगभग 1 लाख बटेर के उत्पादन के मुकाम को सफलतापूर्वक हासिल कर चुके हैं।\n\nभाई से मिली प्रेरणा और वर्ष 2018 में रखी गई नींव\nमोहम्मद साजिद बताते हैं कि उन्हें बटेर पालन के इस व्यवसाय की प्रेरणा अपने बड़े भाई अब्दुल बारी उर्फ गुड्डू से प्राप्त हुई थी, जो पहले से ही इस प्रकार का फार्म चलाते थे। अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान ही साजिद ने अपने भाई के साथ रहकर बटेर पालन की बारीकी से समझ हासिल करना शुरू कर दिया था। हालांकि, कोविड महामारी के दौर में इस व्यवसाय को एक बड़ा नुकसान भी सहन करना पड़ा था, लेकिन उन्होंने इस मुश्किल परिस्थिति में भी अपनी हिम्मत नहीं खोई। अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद वर्ष 2018 में उन्होंने औपचारिक रूप से अपना खुद का नया फार्म स्थापित किया।\n\nएक छोटे से कमरे से लेकर 3 बीघा के विशाल सेटअप तक का सफर\nइस पूरे व्यवसाय की शुरुआत महज 2 हजार बटेर के चूजों और 20×20 फीट आकार के एक छोटे से कमरे के साथ हुई थी। समय के साथ अनुभव बढ़ने और बाजार की मांग को बेहतर ढंग से समझने के बाद साजिद ने अपने इस कारोबार का दायरा लगातार बढ़ाया। वर्तमान समय में करीब 3 बीघा भूमि के क्षेत्रफल पर उनका एक बहुत बड़ा फार्मिंग सेटअप संचालित हो रहा है। इस परिसर के भीतर ही बटेर की हैचिंग यानी अंडे से चूजा निकालने की प्रक्रिया और फार्मिंग दोनों की अत्याधुनिक व्यवस्थाएं एक ही जगह पर उपलब्ध कराई गई हैं।\n\nनेपाल और दिल्ली तक पहुंच चुका है कारोबार का दायरा\nमोहम्मद साजिद के इस फार्म से तैयार होने वाले बटेर की सप्लाई केवल बिहार राज्य तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर भारत के तमाम अन्य राज्यों में भी इसकी काफी अधिक मांग बनी हुई है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल के अलावा पड़ोसी देश नेपाल से भी उन्हें नियमित रूप से आर्डर प्राप्त होते हैं। जो नए लोग इस कारोबार में कदम रखना चाहते हैं, उन्हें साजिद के फार्म से 1 दिन के छोटे चूजे, 7 दिन के तैयार चूजे और पूरी तरह तैयार बटेर यानी रेडी बर्ड आसानी से उपलब्ध करा दिए जाते हैं।\n\n50 लोगों को मिला रोजगार और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी\nबटेर पालन के इस व्यवसाय के जरिए साजिद ने न केवल खुद को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि स्थानीय स्तर पर कई लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित किए हैं। उनके इस फार्म में लगभग 30 से 40 लोग प्रत्यक्ष रूप से अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जबकि प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर कुल मिलाकर लगभग 50 परिवारों की आजीविका इसी कारोबार से चल रही है। इनमें स्थानीय महिलाओं की भी अच्छी खासी भागीदारी देखने को मिलती है। मोहम्मद साजिद का मानना है कि होटल और रेस्टोरेंट सेक्टर में बटेर के मांस तथा अंडों की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। यदि सही जानकारी, साफ-सफाई, बेहतर प्रबंधन और बाजार की अच्छी समझ हो, तो बटेर फार्मिंग आज के दौर के युवाओं के लिए एक बेहद लाभकारी व्यवसाय साबित हो सकता है।\n\nइसका आप पर असर\nयह सफलता की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो नौकरी की तलाश के बजाय स्वरोजगार और कृषि आधारित व्यवसायों की ओर रुख करना चाहते हैं।\n\n• भारत में: कृषि और पशुपालन क्षेत्र से जुड़े युवाओं को छोटे स्तर से शुरुआत करके बड़े पैमाने पर व्यवसाय खड़ा करने का प्रोत्साहन मिलता है।\n• मुजफ्फरपुर में: स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होते हैं और क्षेत्रीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nबटेर पालन के इस कारोबार के विस्तार और सफलता के पीछे व्यवस्थित योजना और बाजार की मांग का बड़ा हाथ है।\n\n• शुरुआती अनुभव: साजिद ने अपने भाई के फार्म पर काम करते हुए संकटों के बीच व्यवसाय की व्यावहारिक बारीकियां सीखीं।\n• बाजार की मांग: होटल और रेस्टोरेंट सेक्टर में बटेर के मांस और अंडों की लगातार बढ़ती खपत ने इस कारोबार को स्थिरता दी।\n• विस्तार नीति: छोटे कमरे से शुरू होकर आधुनिक सुविधाओं से युक्त तीन बीघा के सेटअप तक पहुंचने से उत्पादन क्षमता में भारी इजाफा हुआ।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मोहम्मद साजिद ने अपनी शिक्षा कहां से पूरी की?\nउन्होंने बेचलर इन बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन यानी बीबीए की डिग्री पूरी की है।\n\n2. उन्होंने बटेर फार्मिंग का व्यवसाय कब शुरू किया?\nउन्होंने वर्ष 2018 में औपचारिक रूप से अपना खुद का फार्म शुरू किया था।\n\n3. इस व्यवसाय की शुरुआत कितने सेटअप से हुई थी?\nइस व्यवसाय की शुरुआत महज 2 हजार बटेर के चूजों और 20×20 फीट के एक छोटे कमरे से हुई थी।\n\n4. वर्तमान में उनका फार्म कितने क्षेत्रफल में फैला है?\nउनका वर्तमान फार्मिंग सेटअप लगभग 3 बीघा क्षेत्र में फैला हुआ है।\n\n5. उनके फार्म से बटेर की सप्लाई कहां-कहां होती है?\nउनके फार्म से बिहार के अलावा उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और पड़ोसी देश नेपाल तक सप्लाई की जाती है।\n\nप्रेरणा और सबक\nमोहम्मद साजिद का यह सफर छोटे व्यवसायों को आगे बढ़ाने की एक अनुकरणीय मिसाल पेश करता है।\n\n• संकट में धैर्य: कोविड जैसी गंभीर चुनौतियों के दौरान भी नुकसान झेलने के बाद हिम्मत न हारें।\n• व्यावहारिक ज्ञान: किसी भी व्यवसाय को शुरू करने से पहले उसकी मैदानी और तकनीकी बारीकियों को गहराई से समझें।\n• रोजगार सृजन: अपने व्यवसाय को इस तरह बढ़ाएं कि स्थानीय लोगों और महिलाओं को भी आजीविका का साधन मिल सके।",
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  "category": "सक्सेस स्टोरी",
  "publishedAt": "2026-09-13",
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    "बटेर फार्मिंग",
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    "बिज़नेस आइडिया"
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