# सीए की पढ़ाई छोड़ मधुबनी के दो युवकों ने शुरू किया डिलीवरी वाला, अब हर दिन सैकड़ों घरों तक पहुंचा रहे सामान

> मधुबनी के सुधांशु और रजनीश ने सीए की पढ़ाई बीच में छोड़कर स्थानीय स्तर पर डिलीवरी वाला प्लेटफॉर्म बनाया है, जिससे रोजाना 250 से 300 ग्राहकों को क्विक सर्विस मिल रही है।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-09-23 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/ca-ki-parhai-chhora-madhubani-ke-do-yuvakon-ne-shuru-kiya-delivery-wala-aba-hara-dina-saikaron-gharon-taka-pahuncha-rahe-samana-37192 · **Language:** Hindi
**Tags:** मधुबनी, डिलीवरी वाला, बिहार स्टार्टअप, क्विक कॉमर्स, सुधांशु, रजनीश, लोकल डिलीवरी

बिहार के मधुबनी जिले में इंटरनेट आधारित त्वरित सेवाओं का एक नया स्थानीय मॉडल तेजी से पैर पसार रहा है। महानगरों में रोजमर्रा का सामान घर तक पहुंचाने वाली बड़ी कंपनियों के मुकाबले यहां के दो स्थानीय युवकों ने अपनी खास पहचान बनाई है। बारहवीं कक्षा के बाद चार्टर्ड अकाउंटेंसी यानी सीए की पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले दो दोस्तों ने मिलकर डिलीवरी वाला नाम से एक क्विक सर्विस प्लेटफॉर्म तैयार किया है। इसके जरिए फल, ताजी सब्जियां, तैयार भोजन, ग्रोसरी और पर्सनल केयर उत्पाद स्थानीय लोगों की दहलीज पर सीधे पहुंचाए जा रहे हैं।

## वेबसाइट से शुरुआत के बाद प्ले स्टोर पर उतारा मोबाइल ऐप
इस उपक्रम की नींव अक्टूबर 2024 में पड़ी थी जब दोनों ने खुद एक वेबसाइट तैयार कर ऑनलाइन ऑर्डर लेना शुरू किया था। शुरुआती दौर में वेबसाइट के जरिए काम सीमित दायरे में चला, लेकिन मार्च 2026 में गूगल प्ले स्टोर पर इसका आधिकारिक मोबाइल ऐप जारी होने के बाद कारोबार ने तेज रफ्तार पकड़ ली। ऐप आने के बाद ग्राहकों के लिए ऑर्डर दर्ज करना बेहद आसान हो गया और इसका दायरा देखते ही देखते लगभग 10,000 से 11,000 उपभोक्ताओं तक पहुंच गया। वर्तमान में यह सेवा प्रतिदिन करीब 250 से 300 ग्राहकों तक सीधे जरूरी सामान पहुंचा रही है।

## असफलता, तनाव और बीस रुपये से शुरू हुआ सफर
इस स्टार्टअप के पीछे मधुबनी के रहने वाले दो युवा सुधांशु और उनके साथी रजनीश हैं। दोनों ने अपनी स्कूली शिक्षा बारहवीं तक पूरी करने के बाद सीए की तैयारी शुरू की थी, लेकिन बाद में पढ़ाई छोड़ दी। इसके बाद उन्होंने अलग-अलग स्थानों पर फाइनेंस तथा मार्केटिंग के क्षेत्र में रोजगार तलाशा, पर वहां मनचाही सफलता नहीं मिली। असफलता के कारण वे वापस अपने गृहक्षेत्र लौटे और लगभग तीन महीने तक भारी मानसिक तनाव व डिप्रेशन के दौर से गुजरे। इसी दौरान यूट्यूब पर एक वीडियो देखने के बाद उन्होंने खुद का काम शुरू करने का फैसला लिया। उन्होंने महज ₹ 20 की शुरुआती लागत में एक क्विक कॉमर्स साइट पर खाता खोला और डिलीवरी वाला की बुनियाद रखी। शुरुआती दौर में वे खुद बाइक उठाकर शहर की गलियों में पार्सल पहुंचाने जाते थे।

## ऑपरेटिंग मॉडल, दायरा और फ्रेंचाइजी विस्तार की तैयारी
शुरुआती संघर्ष के बाद अब इस व्यवस्था में कई डिलीवरी पार्टनर नियमित रूप से जुड़ चुके हैं। इस स्टार्टअप का अपना ग्रोसरी स्टोर भी स्थापित हो चुका है, जहां से फूड, किराना सामग्री, सौंदर्य प्रसाधन और पर्सनल केयर उत्पाद ग्राहकों को भेजे जाते हैं। सेवा का संचालन मधुबनी रेलवे स्टेशन से साढ़े छह किलोमीटर के दायरे में किया जा रहा है। ग्राहक सुबह आठ बजे से लेकर रात दस बजे के बीच किसी भी समय अपनी जरूरत के अनुसार सामान मंगवा सकते हैं। कंपनी की नीति के अनुसार ₹ 300 से अधिक मूल्य के ऑर्डर पर कोई अलग डिलीवरी शुल्क नहीं लिया जाता, केवल सामान की वास्तविक कीमत चुकानी होती है। अब यह नेटवर्क मधुबनी से आगे बढ़कर दरभंगा सहित बिहार के अन्य कई इलाकों में फ्रेंचाइजी मॉडल पर विस्तार की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।

## इसका आप पर असर
मधुबनी और आसपास के कस्बों में रहने वाले उपभोक्ताओं को महानगरों जैसी त्वरित होम डिलीवरी की सुविधा बिना अतिरिक्त भारी खर्च के मिल रही है।

- **मधुबनी में:** स्टेशन से 6.5 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोग सुबह 8:00 बजे से रात 10:00 बजे तक किराना, खाना और फल-सब्जियां घर बैठे मंगा सकते हैं। ₹ 300 से अधिक की खरीदारी करने पर ग्राहकों से कोई अलग डिलीवरी शुल्क नहीं लिया जाता है।
- **बिहार के अन्य शहरों में:** दरभंगा और आसपास के जिलों में फ्रेंचाइजी मॉडल शुरू होने से स्थानीय व्यापारियों और युवाओं के लिए नए व्यावसायिक अवसर खुलेंगे। इससे छोटे शहरों में स्थानीय स्तर पर नए रोजगार के साधन भी तैयार होंगे।
- **स्थानीय उपभोक्ताओं के लिए:** मेट्रो शहरों की तरह अब छोटे शहरों में भी मिनटों के भीतर पर्सनल केयर और ताजी सब्जियां सीधे दरवाजे तक पहुंच रही हैं। इससे बाजार जाने के समय और परिवहन लागत दोनों की बचत होती है।
- **छोटे दुकानदारों के लिए:** स्थानीय स्तर पर ग्रोसरी वेयरहाउस और फ्रेंचाइजी मॉडल से क्षेत्रीय आपूर्ति श्रृंखला को सीधा बाजार मिल रहा है। इससे स्थानीय उत्पादों की बिक्री में निरंतरता बनी रहती है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह पहल ग्रामीण और छोटे शहरी क्षेत्रों में क्विक कॉमर्स की अनुपस्थिति तथा युवाओं द्वारा पारंपरिक रोजगार विकल्पों से अलग हटकर स्वरोजगार अपनाने के कारण शुरू हुई।

- **मेट्रो केंद्रित सेवाओं की कमी:** देश की बड़ी डिलीवरी कंपनियां अक्सर छोटे जिला मुख्यालयों और ग्रामीण अंचलों में त्वरित आपूर्ति नेटवर्क नहीं चलाती हैं। इस खाली बाजार को देखते हुए स्थानीय स्तर पर सेवा शुरू करने की योजना बनाई गई।
- **करियर में झटका और नया विकल्प:** सीए की पढ़ाई बीच में छूटने और अन्य शहरों में प्राइवेट नौकरियों में सफलता न मिलने के बाद दोनों संस्थापकों ने गृहक्षेत्र का रुख किया। बेरोजगारी और मानसिक तनाव से उबरने के लिए उन्होंने खुद का काम शुरू करना बेहतर समझा।
- **डिजिटल टूल्स और कम लागत:** यूट्यूब से जानकारी हासिल करने और महज ₹ 20 में प्रारंभिक ऑनलाइन खाता खोलने की सुविधा ने इस विचार को हकीकत में बदल दिया। खुद बाइक से सामान पहुंचाकर उन्होंने बिना किसी बड़े निवेश के कारोबार को खड़ा किया।

## सवाल-जवाब

### 1. डिलीवरी वाला प्लेटफॉर्म की शुरुआत किसने और कहां की?
इसकी शुरुआत बिहार के मधुबनी जिले में रहने वाले दो दोस्तों सुधांशु और रजनीश ने की है।

### 2. संस्थापकों की शैक्षणिक और पेशेवर पृष्ठभूमि क्या रही है?
दोनों ने बारहवीं तक पढ़ाई करने के बाद सीए की तैयारी छोड़ दी थी और फाइनेंस व मार्केटिंग के क्षेत्र में असफलता मिलने पर यह काम शुरू किया।

### 3. यह सेवा कब शुरू हुई और वर्तमान में कितने ग्राहकों तक पहुंच चुकी है?
इसकी शुरुआत अक्टूबर 2024 में वेबसाइट से हुई थी और मार्च 2026 में ऐप आने के बाद यह 10,000 से 11,000 ग्राहकों तक पहुंच चुकी है।

### 4. प्रतिदिन कितने ऑर्डर डिलीवर किए जा रहे हैं?
प्लेटफॉर्म के जरिए रोजाना लगभग 250 से 300 ग्राहकों तक सीधे सामान पहुंचाया जा रहा है।

### 5. मधुबनी में सेवा का दायरा और समय क्या है?
यह सेवा मधुबनी रेलवे स्टेशन से साढ़े छह किलोमीटर के दायरे में सुबह 8:00 बजे से रात 10:00 बजे तक उपलब्ध रहती है।

### 6. क्या सामान मंगाने पर डिलीवरी शुल्क लिया जाता है?
₹ 300 से अधिक मूल्य के ऑर्डर पर कोई डिलीवरी चार्ज नहीं लगता, ग्राहकों को केवल सामान का मूल्य देना होता है।

### 7. यह प्लेटफॉर्म किन-किन चीजों की डिलीवरी करता है?
यहां से तैयार भोजन, ताजी सब्जियां, ग्रोसरी, सौंदर्य उत्पाद और पर्सनल केयर का सामान डिलीवर किया जाता है।

### 8. इस स्टार्टअप की भविष्य की विस्तार योजनाएं क्या हैं?
यह उपक्रम अब दरभंगा सहित बिहार के कई अन्य इलाकों में फ्रेंचाइजी मॉडल के जरिए विस्तार की तैयारी कर रहा है।

## प्रेरणा और सबक
सीमित संसाधनों और असफलताओं के बीच भी लगन से छोटे स्तर पर शुरू किया गया विचार बड़ा आकार ले सकता है।

- **असफलता से न घबराएं:** सीए की पढ़ाई छूटने और नौकरियों में नाकाम रहने के बाद भी दोनों युवाओं ने हार नहीं मानी। पुरानी असफलताओं को पीछे छोड़कर नए सिरे से प्रयास करना ही सफलता की पहली सीढ़ी बना।
- **न्यूनतम लागत में शुरुआत:** किसी भी बड़े काम के लिए हमेशा भारी पूंजी की जरूरत नहीं होती। महज ₹ 20 की शुरुआती राशि और अपनी बाइक से काम शुरू करके उन्होंने साबित किया कि इच्छाशक्ति सबसे बड़ा साधन है।
- **शुरुआती झिझक तोड़ना:** खुद बाइक से डिलीवरी करने में कोई संकोच न करते हुए उन्होंने धरातल पर काम को समझा। जब संस्थापक खुद जमीनी मेहनत करते हैं, तो व्यवस्था की कमजोरियों को दूर करना आसान हो जाता है।
- **तकनीक को ढाल बनाना:** यूट्यूब से सीख लेकर पहले वेबसाइट और फिर मोबाइल ऐप तैयार किया। नई तकनीक को अपनाकर पारंपरिक व्यापार को भी आधुनिक और प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकता है।

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