# बोकारो के बिजली मिस्त्री श्यामलाल महतो ने बनाई बालू छानने की मशीन, लागत सिर्फ 5500 रुपये

> झारखंड के बोकारो जिले के एक इलेक्ट्रीशियन ने पारंपरिक तरीकों के विकल्प के तौर पर सिर्फ 5500 रुपये की लागत से बालू छानने वाली बिजली चालित मशीन तैयार की है। यह मशीन एक से दो घंटे में एक ट्रैक्टर बालू छान देती है, जिससे समय और मेहनत दोनों की बचत हो रही है।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-11-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/bokaro-electrician-shyamlal-mahto-builds-sand-sieving-machine-for-rs-5500-57666 · **Language:** Hindi
**Tags:** श्यामलाल महतो, बोकारो न्यूज, बालू छानने की मशीन, देसी जुगाड़, झारखंड आविष्कार, इलेक्ट्रीशियन इनोवेशन

झारखंड के बोकारो जिले में तकनीकी नवाचार का एक अनूठा मामला सामने आया है, जहां एक स्थानीय कारीगर ने अपनी मेहनत और देसी तकनीक के दम पर निर्माण कार्य को आसान बना दिया है। जिले के चंदनकियारी प्रखंड के सिमुलिया गांव के रहने वाले श्यामलाल महतो ने बेहद कम लागत में बालू छानने की एक ऐसी अनोखी मशीन तैयार की है, जो निर्माण कार्यों से जुड़े लोगों के लिए बेहद मददगार साबित हो रही है। इस आविष्कार की सबसे बड़ी खूबी इसकी कम लागत और उच्च कार्यक्षमता है, जिससे मजदूरों का शारीरिक श्रम काफी हद तक कम हो गया है और समय की भी भारी बचत हो रही है।

## परेशानी से उपजा नया आइडिया
श्यामलाल महतो पेशे से एक इलेक्ट्रीशियन हैं और वह पंखे, मोटर तथा अन्य घरेलू बिजली उपकरणों की मरम्मत का काम करते हैं। उन्हें बचपन से ही तकनीकी प्रयोग करने और कुछ हटकर करने का शौक रहा है। उन्होंने अपने आसपास निर्माण स्थलों पर मजदूरों को पारंपरिक तरीकों से घंटों बालू छानते हुए देखा था, जिसमें अत्यधिक शारीरिक मेहनत लगती थी और काफी समय बर्बाद होता था। इसी समस्या को हल करने की सोच ने उन्हें एक स्वचालित समाधान खोजने के लिए प्रेरित किया। लगातार पांच महीनों की कड़ी मेहनत और तकनीकी प्रयोगों के बाद उन्होंने अंततः यह कामगार मशीन सफलतापूर्वक तैयार कर ली।

## मात्र 5500 रुपये में तैयार हुई मशीन की तकनीकी विशेषताएं
इस पूरी मशीन को बनाने में श्यामलाल महतो की जेब से केवल 5,500 रुपये खर्च हुए हैं। यह उपकरण पूरी तरह बिजली से संचालित होता है और इसमें ढाई हॉर्स पावर की एक शक्तिशाली मोटर लगाई गई है। मशीन के भीतर विशेष रूप से डिजाइन की गई जाली और मोटर का तालमेल बालू को तेजी से छानने का काम करता है। इसमें एक विशेष स्पीड कंट्रोलर भी जोड़ा गया है, जिसकी मदद से काम की जरूरत के अनुसार मशीन की गति को आसानी से कम या ज्यादा किया जा सकता है। इसके अलावा इसमें सुरक्षा और सुविधा के लिए ऑन-ऑफ स्विच भी दिया गया है। निर्माता का दावा है कि एक बार में भारी मात्रा में सामग्री डालने के बाद भी यह मशीन बिना रुके सुचारू रूप से काम करती है और मात्र एक घंटे के भीतर लगभग एक ट्रैक्टर बालू छानकर तैयार कर देती है।

## अतिरिक्त कमाई का जरिया बनी यह तकनीक
श्यामलाल महतो के लिए यह आविष्कार केवल एक प्रयोग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे उनकी आमदनी का नया जरिया भी खुल गया है। उन्होंने इस मशीन के व्यावसायिक उपयोग के दो अलग-अलग रास्ते निकाले हैं। यदि वह खुद मजदूर के साथ जाकर इस मशीन से बालू छानने का काम करते हैं, तो एक ट्रैक्टर के हिसाब से करीब 500 रुपये मेहनताना लेते हैं। वहीं दूसरी तरफ, यदि कोई ग्राहक खुद मशीन को ले जाकर इस्तेमाल करना चाहता है, तो वह केवल 200 रुपये किराया लेते हैं। इस दोहरी व्यवस्था से उन्हें हर महीने अच्छी खासी अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को भी संबल मिल रहा है।

## शुरुआती परेशानियां और लगातार सुधार
इस मुकाम तक पहुंचना श्यामलाल के लिए इतना आसान नहीं था और उन्हें कई तकनीकी बाधाओं का सामना करना पड़ा। उन्होंने खुलासा किया कि शुरुआती दौर में मशीन की गति बहुत अधिक थी, जिसकी वजह से इसमें तीव्र कंपन पैदा होता था और मशीन संतुलन खोकर उलट जाती थी। इसके अलावा, जब एक साथ ज्यादा मात्रा में बालू डाल दी जाती थी, तो मोटर पर दबाव बढ़ने के कारण वह बंद हो जाती थी। इन कमियों को दूर करने के लिए उन्होंने लगातार कई हफ्तों तक प्रयोग किए और मशीन की गति को नियंत्रित करने वाले पुर्जे जोड़े। इन सुधारों के बाद ही यह मशीन पूरी तरह स्थिर और भरोसेमंद बन पाई।

## पहले भी कर चुके हैं कई अनोखे प्रयोग
श्यामलाल महतो का यह कोई पहला तकनीकी करिश्मा नहीं है, बल्कि इससे पहले भी वह अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं। इससे पहले वह एक मिनी इलेक्ट्रॉनिक ट्रैक्टर और हवा से ऊर्जा बनाने वाला विंड टर्बाइन भी सफलतापूर्वक बना चुके हैं। उनके द्वारा घर की छत पर लगाया गया विंड टर्बाइन आज भी सुचारू रूप से काम कर रहा है और बिजली पैदा कर रहा है। उनके इस नए आविष्कार से पूरे गांव में खुशी का माहौल है और स्थानीय लोग उनकी पीठ थपथपा रहे हैं। श्यामलाल अब इस मॉडल को और अधिक उन्नत बनाने की तैयारी में जुटे हैं और भविष्य में इससे बड़े आकार की मशीनें तथा दो-तीन नए मॉडल विकसित करने की योजना पर काम कर रहे हैं।

## इसका आप पर असर
यह स्थानीय आविष्कार देश के ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे निर्माण स्थलों पर काम करने वाले मजदूरों और ठेकेदारों के लिए एक किफायती और व्यावहारिक समाधान पेश करता है।

- **भारत में:** निर्माण कार्यों से जुड़े कामगार इस तरह की कम लागत वाली मशीनों को अपनाकर अपनी शारीरिक मेहनत को कम कर सकते हैं और अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। छोटे स्तर के कारीगरों को इससे अपने कार्य को गति देने के नए रास्ते मिलते हैं।
- **बोकारो में:** सिमुलिया और आसपास के ग्रामीण इलाकों में स्थानीय निवासियों और भवन निर्माताओं को अब महंगे उपकरणों पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है, बल्कि वे कम किराए पर मशीन का लाभ उठा सकते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर निर्माण कार्यों की लागत और समय दोनों में भारी कमी आएगी।

## ऐसा क्यों हुआ
यह मशीन पारंपरिक निर्माण कार्यों में आने वाली अत्यधिक शारीरिक थकान और समय की बर्बादी को दूर करने के लिए बनाई गई है। ग्रामीण इलाकों में भारी भरकम मशीनों की अनुपलब्धता और उनकी ऊंची कीमत के कारण स्थानीय कारीगरों को खुद ऐसे देसी विकल्प तैयार करने पड़ते हैं।

- **शारीरिक श्रम की अधिकता:** पारंपरिक रूप से हाथ से बालू छानने के कार्य में बहुत अधिक समय और मजदूरों की जरूरत पड़ती थी, जिससे लागत बढ़ती थी।
- **कम लागत की आवश्यकता:** व्यावसायिक तौर पर उपलब्ध बड़ी मशीनें महंगी होती हैं, इसलिए केवल 5,500 रुपये में विकल्प तैयार करना आर्थिक रूप से व्यावहारिक साबित हुआ।
- **तकनीकी प्रयोग का शौक:** निर्माता श्यामलाल महतो की इलेक्ट्रिकल उपकरणों और मशीनों को डिजाइन करने की पुरानी रुचि ने इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में मदद की।

## सवाल-जवाब

### 1. यह मशीन किसने बनाई है?
यह मशीन झारखंड के बोकारो जिले के चंदनकियारी प्रखंड के सिमुलिया गांव के रहने वाले इलेक्ट्रीशियन श्यामलाल महतो ने बनाई है।

### 2. इस मशीन को बनाने में कितनी लागत आई है?
श्यामलाल महतो द्वारा तैयार की गई इस बालू छानने वाली मशीन की कुल लागत करीब 5,500 रुपये है।

### 3. यह मशीन कितनी देर में कितना बालू छान सकती है?
यह मशीन महज एक से दो घंटे के भीतर लगभग एक ट्रैक्टर बालू आसानी से छान सकती है।

### 4. इस मशीन से कमाई के क्या जरिए हैं?
श्यामलाल इस मशीन से खुद बालू छानने पर प्रति ट्रैक्टर करीब 500 रुपये लेते हैं या मशीन किराए पर देने पर 200 रुपये लेते हैं।

### 5. मशीन में किस तरह की मोटर का इस्तेमाल किया गया है?
इस मशीन को चलाने के लिए इसमें ढाई हॉर्स पावर की बिजली से चलने वाली मोटर लगाई गई है।

### 6. श्यामलाल महतो इससे पहले कौन से उपकरण बना चुके हैं?
श्यामलाल इससे पहले एक मिनी इलेक्ट्रॉनिक ट्रैक्टर और हवा से चलने वाला विंड टर्बाइन भी तैयार कर चुके हैं।

## प्रेरणा और सबक
श्यामलाल महतो की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि बड़े संसाधनों के बिना भी सिर्फ दृढ़ संकल्प और हुनर से बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं।

- **स्थानीय संसाधनों का उपयोग:** अपनी आसपास की समस्याओं को पहचान कर उपलब्ध और सस्ते सामान से उनका व्यावहारिक समाधान खोजा जा सकता है।
- **निरंतर सुधार की भावना:** किसी भी नए प्रयोग में शुरुआती असफलता या कंपन जैसी तकनीकी बाधाओं से घबराए बिना लगातार सुधार करते रहना चाहिए।
- **कौशल को आय का जरिया बनाना:** अपने तकनीकी ज्ञान और हुनर का सही इस्तेमाल करके अतिरिक्त आमदनी का साधन तैयार किया जा सकता है।
- **सीमित बजट में नवाचार:** बड़े निवेश के बिना केवल पांच हजार रुपये जैसी छोटी राशि से भी उपयोगी बिजनेस मॉडल खड़ा किया जा सकता है।

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