# पूर्वी चंपारण के किसान विजय यादव ने बदली किस्मत, 800 रुपये की मजदूरी से शुरू कर आधुनिक खेती से बना 20 लाख का टर्नओवर

> पूर्वी चंपारण के अमवा गांव निवासी विजय यादव ने 1996 में 800 रुपये की नौकरी से सफर शुरू कर आज आधुनिक खेती, ड्रैगन फ्रूट और डेयरी व्यवसाय के जरिए सालाना 20 लाख रुपये का कारोबार खड़ा किया है।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-07-29 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/east-champaran-ke-kisana-vijay-yadav-ne-badali-kismata-800-rupaye-ki-majaduri-se-shuru-kara-adhunika-kheti-se-bana-20-lakha-ka-tar-11933 · **Language:** Hindi
**Tags:** विजय यादव, पूर्वी चंपारण, आधुनिक खेती, ड्रैगन फ्रूट खेती, बिहार किसान, डेयरी फार्मिंग, कृषि सफलता

बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में कृषि को जीवन यापन के पारंपरिक तरीके से आगे बढ़ाकर आर्थिक आत्मनिर्भरता का सशक्त जरिया बनाया जा रहा है। तुरकौलिया प्रखंड के अमवा गांव निवासी विजय यादव की जीवन यात्रा इस बदलाव की एक बेहतरीन मिसाल पेश करती है। एक समय था जब परिवार पर आए आर्थिक संकट के कारण उन्हें परदेस जाकर मामूली वेतन पर मजदूरी करनी पड़ी थी। आज वही विजय यादव आधुनिक खेती और डेयरी व्यवसाय के जरिए सालाना 20 लाख रुपये का कारोबार कर रहे हैं और पूरे इलाके के किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुके हैं।

## पारिवारिक संकट और पंजाब का कठिन संघर्ष
विजय यादव के जीवन में संघर्ष की शुरुआत तब हुई जब उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण ही की थी। उसी दौरान उनके पिता ने गृहस्थ जीवन त्यागकर संन्यास ग्रहण कर लिया और संत बन गए। पिता के संन्यासी बनने के बाद पूरे परिवार के लालन-पालन का दायित्व अचानक विजय के युवा कंधों पर आ गिरा। आर्थिक तंगी से घिरे विजय को अपने परिवार का पेट पालने के लिए वर्ष 1996 में पंजाब का रुख करना पड़ा। पंजाब पहुंचने के बाद काफी मशक्कत और भटकने के बाद उन्हें 800 रुपये प्रतिमाह की बेहद मामूली नौकरी मिली। हालांकि विजय ने हिम्मत नहीं हारी और अपनी लगन तथा ईमानदारी के बल पर कार्यस्थल पर पहचान बनाई, जिससे समय के साथ उनका वेतन बढ़कर 5000 रुपये प्रतिमाह तक पहुंच गया।

## संडे की छुट्टी और सोच में आया नया मोड़
पंजाब में नौकरी के दौरान प्रत्येक रविवार को मिलने वाले अवकाश के दिन विजय वहां के लहलहाते और समृद्ध खेतों को निहारा करते थे। पंजाब के खेतों में इस्तेमाल हो रही आधुनिक तकनीकों, उन्नत तरीकों और फसलों की विविधता ने उनका ध्यान आकर्षित किया। उन लहलहाती फसलों को देखकर विजय के मन में यह विचार कौंधा कि जो मेहनत वे दूसरों के लिए कर रहे हैं, वही प्रयास यदि वे अपने गांव की मिट्टी पर करें तो कृषि क्षेत्र में एक नया इतिहास रच सकते हैं। इसी प्रेरणा के साथ उन्होंने अपनी जमी-जमाई 5000 रुपये की नौकरी छोड़ने का बड़ा फैसला लिया और वापस अपने गृहग्राम अमवा लौट आए।

## बैंगन की खेती से बहुफसली मॉडल तक का सफर
गांव लौटने के पश्चात विजय यादव ने शुरुआत में बैंगन की खेती से अपना कदम आगे बढ़ाया। पहली ही फसल में मिली सफलता ने उनका हौसला बढ़ा दिया। इसके बाद उन्होंने पारंपरिक सब्जियों का दायरा बढ़ाते हुए भिंडी और विभिन्न प्रकार की गोभी की बड़े पैमाने पर पैदावार शुरू की। पारंपरिक फसलों तक सीमित न रहकर उन्होंने हॉर्टिकल्चर यानी आधुनिक उद्यानिकी फसलों की ओर कदम बढ़ाया। उन्होंने अपने खेतों में ड्रैगन फ्रूट, स्ट्रॉबेरी और रंग-बिरंगी शिमला मिर्च जैसी नकदी और आधुनिक फसलों का व्यावसायिक उत्पादन प्रारंभ किया। इसके साथ ही उन्होंने बागवानी का विस्तार करते हुए नींबू और पपीते के बड़े-बड़े बागान भी तैयार किए।

## डेयरी व्यवसाय से मिली अतिरिक्त मजबूती और सालाना कमाई
फसलों के विविधीकरण के साथ-साथ विजय यादव ने अपनी आय को स्थिरता देने के लिए पशुपालन को खेती से जोड़ा। उन्होंने अपने फार्म पर उन्नत नस्ल के मवेशी रखे, जिससे प्रतिदिन भारी मात्रा में दूध का उत्पादन होने लगा। दूध की बिक्री से उन्हें नियमित और बेहतर मुनाफा मिलने लगा। आधुनिक बागवानी, विविध सब्जियों की खेती और डेयरी फार्मिंग के इस एकीकृत मॉडल के दम पर कभी 800 रुपये की नौकरी से करियर शुरू करने वाले विजय यादव आज सालाना लगभग 20 लाख रुपये की कमाई कर रहे हैं। उनका यह प्रयोग साबित करता है कि सही सोच और मेहनत से खेती को भी मुनाफेदार व्यवसाय बनाया जा सकता है।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** यह कहानी दर्शाती है कि पारंपरिक सब्जियों के स्थान पर ड्रैगन फ्रूट, स्ट्रॉबेरी और डेयरी जैसे एकीकृत मॉडल को अपनाकर खेती को एक लाभदायक व्यवसाय बनाया जा सकता है।

**पूर्वी चंपारण में:** स्थानीय किसान अमवा गांव के विजय यादव के खेत पर जाकर आधुनिक बागवानी और उन्नत मवेशी पालन का व्यावहारिक अनुभव सीख सकते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. विजय यादव मूल रूप से कहां के निवासी हैं?
विजय यादव बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के तुरकौलिया प्रखंड स्थित अमवा गांव के निवासी हैं।

### 2. विजय यादव को पंजाब क्यों जाना पड़ा था?
मैट्रिक के बाद उनके पिता के संन्यासी बन जाने से परिवार पर आर्थिक संकट आ गया था, जिसके चलते 1996 में उन्हें रोजगार की तलाश में पंजाब जाना पड़ा।

### 3. पंजाब में उनकी शुरुआती और अंतिम पगार कितनी थी?
पंजाब में संघर्ष के बाद उन्हें शुरुआत में 800 रुपये प्रतिमाह की नौकरी मिली थी, जो उनकी ईमानदारी और मेहनत से बढ़कर 5000 रुपये प्रतिमाह हो गई थी।

### 4. विजय यादव अपने खेत में किन-किन आधुनिक फसलों की खेती करते हैं?
वे पारंपरिक सब्जियों के अलावा ड्रैगन फ्रूट, स्ट्रॉबेरी, रंग-बिरंगी शिमला मिर्च तथा नींबू और पपीते के बागानों की खेती करते हैं।

### 5. विजय यादव की वर्तमान में सालाना कमाई कितनी है?
आधुनिक खेती, हॉर्टिकल्चर और उन्नत नस्ल के पशुपालन के दम पर विजय यादव सालाना लगभग 20 लाख रुपये का टर्नओवर अर्जित कर रहे हैं।

## प्रेरणा और सबक
**विजय यादव की सफलता से 4 मुख्य सबक:**

- **सीखने की ललक:** कठिन परिस्थिति में भी दूसरों के सफल प्रयोगों (जैसे पंजाब के समृद्ध खेतों) का बारीकी से अध्ययन करना।
- **धीरे-धीरे विस्तार:** सीधी शुरुआत साधारण बैंगन की खेती से की और अनुभव बढ़ने के बाद ड्रैगन फ्रूट व स्ट्रॉबेरी जैसी नकदी फसलों में कदम रखा।
- **विविधीकरण:** केवल एक फसल पर निर्भर न रहकर सब्जियों, फलों के बागान और डेयरी व्यवसाय का एकीकृत ढांचा तैयार करना।
- **साहस और जोखिम:** 5000 रुपये की सुरक्षित नौकरी छोड़कर अपने गांव की जमीन पर नया प्रयोग करने का जोखिम उठाना।

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