# डॉक्टरी छोड़ बने आईएएस और आईपीएस, यूपी में पड़ोसी जिलों की कमान संभाल रहे लुधियाना के दो सगे भाई

> पंजाब के लुधियाना से ताल्लुक रखने वाले दो सगे भाइयों ने मेडिकल करियर छोड़कर सिविल सेवा चुनी, जहां बड़े भाई अजय पाल शर्मा आईपीएस और छोटे भाई अमित पाल शर्मा आईएएस बनकर यूपी में जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-09-12 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/doktari-chhora-bane-ias-aura-ips-up-men-parosi-jilon-ki-kamana-snbhala-rahe-ludhiana-ke-do-sage-bhai-31468 · **Language:** Hindi
**Tags:** अजय पाल शर्मा, अमित पाल शर्मा, आईपीएस अधिकारी, आईएएस अधिकारी, उत्तर प्रदेश प्रशासन, प्रयागराज पुलिस, कौशांबी डीएम, सफलता की कहानी

अक्सर सिनेमाई कहानियों में दो भाइयों की ऐसी जोड़ी देखने को मिलती है, जिसमें से एक वर्दी पहनकर कानून व्यवस्था संभालता है और दूसरा कलम की ताकत से प्रशासनिक तंत्र चलाता है। असल जिंदगी में ऐसा ही दुर्लभ और अनूठा संयोग इस समय उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में देखने को मिल रहा है। पंजाब के एक बेहद साधारण शिक्षक परिवार से निकले दो सगे भाई पड़ोसी जिलों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें से बड़े भाई पुलिस महकमे के शीर्ष पद पर तैनात हैं तो छोटे भाई जिला प्रशासन की कमान संभाल रहे हैं।

## सफेद कोट से खाकी और प्रशासनिक कुर्सी तक का सफर
यह प्रेरक कहानी पंजाब के औद्योगिक शहर लुधियाना के रहने वाले अमरजीत शर्मा के परिवार की है। अमरजीत शर्मा एक सरकारी स्कूल में पंजाबी भाषा के लेक्चरर के पद पर कार्यरत रहे हैं। वे इलाके में अपनी सादगी और जरूरतमंद छात्र-छात्राओं को मुफ्त मार्गदर्शन देने के लिए पहचाने जाते थे। घर की जिम्मेदारी उनकी पत्नी ने संभाली। परिवार का माहौल हमेशा से शिक्षा और अनुशासन को प्राथमिकता देने वाला रहा।

दोनों भाइयों की शुरुआती स्कूली शिक्षा लुधियाना में ही पूरी हुई। उच्च शिक्षा के दौरान दोनों ने डॉक्टरी को अपने करियर के रूप में चुना। बड़े भाई ने डेंटल सर्जरी यानी बीडीएस की डिग्री हासिल की, जबकि छोटे भाई ने एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर डॉक्टर की उपाधि प्राप्त की। हालांकि, मेडिकल क्षेत्र में सफल होने के बावजूद दोनों का मन जनसेवा के व्यापक दायरे में काम करने का था। इसी संकल्प के साथ दोनों ने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की और सफलता हासिल की।

## बड़े भाई अजय पाल शर्मा: डॉक्टर से एनकाउंटर स्पेशलिस्ट कॉप तक
डॉक्टर अजय पाल शर्मा 2011 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं। बीडीएस की डिग्री होने की वजह से पुलिस महकमे में उन्हें अक्सर 'डॉक्टर कॉप' के नाम से भी संबोधित किया जाता है। अपराध और अपराधियों के खिलाफ बेहद सख्त रुख अपनाने के लिए वे जाने जाते हैं। अपनी तेजतर्रार कार्यशैली और अभियानों की वजह से उनकी पहचान एक एनकाउंटर स्पेशलिस्ट अधिकारी की बन चुकी है।

प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद के संगठित आपराधिक नेटवर्क को ध्वस्त करने में उनकी रणनीति काफी अहम मानी गई। उनकी प्रशासनिक दक्षता और कड़े फैसलों को देखते हुए भारत निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान भी उन्हें बेहद संवेदनशील इलाकों में कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी थी। वर्तमान में वे प्रयागराज कमिश्नरेट में अपर पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) के पद पर कार्यरत हैं।

## छोटे भाई अमित पाल शर्मा: विकास और प्रबंधन में माहिर आईएएस
परिवार के छोटे बेटे डॉक्टर अमित पाल शर्मा 2016 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। उन्होंने बाबा फरीद यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की थी। सिविल सेवा में आने के बाद उन्होंने विभिन्न जनपदों में अपनी प्रशासनिक प्रतिभा की छाप छोड़ी है। वे मेरठ के नगर आयुक्त, सोनभद्र के मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) और गाजियाबाद में महत्वपूर्ण पदों पर तैनात रह चुके हैं।

प्रयागराज में आयोजित होने वाले महाकुंभ 2025 की तैयारियों के मद्देनजर उन्हें प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) का उपाध्यक्ष बनाया गया था। वहां उन्होंने बड़े पैमाने पर चल रहे बुनियादी ढांचे के विकास कार्यों और भीड़ प्रबंधन की योजनाओं को तय समय सीमा के भीतर पूरा कराकर अपनी मजबूत प्रशासनिक पकड़ साबित की। वर्तमान में वे कौशांबी जिले के जिलाधिकारी (डीएम) के रूप में तैनात हैं।

## कौशांबी हादसे में साथ उतरे तो चर्चा में आई जोड़ी
प्रयागराज और कौशांबी दोनों जिलों की सीमाएं आपस में सटी हुई हैं। हाल ही में कौशांबी जनपद के एक गांव में स्थित पटाखा फैक्ट्री में बड़ा हादसा हुआ था। इस गंभीर घटना की सूचना मिलते ही राहत, बचाव और कानून व्यवस्था की स्थिति का जायजा लेने के लिए दोनों भाई जमीनी स्तर पर एक साथ सक्रिय दिखाई दिए।

संकट के समय दोनों अधिकारियों का एक साथ तालमेल बिठाकर काम करने का दृश्य स्थानीय लोगों और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का केंद्र बन गया। एक ही सामान्य परिवार से निकलकर देश की दो सबसे कठिन और प्रतिष्ठित सेवाओं में चयनित होना और फिर आसपास के जिलों में ही शीर्ष पदों की जिम्मेदारी संभालना प्रशासनिक इतिहास का एक बेहद खास उदाहरण बन गया है।

## इसका आप पर असर
यह घटनाक्रम प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी कर रहे युवाओं और जनसेवा की कार्यप्रणाली को समझने वाले नागरिकों के लिए सीधा संदेश देता है।

- **उत्तर प्रदेश में:** प्रयागराज और कौशांबी के सीमावर्ती क्षेत्रों में पुलिस और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय देखने को मिलता है। इससे कानून व्यवस्था और विकास कार्यों की निगरानी में त्वरित फैसले लेने में मदद मिलती है।
- **छात्रों और अभ्यर्थियों के लिए:** मेडिकल जैसी तकनीकी पढ़ाई के बाद भी सिविल सेवा में सफल होने की राह स्पष्ट होती है। यह उदाहरण दिखाता है कि विषय पृष्ठभूमि चाहे जो हो, सही रणनीति से यूपीएससी परीक्षा पास की जा सकती है।
- **सार्वजनिक सेवाओं के लिए:** चिकित्सा पृष्ठभूमि वाले अधिकारियों के आने से आपदा और स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियों में त्वरित जमीनी फैसले संभव होते हैं। नागरिकों को आपातकालीन राहत कार्यों में तेज प्रतिक्रिया का लाभ मिलता है।
- **सामुदायिक जीवन में:** कठिन परिश्रम और ईमानदारी से आगे बढ़ने की पारिवारिक प्रेरणा समाज को सकारात्मक दिशा देती है। साधारण पृष्ठभूमि के परिवारों के लिए यह उच्च पदों तक पहुंचने का व्यावहारिक भरोसा जगाता है।

## ऐसा क्यों हुआ
दो सगे भाइयों का एक साथ सिविल सेवा में चयनित होकर पड़ोसी जिलों में तैनात होना पारिवारिक संस्कारों, लगातार मेहनत और प्रशासनिक आवश्यकताओं का स्वाभाविक परिणाम है।

- **पारिवारिक और शैक्षणिक आधार:** शिक्षक पिता के मार्गदर्शन और सादगीपूर्ण पारिवारिक वातावरण ने दोनों भाइयों में अनुशासन और उच्च लक्ष्य तय करने की आदत डाली। मेडिकल की कठिन पढ़ाई पूरी करने से उनकी विश्लेषणात्मक क्षमता और अध्ययन का स्तर मजबूत हुआ।
- **जनसेवा का दायरा बढ़ाने की चाह:** क्लीनिकल प्रैक्टिस तक सीमित रहने के बजाय व्यापक स्तर पर नीति निर्माण और कानून व्यवस्था में योगदान देने की इच्छा ने उन्हें यूपीएससी की ओर मोड़ा। इसी स्पष्ट विजन के कारण दोनों ने अलग-अलग वर्षों में प्रतिष्ठित रैंक हासिल की।
- **कैडर और प्रशासनिक नियुक्तियां:** दोनों अधिकारियों को उत्तर प्रदेश कैडर आवंटित हुआ और उनकी प्रशासनिक क्षमताओं के आधार पर सरकार ने उन्हें प्रयागराज और कौशांबी जैसे महत्वपूर्ण जिलों में तैनात किया।

## सवाल-जवाब

### 1. आईपीएस अजय पाल शर्मा और आईएएस अमित पाल शर्मा कहां के मूल निवासी हैं?
दोनों भाई मूल रूप से पंजाब के लुधियाना शहर के रहने वाले हैं।

### 2. सिविल सेवा में आने से पहले दोनों भाइयों ने क्या पढ़ाई की थी?
बड़े भाई अजय पाल शर्मा ने डेंटल सर्जरी (बीडीएस) और छोटे भाई अमित पाल शर्मा ने एमबीबीएस की डिग्री पूरी की थी।

### 3. दोनों भाई वर्तमान में उत्तर प्रदेश में किन पदों पर कार्यरत हैं?
डॉ. अजय पाल शर्मा प्रयागराज में अपर पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) हैं और डॉ. अमित पाल शर्मा कौशांबी के जिलाधिकारी हैं।

### 4. डॉ. अजय पाल शर्मा किस बैच के आईपीएस अधिकारी हैं?
डॉ. अजय पाल शर्मा उत्तर प्रदेश कैडर के 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं।

### 5. डॉ. अमित पाल शर्मा को किस बैच में आईएएस कैडर मिला था?
डॉ. अमित पाल शर्मा 2016 बैच के आईएएस अधिकारी हैं।

### 6. दोनों अधिकारियों की जोड़ी हाल ही में क्यों चर्चा में आई थी?
कौशांबी में पटाखा फैक्ट्री हादसे के बाद दोनों भाई जमीनी स्तर पर एक साथ राहत और बचाव कार्यों का जायजा लेते नजर आए थे।

## प्रेरणा और सबक
अजय पाल शर्मा और अमित पाल शर्मा की जीवन यात्रा यह साबित करती है कि दृढ़ संकल्प और सही दिशा से किसी भी बड़े मुकाम को हासिल किया जा सकता है।

- **करियर में बदलाव का साहस:** मेडिकल जैसे स्थापित और सुरक्षित पेशे को छोड़कर सिविल सेवा की अनिश्चित परीक्षा में उतरना सिखाता है कि अगर जनसेवा का जज्बा हो तो जोखिम उठाने से नहीं डरना चाहिए।
- **अनुशासन और निरंतरता:** साधारण संसाधनों के बावजूद लगातार मेहनत कर बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं, बशर्ते पढ़ाई और दिनचर्या में अनुशासन बना रहे।
- **विविध कौशलों का उपयोग:** अपनी मेडिकल शिक्षा का उपयोग उन्होंने प्रशासनिक और संकट प्रबंधन में किया, जो यह दर्शाता है कि पुराना ज्ञान कभी व्यर्थ नहीं जाता बल्कि हर क्षेत्र में काम आता है।
- **जमीनी स्तर पर काम करने की निष्ठा:** उच्च पदों पर पहुंचने के बाद भी आपदा या संकट के समय खुद जमीन पर उतरकर काम करना ही एक सच्चे लोकसेवक की असली पहचान है।

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