बुरहानपुर के पंकज ने 50 हजार रुपये के कर्ज से खोली गिफ्ट गैलरी, आज 25 लोगों को दे रहे रोजगार मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में सिंधी बस्ती के पंकज ने पिता की प्रेरणा से 25 साल पहले सिर्फ ₹50000 के लोन से गिफ्ट गैलरी की दुकान शुरू की थी, जो आज रिटेल और होलसेल कारोबार के जरिए 25 लोगों को रोजगार दे रही है। मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले की सिंधी बस्ती में एक ऐसी दुकान है जिसकी कहानी हौसले और मेहनत की मिसाल बन गई है। यहां रहने वाले पंकज ने M.Com तक पढ़ाई की, लेकिन नौकरी के बजाय पिता से मिली सीख पर चलते हुए अपना कारोबार खड़ा करने का फैसला किया। आज उसी फैसले का नतीजा है कि परिवार 25 लोगों को रोजगार दे रहा है। पिता की प्रेरणा से शुरू हुआ सफर पंकज बताते हैं कि गिफ्ट गैलरी की दुकान खोलने का विचार उन्हें अपने पिता से मिला था। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने नौकरी तलाशने के बजाय पारिवारिक व्यापार को आगे बढ़ाने की ठानी। करीब 25 साल पहले उन्होंने ₹50000 का लोन लेकर यह दुकान शुरू की थी। उस समय ना ज्यादा पूंजी थी और ना कोई बड़ा अनुभव, बस पिता का भरोसा और खुद की मेहनत साथ थी। शुरुआती दौर में झेलनी पड़ीं मुश्किलें पंकज के मुताबिक शुरुआती दौर में उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कम पूंजी में दुकान चलाना आसान नहीं था और कई बार मुश्किल हालात भी आए। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। पंकज कहते हैं, "हमने हिम्मत नहीं हारी और लगातार संघर्ष करते गए, आज हमको सफलता मिली है।" यही जज्बा था जिसने धीरे धीरे दुकान को स्थानीय पहचान दिलाई और ग्राहकों का भरोसा जीता। तीन लोगों से शुरू हुआ काम, अब 25 को रोजगार दुकान की शुरुआत में सिर्फ पिता और दो बेटे यानी तीन लोग ही पूरा काम संभालते थे। जैसे जैसे कारोबार बढ़ता गया, परिवार ने बाहर के लोगों को भी काम पर रखना शुरू किया। आज इस दुकान में करीब 25 लोग काम करते हैं, जिनमें युवक, युवतियां और महिलाएं सभी शामिल हैं। पंकज का कहना है कि उनका लक्ष्य स्थानीय लोगों को अधिक से अधिक रोजगार देना है, और हर साल वे कारोबार में नए बदलाव और नवाचार करते हुए और लोगों को जोड़ने की कोशिश करते हैं। ₹20 से ₹5000 तक के आइटम, रिटेल के साथ होलसेल भी कमल टॉकीज क्षेत्र में चल रही इस दुकान में खेल खिलौनों से जुड़े आइटम ₹20 से लेकर ₹5000 तक की कीमत में मिलते हैं। ग्राहक सीधे दुकान पर आकर सामान खरीदते हैं, वहीं परिवार होलसेल कारोबार भी करता है, जिसमें अलग से लोगों को रोजगार मिला हुआ है। पंकज बताते हैं कि उनके यहां सभी आइटम अच्छी क्वालिटी के मिलते हैं, यही वजह है कि लोग खरीदारी के लिए उनकी दुकान पर पहुंचते हैं। 25 साल पुरानी यह दुकान अब सिर्फ एक व्यापार नहीं बल्कि पूरे परिवार की आजीविका का जरिया बन चुकी है और साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार देने का एक बड़ा माध्यम भी। इसका आप पर असर • भारत में: यह कहानी दिखाती है कि छोटी पूंजी और सही मार्गदर्शन से भी अपना कारोबार शुरू किया जा सकता है, जो पढ़े लिखे युवाओं के लिए नौकरी के अलावा स्वरोजगार का एक विकल्प बनता है। • बुरहानपुर में: स्थानीय स्तर पर यह दुकान करीब 25 लोगों, खासकर युवक, युवतियों और महिलाओं को सीधा रोजगार दे रही है, जिससे कमल टॉकीज क्षेत्र के आसपास के लोगों की आजीविका चल रही है। सवाल-जवाब 1. पंकज ने अपनी गिफ्ट गैलरी की दुकान कब शुरू की थी? करीब 25 साल पहले। 2. दुकान शुरू करने के लिए कितना लोन लिया गया था? ₹50000 का लोन लेकर यह दुकान शुरू की गई थी। 3. दुकान शुरू करने की प्रेरणा पंकज को कहां से मिली? यह प्रेरणा उन्हें अपने पिता से मिली थी। 4. यह दुकान कहां स्थित है? मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के सिंधी बस्ती क्षेत्र में, कमल टॉकीज इलाके में यह दुकान चलती है। 5. दुकान में फिलहाल कितने लोग काम करते हैं? करीब 25 लोग काम करते हैं, जिनमें युवक, युवतियां और महिलाएं शामिल हैं। 6. दुकान में किस तरह के सामान मिलते हैं और उनकी कीमत क्या है? खेल खिलौनों से जुड़े आइटम ₹20 से लेकर ₹5000 तक की कीमत में मिलते हैं। 7. क्या यह दुकान सिर्फ रिटेल में ही काम करती है? नहीं, दुकान रिटेल के साथ साथ होलसेल कारोबार भी करती है, जिसमें अलग से लोगों को रोजगार मिला है। प्रेरणा और सबक पंकज की कहानी से कई सीख मिलती हैं: • पढ़ाई के बाद नौकरी ही एकमात्र रास्ता नहीं: M.Com जैसी डिग्री होने के बावजूद पंकज ने नौकरी के बजाय खुद का कारोबार शुरू करने का साहस दिखाया। • परिवार की प्रेरणा को दिशा दें: पिता से मिली सीख को उन्होंने ठोस कारोबारी योजना में बदला, सिर्फ प्रेरणा तक सीमित नहीं रखा। • छोटी शुरुआत से डरें नहीं: सिर्फ ₹50000 के लोन से शुरुआत करके भी बड़ा कारोबार खड़ा किया जा सकता है, अगर मेहनत लगातार बनी रहे। • मुश्किलों में हिम्मत ना हारें: शुरुआती दौर की परेशानियों के बावजूद संघर्ष जारी रखने से ही सफलता मिली। • कारोबार बढ़ने पर दूसरों को जोड़ें: जैसे जैसे काम बढ़ा, परिवार ने बाहर के लोगों को भी रोजगार देना शुरू किया, जिससे कारोबार के साथ साथ समाज को भी फायदा हुआ। https://trendkia.com/success-stories/burhanpur-ke-pankaj-ne-50-hajara-rupaye-ke-karja-se-kholi-giphta-gailari-aja-25-logon-ko-de-rahe-rojagara-9353 TrendKia — Har trend, sabse pehle.