# रोम में चमका बिहार का नाम, ‘मदर्स ऑफ करेज’ डॉक्यूमेंट्री को मिला प्रतिष्ठित संयुक्त राष्ट्र पुरस्कार

> इटली की राजधानी रोम में आयोजित एक समारोह में ‘मदर्स ऑफ करेज’ डॉक्यूमेंट्री को प्रतिष्ठित UN SDG Action Award से नवाजा गया है।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-11-08 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/bihar-shines-in-rome-as-mothers-of-courage-documentary-wins-un-sdg-action-award-57702 · **Language:** Hindi
**Tags:** मदर्स ऑफ करेज, यूएन अवार्ड, बिहार शिक्षा, महिला सशक्तीकरण, खुशबू अवस्थी, पूनम दीदी, रोम

बिहार की माटी की जुझारू महिलाओं और बेटियों की लंबी लड़ाई को वैश्विक स्तर पर एक बहुत बड़ा मुकाम हासिल हुआ है। इटली की राजधानी रोम में आयोजित एक गरिमामयी समारोह के दौरान ‘मदर्स ऑफ करेज’ नामक डॉक्यूमेंट्री फिल्म को संयुक्त राष्ट्र के एसडीजी एक्शन अवार्ड से सम्मानित किया गया। इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर पुरस्कार प्राप्त करने के लिए बिहार की खुशबू अवस्थी विशेष रूप से रोम पहुंची थीं।

## ग्रामीण महिलाओं के नाम किया गया सम्मान
पुरस्कार स्वीकार करने के पश्चात खुशबू अवस्थी ने इस पूरी सफलता का श्रेय मुजफ्फरपुर की पूनम दीदी, पटना की उर्मिला दीदी और उन तमाम अनगिनत ग्रामीण महिलाओं को समर्पित किया, जो अपनी बेटियों की बेहतर तालीम और उनके स्वावलंबन के लिए दिन-रात संघर्षरत हैं। इस अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि के सामने आने के बाद मुजफ्फरपुर की पूनम दीदी ने अपनी प्रसन्नता व्यक्त की और बताया कि खुशबू अवस्थी काफी लंबे समय से शिक्षा के प्रसार के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही हैं।

## संगठनों के जरिए जमीनी स्तर पर प्रयास
विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से देश के कई राज्यों के साथ-साथ बिहार में भी शिक्षा की स्थिति को बेहतर बनाने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। मंत्र फॉर चेंज और शिक्षालोकम जैसी पहलों के तहत राज्य सरकार के शिक्षा विभाग के साथ एक एमओयू संपन्न हुआ था। इस अनुबंध के अंतर्गत मीना मंच के जरिए किशोरियों के सशक्तीकरण से जुड़े मुद्दों पर विशेष जोर दिया गया, जिसमें मुख्य रूप से बाल विवाह जैसी कुप्रथा और लड़कियों की पढ़ाई बीच में ही छूट जाने जैसी गंभीर समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया था।

## वर्ष 1994 से जारी है संघर्ष की लंबी यात्रा
पूनम दीदी ने अपने संघर्षों के दिनों को याद करते हुए साझा किया कि उन्होंने महिला समाख्या से जुड़कर मुजफ्फरपुर के बांद्रा प्रखंड और शिवहर के झूमरी क्षेत्र में जमीनी स्तर पर अभियान चलाए थे। साल 1994 में बिहार शिक्षा परियोजना से जुड़ने के बाद शुरुआती तीन वर्षों तक उन्होंने प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी अपनी सेवाएं दीं। इसके बाद वर्ष 1997 से लगातार मुजफ्फरपुर क्षेत्र में सक्रिय रहकर महिला सशक्तीकरण और शिक्षा की अलख जगाती रहीं, हालांकि महिला समाख्या का यह कार्यक्रम साल 2016 में बंद हो गया था।

## शिक्षाग्राम अभियान के जरिए दूर हो रही हैं मुश्किलें
पूनम दीदी के अनुसार, जिस शिक्षाग्राम अभियान ने इस अंतरराष्ट्रीय सम्मान की नींव मजबूत की है, वह मुख्य रूप से ग्रामीण विद्यालयों की बुनियादी समस्याओं के समाधान पर केंद्रित है। इस अनूठी पहल में छात्र-छात्राओं, शिक्षकों, अभिभावकों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को एक ही मंच पर लाया जाता है, ताकि शिक्षा से जुड़ी बाधाओं पर खुलकर चर्चा हो सके और सामूहिक सहयोग से उनका स्थायी समाधान तलाशा जा सके।

## ग्रामीण महिलाओं के सामूहिक प्रयासों की जीत
इस पूरी उपलब्धि पर बात करते हुए पूनम दीदी ने स्पष्ट किया कि इस ऐतिहासिक सम्मान की असली हकदार वे ग्रामीण महिलाएं हैं जो हर दिन अपनी बेटियों की शिक्षा सुनिश्चित करने और बाल विवाह के खिलाफ डटी रहती हैं। खुशबू अवस्थी ने वैश्विक मंच पर इन महिलाओं का नाम लेकर पूरे समाज का मान बढ़ाया है। यह पुरस्कार किसी एक व्यक्ति या विशेष संस्था की उपलब्धि नहीं है, बल्कि उन सभी महिलाओं के साझा प्रयासों का परिणाम है जिन्होंने इस कठिन मुहिम को आज इस मुकाम तक पहुंचाया है।

## इसका आप पर असर
यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और महिला अधिकारों के लिए काम कर रहे कार्यकर्ताओं और स्थानीय समुदायों के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन है।

- **राष्ट्रीय स्तर पर:** यह उपलब्धि देश भर के ग्रामीण इलाकों में बाल विवाह रोकने और बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देने वाले जमीनी अभियानों को मजबूत करती है। ऐसे प्रयासों से सरकारी योजनाओं और स्थानीय समुदायों के बीच सहयोग की नई राहें खुलती हैं।
- **बिहार में:** राज्य के मुजफ्फरपुर, पटना और शिवहर जैसे जिलों में महिलाओं और किशोरियों के अधिकारों के लिए काम कर रहे स्थानीय संगठनों को इससे विशेष प्रोत्साहन मिलेगा। इससे शिक्षा विभाग और ग्रामीण स्तर के कार्यकर्ताओं के बीच संवाद और बेहतर होने की उम्मीद है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान ग्रामीण भारत में शिक्षा के प्रसार और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ दशकों से चलाए जा रहे जमीनी अभियानों के परिणाम स्वरूप मिला है।

- **शिक्षाग्राम अभियान:** ग्रामीण विद्यालयों की समस्याओं को केंद्र में रखकर बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों को एक मंच पर लाने से स्थानीय स्तर की शिक्षा संबंधी बाधाओं को दूर करने में मदद मिली।
- **संस्थागत सहयोग:** मंत्र फॉर चेंज और शिक्षालोकम जैसी संस्थाओं द्वारा शिक्षा विभाग के साथ मिलकर मीना मंच के माध्यम से किशोरियों के सशक्तीकरण पर विशेष काम किया गया।
- **ऐतिहासिक संघर्ष:** वर्ष 1994 से महिला समाख्या और बिहार शिक्षा परियोजना के साथ जुड़कर कार्यकर्ताओं द्वारा लगातार मुजफ्फरपुर और शिवहर जैसे क्षेत्रों में किए गए निरंतर प्रयासों ने इस सफलता की नींव रखी।

## सवाल-जवाब

### 1. ‘मदर्स ऑफ करेज’ डॉक्यूमेंट्री को कौन सा पुरस्कार मिला है?
इस डॉक्यूमेंट्री को संयुक्त राष्ट्र का प्रतिष्ठित UN SDG Action Award मिला है।

### 2. यह पुरस्कार समारोह कहाँ आयोजित किया गया था?
यह पुरस्कार समारोह इटली की राजधानी रोम में आयोजित किया गया था।

### 3. रोम में पुरस्कार ग्रहण करने कौन गईं थीं?
बिहार की बेटी खुशबू अवस्थी इस पुरस्कार को ग्रहण करने के लिए रोम पहुँची थीं।

### 4. यह डॉक्यूमेंट्री मुख्य रूप से किस विषय पर आधारित है?
यह डॉक्यूमेंट्री ग्रामीण महिलाओं और बेटियों के संघर्ष, शिक्षा और उनके सशक्तीकरण पर आधारित है।

### 5. पूनम दीदी किस क्षेत्र से जुड़ी हुई हैं?
पूनम दीदी मुजफ्फरपुर क्षेत्र से जुड़ी हैं और लंबे समय से शिक्षा एवं महिला सशक्तीकरण के लिए काम कर रही हैं।

### 6. मीना मंच के माध्यम से किन समस्याओं पर काम किया गया?
मीना मंच के जरिए बाल विवाह और लड़कियों की पढ़ाई बीच में छूटने जैसी समस्याओं पर प्रमुखता से काम किया गया।

### 7. महिला समाख्या का कार्यक्रम कब बंद हुआ था?
महिला समाख्या का कार्यक्रम वर्ष 2016 में बंद हो गया था।

### 8. शिक्षाग्राम अभियान का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस अभियान का उद्देश्य ग्रामीण विद्यालयों की समस्याओं का समाधान करने के लिए सभी संबंधित पक्षों को एक मंच पर लाना है।

## प्रेरणा और सबक
मदर्स ऑफ करेज और इससे जुड़े कार्यकर्ताओं की यह यात्रा समाज में बदलाव लाने के इच्छुक लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत है।

- **जमीनी स्तर पर जुड़ाव:** बदलाव लाने के लिए स्थानीय समस्याओं को गहराई से समझना और समुदाय के हर वर्ग को साथ लेकर चलना आवश्यक है।
- **निरंतरता का महत्व:** शिक्षा और महिला अधिकारों जैसे मुद्दों पर सफलता रातों-रात नहीं मिलती, बल्कि इसके लिए दशकों तक लगातार संघर्ष करना पड़ता है।
- **सामूहिक प्रयास:** किसी भी बड़े सामाजिक अभियान की सफलता में व्यक्तिगत योगदान से ज्यादा सामूहिक और संस्थागत सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

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