# दसवीं पास नौजवान ने 30 हजार से खड़ा किया लकड़ी के खिलौनों का कारोबार, अब सालाना लाखों की कमाई

> बुरहानपुर के आजाद नगर में रहने वाले न्यामत बैग ने महज 30 हजार रुपये से लकड़ी के खिलौने बनाने का काम शुरू किया और आज वो हर साल तीन से चार लाख रुपये कमा रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-06-24 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/dasavin-pasa-naujavana-ne-30-hajara-se-khara-kiya-lakari-ke-khilaunon-ka-karobara-aba-salana-lakhon-ki-kamai-2614 · **Language:** Hindi
**Tags:** लकड़ी के खिलौने, बुरहानपुर, न्यामत बैग, स्मॉल बिजनेस आइडिया, कम लागत बिजनेस, मध्य प्रदेश, स्वरोजगार

कहते हैं इरादे मजबूत हों तो छोटी सी पूंजी भी बड़ा कारोबार खड़ा कर देती है। मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के आजाद नगर इलाके में रहने वाले न्यामत बैग इसकी जीती जागती मिसाल हैं। सिर्फ 30 हजार रुपये की रकम और लकड़ी के खिलौने बनाने के एक आइडिया के दम पर इस नौजवान ने ऐसा काम खड़ा किया, जो अब हर साल तीन से चार लाख रुपये की कमाई करा रहा है।

न्यामत ने दसवीं कक्षा तक पढ़ाई की है। इसके बाद उन्हें अपने मामू कासम खान से लकड़ी के खिलौने बनाने के कारोबार का विचार मिला। यही आइडिया उनकी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट बन गया। पिछले दो साल से वो अपनी दुकान चला रहे हैं और इसी काम के जरिए तीन से चार लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं।

## एक छोटे कमरे से हुई शुरुआत
न्यामत बताते हैं कि उन्होंने यह सफर एक छोटे से कमरे से शुरू किया था। 30 हजार रुपये लगाकर जब काम की नींव रखी, तो शुरुआती दौर में कई मुश्किलें सामने आईं। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लगे रहे। उनके बनाए लकड़ी के खिलौने लोगों को खूब भाते हैं। बुरहानपुर जिले के साथ साथ आसपास के राज्यों के लोग भी ये खिलौने खरीदकर ले जाते हैं।

उनकी दुकान पर एक दर्जन से ज्यादा तरह के लकड़ी के सामान बनाए जाते हैं, जिनकी बाजार में अच्छी मांग है। यहां लट्टू, बेलन, पटला, तलवार, लेझीम जैसी कई चीजें तैयार होती हैं, जो ग्राहकों को खूब पसंद आती हैं।

## परिवार बना सबसे बड़ी ताकत
इस कारोबार को आगे बढ़ाने में न्यामत के परिवार का बड़ा हाथ है। उनके परिवार के नोमान, जेद, अनवर, नबिल और नाजिम खिलौने बनाने में उनका साथ देते हैं। अपने इलाके के चार से पांच लोगों को भी उन्होंने रोजगार दिया हुआ है। न्यामत का मकसद साफ है, वो ज्यादा से ज्यादा लोगों को काम देना चाहते हैं। दसवीं तक पढ़ाई करने के बाद बीते दो साल से वो पूरी लगन के साथ इस कारोबार में जुटे हुए हैं।

## इसका आप पर असर
- **भारत में:** कम पढ़ाई और छोटी पूंजी वाले युवाओं के लिए यह उदाहरण दिखाता है कि 30 हजार रुपये जैसी रकम से भी हुनर के दम पर अच्छी कमाई वाला कारोबार खड़ा किया जा सकता है।
- **बुरहानपुर में:** स्थानीय कारीगरों और बेरोजगार युवाओं के लिए लकड़ी के खिलौनों के काम में रोजगार और आमदनी का मौका मौजूद है, क्योंकि इनकी मांग आसपास के राज्यों तक है।

## सवाल-जवाब

### 1. न्यामत बैग ने अपना कारोबार कितने पैसे से शुरू किया था?
उन्होंने सिर्फ 30 हजार रुपये लगाकर लकड़ी के खिलौने बनाने का कारोबार शुरू किया था।

### 2. वो अब इस काम से कितनी कमाई करते हैं?
न्यामत बैग हर साल तीन से चार लाख रुपये की कमाई कर लेते हैं।

### 3. न्यामत बैग कहां के रहने वाले हैं?
वो मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के आजाद नगर इलाके में रहते हैं।

### 4. उन्हें इस बिजनेस का आइडिया कहां से मिला?
यह आइडिया उन्हें अपने मामू कासम खान से मिला था।

### 5. उनकी दुकान पर किस तरह के खिलौने और सामान बनते हैं?
यहां लट्टू, बेलन, पटला, तलवार, लेझीम समेत एक दर्जन से ज्यादा तरह के लकड़ी के आइटम बनाए जाते हैं।

### 6. क्या वो दूसरों को रोजगार भी दे रहे हैं?
हां, वो इस काम के जरिए तीन से चार लोगों को रोजगार दे रहे हैं और परिवार के लोग भी उनका साथ देते हैं।

### 7. न्यामत बैग ने कितनी पढ़ाई की है?
उन्होंने कक्षा दसवीं तक पढ़ाई की है।

### 8. उनके बनाए खिलौने कहां कहां जाते हैं?
बुरहानपुर जिले के साथ साथ आसपास के राज्यों के लोग भी ये खिलौने खरीदकर ले जाते हैं।

## प्रेरणा और सबक
- **छोटी शुरुआत से न डरें:** न्यामत ने सिर्फ 30 हजार रुपये और एक छोटे से कमरे से काम शुरू किया, यानी बड़ी पूंजी का इंतजार किए बिना शुरुआत की जा सकती है।
- **सही आइडिया पहचानें:** मामू कासम खान से मिला खिलौने बनाने का सुझाव उन्होंने गंभीरता से लिया और उसे ही जिंदगी का टर्निंग पॉइंट बना दिया।
- **मुश्किलों में हिम्मत न हारें:** शुरुआती दौर की कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने काम नहीं छोड़ा, यही टिके रहना सफलता की कुंजी बना।
- **परिवार को साथ जोड़ें:** घर के लोगों का सहयोग लेकर उन्होंने काम को मजबूती और रफ्तार दोनों दी।
- **दूसरों को भी आगे बढ़ाएं:** सिर्फ खुद कमाने तक सीमित न रहकर उनका लक्ष्य ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार देना है।

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