# छपरा की बेबी देवी ने पति के निधन के बाद संभाली कमान, जीविका के सहारे खड़ी की सफल बिजनेस

> पति की असामयिक मौत के बाद दो बच्चों की जिम्मेदारी संभालते हुए छपरा की बेबी देवी ने हार नहीं मानी। जीविका समूह से मिले सहयोग और अपनी कड़ी मेहनत के बल पर उन्होंने जनरल स्टोर का कारोबार खड़ा किया और आज वह आत्मनिर्भर जीवन जी रही हैं।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-09-26 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/chhapra-s-baby-devi-overcomes-tragedy-to-build-successful-business-through-livelihood-mission-39165 · **Language:** Hindi
**Tags:** महिला उद्यमी, जीविका समूह, छपरा न्यूज, बिहार बिजनेस, सफलता की कहानी, जनरल स्टोर

बिहार के छपरा जिले में एक महिला ने अपनी जीवटता और दृढ़ संकल्प से जीवन की तमाम कठिनाइयों को मात दे दी है। पति के जाने के बाद जब उनके सामने दुखों का पहाड़ टूट पड़ा और दो मासूम बच्चों की परवरिश का संकट खड़ा हुआ, तब उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। विपरीत परिस्थितियों से मुकाबला करते हुए उन्होंने रोजगार की दुनिया में कदम रखा और आज वह एक सफल कारोबारी के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। छपरा की रहने वाली इस महिला की कहानी उन तमाम लोगों के लिए एक मिसाल है जो मुश्किल वक्त में घबरा जाते हैं।

## साल 2003 में हुई थी शादी और 2007 में आया बड़ा संकट
छपरा जिले के गरखा प्रखंड के अंतर्गत आने वाले गरखा बाजार की रहने वाली बेबी देवी की जिंदगी आम दिनों की तरह चल रही थी। उनकी शादी वर्ष 2003 में हुई थी, लेकिन यह खुशियां ज्यादा लंबी नहीं टिक सकीं। शादी के महज कुछ ही वर्षों बाद वर्ष 2007 में एक गंभीर बीमारी की चपेट में आने से उनके पति का निधन हो गया। उस समय उनके दोनों बच्चे बहुत छोटे थे और घर में कमाने वाला कोई अन्य सदस्य नहीं था। इस अचानक हुए हादसे ने पूरे परिवार को आर्थिक और मानसिक रूप से तोड़ कर रख दिया था।

## जीविका समूह से जुड़ने के बाद मिली नई राह
पति की मृत्यु के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय हो गई थी। हालात इतने बुरे थे कि बच्चों का पेट भरने और उनका पालन-पोषण करने के लिए कभी-कभी दूसरों से उधार तक मांगना पड़ता था। इस कठिन समय में उन्हें एक उम्मीद की किरण नजर आई और वह जीविका समूह से जुड़ गईं। जीविका से जुड़ना उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। संगठन की मदद से उन्हें स्वरोजगार शुरू करने के लिए पहली बार 10 हजार रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई। इस शुरुआती राशि से उन्होंने जनरल स्टोर का कुछ सामान खरीदा और अपने घर के बाहर तिरपाल तानकर दुकानदारी शुरू कर दी।

## कारोबार में आई तेजी और मिला दूसरा लोन
शुरुआती दौर में संघर्ष काफी ज्यादा था, लेकिन बेबी देवी की मेहनत और लगन रंग लाने लगी। धीरे-धीरे उनकी दुकान पर ग्राहकों की आवाजाही बढ़ने लगी और आमदनी में भी सुधार होने लगा। उनके काम की प्रगति को देखते हुए जीविका की ओर से उन्हें दोबारा 40 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी गई। इस बढ़ी हुई राशि से उन्होंने अपने छोटे से स्टोर का दायरा बढ़ाया और सामानों की रेंज में भी इजाफा किया। तिरपाल के नीचे शुरू हुआ वह कारोबार अब उनके पक्के मकान के हिस्से में और उसके सामने सुचारू रूप से संचालित हो रहा है।

## पक्का घर बनवाया और बच्चों की पढ़ाई का उठाया खर्च
इस जनरल स्टोर से होने वाली कमाई ने उनके पूरे परिवार की तस्वीर बदल दी। उन्होंने अपनी मेहनत के पैसों से न केवल घर का रोजमर्रा का खर्च उठाया, बल्कि एक छोटा सा पक्का मकान भी तैयार करवा लिया। इसके अलावा, कारोबार से होने वाले मुनाफे से वह अपने दोनों बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का पूरा खर्च भी खुद ही उठा रही हैं। पति के इस दुनिया से चले जाने के बाद उन्होंने अकेले दम पर परिवार की संपूर्ण जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाई और अपनी मेहनत के बल पर जीवन की सभी बाधाओं को पार कर लिया।

## अब होलसेल बिजनेस शुरू करने की है योजना
अपनी सफलता की इस यात्रा के बारे में बात करते हुए बेबी देवी बताती हैं कि शुरुआती दिन उनके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण थे, लेकिन आज उन्हें अपनी इस मुकाम पर गर्व है। उनका यह सफर यहीं नहीं रुकता है, बल्कि वह भविष्य को लेकर काफी बड़े सपने देखती हैं। उनका कहना है कि अगर उन्हें आगे भी सरकारी स्तर पर या किसी अन्य माध्यम से आर्थिक सहायता मिलती है, तो वह अपने इस जनरल स्टोर के काम को और आगे ले जाना चाहती हैं। उनकी अगली योजना इस छोटे कारोबार को एक बड़े होलसेल बिजनेस में तब्दील करने की है, ताकि वह और अधिक तरक्की कर सकें।

## इसका आप पर असर
यह सफलता की कहानी उन तमाम महिलाओं और ग्रामीण परिवारों के लिए बेहद प्रेरणादायक है जो आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं।

- **बिहार में:** ग्रामीण इलाकों की महिलाएं जीविका जैसे संगठनों से जुड़कर छोटे ऋण के जरिए खुद का स्वरोजगार स्थापित कर सकती हैं।
- **वित्तीय प्रबंधन:** शुरुआती कम पूंजी से व्यवसाय शुरू करके धीरे-धीरे मुनाफे को reinvest करने से बड़े आर्थिक संकटों से निपटा जा सकता है।
- **पारिवारिक सुरक्षा:** विपरीत परिस्थितियों में सरकारी या सामुदायिक सहायता योजनाओं का लाभ उठाकर आत्मनिर्भर बना जा सकता है।
- **शिक्षा पर असर:** छोटे व्यवसायों से होने वाली नियमित आय से बच्चों की स्कूल की पढ़ाई का खर्च आसानी से उठाया जा सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
बेबी देवी के इस संघर्ष और सफलता के पीछे ग्रामीण आजीविका मिशन और व्यक्तिगत दृढ़ संकल्प का अहम योगदान रहा है।

- **आर्थिक संकट:** वर्ष 2007 में पति के निधन के बाद घर में कमाने वाला कोई सदस्य नहीं बचा था और परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच गया था।
- **संस्थागत सहायता:** जीविका समूह से जुड़ने के कारण उन्हें अपने व्यावसायिक सफर की शुरुआत के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता और मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
- **कड़ी मेहनत:** शुरुआती दौर में तिरपाल के नीचे दुकान लगाकर उन्होंने अपनी बिक्री बढ़ाई और ग्राहकों का भरोसा जीता।
- **पुनर्निदेशन:** पहले चरण के लोन पर सफलता मिलने के बाद संगठन ने उन्हें दूसरा बड़ा ऋण दिया जिससे कारोबार का विस्तार संभव हुआ।

## सवाल-जवाब

### 1. बेबी देवी कहां की रहने वाली हैं?
बेबी देवी छपरा जिले के गरखा प्रखंड के गरखा बाजार की रहने वाली हैं।

### 2. उनके पति का निधन कब हुआ था?
उनके पति का निधन गंभीर बीमारी के कारण वर्ष 2007 में हुआ था।

### 3. उन्हें पहली बार व्यवसाय के लिए कितनी मदद मिली थी?
जीविका समूह से जुड़ने के बाद उन्हें रोजगार शुरू करने के लिए पहली बार 10 हजार रुपये की आर्थिक मदद मिली थी।

### 4. व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए दूसरी बार कितनी राशि मिली?
कारोबार को बढ़ाने के लिए जीविका की ओर से उन्हें दूसरी बार 40 हजार रुपये की मदद दी गई थी।

### 5. बेबी देवी वर्तमान में क्या कारोबार करती हैं?
वह अपने घर से जनरल स्टोर का संचालन करती हैं और अब होलसेल कारोबार शुरू करने का सपना देख रही हैं।

## प्रेरणा और सबक
बेबी देवी की यह प्रेरक यात्रा हर उस व्यक्ति को सीख देती है जो जीवन की कठिन परिस्थितियों से हार मान लेता है।

- **मुश्किलों में डटे रहना:** जीवन में चाहे कितनी भी बड़ी ट्रेजेडी क्यों न आ जाए, हिम्मत बनाए रखकर आगे बढ़ने का रास्ता खुद तलाशना पड़ता है।
- **छोटे से शुरुआत करना:** कोई भी व्यवसाय बड़ा या छोटा नहीं होता; आप महज 10 हजार रुपये जैसी छोटी पूंजी से भी व्यापार की शुरुआत कर सकते हैं।
- **संसाधनों का सही उपयोग:** सरकारी या सामुदायिक सहायता समूहों द्वारा मिलने वाले लोन का सही सदुपयोग करके आजीविका चलाई जा सकती है।
- **आत्मनिर्भरता का महत्व:** दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय खुद मेहनत करके अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित किया जा सकता है।

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