# इंजीनियरिंग छोड़कर खेती को बनाया जुनून, 70 साल की उम्र में भी सेहत और कमाई में मिसाल हैं श्रेष्ठ नारायण सिंह

> पूर्वी चंपारण के एक किसान ने इंजीनियरिंग की डिग्री और सरकारी नौकरी ठुकराकर खेती को अपना करियर चुना। आज 70 साल की उम्र में वे न केवल अपनी मेहनत से स्वस्थ जीवन जी रहे हैं, बल्कि आर्थिक रूप से भी पूरी तरह आत्मनिर्भर हैं।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-06-27 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/engineering-chhodkar-kheti-ko-banaya-junoon-70-saal-ki-umra-mein-bhi-sehat-aur-kamai-mein-misal-hain-shrestha-narayan-singh-3288 · **Language:** Hindi
**Tags:** खेती, बिहार, पूर्वी चंपारण, सफल किसान, प्राकृतिक खेती, सब्जी उत्पादन

बिहार के पूर्वी चंपारण में कृषि आज भी जीविका का मुख्य माध्यम बनी हुई है। आधुनिक युग में युवा अक्सर शहरों की ओर पलायन करना या कॉर्पोरेट जगत में करियर बनाना बेहतर समझते हैं, लेकिन इन सबके बीच कुछ ऐसे उदाहरण भी हैं जो एक अलग राह दिखाते हैं। पन्नापुर गांव निवासी श्रेष्ठ नारायण सिंह एक ऐसे ही व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की और सरकारी नौकरी के अवसर भी मिले, लेकिन उन्होंने उन विकल्पों को छोड़कर खेती को ही अपनी जीवनशैली बना लिया।

## इंजीनियरिंग के बाद खेती को चुना रास्ता
श्रेष्ठ नारायण सिंह की जीवन यात्रा प्रेरणादायक है। अब वे 70 वर्ष के हो चुके हैं, फिर भी उनकी दिनचर्या में कोई कमी नहीं आई है। गांव के लोग बताते हैं कि वे आज भी भोर में 4 बजे उठकर अपने खेतों और घर के कामों में जुट जाते हैं। खुद श्रेष्ठ नारायण सिंह का कहना है कि उन्होंने तकनीकी शिक्षा ली थी, परंतु उन्हें कभी नौकरी करने में रुचि महसूस नहीं हुई। उन्होंने सरकारी पद ठुकराकर कृषि को अपनाया क्योंकि उनका मानना है कि यदि खेती को वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सही जानकारी के साथ किया जाए, तो यह किसी भी अन्य पेशे से कहीं अधिक बेहतर और फायदेमंद है।

## प्रकृति के करीब और स्वस्थ जीवन
श्रेष्ठ नारायण सिंह स्वयं को एक प्रकृति प्रेमी मानते हैं। उनका मानना है कि दशकों तक खेतों में शारीरिक परिश्रम करने और खुले वातावरण में रहने के कारण ही वे आज 70 साल की उम्र में भी पूरी तरह स्वस्थ और बीमारी मुक्त हैं। उनका जीवन यह साबित करता है कि प्रकृति के साथ जुड़ाव और कड़ी मेहनत स्वास्थ्य के लिए कितनी जरूरी है।

## सफलता और आत्मनिर्भरता का सफर
अपनी खेती के दम पर श्रेष्ठ नारायण सिंह ने न केवल पांच बेटियों की शादी की जिम्मेदारी निभाई, बल्कि अपने एक बेटे को डॉक्टर बनाने का सपना भी पूरा किया। वे मुख्य रूप से सब्जियों की खेती करते हैं, जिसमें बैंगन, करेला और आलू प्रमुख फसलें हैं। इसके अलावा वे हल्दी, अदरक, मिर्च और लहसुन जैसी फसलों का उत्पादन भी बड़े पैमाने पर करते हैं। युवा किसानों के लिए उनका खास संदेश है कि रासायनिक उर्वरकों की जगह मवेशियों से मिलने वाली प्राकृतिक खाद का अधिक से अधिक उपयोग करें, जो मिट्टी की उर्वरता और फसल की गुणवत्ता बनाए रखने में सहायक होती है।

## इसका आप पर असर
**देशभर में:** यह कहानी युवाओं को पारंपरिक करियर से हटकर कृषि के आर्थिक और स्वास्थ्य लाभों के प्रति जागरूक करती है।

**बिहार में:** पूर्वी चंपारण जैसे क्षेत्रों में, श्रेष्ठ नारायण सिंह का अनुभव किसानों को मवेशियों की खाद का उपयोग करने और वैज्ञानिक विधि से सब्जी उत्पादन कर अपनी आय बढ़ाने के लिए प्रेरित करता है।

## सवाल-जवाब

### 1. श्रेष्ठ नारायण सिंह कौन हैं और वे कहां रहते हैं?
श्रेष्ठ नारायण सिंह एक अनुभवी किसान हैं, जो बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के हरसिद्धि प्रखंड अंतर्गत पन्नापुर गांव में रहते हैं।

### 2. उन्होंने क्या पढ़ाई की थी?
श्रेष्ठ नारायण सिंह ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी।

### 3. उनकी उम्र कितनी है और उनकी दिनचर्या क्या है?
वे 70 वर्ष के हैं और आज भी रोज सुबह 4 बजे उठकर खेती के काम में लग जाते हैं।

### 4. वे किन फसलों की खेती करते हैं?
वे मुख्य रूप से आलू, बैंगन, करेला, लहसुन, अदरक, हल्दी और मिर्च जैसी फसलों की खेती करते हैं।

## प्रेरणा और सबक
- **सही विकल्प का चुनाव:** अपनी रुचि और मूल्यों के अनुसार करियर चुनने का साहस रखें, भले ही वह समाज की लीक से हटकर हो।
- **शारीरिक सक्रियता:** नियमित शारीरिक श्रम और प्रकृति से जुड़ाव उम्र के हर पड़ाव पर स्वास्थ्य बनाए रखने की कुंजी है।
- **सतत कृषि:** मिट्टी की उर्वरता और गुणवत्ता के लिए रसायनों के बजाय मवेशियों की खाद जैसे प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करें।
- **संतोष और धैर्य:** खेती में मेहनत का फल मीठा होता है, बस बड़े पैमाने पर और सही जानकारी के साथ काम करने की जरूरत है।

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