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  "title": "दिहाड़ी मजदूरी से NUS सिंगापुर तक: GATE में 809 रैंक लाकर रामतुल्ला शेख ने 15 लाख की नौकरी छोड़ी, रिसर्च में रचा इतिहास",
  "summary": "आंध्र प्रदेश के रामतुल्ला शेख ने तंगहाली और 300 रुपये की दिहाड़ी मजदूरी के बावजूद GATE 2024 में 809वीं रैंक हासिल की। 15 लाख रुपये सालाना का जॉब ऑफर ठुकराकर वे अब नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर (NUS) से पीएचडी कर रहे हैं।",
  "content": "जीवन में यदि पक्का इरादा और कुछ बड़ा हासिल करने का जुनून हो, तो आर्थिक तंगी या विकट परिस्थितियाँ किसी भी इंसान के कदम नहीं रोक सकतीं। आंध्र प्रदेश के रहने वाले रामतुल्ला शेख का जीवन इस बात का सबसे जीवंत प्रमाण है। एक समय ऐसा था जब अपने परिवार के गुजारे के लिए उन्हें चिलचिलाती धूप में रोजाना सिर्फ 300 रुपये की दिहाड़ी पर मजदूरी करनी पड़ती थी। लेकिन उन्होंने अपनी विपरीत परिस्थितियों के सामने घुटने टेकने के बजाय शिक्षा को ही अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया। आज वही रामतुल्ला देश-विदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं और दुनिया भर के शोध जगत में अपनी पहचान बना रहे हैं।\n\nगरीबी और भीषण तंगहाली में बीता बचपन\nरामतुल्ला शेख का शुरुआती जीवन अत्यंत अभावों और आर्थिक कठिनाइयों के बीच बीता। उनके परिवार की माली हालत इतनी ज्यादा खराब थी कि उनके लिए नियमित पढ़ाई का खर्च उठाना भी एक बड़ी चुनौती बन गया था। कम उम्र में ही उन पर पारिवारिक जिम्मेदारियों का बोझ आ गया। अपनी पढ़ाई जारी रखने और घर के खर्च में मदद करने के लिए उन्हें मजदूरी का रास्ता चुनना पड़ा। वे प्रतिदिन कड़ी मेहनत करते थे और शाम को 300 रुपये की मामूली दिहाड़ी लेकर घर लौटते थे। इस कठिन दौर में शारीरिक थकावट के बावजूद उनका ध्यान अपनी किताबों से कभी नहीं हटा। वे जानते थे कि उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति को बदलने का एकमात्र जरिया केवल बेहतर शिक्षा ही हो सकती है।\n\nGATE 2024 में शानदार प्रदर्शन और 809वीं ऑल इंडिया रैंक\nसालों की निरंतर पढ़ाई, अनुशासन और कठोर परिश्रम के बाद रामतुल्ला शेख ने देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक गेट (GATE) की तैयारी शुरू की। वर्ष 2024 में उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विषय से गेट परीक्षा में भाग लिया। जब परिणाम घोषित हुए, तो उनकी सालों की तपस्या रंग लाई। उन्होंने पूरे भारत में ऑल इंडिया 809वीं रैंक हासिल की। इस शानदार ऑल इंडिया रैंक के आधार पर उन्हें देश के शीर्ष अनुसंधान संस्थान इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc), बेंगलुरु में एमटेक (M.Tech) पाठ्यक्रम में प्रवेश मिला। इसके अतिरिक्त उन्होंने देश के नामी आईआईटी (IIT) से भी अपनी मास्टर डिग्री पूरी की, जहाँ उनके शैक्षणिक प्रदर्शन को काफी सराहा गया।\n\n15 लाख का कॉर्पोरेट पैकेज ठुकराने की ठोस वजह\nगेट परीक्षा में बेहतरीन रैंक हासिल करने के तुरंत बाद रामतुल्ला को एक नामी बहुराष्ट्रीय कॉर्पोरेट कंपनी (MNC) से 15 लाख रुपये सालाना के पैकेज पर नौकरी का प्रस्ताव मिला। जिस व्यक्ति ने अपने जीवन में प्रतिदिन 300 रुपये के लिए हाड़-तोड़ मेहनत की हो, उसके लिए 15 लाख रुपये का पैकेज एक बहुत बड़ा वित्तीय सहारा साबित हो सकता था। लेकिन रामतुल्ला का अंतिम लक्ष्य केवल पैसा कमाना या कॉर्पोरेट जॉब करना नहीं था। उनका सपना विज्ञान और रिसर्च क्षेत्र में मौलिक योगदान देना तथा समाज के लिए कुछ नया करना था। इसी दूरगामी सोच के चलते उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के 15 लाख रुपये की नौकरी के ऑफर को मुस्कुराते हुए अस्वीकार कर दिया और उच्च शिक्षा तथा रिसर्च के मार्ग को चुना।\n\nIISc बेंगलुरु से NUS सिंगापुर तक का रिसर्च सफर\nमास्टर डिग्री के दौरान रामतुल्ला के उत्कृष्ट रिसर्च वर्क और बेहतरीन अकादमिक ट्रैक रिकॉर्ड ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया। उनके शोध पत्र और शैक्षणिक उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें विश्व प्रसिद्ध नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर (NUS) के डायरेक्ट पीएचडी (PhD) प्रोग्राम में दाखिला मिल गया। वर्तमान में रामतुल्ला शेख सिंगापुर की इस नामी यूनिवर्सिटी में पावर इलेक्ट्रॉनिक्स विषय में पीएचडी कर रहे हैं। वे वहाँ एक रिसर्च स्कॉलर के रूप में कार्यरत हैं और उन्हें अपनी रिसर्च के लिए पूरी स्कॉलरशिप भी मिल रही है। 300 रुपये की दिहाड़ी मजदूरी करने वाले एक साधारण युवा का सिंगापुर के अंतरराष्ट्रीय रिसर्च सेंटर तक पहुँचना उनकी असाधारण क्षमता को दर्शाता है।\n\nदेश के लाखों प्रतिस्पर्धी छात्रों के लिए बनी मिसाल\nरामतुल्ला शेख की यह वास्तविक सफलता की कहानी भारत के उन लाखों युवाओं के लिए एक जबरदस्त प्रेरणा है जो वित्तीय तंगी या सीमित संसाधनों के कारण अपने सपनों को अधूरा छोड़ देते हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से यह सिद्ध कर दिखाया है कि यदि मन में दृढ़ संकल्प हो और सही दिशा में मेहनत की जाए, तो कोई भी बाधा मंजिल के रास्ते में नहीं आ सकती। 300 रुपये की मजदूरी से लेकर दुनिया की टॉप यूनिवर्सिटी में रिसर्च स्कॉलर बनने तक का उनका यह सफर आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा।\n\nइसका आप पर असर\nरामतुल्ला शेख की यह सफलता प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे देश भर के छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान करती है।\n\n• भारत में छात्रों के लिए: GATE जैसी कठिन राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में उच्च ऑल इंडिया रैंक हासिल करके IISc और IIT जैसे शीर्ष संस्थानों में प्रवेश का मार्ग प्रशस्त होता है। इससे छात्रों को कॉर्पोरेट सेक्टर के साथ-साथ उच्च शोध में जाने का सीधा अवसर मिलता है।\n• आंध्र प्रदेश में अभ्यर्थियों के लिए: ग्रामीण या आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के छात्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्कॉलरशिप योजनाओं का लाभ उठाकर उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं। वित्तीय तंगी के बावजूद सही रणनीति से GATE में शीर्ष 1000 रैंक में जगह बनाई जा सकती है।\n• रिसर्च स्कॉलर्स के लिए: मास्टर डिग्री के दौरान बेहतर शोध पत्र प्रकाशित करने पर सिंगापुर (NUS) जैसे वैश्विक संस्थानों में पूरी तरह से वित्तपोषित पीएचडी (PhD) फेलोशिप प्राप्त की जा सकती है।\n• करियर चयन में: तत्काल मिलने वाले कॉर्पोरेट पैकेज के स्थान पर लॉन्ग-टर्म रिसर्च का चुनाव करने से वैश्विक स्तर पर पहचान और स्थायी अकादमिक करियर का निर्माण होता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. रामतुल्ला शेख कौन हैं और वे कहाँ के रहने वाले हैं?\nरामतुल्ला शेख आंध्र प्रदेश के रहने वाले एक मेधावी छात्र और शोधकर्ता हैं, जिन्होंने बेहद गरीबी और 300 रुपये की दिहाड़ी मजदूरी के दौर से निकलकर उच्च शिक्षा में बड़ी सफलता हासिल की है।\n\n2. GATE परीक्षा में रामतुल्ला शेख को कौन सी रैंक मिली थी?\nरामतुल्ला शेख ने GATE 2024 परीक्षा के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग पेपर में पूरे भारत में ऑल इंडिया 809वीं रैंक (AIR 809) हासिल की थी।\n\n3. रामतुल्ला शेख ने 15 लाख रुपये का जॉब पैकेज क्यों ठुकरा दिया?\nGATE में अच्छी रैंक के बाद उन्हें एक MNC से 15 लाख रुपये सालाना का ऑफर मिला था, लेकिन उन्होंने कॉर्पोरेट नौकरी के बजाय रिसर्च और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा योगदान देने के लिए इसे ठुकरा दिया।\n\n4. रामतुल्ला शेख वर्तमान में कहाँ से पीएचडी (PhD) कर रहे हैं?\nरामतुल्ला शेख वर्तमान में दुनिया की प्रतिष्ठित नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर (NUS) से पावर इलेक्ट्रॉनिक्स विषय में स्कॉलरशिप के साथ पीएचडी (PhD) कर रहे हैं।\n\n5. GATE क्रैक करने के बाद रामतुल्ला शेख को किन भारतीय संस्थानों में प्रवेश मिला था?\nGATE में 809वीं रैंक लाने के बाद उन्हें इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc), बेंगलुरु में एमटेक पाठ्यक्रम में दाखिला मिला था और उन्होंने देश के प्रतिष्ठित IIT से मास्टर डिग्री पूरी की।\n\nप्रेरणा और सबक\nरामतुल्ला शेख की जीवन यात्रा से हर युवा निम्नलिखित व्यावहारिक सीख और जीवन-मंत्र अपना सकता है:\n\n• परिस्थितियाँ लक्ष्य तय नहीं करतीं: 300 रुपये रोज कमाने की तंगहाली में भी रामतुल्ला ने अपने सपनों का दायरा छोटा नहीं होने दिया। आपकी वर्तमान स्थिति आपकी अंतिम मंजिल तय नहीं करती।\n• तत्कालिक प्रलोभन से ऊपर दूरगामी विजन: 15 लाख रुपये का बड़ा पैकेज ठुकराना यह सिखाता है कि जीवन में दीर्घकालिक लक्ष्यों और जुनून के लिए कभी-कभी तात्कालिक आराम का त्याग करना पड़ता है।\n• निरंतरता ही सफलता की कुंजी है: शारीरिक मजदूरी के बाद भी पढ़ाई से नाता न तोड़ना यह दिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी रोज़ाना थोड़ी-थोड़ी मेहनत बड़ा बदलाव लाती है।\n• अपनी क्षमता पर अटूट विश्वास: बिना किसी बड़े संसाधन के ऑल इंडिया 809वीं रैंक लाना साबित करता है कि आत्म-विश्वास और सही दिशा में किया गया प्रयास किसी भी बाधा से बड़ा होता है।",
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  "category": "सक्सेस स्टोरी",
  "publishedAt": "2026-08-27",
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