बीकानेर के किसान अजय रैन ने पॉलीहाउस खेती से बदली किस्मत, खीरा उगाकर सालाना कमा रहे 15 लाख रुपये बीकानेर के किल्चू देवड़ान गांव के युवा किसान अजय रैन ने 1 एकड़ पॉलीहाउस में खीरे की खेती से सालाना 15 लाख रुपये का कारोबार खड़ा किया है. राष्ट्रीय बागवानी मिशन की मदद से वे हर साल 400 से 500 क्विंटल उत्पादन हासिल कर रहे हैं. रेगिस्तानी सरजमीं पर जहां पानी की कमी और भीषण गर्मी के कारण पारंपरिक खेती करना बेहद कठिन माना जाता है, वहां आधुनिक कृषि तकनीकों ने नई संभावनाएं जगाई हैं. बीकानेर जिले के किल्चू देवड़ान गांव के रहने वाले युवा किसान अजय रैन ने इस विपरीत परिस्थिति को अवसर में बदल दिया है. उन्होंने केवल एक एकड़ जमीन पर पॉलीहाउस तकनीक अपनाकर खीरे की व्यावसायिक खेती शुरू की और आज वे इससे बंपर पैदावार और शानदार मुनाफा हासिल कर रहे हैं. उनकी यह सफलता राजस्थान के शुष्क इलाकों में खेती करने वाले अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी है. शुरुआती चुनौतियों से लेकर बंपर उत्पादन तक का सफर अजय रैन ने वर्ष 2024 में उद्यान विभाग के अधिकारियों के मार्गदर्शन में कदम बढ़ाया. उन्होंने राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत मिलने वाली सरकारी सहायता और अनुदान की मदद से अपने खेत में एक एकड़ का पॉलीहाउस तैयार करवाया. शुरुआत के दौर में फसल प्रबंधन की बारीकियों को समझने में कुछ दिक्कतें आईं और लागत के हिसाब से तुरंत बड़ा लाभ नहीं मिल सका. हालांकि अजय ने हार नहीं मानी और कृषि विशेषज्ञों की सलाह पर बेहतर फसल प्रबंधन, संतुलित सिंचाई प्रणाली और आधुनिक तकनीकों को अपनाया. लगातार अनुभव हासिल करने के बाद उनकी मेहनत रंग लाने लगी और उत्पादन में अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज की गई. वर्तमान में अजय रैन एक एकड़ पॉलीहाउस में एक ही वर्ष के दौरान खीरे की दो फसलें सफलतापूर्वक उगा रहे हैं. इन दोनों फसलों को मिलाकर वे सालाना लगभग 400 से 500 क्विंटल गुणवत्तापूर्ण खीरे का बंपर उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं. पॉलीहाउस का नियंत्रित वातावरण फसल को बाहर के अत्यधिक तापमान और कीटों के हमले से सुरक्षित रखता है, जिससे खीरे की गुणवत्ता बाजार में काफी बेहतर बनी रहती है. लागत, कमाई और अंतरराज्यीय मंडियों में मांग पॉलीहाउस खेती में वित्तीय प्रबंधन और बाजार तक पहुंच बहुत मायने रखती है. अजय रैन के अनुसार एक एकड़ पॉलीहाउस में साल भर में खीरे की दो फसलें तैयार करने में बीज, जैविक और रासायनिक उर्वरक, सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली, कीट एवं रोग नियंत्रण तथा मजदूरी सहित कुल मिलाकर लगभग 5 लाख रुपये का खर्च आता है. इसके विपरीत जब फसल तैयार होकर बाजार में बिकती है, तो खीरे की गुणवत्ता और बाजार में मांग के आधार पर उन्हें 22 रुपये से लेकर 40 रुपये प्रति किलोग्राम तक का बेहतरीन थोक भाव मिल जाता है. इस बेहतर मूल्य निर्धारण की वजह से उनकी कुल वार्षिक बिक्री लगभग 15 लाख रुपये तक पहुंच जाती है. शुरुआत में वे अपनी उपज को केवल बीकानेर के स्थानीय बाजारों और मंडियों में ही बेचा करते थे. लेकिन जब पॉलीहाउस से खीरे का बंपर उत्पादन होने लगा और माल की गुणवत्ता की सराहना होने लगी, तो उन्होंने अपनी पहुंच का विस्तार किया. अब उनकी खेत की पैदावार बीकानेर से निकलकर दिल्ली, चंडीगढ़, लुधियाना और पंजाब की प्रमुख थोक मंडियों तक सप्लाई की जा रही है. अंतरराज्यीय मंडियों में खीरे की भारी मांग होने से उन्हें उपज का सही और अधिक लाभकारी दाम मिल रहा है, जिससे खेती अब उनके लिए एक बेहद लाभदायक व्यावसायिक मॉडल बन गई है. बीकानेर बन रहा पॉलीहाउस हब, मिल रही 70 प्रतिशत तक सब्सिडी संरक्षित खेती के इस मॉडल को बढ़ावा देने में सरकारी योजनाओं का बड़ा योगदान रहा है. उद्यान विभाग बीकानेर के सहायक निदेशक मुकेश गहलोत के अनुसार पूरा बीकानेर क्षेत्र अब तेजी से पॉलीहाउस हब के रूप में पहचान बना रहा है. विषम भौगोलिक परिस्थितियों और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में पॉलीहाउस तकनीक किसानों के लिए एक जीवनदायिनी प्रणाली साबित हो रही है. इस तकनीक के माध्यम से किसान न केवल मौसम की मार से अपनी फसलों को बचा पाते हैं, बल्कि बूंद-बूंद सिंचाई और ड्रिप सिस्टम से पानी की भारी बचत भी करते हैं. इससे कम जल उपयोग में भी फसल का उत्पादन और गुणवत्ता दोनों कई गुना बढ़ जाते हैं. राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत संचालित संरक्षित खेती कार्यक्रम में किसानों को वित्तीय प्रोत्साहन देने का स्पष्ट प्रावधान है. योजना के तहत पॉलीहाउस निर्माण पर सामान्य वर्ग के किसानों को 50 प्रतिशत तक का अनुदान प्रदान किया जाता है. वहीं अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा लघु और सीमांत वर्ग के किसानों को 70 प्रतिशत तक की भारी सब्सिडी दी जाती है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के इस दौर में जहां जल संसाधन सीमित हो रहे हैं, वहां ऐसी आधुनिक संरक्षित खेती की तकनीकें किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उनकी आय दोगुनी करने में मील का पत्थर साबित हो रही हैं. इसका आप पर असर • भारत में: राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत पॉलीहाउस निर्माण पर 50 से 70 प्रतिशत तक सब्सिडी उपलब्ध है, जिससे किसान कम पानी में अधिक मुनाफा कमा सकते हैं. • बीकानेर में: शुष्क जलवायु और पानी की कमी का सामना कर रहे स्थानीय किसान पारंपरिक फसलों के बजाय पॉलीहाउस में खीरे जैसी नगदी फसलों की खेती करके अपनी आय बढ़ा सकते हैं. सवाल-जवाब 1. अजय रैन ने पॉलीहाउस में खीरे की खेती कब और कैसे शुरू की? अजय रैन ने वर्ष 2024 में उद्यान विभाग के मार्गदर्शन और राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत मिलने वाले अनुदान की मदद से 1 एकड़ पॉलीहाउस स्थापित करके खेती शुरू की. 2. एक एकड़ पॉलीहाउस से अजय रैन को खीरे का कितना उत्पादन मिलता है? अजय रैन एक एकड़ पॉलीहाउस में साल में दो फसलें लेकर लगभग 400 से 500 क्विंटल खीरे का उत्पादन प्राप्त करते हैं. 3. खीरे की खेती की लागत और सालाना बिक्री का आंकड़ा क्या है? दो फसलों पर बीज, खाद, सिंचाई और प्रबंधन मिलाकर लगभग 5 लाख रुपये की लागत आती है, जबकि अच्छी कीमत मिलने पर कुल बिक्री 15 लाख रुपये तक पहुंच जाती है. 4. अजय रैन का खीरा किन-किन मंडियों में बेचा जाता है? शुरुआत में बीकानेर के स्थानीय बाजार में बिक्री के बाद अब उनकी उपज दिल्ली, चंडीगढ़, लुधियाना और पंजाब की बड़ी थोक मंडियों में भेजी जा रही है. 5. राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत पॉलीहाउस निर्माण पर कितनी सब्सिडी मिलती है? योजना के तहत सामान्य वर्ग के किसानों को 50 प्रतिशत तथा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और लघु-सीमांत किसानों को 70 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है. प्रेरणा और सबक • सरकारी योजनाओं का उपयोग: राष्ट्रीय बागवानी मिशन जैसे कार्यक्रमों और सब्सिडी का लाभ उठाकर आधुनिक बुनियादी ढांचा तैयार करना. • शुरुआती असफलता से सीख: पहले सत्र में कम लाभ मिलने के बावजूद कृषि विशेषज्ञों की सलाह लेकर फसल प्रबंधन में सुधार करना. • बाजार का विस्तार: केवल स्थानीय बाजार तक सीमित रहने के बजाय पंजाब, दिल्ली और चंडीगढ़ जैसी बड़ी अंतरराज्यीय मंडियों से जुड़कर बेहतर दाम प्राप्त करना. • सीमित संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग: 1 एकड़ की सीमित जमीन और कम पानी में पॉलीहाउस तकनीक के जरिए साल में दो फसलें उगाना. https://trendkia.com/success-stories/bikaner-ke-kisana-ajay-rain-ne-polihausa-kheti-se-badali-kismata-khira-ugakara-salana-kama-rahe-15-lakha-rupaye-14312 TrendKia — Har trend, sabse pehle.