# बुरहानपुर के तीन भाइयों ने पिता की हलवाई कला से खड़ा किया 20 रुपये वाला वड़ा पाव कारोबार

> मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में गोपाल महाजन मुंबई टैटू का हुनर सीखने गए थे, लेकिन वहां वड़ा पाव के कारोबार से प्रभावित होकर लौटे और पिता के हलवाई अनुभव के सहारे दोनों भाइयों के साथ मिलकर शहर में वड़ा पाव का कारोबार शुरू किया, जो 11 साल से चल रहा है.

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-09-08 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/burhanpur-ke-tina-bhaiyon-ne-pita-ki-halavai-kala-se-khara-kiya-20-rupaye-vala-vara-pava-karobara-29494 · **Language:** Hindi
**Tags:** वड़ा पाव, बुरहानपुर, मध्य प्रदेश, स्ट्रीट फूड, पारिवारिक कारोबार, सक्सेस स्टोरी

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में एक परिवार ने साबित कर दिया है कि जिंदगी कई बार वो रास्ता दिखाती है जो हमने सोचा भी नहीं होता. गोपाल महाजन मुंबई में टैटू बनाने का हुनर सीखने गए थे, लेकिन वहां से लौटते समय उनके साथ आया वड़ा पाव का एक आइडिया, जिसने आज उनके और उनके दो भाइयों के पूरे परिवार की तकदीर बदल दी है.

## टैटू सीखने मुंबई पहुंचे, मिल गया कारोबार का आइडिया
गोपाल बताते हैं कि उनके पिता लंबे समय से हलवाई का काम करते आए हैं. बचपन से उन्होंने पिता को मिठाई और तरह-तरह की खाने-पीने की चीजें बनाते देखा था, लेकिन खुद गोपाल कुछ अलग करना चाहते थे. इसी सोच के साथ वे मुंबई गए और वहां टैटू बनाने की कला सीखने की कोशिश की. लेकिन मुंबई में रहते हुए उनकी नजर वहां के मशहूर वड़ा पाव के कारोबार पर पड़ी. उन्हें एहसास हुआ कि मुंबई का यह स्वाद बुरहानपुर के लोगों को भी पसंद आ सकता है.

## पिता के अनुभव ने दी कारोबार को मजबूती
यह आइडिया मन में आते ही गोपाल ने अपने पिता से बात की. सालों के हलवाई अनुभव से पिता को खाने-पीने के धंधे की बारीक समझ थी और उन्होंने बेटे का पूरा साथ दिया. पिता की सलाह और सहयोग से गोपाल ने बुरहानपुर में वड़ा पाव बेचना शुरू किया. गोपाल का मानना है कि पिता के हलवाई हुनर ने ही उन्हें यह भरोसा दिया कि खाने-पीने का यह कारोबार चल सकता है.

## शुरुआती दिनों में करनी पड़ी मशक्कत
कारोबार की शुरुआत आसान नहीं थी. नए स्वाद को बुरहानपुर के लोगों तक पहुंचाने और उनका भरोसा जीतने के लिए तीनों भाइयों को काफी मेहनत करनी पड़ी. धीरे-धीरे शहर के लोगों को उनका वड़ा पाव पसंद आने लगा और ग्राहकों की तादाद बढ़ती चली गई. देखते ही देखते जो कारोबार छोटे स्तर पर शुरू हुआ था, वह परिवार की कमाई का एक मजबूत सहारा बन गया.

## 11 साल से चल रहा है कारोबार, कीमत सिर्फ 20 रुपये
गोपाल महाजन और उनके दोनों भाई पिछले करीब 11 वर्षों से मिलकर वड़ा पाव का यह स्टॉल चला रहे हैं. यहां एक वड़ा पाव की कीमत महज 20 रुपये रखी गई है, जिसकी वजह से कम बजट में स्वादिष्ट नाश्ता चाहने वाले लोगों के बीच इसकी खूब मांग है. बच्चे हों या बड़े, हर उम्र के ग्राहक यहां स्वाद चखने पहुंचते हैं. गोपाल कहते हैं कि पिता से मिले हुनर और अनुभव को उन्होंने अपने तरीके से आगे बढ़ाया और तीनों भाइयों की मेहनत ने इस छोटे से कारोबार को परिवार की जिंदगी बदलने वाला जरिया बना दिया.

यह कहानी दिखाती है कि परिवार से मिली विरासत को अगर सही सोच, मेहनत और थोड़े नए विचार के साथ आगे बढ़ाया जाए, तो एक छोटा सा ठेला भी बड़ी सफलता की कहानी बन सकता है.

## इसका आप पर असर
यह कहानी किसी बड़ी नीति से नहीं जुड़ी, लेकिन छोटा कारोबार शुरू करने की सोच रखने वालों और सस्ता स्ट्रीट फूड ढूंढने वालों दोनों के लिए इसमें सीख और सीधा फायदा है.

- **भारत में:** यह कहानी दिखाती है कि पारिवारिक हुनर और कम पूंजी से भी एक टिकाऊ कारोबार खड़ा किया जा सकता है. देश भर के छोटे कारोबारी इससे सीख सकते हैं कि घर में मौजूद अनुभव को नए आइडिया से जोड़कर आगे बढ़ा जा सकता है.
- **बुरहानपुर में:** शहर के लोगों को अब महज 20 रुपये में वड़ा पाव जैसा स्वादिष्ट नाश्ता आसानी से मिल जाता है. सस्ते और भरोसेमंद स्ट्रीट फूड की तलाश करने वालों के लिए गोपाल महाजन का यह स्टॉल एक नियमित ठिकाना बन गया है.
- **रोजगार का जरिया:** तीन भाइयों ने मिलकर बिना किसी बड़ी नौकरी के अपने परिवार के लिए स्थायी आमदनी का जरिया बना लिया है. यह उन युवाओं के लिए मिसाल है जो नौकरी न मिलने पर खुद का छोटा कारोबार शुरू करने की सोच रहे हैं.
- **कीमत में स्थिरता:** 11 साल से कीमत आम आदमी की पहुंच में बनाए रखी गई है, जिससे बच्चों से लेकर बड़ों तक हर वर्ग के ग्राहक यहां आराम से खा सकते हैं.

## ऐसा क्यों हुआ
गोपाल महाजन और उनके भाइयों का यह कारोबार अचानक नहीं, बल्कि परिवार के पुराने अनुभव और इत्तेफाक से मिले एक आइडिया के मेल से खड़ा हुआ है.

- **पिता का हलवाई अनुभव:** पिता लंबे समय से हलवाई का काम करते आए थे, जिससे गोपाल को बचपन से ही खाने-पीने की चीजें बनाने और बेचने की बारीकियां देखने को मिलीं.
- **मुंबई की यात्रा:** टैटू बनाना सीखने मुंबई गए गोपाल की नजर वहां के मशहूर वड़ा पाव कारोबार पर पड़ी, जिसने उन्हें एक नया व्यावसायिक विचार दिया.
- **पारिवारिक सहयोग:** पिता की सलाह और अनुभव के सहारे गोपाल ने यह कारोबार बुरहानपुर में शुरू किया, जिसे बाद में दोनों भाइयों ने भी अपनाया.
- **लगातार मेहनत:** शुरुआत में ग्राहक जोड़ने के लिए मेहनत करनी पड़ी, लेकिन धीरे-धीरे स्वाद की वजह से मांग बढ़ती गई और कारोबार स्थायी आमदनी का जरिया बन गया.

## सवाल-जवाब

### 1. गोपाल महाजन कौन हैं?
बुरहानपुर में वड़ा पाव का कारोबार चलाने वाले तीन भाइयों में से एक.

### 2. यह कारोबार कहां चल रहा है?
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर शहर में.

### 3. गोपाल मुंबई क्यों गए थे?
टैटू बनाने का काम सीखने के लिए.

### 4. वड़ा पाव का आइडिया कहां से आया?
मुंबई में वहां के मशहूर वड़ा पाव कारोबार को करीब से देखकर.

### 5. एक वड़ा पाव की कीमत क्या है?
20 रुपये.

### 6. यह कारोबार कब से चल रहा है?
करीब 11 साल से.

### 7. गोपाल के पिता क्या काम करते थे?
वे लंबे समय से हलवाई का काम करते आए हैं.

### 8. कारोबार कौन-कौन मिलकर चलाते हैं?
गोपाल महाजन और उनके दो भाई मिलकर.

## प्रेरणा और सबक
गोपाल महाजन और उनके भाइयों की कहानी बताती है कि जिंदगी में मिला हर मौका सीधा रास्ता नहीं होता, लेकिन सही नजरिए से उसे बड़ी सफलता में बदला जा सकता है.

- **पारिवारिक हुनर को पहचानें:** पिता के हलवाई अनुभव को गोपाल ने अपने कारोबार की नींव बनाया, जो दिखाता है कि घर में मौजूद हुनर को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
- **नए मौके के लिए खुले रहें:** टैटू सीखने गए गोपाल ने वहां मिले वड़ा पाव के आइडिया को अपनाने में देर नहीं की.
- **बड़ों की सलाह का महत्व:** पिता की सलाह और अनुभव को साथ लेकर उन्होंने कारोबार को सही दिशा दी.
- **धैर्य और मेहनत:** शुरुआती दिनों की मुश्किलों के बावजूद तीनों भाइयों ने मेहनत जारी रखी, जिसका नतीजा 11 साल की सफलता के रूप में सामने है.
- **किफायती कीमत की ताकत:** सिर्फ 20 रुपये की कीमत रखकर उन्होंने ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों तक पहुंच बनाई.

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