# कॉरपोरेट नौकरी छोड़ बुरहानपुर के प्रफुल्ल ने चुनी प्राकृतिक खेती, 5 एकड़ में तैयार किया कमाई और रोजगार का मॉडल

> मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के गुलई गांव में रहने वाले प्रफुल्ल ने एमकॉम की डिग्री और मल्टीनेशनल कंपनी का बढ़िया पैकेज छोड़कर अपनी 5 एकड़ जमीन में प्राकृतिक और मिश्रित खेती शुरू की, जिससे वह खुद मुनाफा कमाने के साथ गांव के 8 लोगों को साल भर रोजगार भी दे रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-10-06 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/corporate-naukari-chhora-burhanpur-ke-prafull-ne-chuni-prakritika-kheti-5-ekara-men-taiyara-kiya-kamai-aura-rojagara-ka-modala-43985 · **Language:** Hindi
**Tags:** बुरहानपुर, प्राकृतिक खेती, सक्सेस स्टोरी, मध्य प्रदेश, मिश्रित खेती, कृषि रोजगार, जैविक खेती

उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद बड़े शहरों की कॉरपोरेट दुनिया में करियर बनाना आज ज्यादातर युवाओं की पहली पसंद बन चुका है, लेकिन मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में एक युवा ने इस तय ढर्रे से हटकर मिसाल पेश की है। गुलई गांव के रहने वाले प्रफुल्ल ने एमकॉम की पढ़ाई पूरी करने के बाद एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी शुरू की थी। वहां उन्हें बेहतरीन सैलरी पैकेज और तमाम कॉरपोरेट सुविधाएं मिल रही थीं, फिर भी उनका लगाव अपने गांव और खेतों से कम नहीं हुआ। आखिरकार उन्होंने आरामदेह दफ्तर की नौकरी को अलविदा कहकर अपनी मिट्टी की तरफ लौटने और खेती को ही अपना मुख्य पेशा बनाने का पक्का फैसला कर लिया।

## पारंपरिक तौर-तरीकों के साथ नए कृषि प्रयोगों की शुरुआत
गांव लौटने के बाद प्रफुल्ल ने खेती को पुराने ढर्रे पर चलाने के बजाय उसमें वैज्ञानिक और टिकाऊ बदलाव लाने की रणनीति बनाई। उन्होंने प्राकृतिक खेती का रास्ता चुना और जमीन को रसायनों से मुक्त रखने की दिशा में कदम बढ़ाया। फिलहाल वह अपनी करीब 5 एकड़ जमीन पर मिश्रित खेती कर रहे हैं। एक ही खेत में एक साथ कई तरह की फसलें उगाने और अलग-अलग कृषि गतिविधियों को जोड़ने से उनकी जमीन का हर हिस्सा उत्पादक बन गया है। उनका मानना है कि प्राकृतिक खेती का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे बाहरी उर्वरकों और कीटनाशकों पर होने वाला भारी खर्च बच जाता है, जिससे खेती की लागत पूरी तरह नियंत्रण में रहती है और जमीन की प्राकृतिक उपजाऊ क्षमता भी लंबे समय तक सुरक्षित बनी रहती है।

## गांव के 8 परिवारों को साल भर का पक्का रोजगार
प्रफुल्ल का यह 5 एकड़ का कृषि मॉडल सिर्फ उनके अपने परिवार की आर्थिक जरूरतें पूरी करने तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह पूरे गांव के लिए मददगार साबित हो रहा है। उनके खेत में चल रही अलग-अलग फसलों और नियमित कृषि गतिविधियों के चलते गांव के करीब 8 लोगों को पूरे साल रोजगार मिल रहा है। जहां ग्रामीण इलाकों में मौसमी बेरोजगारी एक बड़ी समस्या रहती है, वहीं इस प्रयोग से स्थानीय मजदूरों को गांव में ही आजीविका का पक्का साधन मिल गया है। इस तरह प्रफुल्ल ने खुद को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ दूसरों के लिए भी काम के मौके तैयार किए हैं।

## खेती को व्यवसाय और भविष्य मानने का नजरिया
प्रफुल्ल का मानना है कि आज की पीढ़ी को कृषि क्षेत्र को केवल गुजारे का पारंपरिक जरिया समझना बंद करना होगा। आधुनिक समय में खेती को एक व्यवस्थित और मुनाफे वाले बिजनेस मॉडल के तौर पर देखने की जरूरत है। फसल विविधीकरण, सही तकनीकों का चयन और लगातार मेहनत के दम पर कृषि से एक स्थिर और मजबूत आमदनी बनाई जा सकती है। एक बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनी का आकर्षक करियर छोड़कर गांव के खेत में पसीना बहाने वाले प्रफुल्ल की यह यात्रा उन सभी शिक्षित युवाओं के लिए एक व्यावहारिक रास्ता दिखाती है जो आधुनिक खेती में अपना भविष्य तलाशना चाहते हैं।

## इसका आप पर असर
यह खबर दिखाती है कि उच्च शिक्षा और कॉर्पोरेट अनुभव के साथ आधुनिक तकनीकों को अपनाकर ग्रामीण भारत में खेती को एक लाभदायक व्यवसाय बनाया जा सकता है।

- **मध्य प्रदेश में:** बुरहानपुर और आसपास के जिलों के शिक्षित युवा इस मॉडल को देखकर पारंपरिक फसलों के चक्र से बाहर निकल सकते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रासायनिक खादों के खर्च को घटाकर खेती को फायदे का सौदा बनाने में मदद मिलेगी।
- **किसानों के लिए:** 5 एकड़ जैसी सीमित जोत पर भी मिश्रित और प्राकृतिक खेती अपनाकर लागत घटाई जा सकती है। इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रहती है और अलग-अलग फसलों से पूरे साल नियमित आमदनी हासिल की जा सकती है।
- **ग्रामीण रोजगार:** विविधीकृत खेती से गांवों में खेत मजदूरों को साल भर काम मिलना संभव हो जाता है। इससे मौसमी बेरोजगारी घटती है और मजदूरों को काम की तलाश में बड़े शहरों की तरफ पलायन नहीं करना पड़ता।
- **करियर विकल्प:** डिग्रीधारक युवा कृषि को सिर्फ मजबूरी का काम मानने के बजाय एक पेशेवर स्टार्टअप की तरह शुरू कर सकते हैं। सही प्रबंधन और बाजार की समझ से कॉरपोरेट नौकरी जितना या उससे बेहतर मुनाफा खेतों से निकाला जा सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
प्रफुल्ल का कॉरपोरेट करियर छोड़कर गांव लौटने का कदम उनके अपनी जड़ों से जुड़ाव और खेती में टिकाऊ बदलाव लाने की व्यक्तिगत सोच का परिणाम था।

- **मिट्टी और गांव से गहरा लगाव:** मल्टीनेशनल कंपनी में अच्छा वेतन और सुविधाएं होने के बावजूद उनका मन लगातार अपने गांव और पारिवारिक कृषि भूमि से जुड़ा रहा। इसी आंतरिक खिंचाव के चलते उन्होंने सुरक्षित कॉरपोरेट करियर को छोड़कर ग्रामीण क्षेत्र में लौटने का जोखिम उठाया।
- **खेती की ऊंची लागत से निपटने का फैसला:** पारंपरिक रासायनिक खेती में उर्वरकों और कीटनाशकों पर लगातार बढ़ते खर्च को देखते हुए उन्होंने प्राकृतिक खेती चुनी। इस पद्धति से खेती की उत्पादन लागत नियंत्रित हुई और जमीन की स्वाभाविक गुणवत्ता लंबे समय के लिए सुरक्षित हो गई।
- **फसल विविधीकरण की जरूरत:** एक ही फसल पर निर्भर रहने के आर्थिक जोखिम को खत्म करने के लिए उन्होंने 5 एकड़ में मिश्रित खेती का मॉडल अपनाया। इससे खेत के अलग-अलग हिस्सों से लगातार उत्पादन और आय मिलने का रास्ता खुला।

## सवाल-जवाब

### 1. प्रफुल्ल किस जिले और गांव के रहने वाले हैं?
प्रफुल्ल मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के गुलई गांव के निवासी हैं।

### 2. खेती शुरू करने से पहले प्रफुल्ल क्या काम करते थे?
एमकॉम की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह एक मल्टीनेशनल कंपनी में अच्छे पैकेज पर नौकरी कर रहे थे।

### 3. प्रफुल्ल अपने खेत में किस प्रकार की खेती कर रहे हैं?
वह अपनी करीब 5 एकड़ जमीन में प्राकृतिक खेती के साथ-साथ मिश्रित फसलों की खेती कर रहे हैं।

### 4. प्राकृतिक खेती अपनाने का क्या मुख्य फायदा हुआ है?
प्राकृतिक पद्धति से खेती की लागत नियंत्रित रखने में मदद मिलती है और खेत की मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बनी रहती है।

### 5. उनके कृषि मॉडल से गांव के कितने लोगों को रोजगार मिला है?
उनके खेत में चल रही नियमित कृषि गतिविधियों से गांव के करीब 8 लोगों को पूरे साल रोजगार मिल रहा है।

### 6. युवाओं के लिए खेती को लेकर प्रफुल्ल की क्या राय है?
उनका मानना है कि युवाओं को खेती को सिर्फ पारंपरिक काम नहीं बल्कि सही तकनीक और फसल विविधीकरण के साथ एक मुनाफेदार व्यवसाय मानना चाहिए।

## प्रेरणा और सबक
प्रफुल्ल की यह सफलता साबित करती है कि पारंपरिक क्षेत्र में भी नई सोच और लगन से बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

- **डिग्री का सही इस्तेमाल:** शिक्षा केवल दफ्तर में बैठकर नौकरी करने का साधन नहीं है, बल्कि उसके जरिए पारंपरिक पैतृक कार्यों को भी आधुनिक और लाभकारी बनाया जा सकता है।
- **लागत घटाकर लाभ बढ़ाना:** प्राकृतिक खेती के जरिए बाहरी महंगे आदानों पर निर्भरता खत्म करके किसान अपनी वास्तविक बचत और मुनाफा काफी बढ़ा सकते हैं।
- **सामाजिक जिम्मेदारी और रोजगार:** अपनी सफलता को सिर्फ खुद तक सीमित न रखकर अपने आसपास के लोगों के लिए आजीविका तैयार करना एक सच्चे उद्यमी की पहचान है।
- **विविधीकरण से जोखिम प्रबंधन:** एक ही फसल के भरोसे रहने के बजाय मिश्रित खेती अपनाना जोखिम को कम करने और पूरे साल नकदी प्रवाह बनाए रखने का सबसे कारगर तरीका है।

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