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  "title": "चार लगातार प्रीलिम्स की नाकामियों से सहारनपुर एएसपी तक, जानिए कैसे आईपीएस सारिका चौधरी ने फोमो और माइग्रेन को हराकर निकाली यूपीएससी",
  "summary": "राजस्थान की रहने वाली सारिका चौधरी शुरुआती चार प्रयासों में यूपीएससी प्रीलिम्स भी पास नहीं कर पाई थीं। माइग्रेन और तनाव से जूझते हुए उन्होंने अपने पांचवें प्रयास में 548वीं रैंक हासिल की और अब उन्हें सहारनपुर में एएसपी के पद पर तैनात किया गया है।",
  "content": "दृढ़ संकल्प और निरंतर प्रयास से मिली सफलता की एक प्रेरणादायक कहानी उत्तर प्रदेश के पुलिस महकमे में सामने आई है। साल 2024 बैच की उत्तर प्रदेश कैडर की आईपीएस अधिकारी सारिका चौधरी को सहारनपुर का नया सहायक पुलिस अधीक्षक (एएसपी) नियुक्त किया गया है। इससे पहले वह सहायक पुलिस आयुक्त के पद पर कार्यरत थीं। 20 अगस्त 2026 को योगी सरकार द्वारा 23 आईपीएस अधिकारियों के तबादले और नई तैनाती के दौरान यह जिम्मेदारी दी गई। खाकी वर्दी हासिल करने का यह सफर किसी भी प्रतियोगी छात्र के लिए बेहद प्रेरणादायक है, क्योंकि स्कूल और कॉलेज में लगातार टॉपर रहने वाली सारिका को इस मुकाम तक पहुंचने के लिए असफलता, फोमो और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा।\n\nबिट्स पिलानी और जेएनयू छोड़कर चुना सिविल सेवा का रास्ता\n1 जनवरी 1994 को राजस्थान के झुंझुनूं जिले के पिलानी में जन्मीं सारिका चौधरी का परिवार प्रशासनिक और शैक्षणिक माहौल से जुड़ा रहा है। उनके पिता मुकेश चौधरी तहसीलदार के पद पर कार्यरत रहे हैं, जबकि उनकी मां सुमन चौधरी एक सरकारी स्कूल में प्रिंसिपल के रूप में सेवा दे रही थीं। बचपन से ही मेधावी छात्र रहीं सारिका ने 12वीं की परीक्षा में टॉप किया, जिसके बाद उन्हें देश के प्रतिष्ठित संस्थान बिट्स पिलानी में इंजीनियरिंग के लिए दाखिला मिल गया। हालांकि, उनका मन प्रशासनिक सेवाओं की ओर झुक रहा था, इसलिए उन्होंने इंजीनियरिंग छोड़कर दिल्ली का रुख किया।\n\nसारिका ने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रसिद्ध हिंदू कॉलेज में दाखिला लिया और स्नातक व परास्नातक दोनों में कॉलेज टॉपर बनकर अपनी प्रतिभा साबित की। इसके बाद उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) से पीएचडी में प्रवेश लिया। जेएनयू में पढ़ाई के दौरान ही उनका रुझान सिविल सेवा की तरफ और मजबूत हो गया। अपने लक्ष्य को स्पष्ट देखकर उन्होंने पीएचडी की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी और पूरे मनोयोग से संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की तैयारी में जुट गईं।\n\nलगातार चार प्रयासों में प्रीलिम्स की सीढ़ी भी नहीं पार हो सकी\nस्कूल से लेकर यूनिवर्सिटी तक हमेशा प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली सारिका के लिए सिविल सेवा परीक्षा का शुरुआती दौर बेहद निराशाजनक रहा। साल 2019 से लेकर 2022 तक उन्होंने लगातार चार बार यूपीएससी सीएसई परीक्षा दी। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि चारों प्रयासों में वह प्रीलिम्स परीक्षा का कट-ऑफ भी पार नहीं कर सकीं। चार साल तक लगातार पहली ही सीढ़ी पर असफलता मिलना किसी भी अभ्यर्थी के मनोबल को पूरी तरह तोड़ सकता था।\n\nइस कठिन समय में सारिका को मानसिक तनाव और फोमो (FOMO) यानी दूसरों से पीछे छूट जाने के डर का सामना करना पड़ा। सहपाठियों और दोस्तों के चयन होने से उनके मन में भी दबाव बढ़ रहा था। हालांकि, हार मानने के बजाय उन्होंने अपनी कमियों का विश्लेषण किया। उन्होंने समझा कि बहुत सारे स्टडी मटीरियल के पीछे भागने से बेहतर है कि सीमित स्रोतों से पढ़ाई की जाए और अपने दिमाग को शांत रखा जाए। इन सुधारों के साथ सारिका ने 2023 में पांचवीं बार यूपीएससी परीक्षा देने का फैसला किया।\n\nमाइग्रेन के अटैक को मात देकर हासिल की 548वीं रैंक\nपांचवें प्रयास में सारिका ने अपनी रणनीति को पूरी तरह बदल दिया था। उन्होंने केवल अपने अध्ययन चक्र पर ध्यान केंद्रित किया और बाहरी दबावों को खुद पर हावी नहीं होने दिया। लेकिन परीक्षा से ठीक पहले एक और बड़ी रुकावट आई। यूपीएससी मुख्य परीक्षा (मेंस) से ठीक 10 दिन पहले सारिका को माइग्रेन का बेहद गंभीर अटैक आया, जिससे उन्हें असहनीय शारीरिक पीड़ा का सामना करना पड़ा।\n\nऐसी परिस्थिति में भी सारिका ने हिम्मत नहीं हारी और खुद को संभाला। माइग्रेन के दर्द के बावजूद उन्होंने पूरी एकाग्रता के साथ मेंस परीक्षा दी और सफलता हासिल की। इसके बाद उन्होंने साक्षात्कार चरण को भी सफलतापूर्वक पार किया। जब परिणाम घोषित हुए, तो सारिका ने अपने 5वें प्रयास में ऑल इंडिया 548वीं रैंक हासिल कर अपना सपना पूरा कर दिखाया। अब उत्तर प्रदेश में एएसपी के रूप में उनकी नई तैनाती उनकी इस बेमिसाल यात्रा का नया अध्याय है।\n\nइसका आप पर असर\nइस समाचार का पाठकों और अभ्यर्थियों के लिए व्यावहारिक अर्थ:\n\n• प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों के लिए: यह कहानी यूपीएससी और अन्य सिविल सेवाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को असफलता के बाद रणनीति बदलने और फोमो (FOMO) से बचने की व्यावहारिक राह दिखाती है।\n• उत्तर प्रदेश (सहारनपुर) में: सहारनपुर क्षेत्र में आईपीएस अधिकारियों के प्रशासनिक फेरबदल के बाद सारिका चौधरी के नए एएसपी के रूप में पदभार संभालने से स्थानीय पुलिस व्यवस्था और कानून-व्यवस्था संचालन पर सीधा असर पड़ेगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सारिका चौधरी वर्तमान में किस पद पर कार्यरत हैं?\nसारिका चौधरी 2024 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं और हाल ही में उन्हें उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में नए एएसपी (सहायक पुलिस अधीक्षक) के रूप में तैनात किया गया है।\n\n2. सारिका चौधरी को यूपीएससी परीक्षा में सफलता कितने प्रयासों में मिली?\nसारिका चौधरी को अपने 5वें प्रयास में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में सफलता मिली, जिसमें उन्होंने ऑल इंडिया 548वीं रैंक हासिल की।\n\n3. यूपीएससी की शुरुआती चार परीक्षाओं में सारिका चौधरी को क्या परिणाम मिला था?\nसाल 2019 से 2022 के बीच अपने शुरुआती चार प्रयासों में सारिका चौधरी यूपीएससी प्रीलिम्स परीक्षा भी पास नहीं कर पाई थीं।\n\n4. सारिका चौधरी की शैक्षणिक पृष्ठभूमि क्या रही है?\nउन्होंने 12वीं के बाद बिट्स पिलानी में इंजीनियरिंग छोड़ दी, फिर हिंदू कॉलेज दिल्ली से ग्रेजुएशन व मास्टर्स में टॉप किया और जेएनयू से पीएचडी करते समय यूपीएससी की तैयारी शुरू की।\n\n5. यूपीएससी मुख्य परीक्षा से ठीक पहले सारिका को किस स्वास्थ्य समस्या का सामना करना पड़ा था?\nयूपीएससी मेंस परीक्षा से ठीक 10 दिन पहले सारिका चौधरी को माइग्रेन का गंभीर अटैक आया था, लेकिन उन्होंने इसका डटकर सामना करते हुए परीक्षा दी और सफलता पाई।\n\nप्रेरणा और सबक\nसारिका चौधरी के संघर्ष और सफलता से मिलने वाले प्रमुख सबक:\n\n• अतीत की असफलता अंतिम परिणाम नहीं होती: स्कूल-कॉलेज में टॉपर होने के बाद भी चार बार यूपीएससी प्रीलिम्स में फेल होने पर उन्होंने हार नहीं मानी और रणनीति बदलकर सफलता हासिल की।\n• तुलना और 'फोमो' (FOMO) से बचें: दोस्तों के आगे निकलने का डर मन से निकालकर उन्होंने अपनी पढ़ाई के सीमित संसाधनों और खुद के प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित किया।\n• अंतिम समय के संकट में संयम: परीक्षा से 10 दिन पहले माइग्रेन अटैक जैसी अचानक आई चुनौती के बावजूद धैर्य बनाए रखा और लक्ष्य से ध्यान हटने नहीं दिया।\n• लक्ष्य के प्रति स्पष्टता: बिट्स पिलानी में इंजीनियरिंग और जेएनयू में पीएचडी छोड़ने जैसे कड़े फैसले लेकर उन्होंने अपने असली प्रशासनिक सपने को प्राथमिकता दी।",
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  "category": "सक्सेस स्टोरी",
  "publishedAt": "2026-08-22",
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    "यूपीएससी सक्सेस स्टोरी",
    "सहारनपुर एएसपी",
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