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  "type": "article",
  "title": "ब्रश से साड़ी तक पहुंची खंडवा की आकृति अत्रे, सूरत का प्रगति ग्रुप अपना रहा उनके डिजाइन",
  "summary": "खंडवा की आकृति अत्रे ने 15 साल की कला साधना के बाद साड़ी डिजाइनिंग में अपनी खास जगह बनाई है और सूरत के प्रगति ग्रुप ने उनके डिजाइन अपने कलेक्शन में शामिल किए हैं। उनका सिरामिक आर्ट वर्क अमेरिका तक पहुंच चुका है।",
  "content": "मध्यप्रदेश के खंडवा जिले से निकलीं आकृति अत्रे ने अपनी कला और अथक परिश्रम के बल पर एक ऐसा मुकाम हासिल किया है जिसे देखकर पूरा निमाड़ अंचल गर्व से भर उठता है। छोटे शहर की सीमाओं को पार कर बड़े मंच तक पहुंचने वाली इस कलाकार की पहचान अब पूरे देश में बन रही है।\n\nसूरत के प्रगति ग्रुप ने अपनाए उनके डिजाइन\nआकृति अत्रे पिछले 15 वर्षों से कला के विभिन्न क्षेत्रों में अपना योगदान देती आ रही हैं और अब उन्होंने साड़ी डिजाइनिंग को अपना प्रमुख कार्यक्षेत्र बना लिया है। उनके डिजाइनों की प्रतिभा इतनी प्रभावशाली निकली कि सूरत के मशहूर प्रगति ग्रुप ने उन्हें अपने साड़ी कलेक्शन का हिस्सा बना लिया। आज उनके बनाए डिजाइन कॉटन साड़ियों पर छपकर देश के बाजारों में पहुंच रहे हैं। आने वाले समय में कई सेलिब्रिटी भी इन साड़ियों को पहनती दिख सकती हैं।\n\nगुरु बैजनाथ सराफ की सीख ने बदला जीवन\nआकृति अत्रे मानती हैं कि उनकी इस कामयाबी के पीछे उनके कला गुरु बैजनाथ सराफ 'वशिष्ठ सर' का अहम योगदान है। उनके मार्गदर्शन में उन्होंने पेंटिंग, रंगोली, मेहंदी, ऑइल पेंटिंग और एक्रेलिक आर्ट जैसी विधाओं में निपुणता हासिल की। इसी प्रशिक्षण के दौरान उनके मन में डिजाइनिंग की रुचि जागी और उन्होंने इसे करियर के रूप में आगे बढ़ाने का फैसला किया। गुरुजी की ही सलाह पर उन्होंने अपने कुछ डिजाइन सूरत के एक टेक्सटाइल ग्रुप को भेजे। उन्होंने ब्लैक एंड व्हाइट के साथ-साथ एक कलरफुल डिजाइन भी भेजी। दोनों ही डिजाइन वहां चयनित हो गईं और कॉटन साड़ियों पर प्रिंट होकर बाजार में उतारी गईं।\n\nजब एक डिजाइन ने दिलाई बड़ी पहचान\nआकृति अत्रे ने बताया: \"मैंने एक छोटे शहर में बैठकर सिर्फ एक डिजाइन भेजी थी, लेकिन यह नहीं सोचा था कि वह मुझे इतनी बड़ी पहचान दिलाएगी। आज जब मेरी डिजाइन की साड़ी लोग पहनते हैं, तो बेहद गर्व महसूस होता है।\" वे यह भी मानती हैं कि पैसा अपनी जगह जरूरी है, लेकिन जब काम को असली पहचान मिलती है तो वह खुशी किसी भी चीज से अलग होती है।\n\nचार शहरों में कला प्रदर्शनियां, बेंगलुरु में पुरस्कार\nआकृति अत्रे ने दिल्ली, भोपाल, कोलकाता और बेंगलुरु में कला प्रदर्शनियों में भाग लिया है। बेंगलुरु में उन्हें ऑसम आर्टिस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया। इसके अलावा आकाशवाणी पर उनके इंटरव्यू प्रसारित हुए हैं और उन्होंने कई मंचों पर एंकरिंग का काम भी किया है।\n\nअमेरिका तक पहुंची इस कलाकार की कला\nआकृति की प्रतिभा देश की सीमाओं तक नहीं रुकी। उनका सिरामिक आर्ट वर्क अमेरिका तक पहुंच चुका है, जहां पूजा की थालियां, शुभ-लाभ और कलश जैसे उत्पादों के डिजाइन के लिए उनसे खास ऑर्डर लिया जाता है। दिल्ली के साथ-साथ विदेशों में भी उनके ग्राहक हैं जो उन्हें विशेष डिजाइन बनाने के लिए ऑर्डर देते हैं।\n\nहुनर की कोई सरहद नहीं होती\nआकृति अत्रे की यह सफलता उन तमाम युवाओं के लिए जीती-जागती प्रेरणा है जो छोटे शहरों में रहते हुए बड़े सपने देखते हैं। उन्होंने यह सिद्ध किया है कि अगर लगन, मेहनत और सही मार्गदर्शन मिले तो कोई भी मंजिल असंभव नहीं होती। खंडवा की इस होनहार बेटी ने साबित किया है कि कला को न भूगोल की सीमाएं बांध सकती हैं और न भाषा की। जब हुनर सच्चा हो और मेहनत निरंतर हो, तो पहचान खुद-ब-खुद रास्ता बना लेती है।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: यह कहानी देशभर के छोटे शहरों में रहने वाले कलाकारों को यह भरोसा दिलाती है कि उनकी प्रतिभा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाया जा सकता है, बिना किसी बड़े शहर में जाए।\n• खंडवा और निमाड़ में: आकृति अत्रे की सफलता यहां के युवा कलाकारों के लिए सबसे बड़ी मिसाल है कि स्थानीय प्रतिभा और सही मार्गदर्शन से राष्ट्रीय पहचान मिलना पूरी तरह संभव है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. आकृति अत्रे कहां की रहने वाली हैं?\nआकृति अत्रे मध्यप्रदेश के खंडवा जिले की रहने वाली हैं।\n\n2. उन्होंने कितने वर्षों से कला के क्षेत्र में काम किया है?\nआकृति अत्रे पिछले 15 वर्षों से कला की विभिन्न विधाओं में सक्रिय हैं।\n\n3. सूरत के किस ग्रुप ने उनके डिजाइन अपनाए?\nसूरत के मशहूर प्रगति ग्रुप ने उनके डिजाइनों को अपने साड़ी कलेक्शन में शामिल किया।\n\n4. उनके कला गुरु कौन हैं?\nउनके कला गुरु बैजनाथ सराफ 'वशिष्ठ सर' हैं, जिनके मार्गदर्शन में उन्होंने पेंटिंग से डिजाइनिंग तक का सफर तय किया।\n\n5. आकृति को बेंगलुरु में कौन सा पुरस्कार मिला?\nउन्हें बेंगलुरु में ऑसम आर्टिस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया।\n\n6. उन्होंने किन शहरों में कला प्रदर्शनियों में भाग लिया?\nउन्होंने दिल्ली, भोपाल, कोलकाता और बेंगलुरु में कला प्रदर्शनियों में हिस्सा लिया है।\n\n7. उनका सिरामिक आर्ट वर्क कहां तक पहुंचा है?\nउनका सिरामिक आर्ट वर्क अमेरिका तक पहुंच चुका है, जहां पूजा की थालियां, शुभ-लाभ और कलश जैसे उत्पादों के लिए उनके डिजाइन की मांग है।\n\n8. साड़ी उद्योग में उनकी पहली कामयाबी कैसे मिली?\nगुरुजी की सलाह पर उन्होंने सूरत के एक टेक्सटाइल ग्रुप को ब्लैक एंड व्हाइट और एक कलरफुल डिजाइन भेजी, जो दोनों ही चयनित हो गईं और कॉटन साड़ियों पर प्रिंट होकर बाजार में उतारी गईं।\n\nप्रेरणा और सबक\nआकृति अत्रे की यात्रा में कुछ ठोस सबक छुपे हैं जो हर महत्वाकांक्षी कलाकार या युवा अपने जीवन में उतार सकता है:\n\n• सही मार्गदर्शक खोजें: बैजनाथ सराफ जैसे गुरु ने न केवल कला की बारीकियां सिखाईं बल्कि सही समय पर सही राह भी दिखाई। एक अच्छा मेंटर करियर की पूरी दिशा बदल सकता है।\n• छोटी शुरुआत को कम मत आंकें: आकृति ने सिर्फ एक डिजाइन भेजकर सूरत के बड़े टेक्सटाइल ग्रुप का ध्यान खींचा। एक ईमानदार और छोटा प्रयास भी बड़े दरवाजे खोल सकता है।\n• विविध कौशल ताकत बनते हैं: पेंटिंग, मेहंदी, रंगोली, ऑइल पेंटिंग और एक्रेलिक सीखने से आकृति ने खुद को कई दिशाओं में तैयार किया, जिससे साड़ी डिजाइनिंग जैसा नया क्षेत्र उनके लिए स्वाभाविक रूप से खुला।\n• पहचान को पैसे से ऊपर रखें: आकृति का मानना है कि काम को मिलने वाली सच्ची पहचान की खुशी किसी भी आर्थिक लाभ से कहीं बड़ी होती है। यही सोच उन्हें लगातार आगे बढ़ाती है।\n• शहर नहीं, हुनर आपकी पहचान है: खंडवा जैसे छोटे शहर से काम करते हुए भी उन्होंने दिल्ली, बेंगलुरु और अमेरिका तक अपनी पहुंच बनाई। भौगोलिक सीमाएं असली प्रतिभा को नहीं रोक सकतीं।",
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  "category": "सक्सेस स्टोरी",
  "publishedAt": "2026-06-30",
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