चार बार इंटरव्यू तक पहुंचकर भी चूके अजय विश्वकर्मा, पांचवीं कोशिश में यूपी PGT चयन परीक्षा में पाई छठी रैंक, बनेंगे लेक्चरर सागर की डॉ. हरीसिंह गौर सेंट्रल यूनिवर्सिटी में पीएचडी कर रहे अजय कुमार विश्वकर्मा ने चार बार इंटरव्यू तक पहुंचकर भी असफल रहने के बाद पांचवीं कोशिश में उत्तर प्रदेश शिक्षा चयन आयोग की PGT व्याख्याता परीक्षा-2026 में छठी रैंक हासिल की है. उत्तर प्रदेश शिक्षा चयन आयोग की PGT व्याख्याता परीक्षा-2026 में सागर की डॉ. हरीसिंह गौर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के शोधार्थी अजय कुमार विश्वकर्मा ने छठी रैंक हासिल कर एक नई मिसाल कायम की है. अब वह संभवत लखनऊ के किसी कॉलेज में लेक्चरर के पद पर अपनी सेवाएं देंगे. लेकिन यह सफलता रातोंरात नहीं मिली, इसके पीछे सालों की मेहनत, जुनून, धैर्य, अनुशासन और कई त्याग छिपे हैं. चार बार इंटरव्यू तक पहुंचे, फिर भी रह गए पीछे अजय की यह राह आसान नहीं थी. इससे पहले वह मध्य प्रदेश और राजस्थान लोक सेवा आयोग की असिस्टेंट प्रोफेसर से जुड़ी चार अलग-अलग परीक्षाओं में इंटरव्यू के दौर तक पहुंचे थे, लेकिन हर बार आखिरी पड़ाव पर चयन से चूक गए. इन असफलताओं ने उन्हें तोड़ने के बजाय अपनी कमजोरियों को पहचानने का मौका दिया. उन्होंने बारीकी से यह समझा कि आखिर किन वजहों से वह बार-बार पीछे रह जाते हैं और फिर उन्हीं कमियों पर काम शुरू कर दिया. घर, दोस्त और सामाजिक कार्यक्रमों से बनाई दूरी अपनी कमजोरियों को दूर करने के लिए अजय ने बड़े त्याग किए. उन्होंने अपने घर जाना तक छोड़ दिया, दोस्तों से मिलना बंद कर दिया और सामाजिक व मांगलिक कार्यक्रमों से भी दूरी बना ली. पढ़ाई में इतने डूब जाते थे कि कई बार खाना पीना तक भूल जाते थे. वह कभी यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी में बैठकर पढ़ते, कभी किसी प्राइवेट लाइब्रेरी में और कभी घर पर ही बनाई गई अपनी निजी लाइब्रेरी में. रोजाना 10 से 12 घंटे पढ़ाई करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया था, जबकि शनिवार और रविवार को यह समय बढ़कर 14 घंटे तक पहुंच जाता था. बिना कोचिंग के सेल्फ स्टडी से तैयार किया रास्ता 27 वर्षीय अजय कुमार विश्वकर्मा नेपाल बॉर्डर से सटे उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के रहने वाले हैं और पिछले 5 साल से सागर में रहकर ही अपनी तैयारी कर रहे थे. उनके पिता का नाम राकेश विश्वकर्मा है. तीन भाई और तीन बहनों में अजय सबसे छोटे हैं. खास बात यह है कि उन्होंने अपनी तैयारी के लिए कभी किसी ऑनलाइन या ऑफलाइन कोचिंग का सहारा नहीं लिया. वह हमेशा सेल्फ स्टडी पर भरोसा करते रहे और किताबों से खुद अपने शॉर्ट नोट्स तैयार करते थे, जिनका बार-बार रिवीजन करते थे. मॉक टेस्ट लगाने के लिए भी उनकी अपनी एक खास ट्रिक थी, जब भी कोई एग्जाम नजदीक आता तो वह टेस्ट देकर खुद को परखते थे कि किस टॉपिक में गलतियां हो रही हैं और कौन सा हिस्सा अब भी कमजोर है, फिर उसी पर दोबारा मेहनत कर हर बार पहले से बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश करते थे. पीएचडी के शोध कार्य के साथ संभाली तैयारी अजय कुमार समाजशास्त्र विभाग से थारू जनजाति पर पीएचडी भी कर रहे हैं. ऐसे में परीक्षा की तैयारी के साथ-साथ उन्हें अपने शोध का काम भी साथ लेकर चलना पड़ता था. इस दोहरी जिम्मेदारी को संभालने के लिए उन्होंने सोशल मीडिया का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर दिया था, ताकि ध्यान न भटके और दोनों मोर्चों पर बराबर समय दिया जा सके. उत्तर प्रदेश शिक्षा चयन आयोग की इस चयन परीक्षा में उनकी सफलता की खबर के बाद विश्वविद्यालय में भी खुशी की लहर देखी जा रही है. माता-पिता, गुरुजनों और दोस्तों को दिया श्रेय अजय ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और गुरुजनों के साथ ही अपने मित्रों को भी दिया है. जो विद्यार्थी असफल होकर बीच रास्ते में ही अपना लक्ष्य छोड़ देते हैं, उनके लिए अजय का संदेश साफ है, मेहनत करने में कभी कमी नहीं छोड़नी चाहिए. इसके उलट जब असफलता मिले तो उसका विश्लेषण करना जरूरी है कि आखिर कहां चूक हुई, उस कमी को सुधारना है और दोबारा पूरी ताकत से आगे बढ़ना है. उनका कहना है कि इस रास्ते पर चलकर एक न एक दिन सफलता जरूर मिलती है. इसका आप पर असर • भारत में: पीजीटी, असिस्टेंट प्रोफेसर और अन्य शिक्षक भर्ती परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए अजय की कहानी दिखाती है कि अनुशासित दिनचर्या, सेल्फ स्टडी और अपनी कमजोरियों पर लगातार काम करने से बार-बार की असफलता के बावजूद भी सफलता हासिल की जा सकती है. • उत्तर प्रदेश में: उत्तर प्रदेश शिक्षा चयन आयोग की इस परीक्षा में चयन के बाद अजय को संभवत लखनऊ के किसी कॉलेज में लेक्चरर पद पर नियुक्ति मिलेगी, जिससे प्रदेश में शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. सवाल-जवाब 1. अजय कुमार विश्वकर्मा ने कौन सी परीक्षा में सफलता हासिल की? उन्होंने उत्तर प्रदेश शिक्षा चयन आयोग की PGT व्याख्याता परीक्षा-2026 में छठी रैंक हासिल की है. 2. अजय को यह सफलता कौन से प्रयास में मिली? यह सफलता उन्हें पांचवें प्रयास में मिली, इससे पहले वह चार परीक्षाओं में इंटरव्यू तक पहुंचकर भी चयनित नहीं हो पाए थे. 3. अजय अब कहां लेक्चरर बनेंगे? वह संभवत लखनऊ के किसी कॉलेज में लेक्चरर के रूप में अपनी सेवाएं देंगे. 4. अजय किस जिले के रहने वाले हैं और उनकी उम्र कितनी है? 27 वर्षीय अजय नेपाल बॉर्डर से सटे उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के रहने वाले हैं. 5. अजय ने अपनी तैयारी कैसे की? उन्होंने बिना किसी कोचिंग के सेल्फ स्टडी की, खुद के शॉर्ट नोट्स बनाए और मॉक टेस्ट से अपनी कमजोरियों को पहचाना. 6. अजय रोजाना कितने घंटे पढ़ाई करते थे? वह रोजाना 10 से 12 घंटे और शनिवार-रविवार को 14 घंटे तक पढ़ाई करते थे. 7. अजय पीएचडी किस विषय पर कर रहे हैं? वह समाजशास्त्र विभाग से थारू जनजाति पर पीएचडी कर रहे हैं. 8. अजय ने अपनी सफलता का श्रेय किसे दिया? उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, गुरुजनों और मित्रों को दिया है. प्रेरणा और सबक • असफलता से सीखना: चार बार इंटरव्यू तक पहुंचकर भी असफल रहने पर अजय ने हार मानने की बजाय हर बार अपनी कमजोरियों का विश्लेषण किया. • अनुशासित दिनचर्या: रोजाना 10 से 12 घंटे और सप्ताहांत में 14 घंटे तक पढ़ाई करने की नियमितता उनकी सफलता की बुनियाद बनी. • ध्यान भटकाने वाली चीजों से दूरी: घर जाना, दोस्तों से मिलना, सामाजिक कार्यक्रम और सोशल मीडिया तक छोड़कर उन्होंने पूरा ध्यान तैयारी पर केंद्रित रखा. • सेल्फ स्टडी पर भरोसा: बिना किसी कोचिंग के खुद के नोट्स बनाकर और मॉक टेस्ट से कमजोर टॉपिक पहचानकर उन्होंने अपनी तैयारी को मजबूत किया. • जिम्मेदारियों का संतुलन: पीएचडी शोध कार्य और परीक्षा की तैयारी को साथ-साथ संभालकर उन्होंने दिखाया कि सही प्रबंधन से कई लक्ष्य एक साथ पूरे किए जा सकते हैं. https://trendkia.com/success-stories/chara-bara-intaravyu-taka-pahunchakara-bhi-chuke-ajay-vishwakarma-panchavin-koshisha-men-up-pgt-chayana-pariksha-men-pai-chhathi-r-8835 TrendKia — Har trend, sabse pehle.