बिना बिजली और शून्य जल बर्बादी: चेन्नई के चंद्रशेखरन जे. का नवाचार, 5 लाख परिवारों तक पहुंचाया स्वच्छ पेयजल प्लास्टिक इंजीनियर चंद्रशेखरन जे. ने टेराफिल नैनो-तकनीक से बिना बिजली चलने वाला वॉटर प्यूरीफायर बनाया है। उनका यह नवाचार राजस्थान, बिहार और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों के 5 लाख से अधिक परिवारों तक साफ पानी पहुंचा चुका है। चेन्नई के 58 वर्षीय प्लास्टिक प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ चंद्रशेखरन जे. ने ग्रामीण भारत में पेयजल की गंभीर समस्या को दूर करने के लिए एक विशेष नेचुरल वॉटर प्यूरीफायर विकसित किया है। खुद को 'एक्सीडेंटल एंटरप्रेन्योर' कहने वाले चंद्रशेखरन की कंपनी वत्सन वाटर फिल्टर द्वारा तैयार यह उपकरण पूरी तरह से बिना बिजली के काम करता है। यह प्यूरीफायर अब तक देश के दूरदराज इलाकों में रहने वाले लगभग 5 लाख परिवारों तक पहुंच चुका है, जहां लोग दूषित पानी पीने या बच्चों का स्कूल छुड़वाने के लिए मजबूर थे। कॉर्पोरेट करियर से सामाजिक बदलाव की ओर यात्रा चंद्रशेखरन जे. ने लगभग 35 वर्षों तक एक बड़ी कंपनी में प्लास्टिक प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ के रूप में सेवाएं दीं। उनकी जिंदगी में मोड़ तब आया जब करीब 45 वर्ष की उम्र में वे तमिलनाडु के ग्रामीण क्षेत्रों में मंदिरों के जीर्णोद्धार कार्य के सिलसिले में गए। वहां उन्होंने देखा कि ग्रामीण लोग पीने के पानी के भारी संकट से जूझ रहे थे। स्कूलों और शौचालयों में पानी की अनुपलब्धता के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी और कई माता-पिता अपने बच्चों का स्कूल छुड़वाने के लिए विवश थे। इस स्थिति ने उन्हें एक ऐसा सस्ता और टिकाऊ विकल्प तलाशने की प्रेरणा दी जो बिना किसी जटिल तकनीक के हर घर को साफ पानी उपलब्ध करा सके। टेराफिल नैनो-तकनीक की कार्यप्रणाली और विशेषताएं इस वॉटर फिल्टर की सबसे प्रमुख विशेषता इसकी कार्यप्रणाली है, जो सीएसआईआर-आईएमएमटी की टेराफिल नैनो-तकनीक पर आधारित है। इसमें इस्तेमाल होने वाली फिल्टर कैंडल विशेष नैनो-क्ले कणों से तैयार की जाती है। जब गंदा पानी या बारिश का पानी इस फिल्टर से होकर गुजरता है, तो इसके नैनो-कण हानिकारक बैक्टीरिया, अशुद्धियों और अतिरिक्त आयरन को ऊपरी सतह पर ही रोक लेते हैं। इसके साथ ही यह पानी के प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखता है और इसमें मौजूद आवश्यक खनिजों को नष्ट नहीं होने देता, जिससे पानी का पीएच स्तर संतुलित रहता है। पारंपरिक RO की तुलना में शून्य जल बर्बादी और शून्य रखरखाव खर्च सामान्य आरओ (RO) प्यूरीफायर जहां प्यूरीफिकेशन के दौरान भारी मात्रा में पानी बर्बाद करते हैं, वहीं यह नेचुरल प्यूरीफायर शून्य जल बर्बादी के सिद्धांत पर काम करता है। इसमें बारिश के पानी और अत्यधिक गंदे जल को भी कुछ ही मिनटों में सुरक्षित पेयजल में बदला जा सकता है। इसके अलावा, इसके रखरखाव के लिए किसी भी प्रकार के एनुअल मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट (AMC) की आवश्यकता नहीं होती, जिससे ग्रामीण परिवारों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ता। हल्का और मजबूत डिजाइन होने के कारण इसे एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाना बेहद आसान है। ग्लोबल एक्वा एक्सपो में प्रदर्शन और देशव्यापी प्रसार नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित तीन दिवसीय ग्लोबल एक्वा एक्सपो में जब चंद्रशेखरन जे. ने अपने इस नेचुरल वॉटर प्यूरीफायर का प्रदर्शन किया, तो वहां मौजूद विशेषज्ञों और दर्शकों ने इसकी सादगी और प्रभावशीलता की सराहना की। वर्तमान में यह फिल्टर राजस्थान, पूर्वोत्तर राज्यों, झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के ऐसे क्षेत्रों में उपयोग किया जा रहा है जहां शुद्ध पेयजल की भारी कमी थी। इस पहल ने न केवल दूषित पानी से होने वाली बीमारियों को कम किया है, बल्कि स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसका आप पर असर भारत में: बिना बिजली और बिना बैटरी चलने वाली यह तकनीक देश के दूरदराज और बिजली-मुक्त ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने का एक टिकाऊ और किफायती समाधान देती है। ग्रामीण परिवारों के लिए: पारंपरिक RO प्यूरीफायर की तरह पानी की बर्बादी और महंगे रखरखाव खर्च के बिना गंदे पानी को तुरंत पीने योग्य बनाया जा सकता है, जिससे बीमारियां कम होती हैं और बच्चों की स्कूल उपस्थिति सुधरती है। सवाल-जवाब 1. चंद्रशेखरन जे. का वॉटर प्यूरीफायर किस तकनीक पर काम करता है? यह प्यूरीफायर सीएसआईआर-आईएमएमटी की टेराफिल नैनो-तकनीक पर काम करता है, जिसमें नैनो-क्ले कणों से बनी फिल्टर कैंडल का उपयोग किया जाता है। 2. क्या इस वॉटर फिल्टर को चलाने के लिए बिजली की आवश्यकता होती है? नहीं, यह वॉटर फिल्टर पूरी तरह बिना बिजली और बिना बैटरी के काम करता है। 3. यह प्यूरीफायर पारंपरिक RO फिल्टर से किस प्रकार अलग है? यह पारंपरिक RO की तरह पानी बर्बाद नहीं करता है, आवश्यक खनिजों को नष्ट होने से बचाता है और इसके लिए किसी एनुअल मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट (AMC) की आवश्यकता नहीं होती। 4. चंद्रशेखरन जे. की कंपनी का क्या नाम है और यह किन राज्यों में काम कर रही है? उनकी कंपनी का नाम वत्सन वाटर फिल्टर है। यह राजस्थान, पूर्वोत्तर राज्यों, झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु सहित कई क्षेत्रों में 5 लाख से अधिक फिल्टर पहुंचा चुकी है। 5. चंद्रशेखरन जे. को यह वाटर फिल्टर बनाने की प्रेरणा कहां से मिली? लगभग 45 वर्ष की आयु में तमिलनाडु के गांवों में मंदिर जीर्णोद्धार के दौरान उन्होंने देखा कि पानी की कमी के कारण बच्चों को स्कूल छोड़ना पड़ रहा था, जिससे उन्हें यह नवाचार करने की प्रेरणा मिली। प्रेरणा और सबक • समस्या से समाधान की ओर: मंदिर जीर्णोद्धार के दौरान गांव में पानी का संकट देखकर केवल दुख जताने के बजाय चंद्रशेखरन ने एक व्यावहारिक समाधान की खोज की। • तकनीकी ज्ञान का सामाजिक उपयोग: 35 वर्षों के प्लास्टिक प्रौद्योगिकी अनुभव का उपयोग करके एक ऐसा उत्पाद डिजाइन किया जो समाज की सबसे जमीनी जरूरत को पूरा करता है। • आसान और सुलभ डिजाइन: एक सफल उत्पाद वही है जो बिना बिजली और बिना महंगे रखरखाव के आम लोगों के काम आ सके। • शिक्षा पर सकारात्मक प्रभाव: स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था करके उन्होंने बच्चों, विशेषकर बालिकाओं के स्कूल छोड़ने की गंभीर समस्या को दूर करने में मदद की। https://trendkia.com/success-stories/bina-bijali-aura-shunya-jala-barbadi-chennai-ke-chandrasekharan-j-ka-navachara-5-lakha-parivaron-taka-pahunchaya-svachchha-peyajal-15103 TrendKia — Har trend, sabse pehle.