दरभंगा के किसान ने 10 कट्ठा खेत से निकाला 300 किलो बैंगन, जानिए लाल किस्म की खेती का आसान तरीका बिहार के दरभंगा जिले में किसान वकील यादव ने 10 कट्ठा जमीन पर लाल बैंगन उगाकर प्रति तुड़ाई 300 किलो उपज हासिल की है। सही जुताई, डीएपी खाद के दो चरणों और क्यारी तकनीक से उन्हें यह सफलता मिली है। कृषि के क्षेत्र में नए प्रयोग और सही प्रबंधन से छोटे भूखंड पर भी बंपर मुनाफा कमाया जा सकता है। बिहार के दरभंगा जिले के एक प्रगतिशील किसान ने इसे साबित कर दिखाया है। उन्होंने अपनी केवल 10 कट्ठा जमीन में बैंगन की खेती शुरू की और अब हर तुड़ाई पर 300 किलोग्राम तक की पैदावार हासिल कर रहे हैं। पारंपरिक फसलों से हटकर की गई यह वैज्ञानिक खेती आसपास के पूरे मिथिलांचल क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। लाल बैंगन की किस्म और शुरुआती पैदावार का गणित दरभंगा जिले के किसान वकील यादव ने अपने 10 कट्ठा खेत में लाल बैंगन की एक उन्नत किस्म का चयन किया। इस विशेष किस्म की बदौलत फसल में फलत बहुत तेजी से हुई है। वकील यादव के अनुसार, जब पौधों में फल आने की शुरुआत होती है, तभी प्रति पौधा 2 से 4 किलोग्राम तक बैंगन आसानी से मिल जाता है। फसल चक्र के दौरान नियमित तुड़ाई में उपज का आंकड़ा लगातार 300 किलो के स्तर को छू रहा है। महज दो दिन पहले की गई तुड़ाई में भी ठीक 300 किलोग्राम बैंगन प्राप्त हुए थे। इतने छोटे रकबे से इस स्तर की उपज मिलना बेहतर फसल प्रबंधन का परिणाम है, जिसने स्थानीय कृषि समुदाय को भी आश्चर्यचकित कर दिया है। मिट्टी की तैयारी और डीएपी खाद का सटीक प्रयोग इस रिकॉर्ड तोड़ उपज के पीछे सबसे प्रमुख वजह खेत की वैज्ञानिक तरीके से तैयारी है। वकील यादव ने बुवाई से पहले ट्रैक्टर चलाकर खेत की गहरी जुताई करवाई। इससे मिट्टी पूरी तरह भुरभुरी और समतल हो गई। गहरी और भुरभुरी मिट्टी मिलने से बैंगन के पौधों की जड़ों का फैलाव तेजी से हुआ, जिससे पौधों को गहराई से पोषण मिला। जुताई के बाद खेत में व्यवस्थित क्यारियां बनाई गईं। खाद देने के मामले में भी वकील यादव ने बेहद सटीक तरीका अपनाया। उन्होंने प्रति कट्ठा 1 किलोग्राम की दर से डीएपी खाद का इस्तेमाल किया। इस खाद को दो अलग-अलग चरणों में दिया गया। पहला चरण पौधों की रोपाई से ठीक पहले रखा गया, जबकि दूसरा चरण रोपाई पूरी होने के कुछ समय बाद पूरा किया गया। इस दोहरे पोषण से पौधों का शुरुआती विकास बेहद मजबूत हुआ। क्यारियों में रोपाई और समय पर देखभाल का महत्व वकील यादव ने खेत को समतल छोड़ देने के बजाय क्यारियां बनाकर पौधों को रोपा। क्यारी तकनीक अपनाने से सिंचाई के पानी का जमाव नहीं हुआ और जल निकासी की व्यवस्था आसान हो गई। इसके अलावा, क्यारियों के बीच खाली जगह रहने के कारण खरपतवार निकालने में भी काफी सहूलियत हुई, जिससे पौधों को पूरा पोषण बिना किसी रुकावट के मिला। सिंचाई के मोर्चे पर भी मौसम का सहयोग मिला। सही समय पर हुई बारिश के कारण अतिरिक्त सिंचाई की जरूरत काफी कम हो गई, जिससे लागत में भी सीधी बचत हुई। वकील यादव का मानना है कि कृषि में सफलता किसी चमत्कार से नहीं मिलती। वकील यादव ने कहा, "खेती में किसी जादू की जरूरत नहीं होती, बस समय पर मेहनत और सही तकनीक ही अच्छी उपज की कुंजी है।" इसका आप पर असर भारत में: छोटी जोत वाले किसान उन्नत तकनीकों और बेहतर खाद प्रबंधन को अपनाकर कम जमीन में भी अधिक पैदावार हासिल कर सकते हैं। दरभंगा में: स्थानीय किसानों को पारंपरिक फसलों से इतर लाल बैंगन जैसी लाभदायक किस्मों की खेती करने की प्रेरणा मिल रही है। सवाल-जवाब 1. दरभंगा के किसान ने कितनी जमीन में बैंगन उगाए हैं? किसान वकील यादव ने केवल 10 कट्ठा जमीन में बैंगन की खेती की है। 2. हर तुड़ाई में कितना बैंगन मिल रहा है? उन्हें 10 कट्ठा के खेत से प्रति तुड़ाई लगभग 300 किलोग्राम बैंगन प्राप्त हो रहा है। 3. खेती के लिए किस किस्म के बैंगन का चुनाव किया गया है? उन्होंने बंपर पैदावार देने वाली लाल बैंगन की उन्नत किस्म चुनी है। 4. खाद प्रयोग करने का क्या तरीका अपनाया गया? प्रति कट्ठा 1 किलो डीएपी खाद का प्रयोग दो चरणों में किया गया, पहला रोपाई से पहले और दूसरा रोपाई के बाद। प्रेरणा और सबक नियमित और गहन तैयारी: बुवाई से पहले खेत की गहरी जुताई और समतलीकरण पौधों की मजबूत जड़ों के विकास का आधार बनता है। संतुलित पोषण चक्र: खाद का उपयोग एक बार में करने के बजाय दो चरणों में विभाजित करके देने से पौधों को लगातार पोषण मिलता है। प्रबंधन की सादगी: क्यारियां बनाकर रोपाई करने से जल निकासी और खरपतवार नियंत्रण जैसी मूलभूत समस्याएं आसानी से हल हो जाती हैं। https://trendkia.com/success-stories/darbhanga-ke-kisana-ne-10-kattha-kheta-se-nikala-300-kilo-baingana-janie-lala-kisma-ki-kheti-ka-asana-tarika-15666 TrendKia — Har trend, sabse pehle.