{
  "type": "article",
  "title": "फिरोजाबाद में सिलाई से लेकर विद्युत सखी तक, 13620 महिलाएं बनीं लखपति दीदी",
  "summary": "फिरोजाबाद में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर करीब सवा लाख महिलाएं समूहों के जरिए कमाई कर रही हैं, जिनमें से 13620 महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं।",
  "content": "फिरोजाबाद के गांवों में अब महिलाएं सिर्फ घर के कामकाज तक सीमित नहीं रह गई हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर जिले की लाखों महिलाएं अब अपने दम पर कमाई कर रही हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना रही हैं। पहले घर चलाने की पूरी जिम्मेदारी अक्सर सिर्फ पुरुषों पर होती थी और गरीब परिवारों की माली हालत में मुश्किल से कोई सुधार दिखता था, लेकिन अब गांव-गांव बने महिला समूहों ने इस तस्वीर को बदलना शुरू कर दिया है।\n\nगांव-गांव बन रहे महिलाओं के समूह\nस्वतः रोजगार उपायुक्त तुलिका श्रीवास्तव ने बताया कि गांव में रहने वाली घरेलू महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए हर गांव में अलग-अलग समूह तैयार किए जाते हैं। हर समूह में करीब 20-20 महिलाओं को शामिल किया जाता है। इन्हीं समूहों के जरिए महिलाओं को आजीविका मिशन की योजनाओं और मदद तक पहुंच मिलती है, जिससे कमजोर आर्थिक हालत वाले परिवारों को सीधा फायदा पहुंच रहा है। धीरे-धीरे यह मॉडल जिले के ज्यादातर गांवों में फैल चुका है।\n\nसिलाई से मधुमक्खी पालन तक मुफ्त ट्रेनिंग\nसरकार की तरफ से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिलाओं को अलग-अलग हुनर सिखाने के लिए मुफ्त ट्रेनिंग दी जाती है। समूहों के जरिए महिलाओं को सिलाई, ब्यूटी पार्लर, मधुमक्खी पालन, धूपबत्ती और अगरबत्ती बनाने, अचार बनाने और कांच के खिलौने तैयार करने जैसे अलग-अलग कामों में प्रशिक्षित किया जाता है। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद कई महिलाएं इन्हीं हुनर के दम पर अपना खुद का छोटा कारोबार शुरू कर लेती हैं और घर बैठे कमाई करने लगती हैं। इससे उन्हें किसी और पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ती।\n\nविद्युत सखी बनकर लाखों कमा रहीं महिलाएं\nट्रेनिंग के अलावा कुछ महिलाएं अलग-अलग सरकारी विभागों में सखी के तौर पर भी काम कर रही हैं। इनमें से कुछ महिलाएं विद्युत सखी बनी हैं, जो अब लाखों रुपये की कमाई कर रही हैं। तुलिका श्रीवास्तव के मुताबिक समूहों से जुड़ने के बाद अब तक जिले की लाखों महिलाओं के जीवन में बदलाव आया है, और विभाग लगातार नई महिलाओं को समूहों से जोड़ने का काम कर रहा है ताकि वे आत्मनिर्भर बनकर अपनी आजीविका खुद चला सकें। उन्होंने बताया कि यह सिलसिला लगातार जारी है और हर महीने नई महिलाएं इससे जुड़ रही हैं।\n\nजिले में 8797 समूह, सवा लाख से ज्यादा महिलाएं जुड़ीं\nआंकड़ों के मुताबिक फिरोजाबाद जिले में करीब 8797 समूह महिलाओं के जरिए चलाए जा रहे हैं, जिनसे एक लाख बाईस हजार महिलाएं जुड़कर काम कर रही हैं। इनमें से सात हजार से ज्यादा समूहों को डेढ़ लाख रुपये तक की धनराशि भी उपलब्ध कराई जा चुकी है, जिससे वे अपना काम आगे बढ़ा सकें। इसके अलावा समूहों से जुड़ी करीब 13620 महिलाएं अब तक लखपति दीदी बन चुकी हैं। इन समूहों से जुड़ने के बाद महिलाओं की आर्थिक स्थिति में काफी सुधार देखने को मिला है और उनकी सामाजिक पहचान भी मजबूत हुई है।\n\nवंचित परिवारों को जोड़ने के लिए चलेगा विशेष अभियान\nअब विभाग की कोशिश उन गरीब परिवारों की महिलाओं तक पहुंचने की है, जो अब भी इस योजना से वंचित हैं। इसके लिए जगह-जगह कैंप लगाए जा रहे हैं ताकि ऐसी महिलाओं को चिन्हित कर समूहों से जोड़ा जा सके। आजीविका मिशन से जुड़ने के लिए महिला का राशन कार्ड धारक होना जरूरी शर्त है। तुलिका श्रीवास्तव ने बताया कि जिलाधिकारी के आदेश पर अब ग्राम पंचायत स्तर पर भी एक अभियान चलाया जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा महिलाएं समूहों से जुड़ सकें और अपने जीवन में सामाजिक और आर्थिक दोनों तरह का बदलाव ला सकें।\n\nइसका आप पर असर\nअसर की बात\n\n• भारत में: राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन जैसी योजनाएं देशभर के गांवों में महिलाओं को मुफ्त ट्रेनिंग और शुरुआती आर्थिक मदद देकर स्वरोजगार शुरू करने का मौका देती हैं।\n• फिरोजाबाद में: जिले की करीब सवा लाख महिलाएं समूहों से जुड़कर कमाई कर रही हैं और 13620 महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं, जिससे उनके परिवारों की आर्थिक हालत में सीधा सुधार आया है।\n• राशन कार्ड धारक महिलाएं गांव में लगने वाले कैंपों के जरिए मुफ्त में इन समूहों से जुड़ सकती हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन क्या है?\nयह एक सरकारी योजना है जिसमें गांव-गांव महिलाओं के समूह बनाकर उन्हें मुफ्त ट्रेनिंग और मदद देकर स्वरोजगार से जोड़ा जाता है।\n\n2. फिरोजाबाद में कितनी महिलाएं इस मिशन से जुड़ी हैं?\nजिले में करीब 8797 समूहों से एक लाख बाईस हजार महिलाएं जुड़कर काम कर रही हैं।\n\n3. कितनी महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं?\nसमूहों से जुड़ी करीब 13620 महिलाएं अब तक लखपति दीदी बन चुकी हैं।\n\n4. समूहों को कितनी आर्थिक मदद दी गई है?\nसात हजार से ज्यादा समूहों को डेढ़ लाख रुपये तक की धनराशि उपलब्ध कराई गई है।\n\n5. महिलाओं को कौन-कौन सी ट्रेनिंग दी जाती है?\nसमूहों के जरिए सिलाई, ब्यूटी पार्लर, मधुमक्खी पालन, धूपबत्ती-अगरबत्ती और अचार बनाने तथा कांच के खिलौने बनाने की ट्रेनिंग दी जाती है।\n\n6. विद्युत सखी कौन होती हैं?\nकुछ महिलाएं विभागों में सखी के तौर पर काम करती हैं, जिनमें से विद्युत सखी बनी महिलाएं अब लाखों रुपये कमा रही हैं।\n\n7. इस मिशन से जुड़ने के लिए क्या शर्त है?\nआजीविका मिशन से जुड़ने के लिए महिला का राशन कार्ड धारक होना जरूरी है।\n\n8. वंचित महिलाओं को जोड़ने के लिए क्या किया जा रहा है?\nविभाग द्वारा कैंप लगाए जा रहे हैं और जिलाधिकारी के आदेश पर ग्राम पंचायत स्तर पर भी अभियान चलाया जाएगा।\n\nप्रेरणा और सबक\nप्रेरणा और सीख\n\n• छोटे-छोटे समूहों में जुड़कर भी बड़ा बदलाव लाया जा सकता है, जैसा फिरोजाबाद की महिलाओं ने कर दिखाया।\n• नया हुनर सीखने से हिचकने के बजाय सिलाई, मधुमक्खी पालन जैसे नए काम अपनाने से आमदनी के नए रास्ते खुलते हैं।\n• सरकारी योजनाओं की सही जानकारी रखना और उनसे जुड़ने की पहल करना महिलाओं को आत्मनिर्भर बना सकता है।\n• विद्युत सखी जैसी जिम्मेदारी निभाकर महिलाएं परंपरागत दायरे से बाहर निकलकर भी अच्छी कमाई कर सकती हैं।\n• लगातार मेहनत और समूह की मदद से एक आम गृहिणी भी लखपति दीदी बनने तक का सफर तय कर सकती है।",
  "url": "https://trendkia.com/success-stories/firozabad-men-silai-se-lekara-vidyuta-sakhi-taka-13620-mahilaen-banin-lakhapati-didi-8723",
  "category": "सक्सेस स्टोरी",
  "publishedAt": "2026-07-19",
  "tags": [
    "राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन",
    "फिरोजाबाद",
    "लखपति दीदी",
    "महिला स्वरोजगार",
    "विद्युत सखी",
    "स्वयं सहायता समूह"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}