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  "title": "बुरहानपुर के 65 वर्षीय विजय भावसार की सुई से निकलती है ऐसी कारीगरी, जिसके दीवाने हैं विदेशी ग्राहक भी",
  "summary": "मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में रहने वाले 65 वर्षीय कारीगर विजय भावसार चार पीढ़ियों से डिजाइनर ब्लाउज और लेंगे बना रहे हैं, जिनके ग्राहक विदेशों से भी ऑर्डर भेजते हैं और सालाना तीन से चार लाख रुपए की कमाई होती है.",
  "content": "मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के मंडी बाजार इलाके में रहने वाले 65 वर्षीय विजय भावसार की सुई और धागे से निकली कारीगरी अब सिर्फ बुरहानपुर तक सीमित नहीं रही, बल्कि सात समंदर पार तक अपनी पहचान बना चुकी है. वे डिजाइनर ब्लाउज और दुल्हन के लिए खास लेंगे तैयार करते हैं, जिनकी मांग विदेशों में बसे भारतीय परिवारों के बीच भी खूब देखी जा रही है.\n\nपिता से मिली विरासत, चार पीढ़ियों से चला हुनर\nविजय भावसार बताते हैं कि उन्होंने यह कलाकारी अपने पिताजी से सीखी थी. समय के साथ उन्होंने इसमें अपनी तरफ से नवाचार जोड़ा और पुराने पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ सोशल मीडिया का भी सहारा लिया, ताकि उनका काम ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच सके. उनका परिवार पिछली चार पीढ़ियों से यही डिजाइनिंग का काम कर रहा है. पिता से शुरू हुआ यह सफर अब उनकी अगली पीढ़ी तक पहुंच चुका है. उन्होंने अपने बच्चों के अलावा तीन-चार और लोगों को भी यह हुनर सिखाया है, जिससे उन्हें भी रोजगार मिल रहा है और यह कला आगे भी जीवित रहेगी.\n\nविदेश से आते हैं ऑर्डर, छह महीने पहले भेजा जाता है कपड़ा\nविजय भावसार के मुताबिक, विदेश में रहने वाले लोग भी उन्हें ऑर्डर देते हैं और अपने कपड़े यहीं तैयार करवाते हैं. ऐसे ग्राहक करीब छह महीने पहले कपड़ा भेज देते हैं, जिसे भावसार डिजाइन करके तैयार रखते हैं. जब भी ये लोग भारत आते हैं और बुरहानपुर पहुंचते हैं, तो अपने साथ तैयार ब्लाउज और लेंगे लेकर लौटते हैं. सात समंदर पार बसे लोग जब भी बुरहानपुर आते हैं, वे उन्हीं से ब्लाउज और लेंगे सिलवाकर ले जाते हैं. उनके यहां ब्लाउज की सिलाई ₹350 से लेकर ₹5000 तक ली जाती है, जो डिजाइनिंग वर्क की जटिलता पर निर्भर करता है.\n\nखुद कमाते हैं, दूसरों को भी दे रहे रोजगार\nबुटीक चलाने वाले विजय भावसार बताते हैं कि उन्हें हर साल करीब तीन से चार लाख रुपए की कमाई हो जाती है. वे अपने बुटीक में तीन लोगों को रोजगार भी देते हैं, जो उनके साथ मिलकर ब्लाउज तैयार करने का काम करते हैं. इसके अलावा वे खुद भी दो लोगों को अलग से रोजगार दे रहे हैं. इस तरह उनका काम न सिर्फ उनके अपने परिवार बल्कि आसपास के कई और लोगों की भी रोजी-रोटी चला रहा है.\n\nमध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात से भी आते हैं ग्राहक\nविजय भावसार की डिजाइनिंग सिर्फ विदेशों में ही नहीं, बल्कि देश के कई राज्यों में भी खूब पसंद की जाती है. मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात सहित अन्य राज्यों से भी महिलाएं और परिवार उनसे ब्लाउज सिलवाने के लिए खासतौर पर बुरहानपुर आते हैं. उनकी बारीक डिजाइनिंग और मेहनत ही है कि चार पीढ़ियों से चला आ रहा यह पारिवारिक हुनर आज भी उतना ही लोकप्रिय है, जितना पहले हुआ करता था.\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: यह कहानी दिखाती है कि परंपरागत हुनर को सोशल मीडिया से जोड़कर छोटे कारीगर भी विदेशी ग्राहकों तक पहुंच सकते हैं और अपना कारोबार बढ़ा सकते हैं.\n• बुरहानपुर में: स्थानीय कारीगरों और दर्जियों के लिए यह मिसाल है कि पारंपरिक सिलाई-कढ़ाई के हुनर से भी सालाना तीन से चार लाख रुपए तक की कमाई और कई लोगों को रोजगार दिया जा सकता है.\n\nसवाल-जवाब\n\n1. विजय भावसार कौन हैं और कहां रहते हैं?\nवे मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के मंडी बाजार इलाके में रहने वाले 65 वर्षीय कारीगर हैं जो डिजाइनर ब्लाउज और दुल्हन के लेंगे तैयार करते हैं.\n\n2. उन्होंने यह हुनर कैसे सीखा?\nउन्होंने यह कलाकारी अपने पिताजी से सीखी और उसमें अपनी तरफ से नवाचार जोड़ा.\n\n3. विदेश से ऑर्डर कैसे मिलते हैं?\nविदेश में रहने वाले ग्राहक करीब छह महीने पहले कपड़ा भेजते हैं, विजय भावसार उसे डिजाइन करके तैयार रखते हैं और लोग भारत या बुरहानपुर आने पर उसे ले जाते हैं.\n\n4. ब्लाउज सिलाई की कीमत कितनी है?\nउनके यहां ब्लाउज की सिलाई ₹350 से लेकर ₹5000 तक ली जाती है, जो डिजाइनिंग वर्क पर निर्भर करता है.\n\n5. उनकी सालाना कमाई कितनी है?\nउन्हें हर साल करीब तीन से चार लाख रुपए की कमाई हो जाती है.\n\n6. वे कितने लोगों को रोजगार दे रहे हैं?\nवे अपने बुटीक में तीन लोगों को रोजगार देते हैं और अलग से दो और लोगों को भी काम दे रहे हैं, इसके अलावा उन्होंने अपने बच्चों और तीन-चार अन्य लोगों को भी यह कला सिखाई है.\n\n7. कौन-कौन से राज्यों से ग्राहक आते हैं?\nमध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात सहित अन्य राज्यों से लोग उनसे ब्लाउज सिलवाने के लिए बुरहानपुर आते हैं.\n\n8. यह कितनी पीढ़ियों से चल रहा काम है?\nउनका परिवार पिछली चार पीढ़ियों से यह डिजाइनिंग का काम कर रहा है.\n\nप्रेरणा और सबक\n• पारिवारिक हुनर को सहेजना और उसमें नयापन जोड़ना बड़ा फर्क ला सकता है, जैसे विजय भावसार ने पिता से सीखी कला में अपनी तरफ से नवाचार जोड़ा.\n• सोशल मीडिया का सही इस्तेमाल छोटे कारोबार को भी विदेशी ग्राहकों तक पहुंचा सकता है.\n• अपना हुनर दूसरों को सिखाना और उन्हें रोजगार देना समाज को भी फायदा पहुंचाता है, जैसा भावसार ने अपने बच्चों और कई अन्य लोगों को सिखाकर किया.\n• गुणवत्ता और भरोसे से ग्राहक बार-बार लौटते हैं, यहां तक कि विदेश में बसे लोग भी सालों से यहीं ऑर्डर भेजते हैं.\n• निरंतरता से पीढ़ी दर पीढ़ी हुनर को जिंदा रखा जा सकता है, बशर्ते अगली पीढ़ी को भी वही कला सिखाई जाए.",
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  "category": "सक्सेस स्टोरी",
  "publishedAt": "2026-07-20",
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    "विजय भावसार",
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