# छतरपुर के फईम खान ने सरकारी मास्टरी ठुकराकर खड़ा किया प्लाई फोम कारोबार, हर माह 50 हजार तक कमाई

> मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के लवकुश नगर निवासी फईम खान ने सरकारी शिक्षक पद और इंजीनियरिंग छोड़कर व्यापार का रास्ता चुना। आज वे प्लाई, फोम और रियल एस्टेट के जरिए हर महीने 40 से 50 हजार रुपये कमा रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-09-30 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/chhatarpur-ke-faheem-khan-ne-sarakari-mastari-thukarakara-khara-kiya-plai-phoma-karobara-hara-maha-50-hajara-taka-kamai-40663 · **Language:** Hindi
**Tags:** फईम खान, छतरपुर, लवकूश नगर, सक्सेस स्टोरी, प्लाई फोम बिजनेस, किंग प्लाई फोम, मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश में छतरपुर जिले के लवकुश नगर निवासी फईम खान ने सुरक्षित सरकारी नौकरी के पारंपरिक रास्ते से अलग हटकर अपनी राह खुद बनाई। शिक्षक पद पर चयन होने के बावजूद उन्होंने शिक्षण कार्य को अपनाने के बजाय कारोबारी क्षेत्र में कदम रखने का साहसिक फैसला किया। शुरुआत में उनके इस निर्णय को लेकर लोगों ने तरह-तरह के सवाल उठाए और आलोचना भी की, लेकिन उन्होंने अपने इरादे नहीं बदले। आज वे एक स्थापित कारोबारी बन चुके हैं और विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियों के जरिए हर महीने 40 से 50 हजार रुपये की नियमित कमाई कर रहे हैं।

## उच्च शिक्षा के बावजूद बिजनेस बना तीसरा विकल्प
फईम खान की शैक्षणिक पृष्ठभूमि काफी मजबूत रही है। उन्होंने छतरपुर के महाराजा छत्रसाल कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके साथ ही उन्होंने अरेबिक भाषा में डिप्लोमा हासिल किया और अंग्रेजी भाषा का भी अध्ययन किया। हालांकि, उनके जीवन में व्यापार करना पहली प्राथमिकता नहीं था, बल्कि यह उनका तीसरा विकल्प बनकर सामने आया।

साल 2011 में उन्होंने वर्ग 3 शिक्षक भर्ती परीक्षा पास की थी और वे सरकारी शिक्षक बन गए थे। उस समय मिलने वाला 2500 रुपये प्रति माह का मानदेय उन्हें वित्तीय दृष्टि से उपयुक्त नहीं लगा। कम वेतन के कारण उन्होंने इस पद पर योगदान न देने का मन बनाया और जॉइन नहीं किया।

## पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते छूटा इंजीनियरिंग कॉलेज
शिक्षक पद छोड़ने के उपरांत फईम खान ने प्री इंजीनियरिंग टेस्ट यानी पीईटी परीक्षा दी और उसमें भी सफलता प्राप्त की। इस परीक्षा के जरिए उन्हें ग्वालियर का प्रतिष्ठित सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज अलॉट हो गया था। लेकिन घर की परिस्थितियों ने उन्हें शहर छोड़ने की अनुमति नहीं दी।

परिवार में उनके पिता ही एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे, जबकि उनके बड़े भाई पहले से जबलपुर रहकर इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे। इसके अलावा, फईम खान कभी गृह नगर से बाहर नहीं रहे थे, इसलिए उन्हें बाहर अकेले रहने का कोई अनुभव भी नहीं था। पारिवारिक हालात और पिता का संबल बनने के उद्देश्य से उन्होंने घर पर ही रुकने का निर्णय लिया, जिससे इंजीनियरिंग का दूसरा विकल्प भी समाप्त हो गया।

## थोक काम से किंग प्लाई फोम के विस्तार तक
पहले दोनों रास्ते बंद होने के बाद उन्होंने साल 2013 में औपचारिक तौर पर कारोबार को ही अपना मुख्य पेशा बना लिया। व्यापार की शुरुआत उन्होंने अपने घर से ही थोक में फोम का काम करके की थी। साल 2012 के बाद उन्होंने दुकान लेकर फुटकर में फोम की बिक्री शुरू कर दी और धीरे-धीरे इसमें प्लाईवुड तथा हार्डवेयर का सामान भी जोड़ लिया। व्यापारिक क्षेत्र से उनका जुड़ाव करीब 20 वर्षों का रहा है।

व्यापार में लगातार सक्रिय रहते हुए उन्होंने रियल एस्टेट के क्षेत्र में भी कदम रखा और प्लॉटिंग का काम शुरू किया। इसके साथ वे अन्य साइड बिजनेस भी संभालते रहे। हाल ही में उन्होंने अपने कारोबार को बड़ा रूप देने के लिए 30 लाख रुपये की लागत से 2 दुकानें खरीदीं और 'किंग प्लाई फोम' नाम से एक विस्तृत प्रतिष्ठान की स्थापना की।

## व्यापार में विश्वास, जीएसटी और कमाई का गणित
कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए ग्राहकों का अटूट भरोसा जीतना और उन्हें सही दाम पर गुणवत्तापूर्ण सामान देना सबसे अहम होता है। फईम खान के अनुसार, प्लाई फोम के कारोबार में उन्हें लगभग 10 प्रतिशत का शुद्ध मुनाफा मिलता है। वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी लागू होने से पहले यह मार्जिन 15 प्रतिशत हुआ करता था, जो बाद में घटकर 10 प्रतिशत रह गया।

वे मानते हैं कि सरकारी या निजी नौकरी में स्थिरता और एक तय आमदनी होती है, लेकिन व्यवसाय में जितनी अधिक लगन और मेहनत लगाई जाए, आमदनी की संभावनाएं उतनी ही बढ़ जाती हैं। आज वे केवल प्लाई फोम के काम से ही हर माह 40 से 50 हजार रुपये की आय सहजता से अर्जित कर रहे हैं।

## इसका आप पर असर
फईम खान की यह यात्रा दिखाती है कि कम वेतन वाली सरकारी नौकरी या डिग्री के पीछे भागने के बजाय जमीनी स्तर पर व्यापार खड़ा करके भी सम्मानजनक आजीविका पाई जा सकती है।

- **भारत में:** यह कहानी उन युवाओं के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शक है जो मामूली मानदेय वाली नौकरियों में वर्षों बिता देते हैं। छोटे शहरों में थोक व खुदरा व्यापार शुरू कर स्वरोजगार से बेहतर आय अर्जित की जा सकती है।
- **मध्य प्रदेश में:** छतरपुर और बुंदेलखंड क्षेत्र के युवाओं के लिए यह स्थानीय स्तर पर उद्यम लगाने की प्रेरणा है। बड़े शहरों की तरफ पलायन करने के बजाय अपने जिले में ही हार्डवेयर, प्लाई और निर्माण सामग्री का काम खड़ा किया जा सकता है।
- **व्यवसाय चयन:** बुनियादी जरूरतों जैसे फोम, प्लाई और निर्माण सामग्री की मांग हर कस्बे में निरंतर बनी रहती है। शुरुआत में घर से काम करके पूंजी बचाई जा सकती है और धीरे-धीरे दुकान का विस्तार किया जा सकता है।
- **मार्जिन प्रबंधन:** जीएसटी जैसे कर बदलावों के बाद 10 प्रतिशत मार्जिन पर भी ग्राहक भरोसा जीतकर बड़ा टर्नओवर बनाया जा सकता है। उचित मूल्य और भरोसेमंद सेवा से स्थायी ग्राहक वर्ग तैयार होता है।

## ऐसा क्यों हुआ
फईम खान द्वारा सरकारी शिक्षण पद और इंजीनियरिंग दोनों को त्यागकर व्यापार चुनने के पीछे आर्थिक और पारिवारिक परिस्थितियां मुख्य वजह रहीं।

- **कम वेतन का असंतोष:** साल 2011 में शिक्षक भर्ती परीक्षा पास करने के बाद उन्हें मात्र 2500 रुपये महीने का मानदेय मिल रहा था। इतनी सीमित राशि में भविष्य की वित्तीय संभावनाएं न दिखने के कारण उन्होंने नौकरी जॉइन नहीं की।
- **पारिवारिक और आर्थिक सीमाएं:** ग्वालियर के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला मिलने के बाद भी वे बाहर नहीं जा सके। पिता अकेले कमाने वाले थे और बड़े भाई जबलपुर में पहले से इंजीनियरिंग कर रहे थे, जिससे दोहरी पढ़ाई का खर्च उठाना परिवार के लिए संभव नहीं था।
- **विकल्पों का अंत और व्यापार:** पहले दोनों रास्ते बंद होने के बाद व्यापार ही उनका एकमात्र व्यावहारिक विकल्प बचा। उन्होंने उपलब्ध संसाधनों के साथ फोम के थोक काम से शुरुआत की और धीरे-धीरे प्लाईवुड व हार्डवेयर में विस्तार किया।

## सवाल-जवाब

### 1. फईम खान कहां के रहने वाले हैं?
फईम खान मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के लवकुश नगर के निवासी हैं।

### 2. फईम खान ने सरकारी शिक्षक की नौकरी क्यों छोड़ी थी?
साल 2011 में शिक्षक पद पर मात्र 2500 रुपये महीने का मानदेय मिल रहा था, जो उन्हें आर्थिक रूप से आकर्षक नहीं लगा।

### 3. इंजीनियरिंग कॉलेज अलॉट होने के बाद भी वे पढ़ने क्यों नहीं गए?
पिता अकेले कमाने वाले थे और बड़े भाई पहले से जबलपुर में इंजीनियरिंग कर रहे थे, इसलिए पारिवारिक स्थिति के चलते वे ग्वालियर नहीं जा सके।

### 4. फईम खान की शैक्षणिक योग्यता क्या है?
वे महाराजा छत्रसाल कॉलेज छतरपुर से ग्रेजुएट हैं, उनके पास अरेबिक भाषा में डिप्लोमा है और उन्होंने अंग्रेजी भाषा भी सीखी है।

### 5. फईम खान ने अपने व्यापार की शुरुआत कैसे की थी?
उन्होंने शुरुआत में अपने घर से ही थोक में फोम बेचने का काम शुरू किया था, जिसे बाद में दुकान खोलकर खुदरा रूप दिया।

### 6. उनके मुख्य व्यापारिक प्रतिष्ठान का नाम क्या है?
उन्होंने 30 लाख रुपये में 2 दुकानें खरीदकर 'किंग प्लाई फोम' नाम से अपने व्यापार का विस्तार किया है।

### 7. प्लाई फोम के कारोबार में उन्हें कितना प्रतिशत मुनाफा मिलता है?
उन्हें इस कारोबार में 10 प्रतिशत का शुद्ध मुनाफा मिलता है, जो जीएसटी लागू होने से पहले 15 प्रतिशत था।

### 8. फईम खान इस समय प्रति माह कितनी कमाई कर रहे हैं?
फईम खान अपने प्लाई फोम कारोबार से हर महीने 40 से 50 हजार रुपये की नियमित कमाई कर लेते हैं।

## प्रेरणा और सबक
फईम खान का अनुभव यह सिखाता है कि जब प्राथमिक योजनाएं विफल हो जाएं, तो व्यावहारिक फैसले लेकर जीवन में नई शुरुआत की जा सकती है।

- **योजना विफल होने पर न रुकें:** जब शिक्षक की नौकरी और इंजीनियरिंग दोनों रास्ते बंद हो गए, तो उन्होंने समय गंवाए बिना तीसरे विकल्प को पूरे समर्पण से अपनाया।
- **छोटे स्तर से शुरुआत:** उन्होंने तुरंत बड़ी दुकान खोलने के बजाय पहले घर से थोक फोम बेचने का काम किया और पूंजी जुड़ने पर खुदरा दुकान खोली।
- **पारिवारिक दायित्वों का सम्मान:** अपनी महत्वाकांक्षा को परिवार की आर्थिक स्थिति के आड़े नहीं आने दिया और पिता का सहारा बनकर स्थानीय स्तर पर ही राह बनाई।
- **विविधीकरण से मजबूती:** केवल एक उत्पाद तक सीमित न रहकर उन्होंने प्लाई, हार्डवेयर और रियल एस्टेट प्लॉटिंग जैसे कई क्षेत्रों में कारोबार फैलाया।

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