छतरपुर के आकाश सिंह राठौर ने 6 सालों में बचाए 1400 सांप, धोखेबाज़ी के खिलाफ शुरू किया था रेस्क्यू मिशन मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में रहने वाले बैंक कर्मचारी आकाश सिंह राठौर पिछले 6 वर्षों में 1400 सांपों और 300 गोह को बचा चुके हैं। एक ठग सपेरे की चालाकी देखकर शुरू हुआ उनका यह अभियान अब 5000 जीवों को बचाने के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में रहने वाले आकाश सिंह राठौर पिछले 6 वर्षों से सांपों और गोह जैसे जहरीले जीवों को सुरक्षित पकड़कर जंगल में छोड़ने का काम कर रहे हैं। इस अवधि के दौरान उन्होंने 1400 सांपों और 300 गोह को सुरक्षित रेस्क्यू किया है। आकाश का अंतिम लक्ष्य 5000 सांपों को बचाना है। अपनी आजीविका चलाने के लिए वह एक निजी बैंक में नौकरी करते हैं और बाकी समय पूरी लगन से वन्यजीवों की रक्षा में लगाते हैं। धोखेबाज़ी के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणादायी कहानी आकाश ने कभी यह नहीं सोचा था कि वह पेशेवर रूप से सांप पकड़ने का कार्य करेंगे। उनके इस अभियान की शुरुआत के पीछे छतरपुर शहर का एक विशेष घटनाक्रम जुड़ा हुआ है। शहर में एक बुजुर्ग व्यक्ति सांप पकड़ने का काम करते थे और प्रत्येक कॉल के लिए 2 हजार रुपये शुल्क लेते थे। वह गरीब लोगों से भी यह रकम वसूलते थे। इसके साथ ही वह एक चालाकी भी करते थे। वह पकड़े गए सांप के दांत तोड़कर उसे उसी घर के आसपास दोबारा छोड़ देते थे, ताकि दोबारा बुलावा आने पर फिर से पैसे कमाए जा सकें। जब आकाश को इस धोखाधड़ी और गरीबों के शोषण के बारे में पता चला, तो उन्हें यह बात गहराई से चुभी। उन्होंने तय किया कि वह इस अनैतिक काम को खत्म करेंगे। इसके बाद उन्होंने खुद सांप पकड़ने का विधिवत प्रशिक्षण लिया और बीते 6 वर्षों से बिना किसी स्वार्थ के यह सेवा दे रहे हैं। 100 किलोमीटर दूर तक की यात्रा और जागरूकता अभियान जब भी आकाश को सांप मिलने की सूचना मिलती है, वह बिना समय गंवाए अपनी मोटरसाइकिल से मौके पर पहुंच जाते हैं। कई बार उन्हें रेस्क्यू के लिए 100 किलोमीटर तक की दूरी तय करनी पड़ती है। आर्थिक रूप से सक्षम लोग उन्हें पेट्रोल का खर्च दे देते हैं, जबकि गरीब परिवारों से वह किसी भी प्रकार का शुल्क या ईंधन खर्च नहीं लेते हैं। छतरपुर जिले में हर साल सांप के काटने से कई लोगों की जान चली जाती है। इसका मुख्य कारण लोगों में सांपों की प्रजातियों और उनके व्यवहार के बारे में सही जानकारी न होना है। इस समस्या को देखते हुए आकाश रेस्क्यू के साथ-साथ लोगों को जागरूक भी करते हैं। वह स्थानीय निवासियों को बताते हैं कि क्षेत्र में कौन-कौन से सांप पाए जाते हैं और इनमें से कौन से जहरीले होते हैं। बैंक की नौकरी, भावी लक्ष्य और सरकारी मदद की उम्मीद सांप पकड़ने के कार्य से परिवार का खर्च नहीं चल सकता, इसलिए आकाश एक प्राइवेट बैंक में नौकरी करते हैं। नौकरी से होने वाली आय से वह अपना घर चलाते हैं और बचा हुआ समय वन्यजीव संरक्षण में लगाते हैं। निष्पक्ष और ईमानदार सपेरों की संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से वह फिलहाल 2 अन्य युवाओं को भी सांप पकड़ने की ट्रेनिंग दे रहे हैं। आकाश अपना पूरा समय वन्यजीव संरक्षण को देना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया और मध्य प्रदेश के वन एवं पर्यावरण मंत्री दिलीप अहिरवार से भी मुलाकात की। हालांकि, उन्हें विभाग में कोई आधिकारिक नौकरी या पद नहीं मिल सका। इसके बावजूद आकाश का कहना है कि वह बिना किसी सरकारी मदद के अपने निजी खर्च पर सांप पकड़ने का अभियान जारी रखेंगे और युवाओं को प्रशिक्षण देते रहेंगे। इसका आप पर असर • भारत में: यह कहानी दर्शाती है कि कैसे व्यक्तिगत जागरूकता और निस्वार्थ प्रयास से स्थानीय स्तर पर वन्यजीव संरक्षण और मानव सुरक्षा दोनों को बढ़ावा दिया जा सकता है। • छतरपुर में: जिले के निवासियों को जहरीले सांपों के प्रति जागरूकता और आपात स्थिति में मुफ्त तथा भरोसेमंद रेस्क्यू सेवा की सुविधा मिल रही है। सवाल-जवाब 1. छतरपुर के आकाश सिंह राठौर अब तक कितने जीवों का रेस्क्यू कर चुके हैं? आकाश सिंह राठौर पिछले 6 सालों में 1400 सांपों और 300 गोह को सुरक्षित बचा चुके हैं। 2. आकाश सिंह राठौर ने सांप पकड़ना क्यों शुरू किया? एक स्थानीय सपेरे द्वारा लोगों से भारी रकम वसूलने और सांप के दांत तोड़कर दोबारा उसी घर में छोड़ने की धोखाधड़ी को रोकने के लिए उन्होंने प्रशिक्षण लेकर यह कार्य शुरू किया। 3. क्या आकाश सांप पकड़ने के लिए कोई शुल्क लेते हैं? वह सक्षम लोगों से केवल पेट्रोल का खर्च लेते हैं, जबकि गरीब परिवारों से कोई पैसा या ईंधन खर्च नहीं लेते। 4. आकाश अपनी आजीविका के लिए क्या करते हैं? घर चलाने और अपने दैनिक खर्चों को पूरा करने के लिए आकाश एक प्राइवेट बैंक में नौकरी करते हैं। 5. क्या आकाश को वन विभाग या सरकार से कोई नौकरी मिली है? उन्होंने वन विभाग और मंत्री दिलीप अहिरवार से बात की थी, लेकिन उन्हें कोई सरकारी नौकरी या पद नहीं मिला है। प्रेरणा और सबक • अन्याय के खिलाफ ठोस कदम: केवल बुराई की शिकायत करने के बजाय खुद प्रशिक्षित होकर समस्या का समाधान बने। • व्यावहारिक संतुलन: जुनून को पूरा करने के साथ-साथ आजीविका के लिए बैंक नौकरी का संतुलन बनाए रखा। • निस्वार्थ सेवा: सरकारी नौकरी या अनुदान न मिलने के बाद भी अपने जेब के खर्च पर जनसेवा जारी रखी। • ज्ञान का विस्तार: नए युवाओं को ट्रेनिंग देकर अपनी जगह ईमानदार रेस्क्यूअर्स की नई पीढ़ी तैयार की। https://trendkia.com/success-stories/chhatarpur-ke-akash-singh-rathore-ne-6-salon-men-bachae-1400-sanpa-dhokhebazi-ke-khilapha-shuru-kiya-tha-reskyu-mishana-11049 TrendKia — Har trend, sabse pehle.