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  "type": "article",
  "title": "छोटे कारोबार से खड़ा किया अरबों का साम्राज्य, जानिए बरेली की इन हस्तियों ने कैसे बदली शहर की पहचान",
  "summary": "खाद्य तेल उद्योग, उच्च शिक्षा, अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में बरेली के प्रमुख उद्योगपतियों ने उल्लेखनीय मुकाम हासिल कर शहर के विकास को नई दिशा दी है।",
  "content": "उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक और व्यापारिक केंद्रों में शुमार बरेली ने समय के साथ अपनी पारंपरिक पहचान से आगे बढ़कर एक नई आर्थिक छलांग लगाई है। इस बदलाव की मजबूत नींव उन स्थानीय उद्यमियों, चिकित्सकों और शिक्षाविदों ने रखी है, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बीच काम शुरू करके राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमाई। खाद्य तेल के विशाल कारोबार से लेकर मेडिकल हब और वैश्विक सुगंध उद्योग तक में इन हस्तियों ने बरेली के आर्थिक परिदृश्य को पूरी तरह बदलकर रख दिया है।\n\nखाद्य तेल बाजार में घनश्याम खंडेलवाल का दबदबा\nबीएल एग्रो इंडस्ट्रीज लिमिटेड के अध्यक्ष घनश्याम खंडेलवाल की व्यावसायिक यात्रा दृढ़ संकल्प का एक असाधारण उदाहरण पेश करती है। उन्होंने अपने करियर का आगाज बरेली की एक बेहद छोटी पुश्तैनी दुकान में तेल बेचने से किया था। दशकों के अथक प्रयास, गुणवत्ता पर ध्यान और आधुनिक वितरण तंत्र के बल पर आज उनके नेतृत्व वाले बीएल एग्रो ग्रुप का सालाना कारोबार 5,000 करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है। देश भर के घरों में अपनी पहचान बना चुका सरसों तेल का प्रमुख ब्रांड ‘बैल कोल्हू’ इसी समूह का हिस्सा है, जिसने देश के खाद्य तेल बाजार में एक मजबूत और भरोसेमंद मुकाम बनाया है।\n\nस्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा में देव मूर्ति की पहल\nबरेली में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं और उच्च तकनीकी चिकित्सा शिक्षा का जिक्र होते ही देव मूर्ति का नाम सबसे पहले आता है। श्री राम मूर्ति स्मारक (एसआरएमएस) ट्रस्ट के संस्थापक और चेयरमैन के रूप में उन्होंने बरेली से नैनीताल मार्ग पर एक विशाल मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की स्थापना की। इस 950 बिस्तरों वाले मल्टी सुपर स्पेशलिटी और ट्रॉमा सेंटर ने रुहेलखंड क्षेत्र में गंभीर बीमारियों के इलाज की दिशा बदल दी है। हाल ही में इस परिसर में उत्तर प्रदेश का पहला हाइपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी सेंटर शुरू किया गया है। इसके अलावा, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और लखनऊ के पूरे मार्ग पर इकलौती ईसीएमओ (एक्स्ट्राकॉर्पोरियल मेंब्रेन ऑक्सीजनेशन) जैसी अत्याधुनिक जीवन रक्षक प्रणाली भी इसी अस्पताल में उपलब्ध कराई गई है।\n\nडॉ. केशव कुमार अग्रवाल का चिकित्सा और शिक्षण में योगदान\nप्रतिष्ठित कैंसर और जनरल सर्जन डॉ. केशव कुमार अग्रवाल ने चिकित्सा सेवा के साथ-साथ शिक्षा क्षेत्र में भी बड़ा निवेश किया है। वह रोहिलखंड मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के ग्रुप चेयरमैन हैं, जिसके तहत नर्सिंग, फार्मेसी, डेंटल और पैरामेडिकल संस्थानों की एक पूरी श्रृंखला संचालित की जाती है। उनके मार्गदर्शन में बरेली स्वास्थ्य शिक्षा का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। इसके साथ ही वह मेरठ में स्थित राधा गोविंद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के उच्च प्रशासनिक नेतृत्व से भी जुड़े हुए हैं, जिससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उनका संस्थागत प्रभाव और व्यापक हुआ है।\n\nशिक्षा और राजनीति के संगम पर डॉ. उमेश गौतम\nभारतीय जनता पार्टी से जुड़े डॉ. उमेश गौतम ने अकादमिक जगत और स्थानीय नगर प्रशासन दोनों में अपनी अलग पहचान बनाई है। वह वर्तमान में बरेली के महापौर पद पर कार्यरत हैं और साथ ही नगर के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थान इन्वर्टिस यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति भी हैं। अपनी शिक्षा के अंतर्गत उन्होंने मुरादाबाद के हिंदू कॉलेज से वाणिज्य में स्नातक (बी.कॉम) पूरा किया। इसके बाद उन्होंने इटली की प्रसिद्ध यूनिवर्सिटी पोपोलारे डी मिलानो से डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (पीएचडी) की मानद उपाधि प्राप्त कर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय अनुभव भी हासिल किया।\n\nप्रवीण सिंह ऐरन का विधि और विविध कारोबार में दखल\nपेशे से प्रख्यात कानूनविद प्रवीण सिंह ऐरन एक बड़े व्यावसायिक समूह के रणनीतिक सलाहकार के रूप में कार्य करते हैं। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान दाखिल किए गए आधिकारिक हलफनामे के मुताबिक, उनके और उनके परिवार के पास 182 करोड़ रुपये से अधिक की कुल चल और अचल संपत्ति दर्ज है। इस संपत्ति सूची में बड़े पैमाने पर कृषि भूमि, महंगी घड़ियां और लग्जरी गाड़ियां शामिल हैं। उनके व्यावसायिक समूह और पारिवारिक निवेश का विस्तार कृषि, रियल एस्टेट, हेल्थकेयर, आतिथ्य सत्कार और शिक्षा के व्यापक क्षेत्रों तक फैला हुआ है।\n\nमेहताब सिद्दीकी ने संवारी बरेली की आतिथ्य परंपरा\nबरेली के बिहारीपुर इलाके से ताल्लुक रखने वाले मेहताब सिद्दीकी ने शहर के होटल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को आधुनिक रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। शहर में शानदार शादियों, कॉर्पोरेट आयोजनों और पर्यटन से जुड़ी सेवाओं के स्तर को ऊपर उठाने के लिए उन्हें विशेष रूप से जाना जाता है। होटल व्यवसाय के सफल प्रबंधन और बेहतरीन मेजबानी के लिए उन्हें ‘माई बरेली माई प्राइड’ तथा ‘गोल्डन ग्लोरी अवार्ड्स’ जैसे कई प्रतिष्ठित नागरिक और व्यापारिक सम्मानों से नवाजा जा चुका है।\n\nवैश्विक सुगंध बाजार और गौरव मित्तल की विशेषज्ञता\nसुगंध और आवश्यक तेल (एसेंशियल ऑयल) के क्षेत्र में गौरव मित्तल बरेली का नाम अंतरराष्ट्रीय पटल पर चमका रहे हैं। वह 2010 से अपने पारिवारिक व्यवसाय के मैनेजिंग डायरेक्टर के पद पर कार्यरत हैं और इसे तकनीकी रूप से समृद्ध बना रहे हैं। गौरव ने फ्रांस की राजधानी पेरिस के विश्वविख्यात संस्थान आईएसआईपीसीए से यूरोपियन फ्रैग्रेंस एंड कॉस्मेटिक्स में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है। भारत लौटने से पूर्व उन्होंने लगभग 15 वर्षों तक फ्रांस में एक पेशेवर इत्र निर्माता (परफ्यूमर) के रूप में कार्य किया, जिसका तकनीकी अनुभव अब बरेली के पारंपरिक उद्योग को मिल रहा है।\n\nदिलीप कुमार खंडेलवाल का खाद्य तेल और पैकेजिंग उद्योग\nबरेली स्थित खंडेलवाल एडिबल ऑयल्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक दिलीप कुमार खंडेलवाल खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में एक मजबूत स्तंभ हैं। वह अपने बेटे प्रियंक खंडेलवाल के साथ मिलकर इस कंपनी का सफल संचालन करते हैं। उनकी कंपनी न केवल पारंपरिक सरसों तेल और रिफाइंड सोयाबीन तेल का उत्पादन करती है, बल्कि पामोलिन, ब्लेंडेड वेजिटेबल ऑयल और उपभोक्ता वस्तुओं जैसे चाय व चीनी की पैकेजिंग के क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर कारोबार संभाल रही है।\n\nइसका आप पर असर\nबरेली के इन प्रमुख व्यापारिक और संस्थागत मॉडलों से आम नागरिकों और रोजगार तलाश रहे युवाओं को स्थानीय स्तर पर बेहतर अवसर और सुविधाएं मिल रही हैं।\n\n• स्थानीय रोजगार: खाद्य तेल, पैकेजिंग और हॉस्पिटैलिटी जैसे क्षेत्रों में बड़े उद्योगों के विस्तार से जिले में हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियां तैयार हुई हैं। स्थानीय युवाओं को आजीविका के लिए दूसरे बड़े महानगरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता है।\n• आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा: नैनीताल रोड स्थित अस्पताल में ईसीएमओ और हाइपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी जैसी तकनीकें आने से गंभीर मरीजों को लखनऊ या दिल्ली रेफर करने की जरूरत कम हो गई है। गोल्डन ऑवर के दौरान त्वरित इलाज मिलने से गंभीर मरीजों की जान बचाना आसान हुआ है।\n• उच्च शिक्षा के विकल्प: जिले में निजी विश्वविद्यालयों और मेडिकल कॉलेजों की स्थापना से छात्रों को अपने गृह क्षेत्र में ही पेशेवर डिग्रियां हासिल करने की सुविधा मिली है। इससे दूसरे शहरों में रहने और पढ़ाई करने पर होने वाले भारी खर्च में बचत होती है।\n• व्यापारिक अवसर: पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और कृषि उपज से जुड़े सहायक व्यवसायों को इन बड़े समूहों की आपूर्ति श्रृंखला से नियमित काम मिल रहा है। छोटे व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों की आय में इससे निरंतर स्थिरता बनी रहती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. घनश्याम खंडेलवाल की कंपनी बीएल एग्रो का टर्नओवर कितना है?\nघनश्याम खंडेलवाल के नेतृत्व वाले बीएल एग्रो ग्रुप का कुल वार्षिक टर्नओवर 5,000 करोड़ रुपये से अधिक है।\n\n2. बीएल एग्रो का सबसे प्रसिद्ध उत्पाद कौन सा है?\nबीएल एग्रो का सबसे लोकप्रिय और प्रसिद्ध उत्पाद 'बैल कोल्हू' सरसों तेल है।\n\n3. एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में कितने बेड हैं?\nदेव मूर्ति द्वारा स्थापित एसआरएमएस अस्पताल में 950 बिस्तरों वाला विशाल मल्टी सुपर स्पेशलिटी और ट्रॉमा सेंटर संचालित होता है।\n\n4. एसआरएमएस अस्पताल में हाल ही में कौन सी आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं शुरू की गई हैं?\nअस्पताल में उत्तर प्रदेश का पहला हाइपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी सेंटर और दिल्ली व लखनऊ के बीच इकलौती ईसीएमओ सुविधा शुरू की गई है।\n\n5. बरेली के वर्तमान महापौर कौन हैं और वह किस विश्वविद्यालय से जुड़े हैं?\nबरेली के वर्तमान महापौर डॉ. उमेश गौतम हैं, जो इन्वर्टिस यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति भी हैं।\n\n6. प्रवीण सिंह ऐरन ने 2024 के हलफनामे में कितनी संपत्ति घोषित की थी?\n2024 के लोकसभा चुनाव हलफनामे के अनुसार, प्रवीण सिंह ऐरन और उनके परिवार के पास 182 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति है।\n\n7. गौरव मित्तल ने फ्रांस में कितने समय तक काम किया?\nगौरव मित्तल ने भारत लौटकर पारिवारिक व्यवसाय संभालने से पहले फ्रांस में लगभग 15 वर्षों तक परफ्यूमर के तौर पर काम किया था।\n\n8. खंडेलवाल एडिबल ऑयल्स प्राइवेट लिमिटेड कौन-कौन से उत्पाद तैयार करती है?\nयह कंपनी सरसों तेल, रिफाइंड सोयाबीन तेल, पामोलिन, ब्लेंडेड ऑयल के अलावा चाय और चीनी की पैकेजिंग का काम करती है।\n\nप्रेरणा और सबक\nसीमित पृष्ठभूमि से निकलकर राष्ट्रीय स्तर के उद्यम स्थापित करने वाले इन कारोबारियों का जीवन कई व्यावहारिक सीख देता है।\n\n• जड़ों से जुड़े रहकर विस्तार: एक छोटी पुश्तैनी दुकान से 5,000 करोड़ रुपये का ब्रांड तैयार करना यह साबित करता है कि स्थानीय उत्पाद में अगर गुणवत्ता हो, तो उसे राष्ट्रीय पहचान दिलाई जा सकती है। अपने मूल काम को धैर्य और निष्ठा से आगे बढ़ाना ही दीर्घकालिक सफलता की कुंजी है।\n• वैश्विक अनुभव का स्थानीय उपयोग: विदेश में उच्च शिक्षा और 15 साल का पेशेवर अनुभव हासिल करने के बाद अपने पैतृक कारोबार को आधुनिक बनाना एक आदर्श रणनीति है। वैश्विक ज्ञान को घरेलू उद्योग में लागू करके विश्वस्तरीय उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं।\n• सामाजिक जरूरतों से जुड़ाव: चिकित्सा और शिक्षा जैसे बुनियादी क्षेत्रों में निवेश करके न केवल सफल संस्थान बनाए जा सकते हैं, बल्कि पूरे समाज का जीवन स्तर भी सुधारा जा सकता है। व्यापार वही सबसे टिकाऊ होता है जो जनहित की बड़ी समस्याओं का समाधान करे।",
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  "category": "सक्सेस स्टोरी",
  "publishedAt": "2026-10-22",
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